30 अप्रैल को मध्य प्रदेश के बर्गी डैम में जो क्रूज हादसा हुआ था, वह वहां के अफसरों की लापरवाही से हुआ था। अफसरों को पता था कि वह जो लापरवाही कर रहे हैं, उससे लोगों की हो सकती है। लेकिन फिर भी एक्शन लेने की जहमत नहीं उठाई गई। अफसरों की टेबल पर वो फाइलें मौजूद थी जो हादसे के लिए आगाह कर रही थी। लेकिन उन फाइलों को पलटना तो दूर उस पर नजरें तक नहीं फेरी गई।
अगर उन फाइलों की धूल साफ करके उनमें लिखी रिपोर्ट को पढ़ लिया जाता तो आज शायद वह 13 लोग जिंदा होते। ऐसा किस आधार पर कहा जा रहा है आपको वो भी बताते हैं। तो जबलपुर के बरगी डैम में 30 अप्रैल को जो क्रूज हादसा हुआ था।
उस मामले में अब एक खुलासा हुआ है जिसने पर्यटन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्रूज बोट पलटने से 2 महीने पहले बोट को चलाने वाले सरकारी रिसोर्ट के अधिकारियों ने अपने सीनियर अफसरों को औपचारिक रूप से यह चेतावनी दी थी कि पुराना हो चुका क्रूज का इंजन बार-बार खराब हो रहा है।
उसे तुरंत बदलने की जरूरत है। लेकिन सीनियर अधिकारियों ने इस शिकायत की सुध नहीं ली। इंडियन एक्सप्रेस के रिपोर्ट के मुताबिक 1 मार्च 2026 के एक अंदरूनी लेटर से यह पता चला है कि मध्य प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम के तहत आने वाले मैकल रिसोर्ट और वाटर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के अधिकारियों ने बर्गी डैम पर चलने वाले दोनों क्रूज बोर्ड के बारे में चिंता जताई थी।
इसके बावजूद विभाग के स्तर पर कोई ठोस कारवाई नहीं हुई। इस लेटर में खासतौर पर 14 जनवरी 2025 की घटना का जिक्र भी किया गया है। जब रीवा में क्रूज बोट के दोनों इंजन जो है राउंड के दौरान बंद हो गए थे। टूरिज्म डिपार्टमेंट को लिखे गए लेटर के अनुसार बोट की मरम्मत से जुड़ी कंपनी हैदराबाद बोट बिल्डर्स ने यूनिट को ईमेल के जरिए बताया कि इंजन बहुत पुराने हो गए हैं। उसके स्पेयर पार्ट्स अब मार्केट में मौजूद नहीं है। इसलिए यह सजेशन दिया गया कि दोनों इंजनों को बदल दिया जाना चाहिए।
यह चेतावनी दूसरी बूट यानी माइकल सुताप पर लागू होती है जो कि 30 अप्रैल को हादसे का शिकार हुआ था। जबलपुर में पर्यटन निगम के रीजनल मैनेजर को लिखे गए इस पत्र में कहा गया था कि दोनों क्रूज बोट की कई बार मरम्मत की गई थी। लेकिन उसमें इंजन में बार-बार समस्याएं जो है वो बनी रही। जिसमें एक क्रूज बोट मैकल सुता 2006 में और दूसरी जो क्रूज बोट है वो रीवा 2007 में शुरू हुई थी।
लेटर में यह भी जोड़ा गया कि अधिकारियों को लेटर लिख लिखकर कई बार इस बारे में जानकारी दी गई थी। शिकायत के साथ लेटर में अधिकारियों के लिए जो आग्रह है वो भी यह किया गया था कि वो पर्यटकों का सीजन जोर पकड़ने से पहले मरम्मत का काम पूरा करवा दें या इंजन इसका बदल लें। लेकिन इस पर कोई संज्ञान नहीं लिया गया और 30 अप्रैल को जो क्रूज हादसा हुआ था उसमें 13 टूरिस्ट को अपनी जान गवानी पड़ी जबकि 28 टूरिस्ट को सकुशल बचा लिया गया था रेस्क्यू के दौरान।
इसके बाद राज्य सरकार ने जांच के आदेश दिए। सुरक्षा समीक्षा पूरी होने तक पूरे मध्य प्रदेश में इस तरह के कुसलन पर रोक लगा दी गई थी। जबलपुर में पर्यटन निगम के रीजनल मैनेजर संजय मल्होत्रा को हटाकर उन्हें पर्यटन विभाग के भोपाल मुख्यालय में अटैच कर दिया गया था। यही वह अफसर हैं जिनको पत्र लिखा गया था। जो अभी पत्र आपको सामने दिखा है वो इन्हीं के नाम लिखा गया था।
लेकिन इनकी ओर से उस पर कोई रिएक्शन नहीं दिया गया। इसके अलावा मध्य प्रदेश सरकार की ओर से इस मामले में रिटायर्ड जस्टिस संजय द्विवेदी की अध्यक्षता में एक न्यायिक जांच आयोग बनाया गया जो 3 महीने में अपने रिपोर्ट पेश करेगा। क्रूज के पायलट, हेल्पर और टिकट प्रभारी को बर्खास्त कर दिया गया। मैनेजर को निलंबित कर दिया गया। जबलपुर हाईकोर्ट ने क्रू मेंबर्स पर एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया। यह स्वतः संज्ञान लिया हाईकोर्ट ने।
प्रेज प्रदेश में क्रूड संचालन पर अस्थाई रोक लगाई गई और घाटों पर सुरक्षा बढ़ाई गई। लेकिन सवाल अब भी वही है कि जब खतरे की जानकारी पहले से थी तो पुराने और खराब क्रूज को टूरिस्ट के साथ पानी में क्यों उतारा गया? सिर्फ क्रूज चालक पर कारवाई करने के बजाय उन अधिकारियों की जिम्मेदारी क्यों नहीं तय की जा रही है? जिन्होंने चेतावनी मिलने के बाद भी संचालन जारी रखने की अनुमति दी।