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कौन है cjp प्रोटेस्ट में 40 मिनिट तक पुलिस वैन के आगे खड़ी रहने वाली वायरल लड़की?जानकार होश उड़ जाएंगे।

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मुंबई पुलिस की वैन के ठीक सामने एक महिला हाथ सा आगे करके इस तरह से एक खड़ी है और उसका एक वीडियो और फोटोग्राफ्स काफी वायरल हो गया है और आखिर वो कौन है वो महिला क्या कर रही थी शिवाजी पार्क पर क्यों प्रोटेस्ट में हिस्सा लेने आई थी ये सब उन्हीं से जानते हैं। इस वक्त हमारे साथ रिया खुद मौजूद हैं। रिया सबसे पहले आप मतलब कैसा लग रहा है?

पहले तो सब लोग सुपर वूमन से लेके मतलब बहुत कुछ आपको बोल रहे हैं। क्या-क्या कह रहे हैं? अ मैं सुबह 5:30 सोई हूं क्योंकि उस वो सब प्रोसेस करने में मुझे काफी वक्त लगा। मैं मुझे खुद अंदाजा नहीं था ये मैंने क्या किया है उस वक्त क्योंकि मेरी तो आदत है। मैं मेरी आवाज बहुत बुलंद है मेरे थिएटर की वजह से।

तो जहां भी गलत होता है मैं अपनी बुलंद आवाज लेकर पहुंच जाती हूं। तो उसके वजह से मुझे नहीं लगा था मैंने कुछ एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी किया है। बट जब 10:00 बजे 9:00 बजे से मुझे सारे मैसेजेस आने लगे तो थोड़ा-थोड़ा ऐसे हिट होने लगा कि क्या ओके ये मैंने कुछ किया है। तो 5:30 बजे तो मैं सोई हूं और उसके बाद उठ के जो इट्स वैरी ओवरवेल्मिंग इट्स आई एम वैरी हंबल्ड आल्सो एट द सेम टाइम कि बस मेरा छोटा सा हाथ है किसी पॉलिटिकल पार्टी का नहीं है। एक सिटीजन ऑफ इंडिया का है। तो वो जो हाथ है वो जो सरकार पर इतना भारी पड़ा है कि वो हम सब रियलाइज कर रहे हैं।

तो अंदर से गदगद फील हो रहा है। तो अगर पहले मैं जानना चाहूंगी आपके बारे में आप क्या करती हैं? मतलब एज इन इस प्रोटेस्ट में कहां तक कैसे पहुंची? क्या कभी इससे पहले भी प्रोटेस्ट किया है? जी नहीं। अनफॉर्चूनेटली नहीं किया है। बट यह जो चिंगारी अब लगी है जब तक ये बुझ ना जाए तब तक मैं करती रहूंगी। इंडिपेंडेंट प्रोटेस्ट पॉलिटिकल प्रोटेस्ट नहीं बिकॉज़ वहां हमारे पास कोई आवाज नहीं है। वहां हमें लीड कुछ कोई और लीड कर रहा है।

वो किस तरीके से कर रहे हैं, क्यों कर रहे हैं वो हमें नहीं पता है। तो इसके पहले एक ही दिन पहले मैंने किया था। एक्चुअली शिवाजी पार्क में काफी कम बच्चे थे और उसके बारे में पहुंची नहीं। 21 तारीख को भी पहुंची। जी बिल्कुल। क्या उस दिन वजह क्या है? क्यों आप प्रोटेस्ट में जा रही हैं? वजह काफी ऑब्वियस है जो कुछ भी होता रहा है।

यह नहीं कि हो रहा है। होता रहा है हमारे मम्मी पापा के वक्त से भी सबको बोला गया था एडजस्ट करो यू नो चुप रहो। आगे ठीक है होता है बट अब हम जो यूथ है वो रियलाइज कर रहे हैं ऐसा नहीं होता है दिस इज़ नॉट नॉर्मल जस्ट बिकॉज़ ये होता रहा है इसका मतलब ये नहीं है कि ये नॉर्मल है ये होता है मतलब होता है बट ये नॉर्मल है वो गलत है उसको नॉर्मलाइज मत करो बिहेवियर को तो वो जो यूथ है आज हमारी जेंजी जो है जी फॉर जिद्दी है जो अड़ गई है कि जो तुम गलत कर रहे हो बेटा वो हम सब देख रहे हैं।

वो पूरी दुनिया इंटरनेशनलली देख रही है मेरे पापा को और मुझे इंटरनेशनल मीडिया से कॉल आ रहा है। मेरे पेरेंट्स को जो उनके फ्रेंड्स हैं, उनके बच्चे हैं, वहां तक ये आवाज जो बुलंद आवाज है वो पहुंच चुकी है। सो बस यही जज्बा है हमारा। तो पहले बात कर लेते हैं क्या किया था आपने? तो आप प्रोटेस्ट के लिए पहुंची थी। आपको लगा कि एक आम दिन है। प्रोटेस्ट है। कल भी गए थे? नहीं आम दिन नहीं था। प्रोटेस्ट देखिए ना हम हम कैसे सोच में आ गए हैं कि एक आम दिन प्रोटेस्ट हो गया है क्योंकि प्रोटेस्ट आजकल हर रोज होते हैं हर कोई प्रोटेस्ट करता रहता है लेकिन हां ये ये प्रोटेस्ट बहुत बड़े स्केल पे हो रहा है देश भर में हो रहा है तो ये एक बात जरूर है लेकिन मैं एक जानना चाहूंगी तो कि आप जब आप पहुंची प्रोटेस्ट करने के लिए आपके साथ और भी कोई था वहां पे फिर अचानक से वो वैन के सामने कैसे पहुंची आप तो 4:30 बजे मैं कोहिन नूर अपने फ्रेंड्स के लिए वेट कर रही थी। अकेले जाना काफी अ आइसोलेटिंग एक्सपीरियंस होता है। बट हमें पता है कि क्राउड हमारे साथ है। बट फिर भी जैसे हमने देखा है दिल्ली में जो बच्चों के साथ हुआ है।

छोटी-छोटी बच्चियों के साथ 12 साल की बच्ची का सर फोड़ दिया है। आप आपको कैसे किस चीज किस मुंह से आप बात कर सकते हो? ट्वीट कर सकते हो। धर्मेंद्र प्रधान जी ने कल सुबह ट्वीट किया राहुल गांधी जब आए थे तो उन्होंने ये पूरी रिफ्लेक्ट करने की कोशिश की है। पॉलिटिकल ये सब खेलने लगे हैं। पॉलिटिक्स को जब तक आप पॉलिटिक्स की तरह खेलोगे तब तक जनहित नहीं हो सकता। पॉलिटिक्स को आप कुछ करना है। आपको पॉलिटिक्स करने वाला होता है। आजमाने वाला नहीं होता है। सो मैं पहुंची थी।

4:30 बजे। अपनी फ्रेंड्स का इंतजार कर रही थी। 20 मिनट हो गए बॉम्बे के ट्रैफिक में। या तो वक्त लग जाता है या पार्किंग में टाइम लग जाता है। तो फिर 20 मिनट वेस्ट हो गए थे और मैं सुन रही थी वो नारेबाजी चल रही है और मैं अपने आप को रोक नहीं पाई। मैंने बोला मैं जा रही हूं जिसको आना है वो लाइव लोकेशन फॉलो करके आ जाएगा पीछे। तो जैसे ही मैं निकली मुझे ज्यादा चलना भी नहीं पड़ा। आप आंदोलन तक जाओगे आंदोलन आपके सामने आ जाएगा। तो मैं आगे जा ही रही थी जहां नारेबाजी हो रही थी तो पुलिस की ये गाड़ी मेरे सामने थी और आगे से लेकर पीछे तक वहां बच्चे भरे हुए थे और बच्चे चिल्ला रहे थे अंदर से आप इमेजिन करिए कि एक पुलिस की वैन है अंदर और बच्चे अंदर से चिल्ला रहे हैं। पूरा स्टफ था। पूरा स्टफ था। वो जो पुलिस थे वो सीढ़ियों पर खड़ी थी। कैन यू गिव मी वन मिनट? तो आपने एक कोशिश भी की थी कि वहां पर लोगों को आप बचा के निकाल लें, बाहर निकालने तो सबसे पहले मैंने अपना होमवर्क किया था। मैं सबको बोलती हूं जो भी आप जा रहे हो,

आप कर रहे हो आप अपने अधिकार जाने। सबसे पहले इसलिए इस तरीके से आप राइटफुली वहां अपीयर हो सकते हैं और आपके पास एक करज भी आता है। एक्स्ट्रा बहुत ज्यादा एक लेवरेज होता है आपके पास। तो मैंने अपना होमवर्क किया था और मैंने उनसे पूछा कि क्या आपके पास बहुत अच्छे से कन्वर्सेशन एक वार्तालाप होता है। वो किसी भी एक कंक्लूजन पे आने का सबसे पहला जरिया होता है। तो मैंने उनसे पूछा कि आपके पास मेमो है इन बच्चों को ले जाने का। उन्होंने मेरे से आंखें भी नहीं मिलाई। उन्होंने नीचे देखा और बच्चे पीछे से चले नहीं है। नहीं है। तो मैंने अपना मुझे पता चल गया था कि ये गलत है।

तो यह मेरा कुछ नहीं कर सकते। अगर वो मेरे ऊपर एफआईआर करते या मुझे डिटेन करते मैंने आज के दिन उनके ऊपर रिवर्स करती एफआईआर बिकॉज़ ये गलत है। मैं सच मैं सही थी मुझे पता है इसलिए शायद से मुझ में जज्बा और हिम्मत आई तो मैंने अपना हाथ आगे किया और एक बच्ची को निकालने की कोशिश की वहां से। तो पुलिस ने अपना हाथ अड़ा दिया बीच में। उन्हें नहीं आने दिया। दो थे तो उन्होंने हाथ अड़ा दिया नहीं आने दिया और बस चलने लगी। जैसे ही जो वैन है वो चलने लगी तो मुझे थोड़ा सा डर लगा कि वह अंदर से गिर जाएंगे। तो मुझे यह नहीं करना चाहिए या मैं बस के नीचे आ जाऊंगी। सो दिस इज नॉट राइट।

तो मैं बस के साथ-साथ चलने लगी और जैसे ही हम चल रहे थे मैंने देखा कि ये तो आगे निकल जाएंगे मुझसे। है ना? तो और जब वो अगर वैसा होगा तो आई विल फील कि मैंने अपने आप को फेल कर दिया एज अ सिटीजन। अगर मैं नारेबाजी करने आई हूं, बच्चों को बचाने आई हूं। अपने आप को एज अ सिटीजन शो अप कर रही हूं तो जो मेरी ड्यूटी है वो यहां से शुरू होती है। तो मैंने उनको अच्छे से बोला सर मैं समझ रही हूं आप क्या करें। आप अपनी ड्यूटी कर रहे हैं।

बट आप रिस्पांसिबली नहीं कर रहे हैं। ठीक है? तो फिर उन्होंने कुछ नहीं बोला। वो चुप थे। मैंने बोला मैडम आप करिए ना। मैडम आप करिए ना। बस में इतनी जगह भी नहीं थी कि वो मुझे अंदर ले ले एक्चुअली। तो इसलिए भी मैं और कॉन्फिडेंट थी। तो मैं आगे चली गई और मैंने कुछ नहीं सोचा। मैंने बस सोचा इनको रोकना है। ये मेरे सामने से तो मैं ऐसे नहीं जाने दूंगी इन्हें। चाहे कुछ भी हो जाए। मरेंगे या करेंगे। तो मैं आगे खड़ी हो गई और यू नो इफ अगर आप कॉमन सेंस यूज करेंगे तो आप रास्ते पर हैं। पीछे ट्रैफिक हो रहा है तो आप तो हमारे लिए हो ट्रैफिक आप ये सभी मैनेज करने आए हो तो उनको मैनेज तो करना ही पड़ेगा। लेकिन उन्होंने डराने की कोशिश नहीं की। जब आप सामने खड़े थे वहां पर क्या उन्होंने डराने की कोशिश आपको हटने के लिए नहीं की? बिल्कुल कैसे नहीं करेंगे?

वो सब कुछ आजमा लेंगे। लेकिन बॉम्बे बिल्डिंग्स हम बोल सकते हैं उनके हाथ में लाठियां नहीं थी। उन्होंने कुछ भी थ्रेटनिंग ऑब्जेक्ट्स नहीं उठा रखे थे तो उन्होंने एक्सलरेट करने की कोशिश की। तो देखा जाए तो थोड़ा डर लगा है। डर लगा था। मैं झूठ बोलूंगी अगर मैं बोलूं मैंने डर नहीं लगा। थोड़ा डर लगा। थोड़ा सा लगा फॉर वन सेकंड। एंड आई वाज़ लाइक ये मेरे ऊपर से जा सकती है गाड़ी। बट तब मैं शहीद होती। और अब जो है अगर मैं बैठी रहूंगी घर पे मैं कुछ नहीं करूंगी तो मैं हेल्पलेस असहाय हंगी या असहाय या शहीद आपको चूज़ करना है। तो शहादत मैं जरूर और वहां के स्टूडेंट्स अगर मैं वहां शहीद भी हो जाती ना मुझे एक बात पता है कि वहां के स्टूडेंट्स मेरी लाश को छोड़ते नहीं। वो अंत तक मेरे साथ रहते हैं क्योंकि आजकल तो आप एज अ वुमेन अगर आप लाश भी हो जाए तो आप सेफ नहीं हो। तो स्टूडेंट्स मुझे मेरी लाश को भी सेफ रखते हैं।

मुझे इतना पता है। बहुत बड़ी बात कह रही हैं आप। तो वहां पे और भी स्टूडेंट्स जो हम वीडियोस देख रहे हैं उसमें स्टूडेंट्स बहुत सारे पीछे भी आपके खड़े हो गए। क्या उससे भी आपको काफी करेज मिला उसमें? सो जब ये सब शुरू हुआ था तब जो मेरा कॉज है वो मेरे आगे था। मेरे पीछे क्या हो रहा है मुझे कुछ अंदाजा ही नहीं था। मैं उस मगन हो गई थी उनको निकालने के लिए। तो पीछे से जब आवाज आने लगी और साइड से जब लोग फोन लेकर और कैमरा लेकर आ रहे हैं तब मुझे रियलाइज हुआ कि मेरे पीछे भी लोग आ रहे हैं। आप कुछ बोल भी रहे थे उसको।

हां वो पीछे से चटिंग करने लगे तब मुझ में और करज आया और फिर मैंने भी बोला इंकलाब जिंदाबाद। क्या आप बोल सकते हैं एक बार? इंकलाब जिंदाबाद। बिल्कुल। और फिर ये आपसे नहीं बुलवाऊंगी मैं। धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो। क्योंकि यह जो भी चीज शुरू हुई है, आपने अपने कंट्री को, अपने बच्चों को एक पद पर रहकर फेल किया है। एक बार नहीं, दो बार नहीं।

काफी बार उसके बाद जो रीसेंट एग्जामिनेशंस फिर से हुए थे, आपके शीट्स एआई जनरेटेड हैं। आप कैसे कर सकते हो ऐसा? एक बार फेल इतना बड़ा मुद्दा बनाया। आप फिर से मतलब उनको कोई परवाह ही नहीं है। जब वो परवाह नहीं करेंगे, तो हम उन्हें बताएंगे। एक रीज़न देंगे। आप करो परवाह। तो क्या यह आपकी जो नाराजगी है सिस्टम से जो नाराजगी है क्या ये एक पर्सनल रीजन से भी है या फिर जो आपने जंतरमंतर पे जो देखा जिस तरीके से आक्रोश निकल रहा है जंतरमंतर पे क्या उसको देखने के बाद आप में ज्यादा नाराजगी आई जिसकी वजह से ये प्रोग्रेस ये गवर्नमेंट पर्सनल हो गई है ये गवर्नमेंट हम नहीं चाहते थे ये सब हो बट हम सब किसी ना किसी लेवल पर नाइंसाफी या सिस्टम से फेल हुए हैं। मैंने अभी फिर से अपनी स्टडीज के लिए मैंने साइकोलॉजी की है कोविड के पहले।

अब मैंने फिर से मुंबई यूनिवर्सिटी में एनरोल किया है अह इंग्लिश लिटरेचर करने के लिए और मैं पिछले दो हफ्ते से कॉल कर रही हूं उन्हें। उनके छह नंबर हैं ऑनलाइन तो मैंने सारे नंबरों पर कॉल किया है और मैंने उसकी स्क्रीन रिकॉर्डिंग भी ली है कल जब मैं कर रही थी क्योंकि मैं परेशान हो गई थी। यू नो जब आपके साथ आपने पैसे जमा कर दिए हैं और उसके बाद आगे क्या करना है कोई को बता नहीं ऑनलाइन मुझे फुल अच्छे से कितने स्मार्ट हैं। उन्होंने ईमेल मुझे भेजा है कि फीस भरनी है आपको इतनी इतनी और ऑनलाइन करना है। तो ऑनलाइन फीस भर दी है।

ऑनलाइन दिखा रहा है एडमिशन ग्रांटेड। बट ईमेल उसके बाद सन्नाटा उसके बाद ना वो कॉल्स उठा रहे हैं ना उन्होंने मैंने उन्होंने ईमेल भी किया है। इनफैक्ट आई हैव ऑल द प्रूफ। मैं डॉक्यूमेंटेशन इज़ वेरीेंट इन टुडेज़ टाइम। तो आई हैव ऑल द प्रूफ। मैं उन्हें दो हफ्ते से कॉल करने की कोशिश कर रही हूं। उन्होंने ना कॉल उठाए हैं ना आंसर किया है। उनका कॉल अनवेलेबल आ रहा है, बिजी आ रहा है। सब कुछ हो रहा है बट जो होना चाहिए वो नहीं हो रहा है। सो मैं नाराज तो हूं पर्सनली भी हूं और ये पर्सनल है। मेरा भाई 9 साल का है। वो पढ़ाई उसको इतनी पसंद नहीं है। तो उसने मुझे बोला कि दीदी मुझे तो नहीं पढ़ना तो आप क्यों जा रहे हो? मैंने बोला बेटा ये आपकी चॉइस है।

वो गवर्नमेंट आपके लिए नहीं डिसाइड करेगी। आपको कल पढ़ना है नहीं पढ़ना है। दिस इज़ आवर चॉइस। दे कैन नॉट फोर्स इलिटरेसी अपॉन अस। वी आर अ डेवलपिंग नेशन। हमें वापस पीछे नहीं जाना है। तो जब आप यह प्रोटेस्ट में हिस्सा ली, जब आप ये वीडियोस वायरल होने लगे तो सबसे पहले मैं जानना चाहूंगी कि आपके फैमिली का रिएक्शन फ्रेंड्स का रिएक्शन क्या था इसमें? इसके इमीडिएटली बाद जब वो रिलीज हो गए थे बच्चे। 40 मिनट तक ये सब चला था। तो बच्चे रिलीज़ होने के बाद हमने सेलिब्रेट किया। सब मेरे पास आए। बैरी एंड ऑल यू नो बैडी इन द सेंस कि आप दिखते भी अच्छे हो, आप करते भी अच्छा हो। यू नो। तो थैंक यू एवरीवन फॉर दैट। तो हम दूसरी तरफ गए जॉइ करने। मैंने पापा को फेस टाइम किया कि मैंने पापा को दिखा रही थी। मेरे पापा परसों जब हो रहा था ना तो मेरे पापा से मैंने बोला पापा कैंसिल हो गया है। इट वास कैंसिल्ड। उन्होंने परमिशन वापस अपनी ले ली थी। बताओ अपने खुद के वर्ड्स पे नहीं रह सकते वो तो।

तो परमिशन वापस ले ली थी। तो पापा ने बोला अच्छा फिर भी जाएंगे तो चली जाओ। परमिशन किस चीज की? प्रोटेस्ट करने की। प्रोटेस्ट करने की परमिशन उन्होंने वापस ले ली थी। ये गलत है ना? कि आप परमिशन दे रहे हो फिर ले रहे हो। फिर आप बैन लगा रहे हो, प्रोहिबिट कर रहे हो। मतलब आप मैं जाना चाहूंगी तो आप लोग इकट्ठे कैसे हुए शिवाजी पार्क में? मतलब कि एक्चुअली आजाद मैदान इज़ इज़ द डेज़िग्नेटेड प्रोटेस्ट ग्राउंड। तो आजाद मैदान कोई है नहीं कोई प्रोटेस्ट ग्राउंड। तो आप लोग वहां इकट्ठे कैसे हुए? इन सोशल मीडिया। सोशल मीडिया पे हम एक दूसरे को फॉलो करते हैं। स्टूडेंट्स हैव बीन कॉन्सेंटली इन टच विथ ईच अदर। यू नो वी नो कि आई एम सॉरी टू से दिस। दिस इज़ नॉट पर्सनल टू यू बट हमारे बड़ों ने हमें फेल किया है। सो वी हैव टू स्टिक टुगेदर। सो मैंने सुबह स्टोरी भी डाली थी। शिवाजी पार्क पे हम सब मिलेंगे और हमें पता है कि 21 को भी शिवाजी पार्क में हम मिल रहे थे।

तो 23 को जो है बैन शुरू होता है। तो सब में वो जो अंदर का भारतीय था एक पेट्रिएट था उसने बोला था कि 2 को कुछ तो करना है। तो सबको कुछ तो करना था। शिवाजी पार्क सबके दिमाग में चल रहा था। तो बस वी शोड अप हमें एक्चुअली किसी ने नहीं सोचा था इतना बड़ा क्राउड आएगा। सब अपने लिए आए थे। वहां अपने देश के लिए आए थे। एक दूसरे के लिए सबके लिए आए थे। बट यह सोच कर नहीं आए थे कि ये भेदचाल नहीं है ये। बिल्कुल बहुत कुछ किया आपने। लेकिन परिवार का रिएक्शन इस उस वीडियो के वायरल होने के बाद क्या था? हम अभी लंच कर रहे थे। मम्मी पापा दे आर वेरी प्राउड। पापा ने स्पेशली बोला पापा मेरे सोशल सर्विस भी करते हैं बचपन से। कोविड के टाइम पे उन्होंने हमने मिलकर वैक्सिननेट किया है लोगों को। सो ये जो मेरे अंदर प्रोबेब्ली सेवा भाव है मेरी मम्मी से भी आया है। एव्री हाउस वाइफ हर नारी जो घर पर काम करती है। बच्चों का ध्यान रखती है। पति का ध्यान रखती है। अपना ध्यान रखती है। बच्चों की एजुकेशन का भी वही ध्यान रखती है। देखा जाए तो तो वो जो सेवा भाव है वो मम्मी से आया है। जो सपोर्ट है वो पापा से आया है। जो करज है वो मेरी खुद की है और ये जो प्लान है वो भगवान का है। अब इसके आगे मतलब अब तो पढ़ाई जैसे आपने कहा कि आपको ग्रेजुएशन अपना कंप्लीट करना है। तो उसके साथ-साथ इस तरह के प्रोटेस्ट और करेंगे। अगर होंगे तो जरूर बट मैं एक बात सबको बताना चाहूंगी वी हैव टू प्ले इट बाय द बुक्स।

वो कभी भी हमारे ऊपर पलट सकते हैं। वो ऑलरेडी कर रहे हैं। वो प्लांट कर रहे हैं चीजें ताकि हमें फौ्टी करार कर सके। बट जो एक इंपॉर्टेंट वर्ड है इस सारे प्रोटेस्ट का वो है पीसफुल। हम हम सब बोल रहे हैं पीसफुल प्रोटेस्ट। पीसफुल प्रोटेस्ट गवर्नमेंट नहीं बोल रही है पीसफुल प्रोटेक्शन। नहीं वह गलत कर रहे हैं वो उनको भी पता है। हम सही कर रहे हैं ये हमें भी पता है। और ये जो आवाज हमारी कल हमने निकाली है वो पूरी दुनिया तक इंटरनेशनलली पहुंची है। इसका मतलब सबको रेजोनेट हो रहा है कि ये जो कर रहे हैं बच्चे वो सही है। हम किसी को एक इंसान को भी हिम्मत देंगे ना वो काफी है। मैंने भगवा कलर इसलिए पहना है आज क्योंकि किसी सो आपने पर्टिकुलरली चूज़ किया है? बिलकुल बिलकुल कल का भी आपने पूरा सोचा हुआ था। इसका इसकी वजह यह है कि किसी पार्टी ने खरीद नहीं लिया है कलर। किसी बार मैं नाम नहीं लूंगी बट हम सबको दो-तीन पार्टियां हैं ऐसी एक नहीं है। सो उन्होंने खरीद नहीं लिया है। ये हमारे तिरंगे का कलर है जो सबसे पहला कलर है जो हमें बोलता है करज।

जो हमें देता है सैक्रिफाइस। अगर आपको करज चाहिए। अगर आपको कोई सही चीज करनी है तो आपको अपनी कंफर्ट को सैक्रिफाइस करना पड़ेगा। स्पिरिचुअलिटी। तो अगर सिस्टम नहीं बदलता है तो प्रोटेस्ट जारी रहेगा। आप भी हिस्सा लेती रहेंगी। बिल्कुल। और इसी तरह से डिटेनिस को छुड़ाती रहेंगे।

बिल्कुल। मैंने 21 को भी उन्हें छुड़ाया था। तो मैं तो हाथ पैर मारूंगी अगर वो मेरे पास आए बिकॉज़ कोर्स नहीं कर सकते वो हमें। बट अगर करते भी हैं तो मैं अंदर से लडूंगी और मैं उनके पास उनो रिवर्स खेल के उन्हें उनके ऊपर एफआईआर करूंगी।

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