आज के वीडियो में बात होगी विजेंद्र घाटगे की एक रॉयल फैमिली से आने वाला ऐसा अभिनेता जिसने अपने करियर की शुरुआत में ही एक ऐसी गलती कर दी कि अंत तक उसे सुधार नहीं पाया जिनसे शादी हुई उनसे बच्चे नहीं हुए और जिनसे बच्चे हुए उनसे शादी नहीं हुई और बहुत लंबा करियर होने के बाद आज एक गुमनाम सी जिंदगी जी रहे हैं विजेंद्र घाट के बॉलीवुड की बोलती खबरों से लेकर पुराने सितारों के राज खोल कहानियों तक बात दुनिया के रहस्यों की हो या हैरान करने वाली घटनाओं की य का सबसे रंग बिरंगा कंटेंट मेरे साथ सिर्फ उज्जवल त्रिवेदी टॉक्स पर तो शुरुआत होती है इनकी कहानी की और उस शुरुआत से पहले आपको मैं यह बता दूं कि इनकी माताज सीता राजे घाटगे जी जो इंदौर का राजसी घराना है तुकोजी राव होलकर थर्ड हुए हैं उनकी बेटी थी और उनकी बेटी होने के साथ-साथ एक और बात यह भी कि तुकोजी राव होलकर द थर्ड ने एक अमेरिकन युवती से शादी की थी नैंसी मिलर से उनसे इनकी माता जी का जन्म हुआ था उसके बाद इनकी माता जी की शादी हो गई कोल्हापुर घराने से जुड़े एक जमींदार फैमिली से तो आप कह सकते हैं कि विजेंद्र घाटगे की मां और पिताजी दोनों ही राजसी फैमिली से ताल्लुक रखते थे और इनका अच्छा खासा एक बड़ा फैमिली बिजनेस था लेकिन शुरुआती दिनों में इंदौर में जब इनकी तालीम हुई और उस वक्त यह एक अच्छे मैनेजमेंट स्टूडेंट भी थे एक अच्छे एनसीसी कैडेट भी थे उसके बाद इन्होंने रुख किया आगे की पढ़ाई के लिए सिडन कॉलेज है बॉम्बे में वहां बॉम्बे आने के बाद इनको ऐसा लगने लगा कि ये कैमरा के लिए बने हैं
और उन्होंने मॉडलिंग में ट्राई करना शुरू कर दिया पर्सनालिटी बहुत अच्छी थी इसलिए काम मिलने लगा धीरे-धीरे य छाने लगे और इनकी गिनती देश के अच्छे नामी गिरामी मॉडल्स में होने लगी और फिर उन्होंने अपने परिवार को अपनी वह इच्छा बताई जिसको सुनने के बाद इनके परिवार में शुरू में तो विरोध हुआ लेकिन बाद में वह लोग मान गए इच्छा यही थी कि मैं फैमिली बिजनेस नहीं करूंगा मैं कैमरा के सामने आना चाहता हूं मैं सिनेमा में काम करना चाहता हूं मैं एक्टर बनना चाहता हूं अब यह उनके परिवार के लिए थोड़ा सा ऐसा निर्णय जरूर था क्योंकि उनके परिवार में और कोई एक्टर था नहीं वो तो राजसी फैमिली को बिलोंग करते थे अब हुआ यह कि जब बहुत ज्यादा इच्छा जताई विजेंद्र घाटगे ने तो घर वालों ने कहा ठीक है अब यह वहां से चले आए पुणे के फिल्म इंस्टिट्यूट में वहां अच्छी एक्टिंग की तालीम ली और फिर बाहर निकले तो इनको मिल गए बासु चटर्जी जो उन दिनों एक फिल्म बना रहे थे चित चोर चित चोर थोड़ी सी लीक से हटकर फिल्म थी लीड एक्टर इसमें हीरो थे अमोल पालेकर हीरोइन जरीना वहाब और प्रोडक्शन हाउस जो था वो राजश्री का राजी फिल्म्स तो विजेंद्र को लगा कि पहली फिल्म मुझे ऐसी मिल रही है तो चलो कर लेते हैं लेकिन उन्हें पता नहीं था कि वह असल में एक बहुत बड़ी गलती कर रहे हैं उस फिल्म को करके खैर इस फिल्म के रिलीज होने के बाद उन्हें एहसास हुआ कि इस फिल्म को लोग अमोल पालेकर की फिल्म के तौर पर जान रहे हैं उनका तो कहीं कोई खास जिक्र है ही नहीं और वैसे भी उनका रोल एक छोटा सा था जरीना वहाब शादी करना चाहती हैं अमोल पालेकर से और यह आ जाते हैं उनसे शादी करने तो मतलब एक छो छोटा सा रोल था जिसका कोई खास इनको पहचान नहीं मिली इसके बाद उन्होंने ऐसी ही गलती एक और कर दी इन्होंने अपनी अगली फिल्म जो साइन की सुनेना उसमें भी ये सेकंड लीड में अब धीरे-धीरे इंडस्ट्री में यह हो गया कि भा ये सेकंड लीड है
हालांकि फिल्में इन्होंने कई की 76 से अगर इनका करियर शुरू हुआ तो 80 तक आते आते यह प्रेमरोग जैसी फिल्म भी कर चुके थे जहां राज कपूर ने इन्हें डायरेक्ट किया था लेकिन इनकी पहचान बन चुकी थी कि यह एक सेकंड लीड हीरो हैं इस बीच खुद को हीरो बनाने के चक्कर में इन्होंने कुछ बीग्रेट फिल्मों में भी काम किया कुछ हॉरर फिल्मों में भी काम कर लिया अब यहां पूरी कहानी यह होती चली गई कि इनके माथे पर दो टैग लग गए कि भैया इनको अगर नॉर्मल फिल्मों में लोगे बड़ी फिल्मों में तब तो यह सेकंड लीड कर सकते हैं या ग्रे शेड या नेगेटिव कैरेक्टर और हीरो बनाना है इनको तो फिर बी ग्रेट फिल्मों में देखना होगा इधर इनकी पर्सनल लाइफ में दो बड़े हाद से हुए पहला हादसा तो यह हुआ कि 23 जून 1985 की बात है एक कनिष्क एयर ब्लास्ट हुआ था असल में की बहन संगीता और इनकी बहन संगीता के होने वाले पति विजय और उसको वह जो फ्लाइट थी वह ब्लास्ट हो गई उसमें इनकी जो बहन थी जिन्हें बहुत चाहते थे उनकी मृत्यु हो गई और उनके होने वाले पति की भी और उनकी कहानी भी बड़ी दुखद है क्योंकि वो क्रू मेंबर थी एयर इंडिया में और उस दिन उन्हें उस फ्लाइट को नहीं लेना था लेकिन उन्होंने जिद करके अपनी ड्यूटी उस फ्लाइट में लगवाई थी क्योंकि उसमें उनके होने वाले पति भी सफर कर रहे थे और उनका प्लान आगे का यह था कि हम अब्रॉड में सेटल हो जाएंगे लेकिन 23 जून को यह हादसा होता है 1985 को और उसके बाद विजेंद्र घाट के बुरी तरह टूट गए क्योंकि उन्हें अपने पेरेंट्स को य इंफॉर्मेशन देनी थी और बड़ा आप सोचिए ना घर की सबसे छोटी बिटिया के साथ ये हो गया है और बड़ा भाई अपने मम्मी पापा को ये बता रहा है कैसे किया होगा कहते हैं कि उस वक्त उन्होंने इंदौर से मुंबई बुलाया और फिर अपने सामने यह सूचना उनको दी उस वक्त टेलीफोन और यह सब इतना ज्यादा नहीं था इंटरनेट वगैरह एक तो यह हादसा जिसने इन्हें बुरी तरह तोड़ दिया यह चले गए बहुत ही अ डिप्रेशन में उसी दौरान इनकी लव मैरिज हुई थी निकी वालिया से निकी वालिया ने भी इनको छोड़ने का निर्णय ले लिया उसी उन्हीं दिनों के आसपास और फिर उन्होंने एक विलन के रोल में आते रहे डन धनुआ उनसे शादी कर ली बाद में निकी वालिया ने डन धनुआ को भी तलाक दे दिया और आजकल निकी वालिया अपना एक स्पा चलाती हैं लॉस एंजेलिस में तो पर्सनल लाइफ तो उनकी यह रही कि निकी वालिया से शादी तो हुई पर कोई बच्चे नहीं हुए उन्होंने भी तलाक दे दिया इधर जो बहन थी उसकी मृत्यु हो गई अपने होने वाले पति के साथ दूसरा कहते हैं कि यह सारी जो चीजें थी बड़ा तोड़ गई थी विजेंद्र घाटगे को इधर फिल्मों में भी हीरो बन के नहीं आ पा रहे थे बड़ी अच्छी पर्सनालिटी थी मॉडलिंग करते थे कोई कमी नहीं थी आवाज बहुत दमदार थी फिर उन्होंने टीवी का रुख किया और 1985 में उन्होंने सीरियल किया सिंहासन बसी राजा विक्रमादित्य बने उसमें और जिन लोगों ने वो सीरियल देखा है वो जानते हैं
इस बात को कि बिल्कुल राजा विक्रमादित्य ही लग रहे थे वो कन्विंसिंगली बहुत उस रोल को किया फिर विक्रम और बेताल किया फिर इनको बुनियाद मिल गया बुनियाद में बड़ा अच्छा इनका कैरेक्टर रहा जिस वजह से इनको घर-घर पहचान मिली कह सकते हैं कि 19 76 से 86 तक उन्हें घर-घर में वह पहचान नहीं मिल रही थी जो बुनियाद से उन्हें मिल गई उन्हीं दिनों एक और गलती यह कर बैठे इनको महाभारत ऑफर हुआ बीआर चौपड़ा का टीवी पर जो आया था महाभारत उसमें इन्हें ऑफर हुआ भीष्म पितामह का रोल पर इन्होंने यह कहकर मना कर दिया कि भाई मैं बूढ़ा नहीं दिखना चाहता टीवी पर अगर व रोल भी कर लेते तो फिर मुकेश खन्ना को वो रोल नहीं मिलता मुकेश खन्ना जो शक्तिमान बनकर आते थे फिर उन्हें वो रोल मिला इधर इन सारी पर्सनल चीजों की वजह से और फिल्मों में हीरो ना बन पाने की वजह से इनके मन में भी कोई बार इस तरह के विचार आने लगे कि भाई मैं उतना सक्सेसफुल नहीं हुआ हूं फिल्में इन्होंने कई की रजिया सुल्तान भी की बहुत सी फिल्में की एक और बात कि बहुत सारी ऐसी फिल्मों का हिस्सा भी रहे जो बन ही नहीं पाई तो कई बार ऐसा भी हुआ कि रोल अच्छा था लेकिन फिल्म नहीं बनी फिल्म बनी तो सेकंड लीड मिला पहचान बनी तो एक अलग तरह से बनी होते-होते एक इनके करियर में एक जो बहुत बड़ा ब्रेक आया 1976 में जो इनका करियर शुरू हुआ था उस करियर के करीब-करीब 30 साल बाद 2006 में देवदास में इन्हें रोल मिला ऐश्वर्या राय के पति का अब यह रोल कैसे मिला इसको लेकर भी कहानी है असल में संजय लीला भंसाली इन को साइन करना चाहते थे किसी एक नॉर्मल रोल के लिए यह नहीं सोचा था कि इतना बड़ा रोल देंगे फिल्म में और संजय लीला भंसाली की इनसे मीटिंग होने वाली थी अब हुआ कि मीटिंग के लिए जब यह पहुंचे तो संजय लीला भंसाली इनसे पहली बार मिल रहे थे उससे पहले उन्होंने उन्हें सिर्फ पर्दे पर देखा था उनको देखकर संजय लीला भंसाली इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने कहा कि भाई यह एक ऐसा अभिनेता है कि मैं इसे कोई बड़ा रोल देता हूं क्योंकि बड़ी अच्छी पर्सनालिटी है बड़ी अच्छी आवाज है एक नॉर्मल रोल कैसे दे दूं तो फिर उन्होंने तय किया कि मैं इसको इस अभिनेता को ऐश्वर्या राय के पति का रोल देता हूं यह एक कहानी है उसके बाद अगर आप देखें तो 2011 तक एक्टिव रहे हैं एक अजान नाम से फिल्म आई थी सचिन जोशी की उसमें शायद आखरी बार देखे हैं और उसके बाद से यह इंदौर में रहते हैं अपने बिजनेस को संभालते हैं उसी बिजनेस को जिस बिजनेस को उन्हें 1976 में संभालना था लेकिन वह सब छोड़ के फिल्मों में आ गए लेकिन कुछ गलतियां होती चली गई इधर एक इनका संबंध लोत मा नाम की इनकी फ्रेंड कहे गर्लफ्रेंड कहे उनसे भी रहा जो ग्वालियर से आती थी चित्रकार थी और उनसे एक बेटी भी है 1988 में बेटी का जन्म हुआ तो जैसा मैंने इस वीडियो की शुरुआत में बताया कि जिनसे शादी हुई उनसे बच्चे नहीं हुए जिनसे बच्चे हुए उनसे शादी नहीं हुई कुछ फैसले गलत होते चले गए हीरो बन के आना चाहिए था पहली फिल्म में सेकंड लीड बनकर आए अच्छा इस दौरान एक और बात है कि इनके पास पैसे की कभी कोई कमी नहीं थी तो ऐसा कुछ भी नहीं था
कि इन्हें मजबूरी में सेकंड लीड करना पड़ा यह चाहते तो रुक जाते लेकिन कुछ हुआ नहीं ऐसा 1975 में ही इन्होंने एक ब्रिटिश फिल्म में भी काम किया वो भी उस समय काफी सराही गई थी तो कुल मिलाकर अगर हम देखें विजेंद्र घाटगे के जीवन को कि दो-दो रॉयल फैमिली से ताल्लुक रखते हैं फिल्मों में आए तो शुरुआत में ही कुछ गलत फैसले ले लिए सेकंड लीड बन गए इसलिए फिर हीरो के रोल ऑफर नहीं हुए एक टैग लग गया सेकंड लीड का टैग लग गया बी ग्रेड हीरो का फिर नेगेटिव रोल भी किए करने को बड़ी फिल्में भी की करने को ऐसी फिल्में भी की जो शेल्व हो गई जो बनी नहीं और फिर टीवी में भी एक ऐसा रोल ठुकरा दिया भीष्म पितामह का महाभारत में कि अगर वह किया होता तो शायद कुछ एक और अलग लेवल आता खैर जो उनको याद किया जाता है विजें घाटगे को वह याद किया जाता है बुनियाद के लिए वह याद किया जाता है सिंहासन बतीसी विक्रम बेताल और देवदास के लिए टीवी में भी उन्होंने अच्छा काम किया जुनून वगैरह कुछ शोज किए अच्छे लेकिन वही है कि जो जिस लेवल का इनका टैलेंट था वह लेवल का टैलेंट निखर नहीं पाया वो सब कुछ हो नहीं पाया वैसा जैसा कि होना चाहिए था तो जिंदगी से हमें यह सबक मिलता है कि अक्सर जिंदगी में हमें कई बार मौके मिलते हैं हम कई बार उन मौकों को सही से खेल नहीं पाते कई बार हम उन्हें समझ नहीं पाते कई बार हमें इंपॉर्टेंस देर से समझ में आती है और तब तक भूल हो चुकी होती है इधर जब चकदे आई और सागरिका घाट के उसमें दिखाई दी तो कुछ लोगों ने ये भी कहना शुरू कर दिया कि सागरिका घाटगे जो है वो विजयेंद्र घाटगे की बेटी है जबकि ऐसा नहीं है विजयेंद्र घाटगे की रिलेटिव हैं वो भतीजी आप कह सकते हैं लगती हैं क्योंकि सागरिका घाटगे के जो पिता हैं विजय घाटगे उनका नाम था उनकी डेथ हो गई कुछ साल पहले वो रिलेटिव है डिस्टेंस रिलेटिव हैं विजेंद्र घाटगे के तो यह भी एक लोगों का कंफ्यूजन मैंने कहा दूर कर दूं फिलहाल विजेंद्र घाटगे से अगर आपको मिलना है तो विजेंद्र घटगे डॉइन आप टाइप करेंगे इंटरनेट पर तो आपको उनके बारे में थोड़ी
और जानकारी मिल जाएगी एक फोन नंबर भी शायद मिल सकता है आपको मिल जाए और एक ईमेल आईडी भी मिल जाए इन दिनों इंदौर में रहते हैं फैमिली बिजनेस संभाल रहे हैं और शायद अपनी जिंदगी में उन्होंने जो कुछ भूल और गलतियां की हैं उनके बारे में कभी क बार सोचते होंगे कि काश पहली फिल्म एज अ हीरो साइन की होती काश थोड़ा रुक गए होते काश महाभारत का रोल वो ठुकराया ना होता तो ऐसा होता है कोशिश करेंगे ऐसे ही मशहूर चेहरों की कहानियां आपको बताते रहे ताकि आपको यह पता चलता रहे कि भाई कुछ मशहूर चेहरों से भी गलतियां हो जाती हैं और अक्सर हमें लगता ही है ना कि बड़ी रॉयल फैमिली से आ ते हैं बड़े मशहूर हैं बड़ी अच्छी पर्सनालिटी है इनसे तो कभी कुछ गलती हो ही नहीं सकती ऐसा नहीं है किस्मत हमको अपने इशारों पर नचा है और किस्मत कहे या कई बार हमारी समझ का धोखा कहे हो जाता है ऐसा कि जीवन में कुछ चीजें ऐसी कई परतों में आ जाती हैं कि फिर समझने में काफी समय लग जाता है उम्मीद है विजेंद्र घाटगे की ये कहानी आपको समझ में आई होगी और आप इससे कुछ ना कुछ सीखेंगे जरूर क्योंकि यहां कहानी कहने का मकसद मेरा यही है कि कुछ सीखना बहुत जरूरी होता है लाइफ में जो भी मौका मिल रहा है उसे पकड़ कर रखिए आपको नहीं मालूम कि वोह कितना कीमती है और उसको सही से खेलना कितना जरूरी है