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NEET पेपर leak CM विजय ने PM मोदी से क्या मांग की ?

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नीट यूजी 2026 एग्जाम रद्द होने के बाद देश भर में बवाल मचा हुआ है। सरकार और परीक्षा कराने वाली जो संस्था है एनटीए उसकी क्षमता पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। इस बीच तमिलनाडु के मुख्यमंत्री जोसेफ विजय ने मेडिकल एंट्रेंस एग्जाम को लेकर एक बयान दिया है।

उन्होंने मेडिकल एग्जाम के लिए तमिलनाडु का वही पुराना स्टैंड दोहराया है जो काफी लंबे समय से चला आ रहा है। उन्होंने केंद्र सरकार से रिक्वेस्ट की है कि वो नीट बेस्ड एंट्रेंस एग्जाम का जो प्रोसेस है उसे खत्म करें और राज्यों को 12वीं के नंबरों के आधार पर स्टूडेंट्सको एडमिशन देने की परमिशन दें।

सीएम विजय ने नीट एग्जाम को लेकर एक्स पर एक पोस्ट किया। पोस्ट में सीएम विजय ने लिखा कि हालिया पेपर लीक विवाद ने नेशनल लेवल के एग्जाम सिस्टम में मौजूदा जो स्ट्रक्चरल डिफिशिएंसी है उसको उजागर किया है। इस विवाद ने पूरे देश में लाखों मेडिकल कैंडिडेट्स की उम्मीदों को तोड़ दिया है।

मुख्यमंत्री ने यह भी लिखा कि तमिलनाडु सरकार नीट को खत्म करने की मांग को दोहराती है। हम राज्यों को 12वीं के अंकों के आधार पर एमबीबीएस, बीडीएस और आयुष जैसे कोर्सेज में स्टेट कोटा के तहत सभी सीटेंभरने की अनुमति अनुमति देने की मांग फिर से दोहराते हैं। मुख्यमंत्री जोसेफ विजय ने यह भी कहा कि तमिलनाडु की पिछली सरकारों ने भी नीट का शुरुआत से ही विरोध किया है।

उनका तर्क है कि यह एग्जाम ग्रामीण इलाकों, सरकारी स्कूलों, तमिल मीडियम से पढ़ाई करने वाले और सामाजिक, आर्थिक रूप से पिछड़े परिवारों के स्टूडेंट्स पर असमान रूप से असर डालती है। उन्होंने मांग की कि इस परीक्षा को खत्म कर दिया जाए और राज्यों को 12वीं के जो अंक आते हैं उसके आधार पर मेडिकल सीटों को भरने की अनुमति दी जाए।

मुख्यमंत्री जोसेफ विजय की ओर से यह टिप्पणी ऐसे समय पर आईहै जब ने नीट यूजी 2026 पेपर लीक मामले में पांच लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। देश भर में कई जगहों पर तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। साथ ही इसे लेकर पूरे देश में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। तमाम एजुकेशनिस्ट है, विपक्ष तो लगातार हमलावर है ही और लोग सेंट्रल एजुकेशन मिनिस्टर धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की भी मांग कर रहे हैं।

हालांकि जो एजुकेशन मिनिस्टर उनकी तरफ से कोई आधिकारिक बयान अभी तक आया नहीं है। जब मीडिया उनसे बात करने की कोशिश कर रही थी तब भी वो बिना कोई रिएक्शन दिए हुए वहां से निकल गए थे।इन सबके बीच फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन यानी फेमा ने सुप्रीम कोर्ट का रुख करते हुए एनटीए को पूरी तरह से इसमें सिस्टम में बदलाव करने की मांग की है। कहा या तो इस एजेंसी को ही खत्म कर दिया जाए या इसमें स्ट्रक्चरल चेंजेस लाए जाए। फाइमा ने मेडिकल एंट्रेंस एग्जाम की जो क्रेडिबिलिटी है उसको बहाल करने के लिए इसकी जगह एक टेक्निकली साउंड जो ऑर्गेनाइजेशन है वह लाने की मांग की है।

बाकी इन सबके बीच उस टीचर के बारे में भी पता चला है जिसने सबसे पहले नीट यूजी पेपर लीक की शिकायत की थी जिसके बाद एनटीए नेएग्जाम कैंसिल कराने का ऐलान किया था। इंडियन एक्सप्रेस में हमजा खान की एक रिपोर्ट छपी है जिसमें राजस्थान के सीकर जिले के उद्योग नगर थाने में जो है 4 मई की रात ये उस रिपोर्ट में बताया गया है कि 4 मई की रात करीब 1:30 बजे इकोनामी कोचिंग संस्थान के टीचर कुछ पन्ने लेकर वहां पहुंचते हैं। टीचर आरोप लगाते हैं कि नीट यूजी 2026 की परीक्षा में गड़बड़ी हुई है और उनके पास कथित तौर पर गेस पेपर मौजूद है। हालांकि जो एसएओ हैं उस थाने के राजेश कुमार उन्होंने ये क्लेम किया है कि उनकी बात हमने सुनी थी और लिखित शिकायत देने कोकहा था लेकिन वो टीचर वहां से चले गए थे। बताया गया कि टीचर ने पहले कुछ पत्रकारों से भी संपर्क किया था मगर किसी ने उनके आरोपों को गंभीरता से नहीं लिया था।

घबराए टीचर जो है बाद में कोचिंग सेंटर के जो मालिक है उनसे बात की और 7 मई को एनटीए को एक मेल किया था। शिकायत में उन्होंने कहा कि वो फॉरेंसिक जांच के लिए अपना मोबाइल फोन भी देने को तैयार हैं। उनके पास 60 पन्नों की एक पीडीएफ है जिसमें केमिस्ट्री और बायोलॉजी के सवाल शामिल हैं और यह वही गेस पेपर है जो पूरे पेपर लीक में जिसकी बात हो रही है कि उसमें ज्यादातर सवाल जोहै वही सवाल थे जो एग्जाम में आए थे। शुरुआती जांच में टीचर को क्लीन चशीट दे दी गई है क्योंकि उन्हें जो कथित पेपर जो है जो गेस पेपर कहा जा रहा है वह एग्जाम खत्म होने के बाद मिला था। लेकिन उनकी शिकायत के बाद ही नीट यूजी 2026 का जो पेपर लीक का मामला है।

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