भाग गया हीरो अकेले सबको मार के भाग गया आहा मुझे दे दो तमन्ना की क्या कहना तेरा क्या कहना रहना आज की यह कहानी सिर्फ एक अभिनेत्री की नहीं बल्कि टूट कर भी बार-बार खड़े हो जाने की कहानी है। कौन सी चीज है प्यारी तुझको छोड़ दिया तुझ पर। आज की यह कहानी बीते दौर की एक ऐसी अदाकारा की है जिसकी नीली आंखें, मासूम चेहरा और मोहक मुस्कान ने पूरे भारत के लाखों युवाओं को दीवाना बना दिया था। जीवन के दिन छूटे सही हम भी लेकिन जितनी खूबसूरत वह पर्दे पर दिखती थी, उनकी असली जिंदगी उससे कहीं ज्यादा दर्दनाक थी। सब कैसे है डैडी? सब ठीक है बेटी। तुम अपने कमरे में जाओ। राजू कैसा है डैडी? पैदा होने से लेकर जवानी तक इस अदाकारा ने कभी सुकून का एक पल नहीं देखा और वो हर बात में खामखा अपनी टांग अड़ाई जाती है। जरूर पूरी करूंगी। बोलो क्या चाहते हो? अगर उनकी जिंदगी में कुछ था तो बस घुटन, मजबूरी और अकेलापन। बहुजी दिल पर पत्थर रखकर सुन लो। हमार बात का विश्वास नहीं है ना? तो आज खुद ही देख लियो। तो आइए आज जानते हैं उस बेहद हॉट और खूबसूरत दिखने वाली अभिनेत्री के जीवन के वे काले सच। क्यों बचपन में लड़की होकर भी उन्हें लड़कों के किरदार निभाने पड़े? कौन था वह शख्स जिसने उन्हें जबरन फिल्मों में धकेल दिया। किसने उनकी पूरी कमाई एक झटके में हड़प ली? करोड़ों कमाने के बावजूद क्यों उन्हें कई-कई दिन कार में रहकर गुजारने पड़े?
शादी से पहले कैसे वह एक बच्चे की मां बन गई? अरे आंटी को नहीं पसंद तो रहने देना। प्यार हम दोनों करते हैं और आज हम दोनों जरूर मिलेंगे। किस सुपरस्टार पति ने धोखा दिया और उनकी ही सबसे करीबी सहेली के साथ रिश्ता बना लिया। और क्यों उनकी अपनी ही बेटियां एक समय उन्हें छोड़कर चली गई? अरे पगली इस घर में तेरे होते हुए मेरी आंखें कौन बंद कर सकता है दीपा? और हां आज के वीडियो में हम आपको यह भी बताएंगे कि भारतीय क्रिकेट टीम का वह कौन सा खिलाड़ी था जिसने इस अभिनेत्री से मोहब्बत तो की लेकिन अंत में उन्हें धोखा भी दिया। इंपॉसिबल मैं यह बात बिल्कुल नहीं मान सकती। बने रहें हमारे साथ। ना बाबा ना। मैं मां से कहूंगी ना तो मां मुझसे पूछेंगी कि मैं आपकी सिफारिश क्यों कर रही हूं। हम तो मैं क्या जवाब दूंगी? जी हां, हम बात कर रहे हैं बॉलीवुड की हॉट अभिनेत्री सारिका ठाकुर की। सारिका ठाकुर का जन्म 5 दिसंबर 1960 को दिल्ली में एक राजपूत परिवार में हुआ। उनकी मां कमल ठाकुर एक गृहणी थी और पिता दिनेश ठाकुर एक अच्छे फोटोग्राफर थे। सारिका अपने माता-पिता की इकलौती संतान थी। बचपन से ही वह बेहद खूबसूरत, मासूम और भोलीभाली थी। लेकिन उनकी यह मासूमियत माता-पिता के झगड़ों की भेंट चढ़ गई। रोज-रोज के घरेलू कलह और मां के चिड़चिड़े स्वभाव से परेशान होकर उनके पिता घर छोड़कर चले गए और बाद में दूसरी शादी कर ली।
पिता के जाने के बाद सारिका और उनकी मां पूरी तरह अकेली रह गई। घर चलाने का कोई साधन नहीं था। आय का कोई जरिया नहीं बचा। इसी मजबूरी में कमल ठाकुर अपनी बेटी को लेकर मुंबई आ गई। यहां किसी ने उन्हें सलाह दी कि उनकी बेटी बहुत सुंदर है। क्यों ना उसे फिल्मों में काम दिलवाया जाए। यह बात कमल ठाकुर के मन में बैठ गई। वह छोटी सी मासूम सारिका को लेकर फिल्म निर्माताओं के चक्कर काटने लगी। मां का उद्देश्य साफ था। खुद कुछ ना करना पड़े। बेटी कमाए और वह आराम की जिंदगी जी सके। तो क्या मैं तुम पर बोझ बन गई हूं? तुम मुझे इस घर से निकालना चाहती हो? सारिका इतनी सुंदर और प्रतिभाशाली थी कि मुंबई आए उन्हें ज्यादा समय नहीं हुआ था कि उन्हें काम मिल गया। उनकी पहली फिल्म मजली दीदी थी। यह फिल्म उनके फिल्मी सफर की पहली सीढ़ी बनी। अब मुझसे कोई भूल ना होगी इतना कह इसके बाद उन्हें हमराज जैसी बड़ी फिल्म मिली। एक बाल कलाकार के रूप में सारिका को दर्शकों ने खूब प्यार दिया। इस फिल्म में उनके साथ सुनील दत्त जैसे बड़े कलाकार थे। आपको जानकर हैरानी होगी कि इतनी छोटी उम्र में ही सारिका ने अपने नन्हे कंधों पर पूरे परिवार की जिम्मेदारी उठा ली थी। लेकिन उनकी स्वार्थी मां को बेटी की थकान, उसकी भावनाओं या बचपन से कोई मतलब नहीं था। वह बस यही चाहती थी कि सारिका दिन रात काम करती रहे और उनके सारे शौक पूरे होते रहे। आखिर वह होते कौन है मेरे पर्सनल मामलात में दखल देने वाली? हम बाल कलाकार के रूप में सारिका पूरी तरह स्थापित हो चुकी थी। ज्योति, आशीर्वाद, बेटी, छोटी बहू, सत्य काम, बालक, हार या जीत जैसी कई फिल्मों में उनकी अदाकारी को सराहा गया। खास बात यह थी कि फिल्मों में उन्होंने लड़की होते हुए भी लड़कों के किरदार निभाए। उनकी मां हमेशा निर्माताओं और निर्देशकों पर दबाव बनाती रहती थी कि सारिका हर तरह का रोल कर लेगी। बस उसे काम मिलना चाहिए। मां के डर के कारण सारिका कभी कुछ कह नहीं पाती थी। 4 साल की उम्र से ही सारिका अपनी मां का पेट पाल रही थी। काम के इस बोझ के कारण वह कभी स्कूल नहीं जा सकी। जब फिल्मों में अंग्रेजी बोलने की जरूरत पड़ी तो उनकी मां ने तुरंत एक टटर रख दिया ताकि वह अंग्रेजी सीख सके। हालांकि सारिका को पढ़ने लिखने का बहुत शौक था। जब भी थोड़ा सा समय मिलता वह कहीं से किताबें ढूंढ लाती और चुपचाप पढ़ती रहती। लेकिन उनकी मां को यह बिल्कुल पसंद नहीं था। उन्होंने सारिका को किताबें पढ़ने से मना कर दिया। इसके बावजूद सारिका ने अपने बचाए हुए पैसों से कुछ किताबें खरीदी
और घर में पढ़ने लगी। जब मां को इसका पता चला तो उन्होंने बेरहमी से सारिका की पिटाई की। उस दिन के बाद सारिका ने कभी किताबों को हाथ नहीं लगाया। समय यूं बीतता गया और सारिका 15 वर्ष की हो गई। 4 साल की उम्र से लेकर किशोरा अवस्था तक उन्होंने लगातार कड़ी मेहनत की। अपना बचपन, अपनी पढ़ाई और अपने सपने सब कुछ कुर्बान कर दिया। यह थी मासूम अदाकारा की दर्दनाक शुरुआत जिसकी जिंदगी पर्दे पर चमकदार थी लेकिन हकीकत में बेहद दर्द भरी। दिन रात की इसी कड़ी मेहनत का नतीजा था कि साल 1970 के दशक में सारिका की मां ने मुंबई जैसे महंगे शहर में पांच-प फ्लैट खरीद लिए थे। जब इस बात का पता सारिका को चला तो उन्होंने मजाकमज़ाक में अपनी मां से पूछ लिया। मां यह सारे फ्लैट किसके नाम पर हैं? बस यही सवाल मां के गुस्से की वजह बन गया। क्रोध में आकर मां ने कहा, तुम्हें इससे क्या मतलब? यह सारे फ्लैट मेरे नाम पर हैं। इतना ही नहीं उस उम्र में भी उन्होंने सारिका की बेरहमी से पिटाई कर दी। मां ने ताना मारते हुए कहा कि आज जो कुछ भी तुम हो वह सिर्फ मेरी वजह से हो। इसके बाद उन्होंने सारिका को घर से निकाल दिया। घर से बेघर हुई सारिका पूरी तरह टूट चुकी थी। निराशा और सदमे के अलावा उनके पास कुछ भी नहीं था। बस एक कार थी। उसी कार के सहारे वह वहां से निकल पड़ी। लेकिन जाए तो जाए कहां? सिर छुपाने के लिए एक जगह तो चाहिए ही थी। हालात इतने खराब हो गए कि कई-कई दिनों तक उन्हें अपनी कार में ही रहना पड़ा। कभी-कभी शशि कपूर के पृथ्वी थिएटर में रात बिताने का मौका मिल जाता। जिस रात थिएटर में रुकने को मिल जाता वही रात उनके लिए सुकून की होती क्योंकि उसी रात वह ठीक से सो पाती थी। कुछ दिन बीते तो उनके कुछ अच्छे दोस्तों ने मिलकर उन्हें किराए पर एक कमरा दिलवा दिया। अब सारिका कोई बच्ची नहीं थी। उन्हें लीड एक्ट्रेस के रूप में फिल्मों में काम मिलने लगा था। एक नायिका के तौर पर उन्होंने कागज की नाव और गीत गाता चल जैसी फिल्मों से अपने नए फिल्मी सफर की शुरुआत की। इसके बाद फिल्म हमारा मिलन में राज किरण और सचिन के साथ उनकी जोड़ी को खूब पसंद किया गया। इन फिल्मों के साथ ही सारिका का करियर सफलता की राह पर बढ़ने लगा। फिल्मी पर्दे पर सचिन और सारिका की जोड़ी इतनी पसंद की गई असल जिंदगी में भी दोनों उतने ही करीब आ गए। लेकिन यह रिश्ता ज्यादा आगे नहीं बढ़ सका और कुछ ही समय बाद दोनों के रास्ते अलग हो गए। इसी दौरान भारतीय क्रिकेट टीम के तत्कालीन कप्तान कपिल देव के साथ भी सारिका के रिश्ते की खूब चर्चा होने लगी। बताया जाता है कि एक कार्यक्रम के दौरान दोनों की मुलाकात हुई और पहली ही मुलाकात में दोनों एक दूसरे को पसंद करने लगे। उनका प्यार परवान चढ़ने लगा। कपिल देव ने तो सारिका को अपने माता-पिता से भी मिलवा दिया था। मीडिया में दोनों की शादी की अटकलें तेज हो गई। लेकिन तभी कपिल देव की पूर्व प्रेमिका रोमा भाटिया एक बार फिर उनकी जिंदगी में लौट आई। कपिल देव ने सारिका से माफी मांगते हुए उनसे रिश्ता खत्म कर लिया। यह सब सारिका के लिए बहुत बड़ा झटका था। उनकी जिंदगी में फिर से मायूसी छा गई। सारिका के दिल में बस यही कसक रह गई कि काश उन्होंने उनसे पहले ही कह दिया होता।
वह उनके लिए अपनी जान तक देने को तैयार थी। इसके बावजूद 70 और 80 के दशक में सारिका एक नामी गिरामी और सफल अभिनेत्री बन चुकी थी। लेकिन निजी जिंदगी में दर्द और अकेलापन उनका पीछा करता रहा। गृह प्रवेश और कातिल जैसी फिल्मों में काम करके सारिका ने अपनी बेहतरीन अभिनय क्षमता से सबको प्रभावित कर दिया। उस दौर में वह बड़े से बड़े कलाकारों के साथ काम कर रही थी। कहा जाता है कि उन्होंने सबसे ज्यादा फिल्में संजीव कुमार के साथ की। संजीव कुमार ने ही सारिका को अभिनय की बारीकियां सिखाई और उन्हें एक परिपक्व अभिनेत्री के रूप में निखारा। सत्य पे सत्ता, देवता, श्रीमान श्रीमती, जानी दुश्मन और विधाता जैसी एक के बाद एक सुपरहिट फिल्मों ने सारिका को सफलता की ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया। उनका फिल्मी करियर तो शानदार चल रहा था लेकिन निजी जीवन में हालात और अकेलापन उन्हें हमेशा उदास रखते थे। इसी अकेलेपन के दौर में सारिका ने फिल्म राजतिलक में काम किया। इस फिल्म के हीरो साउथ के सुपरस्टार कमल हासन थे। फिल्म के शूटिंग के दौरान दोनों के बीच अच्छी दोस्ती हो गई। पहले से ही टूटी हुई और तनहाइयों में जी रही सारिका का कमल हासन के करीब आना स्वाभाविक था। यह नजदीकियां कब दोस्ती से आगे बढ़कर प्यार में बदल गई उन्हें खुद भी पता नहीं चला। कुछ समय बाद सारिका और कमल हासन लिव इन रिलेशनशिप में रहने लगे। उस समय कमल हासन पहले से शादीशुदा थे। हालांकि वह अपनी पहली पत्नी वाणी गणपति से अलग रह रहे थे। तलाक ना होने की वजह से वह सारिका से शादी नहीं कर पा रहे थे। इसी बीच बिना शादी के ही सारिका कमल हासन के बच्चे की मां बन गई। उन्होंने बेटी श्रुति हासन को जन्म दिया।
शादी से पहले मां बनने की वजह से सारिका को काफी बदनामी झेलनी पड़ी। श्रुति के जन्म के कुछ समय बाद कमल हासन का अपनी पहली पत्नी से तलाक हो गया और इसके बाद साल 1988 में सारिका और कमल हासन ने शादी कर ली। फिर 1991 में सारिका ने अपनी दूसरी बेटी अक्षरा को जन्म दिया। शादी के बाद सारिका बहुत खुश थी। उन्हें वह परिवार मिल गया था जिसकी चाह उन्हें बचपन से थी। अब उनके पास अपना घर, पति और बच्चे थे। परिवार की खुशियों के लिए उन्होंने फिल्मों से दूरी बना ली। जिन फिल्मों ने उन्हें नाम, शोहरत और पहचान दी, उन्हें उन्होंने अपने परिवार और बच्चों की परवरिश के लिए छोड़ दिया। उस समय वह अपने परिवार के साथ बेहद खुश थे, लेकिन सारिका की किस्मत ने उन्हें ज्यादा समय तक यह सुख नहीं दिया। उनके जीवन में एक बार फिर दुख ने दस्तक दी। सारिका की एक दोस्त थी गौतमी जिनकी पहली शादी टूट चुकी थी। अपने दुख बांटने के लिए गौतमी अक्सर सारिका के घर आने लगी। सारिका को इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं था कि जिस सहेली को वह सहारा दे रही है वही आगे चलकर उनके घर की खुशियां उजाड़ देंगी। गौतमी के घर आने जाने से उनकी मुलाकात सारिका के पति कमल हासन से भी होने लगी। शुरुआत में यह सब सारिका को बिल्कुल सामान्य लगता था। लेकिन सच्चाई यह थी कि गौतमी कमल हासन की ओर आकर्षित होने लगी थी और कमल हासन भी धीरे-धीरे उनकी ओर खींचते चले गए। कहा जाता है कि गौतमी और कमल हासन के बीच धीरे-धीरे प्यार पनप गया और यह रिश्ता कब नाजायज संबंध में बदल गया किसी को पता ही नहीं चला। जब यह सब बातें सारिका के सामने आई तो उनकी पूरी दुनिया उजड़ गई। यह सदमा उनके लिए इतना बड़ा था कि वह अंदर से पूरी तरह टूट गई और अपना मानसिक संतुलन तक खो बैठी। अचानक एक दिन सारिका ने अपने ही फ्लैट की पांचवी मंजिल से छलांग लगा दी। किस्मत अच्छी थी कि उनकी जान बच गई। लेकिन चोटें इतनी गंभीर थी कि उन्हें कई दिनों तक अस्पताल में रहना पड़ा। अस्पताल से लौटने के बाद भी वह गौतमी और कमल हासन के रिश्ते की सच्चाई को अपने मन से निकाल नहीं पा रही थी। घर लौटते ही उन्होंने सबसे पहला और सबसे बड़ा फैसला लिया कमल हासन से तलाक लेने का। शादी के 16 साल बाद वर्ष 2004 में सारिका ने कमल हासन को तलाक दे दिया। उस समय उनकी बड़ी बेटी श्रुति हासन 16 वर्ष की थी और छोटी बेटी अक्षरा 13 वर्ष की थी।
अदालत की कार्यवाही के दौरान जब दोनों बेटियों से पूछा गया कि वे माता या पिता में से किसके साथ रहना चाहेंगी तो दोनों ने अपने पिता कमल हासन के साथ रहने का फैसला किया। दोनों बेटियां यह समझ रही थी कि उनके पिता के पास ज्यादा पैसा और सुविधाएं हैं और वही उन्हें एक आरामदायक जीवन दे सकते हैं। इस फैसले ने सारिका को अंदर से तोड़ दिया। उनकी मजबूर, दुखी और लाचार मां को दोनों बेटियां अकेला छोड़ गई। सारिका को जीवन के हर रिश्ते में ठगे जाने का एहसास हुआ। चाहे वह उनकी सगी मां हो, उनका पति, उनके सबसे करीबी दोस्त या फिर उनकी कोख से जन्मी दोनों बेटियां। हर रिश्ते में उन्होंने खुद से बेइंतहा दर्द मिला। इसके बाद सारिका चेन्नई छोड़कर एक बार फिर मुंबई आ गई। अब ना तो पहले जैसी खूबसूरती बची थी और ना ही वैसी फिल्में ऑफर हो रही थी। मुंबई में उनके दिन बेहद गरीबी और संघर्ष में बीत रहे थे। लेकिन सारिका एक मजबूत औरत्वाकांक्षी महिला थी। उन्होंने खुद को संभाला और फिर से बॉलीवुड में अपनी पहचान बनाने का संकल्प लिया। साल 2005 में उन्होंने फिल्म परजानिया में काम किया। इस फिल्म में उनके सशक्त अभिनय के लिए सारिका को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार बेस्ट एक्ट्रेस से सम्मानित किया गया। यह उनके जीवन की बहुत बड़ी उपलब्धि थी। इस फिल्म के बाद उन्हें फिर से फिल्मों के प्रस्ताव मिलने लगे। इसके बाद उन्होंने मनोरमा 6 फीट अंडर पराई जब तक है जान क्लब 60 बार-बार देखो पुरानी जींस और ऊंचाइयां जैसी फिल्मों में काम किया। इन फिल्मों के जरिए सारिका ने एक बार फिर अपने आत्मसम्मान और मेहनत के बल पर खुद को खड़ा कर लिया। सारिका के साथ समय के साथ सारिका आगे बढ़ती रही और उन्हें सफलता मिलने लगी। इधर उनकी जिंदगी में कामयाबी लौटी। उधर उनकी दोनों बेटियां भी धीरे-धीरे वापस उनकी जिंदगी में आई। दोनों बेटियों ने किसी ना किसी तरह से अपनी मां से मिलने की इच्छा जताई और मां तो मां ही होती है। सारिका ने बीती सारी बातों को भुलाकर अपनी बेटियों को माफ कर दिया और उन्हें गले से लगा लिया। जब सारिका ने एक इंटरव्यू में अपने जीवन के संघर्षों के बारे में खुलकर बात की तो जिसने भी वह इंटरव्यू देखा, वह उनकी हिम्मत और साहस का कायल हो गया। लोगों के मन में उनके लिए इज्जत और सम्मान और भी बढ़ गया। अपने ही रिश्तों से बार-बार धोखा खाने के बावजूद सारिका ने कभी हार नहीं मानी। जीवन की हर कठिनाई, हर दुख और हर कष्ट का सामना करते हुए उन्होंने बार-बार खुद को संभाला और आगे बढ़ती रही। ईश्वर ने उन्हें कई बार कठिन परीक्षाओं से गुजारा लेकिन सारिका ने कभी हार स्वीकार नहीं की। आज भी सारिका संघर्ष के रास्ते पर चलते हुए आगे बढ़ रही हैं और आने वाले समय में वह कई बड़ी बजट की फिल्मों में नजर आने वाली हैं। अब आप बताइए अगर आपको सारिका जी की यह संघर्ष भरी कहानी जरा सी भी प्रेरणादायक लगी हो तो वीडियो को ज्यादा से ज्यादा लाइक करें। ऐसी ही सच्ची, अनसुनी और भावनात्मक कहानियों के लिए चैनल को सब्सक्राइब भी कर लें और हर नई वीडियो की अपडेट पाने के लिए बेल आइकन दबाना ना भूलें। और हां, नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर लिखिए सारिका जी की कौन सी फिल्म आपको सबसे ज्यादा पसंद है। उनका कौन सा गाना आज भी आपके दिल में बसता है। इस वीडियो को अपने दोस्तों और परिवार के साथ शेयर करें ताकि यह कहानी ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंच सके। आपका एक लाइक, एक कमेंट और एक शेयर हमें आगे और बेहतर कंटेंट लाने की ताकत देता है। मिलते हैं अगले वीडियो में। थैंक यू सो मच। हां मां, मैं बस की छत पर सवार होकर आई हूं। यह आखिर का फैशन है।