साल 2024 में अभिनेता और राजनेता रवि किशन से जुड़ाव और उनकी निजी जिंदगी को लेकर एक बड़ा विवाद सामने आया था, जब मुंबई की रहने वाली अपर्णा सोनी (जिन्हें अपर्णा ठाकुर के नाम से भी जाना जाता है) ने सार्वजनिक रूप से यह दावा किया कि उनकी बेटी शिनोवा के जैविक (बायोलॉजिकल) पिता रवि किशन हैं।
इस मामले ने तूल तब पकड़ा जब यह विवाद अदालत और मीडिया की सुर्खियों में आ गया।विवाद की मुख्य बातें और दावे * पितृत्व का दावा: अपर्णा सोनी ने सार्वजनिक मंचों और कानूनी माध्यमों से यह दावा किया कि उनके और रवि किशन के बीच लंबे समय तक संबंध रहे हैं और शिनोवा उन्हीं की बेटी हैं। उनका मुख्य आरोप यह था कि सार्वजनिक जीवन में आने के बाद रवि किशन इस रिश्ते और अपनी जिम्मेदारी से पीछे हट रहे हैं। *
डीएनए टेस्ट की मांग:
इस मामले में शिनोवा और अपर्णा की तरफ से अदालत में यह मांग रखी गई कि इस बात की सच्चाई सामने लाने के लिए डीएनए टेस्ट कराया जाए, ताकि यह साफ हो सके कि शिनोवा के जैविक पिता रवि किशन ही हैं या नहीं। * परिवार का पक्ष और कानूनी जवाबी कार्रवाई: दूसरी तरफ, इस पूरे मामले में रवि किशन के परिवार, विशेषकर उनकी पत्नी प्रीति शुक्ला का पक्ष भी सामने आया। प्रीति शुक्ला ने लखनऊ में अपर्णा सोनी और
अन्य लोगों के खिलाफ एक आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई। इस शिकायत में यह आरोप लगाया गया कि यह पूरा मामला उन्हें ब्लैकमेल करने, बदनाम करने और उनसे जबरन पैसे ऐंठने की एक सोची-समझी साजिश है। परिवार का यह भी कहना था कि इन बेबुनियाद आरोपों से उनकी छवि को नुकसान पहुंचाया जा रहा है।कानूनी स्थिति और वर्तमान परिप्रेक्ष्ययह मामला काफी समय तक मीडिया की सुर्खियों में बना रहा, क्योंकि रवि किशन एक जाने-माने सांसद और लोकप्रिय अभिनेता हैं,
जिससे इस तरह के निजी मामलों पर जनता का ध्यान स्वाभाविक रूप से आकर्षित होता है। हालांकि, इस विवाद के दौरान अदालत ने तुरंत अंतरिम डीएनए टेस्ट की मांग को स्वीकार नहीं किया, और यह मामला कानूनी प्रक्रिया, बयानों और दोनों पक्षों के अपने-अपने दावों के बीच उलझा रहा।किसी भी सार्वजनिक हस्ती के जीवन से जुड़े ऐसे निजी और संवेदनशील मामलों में कानूनी साक्ष्यों और अदालती फैसले के बिना किसी एक पक्ष को पूरी तरह सही या गलत ठहराना उचित नहीं होता है, क्योंकि एक तरफ जहां डीएनए टेस्ट के जरिए सच्चाई सामने लाने की मांग की गई थी, वहीं दूसरी तरफ इसे छवि धूमिल करने और साजिश करार देने के गंभीर आरोप भी लगाए गए थे।