एक छ साल की बच्ची अपनी मां से टॉयलेट जाने की जिद कर रही थी। मां उसे लेकर कॉकपेट के पास पहुंची और वहां उसने जो देखा उसे देखकर उसकी चीख निकल गई। कॉकपेट के अंदर भारतीय कैप्टन स्मिथ मच्छार खून से लथपथ थे और एक को पायलट उन पर चाकू से हमला कर रहा था।
बच्चे की मां ने तुरंत शोर मचाया लेकिन तभी विमान अचानक नीचे की तरफ जाने लगा। बच्चियां डर के मारे अपने पिता से लिपट गई और बोली पापा हम मरना नहीं चाहते। इसके बाद जो हुआ वो किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं था। यात्रियों ने अपनी जान की परवाह किए बिना कॉकपिट की तरफ दौड़ लगा दी। एक प्लंबर ने हमलावर को पकड़ लिया। एक डेंटिस्ट ने घायल कैप्टन को संभाला और लहूलुहान हालत में पड़े कैप्टन स्मिथ मच्छार ने ऐसा कदम उठाया जिससे पूरे विमान को बचाने का रास्ता खुल गया। यह पूरी कहानी शुरू होती है 30 सितंबर के उस फ्लाई दुबई फ्लाइट एफz 1073 से जो दुबई से तेल अभी जा रही थी। विमान करीब 35,000 फीट की ऊंचाई पर उड़ रहा था और उसमें करीब 180 लोग सवार थे। आरोप है कि इसी दौरान ओमानी को पायलट ने भारतीय कैप्टन स्मिथ मच्छार पर चाकू से हमला कर दिया और विमान को क्रैश कराने की कोशिश की।
उस वक्त नीना नाम की छ साल की बच्ची अपने माता-पिता ताली मानेस और रिका मानेस के साथ विमान में थी। उड़ान के दौरान नीना को टॉयलेट जाना था। उसकी मां ताली उसे कॉकपेट के पास भरे वाशरूम की तरफ ले गई। कॉकपेट का दरवाजा थोड़ा खुला था। ताली ने अंदर झांका तो उनके होश उड़ गए। उन्होंने देखा कि अंदर खून फैला हुआ था और कैप्टन स्मिथ अपनी जान बचाने के साथ-साथ विमान को संभालने के लिए संघर्ष कर रहे थे। ताली ने बताया कि उन्होंने जोर-जोर से चिल्लाना शुरू कर दिया।
वो पायलट को चाकू मार रहा है। कोई मदद के लिए आओ। लेकिन शुरुआत में लोग उनकी चीख का मतलब समझ नहीं पाए। इसी बीच हालात और ज्यादा खतरनाक हो गए। आरोप है कि हमलावर ने विमान के कंट्रोल को नीचे की तरफ कर दिया। देखते ही देखते विमान तेजी से नीचे जाने लगा। जेक मानिस ने बताया कि विमान के अचानक नीचे जाने से उनकी बच्चियां बुरी तरह डर गई। उन्होंने रोते हुए अपने पिता का हाथ पकड़ लिया और कहा पापा हम मरना नहीं चाहते। बच्चियों की यह बात सुनकर जका से रहा नहीं गया। वह बिना अपनी जान की परवाह के सीधे कॉकपिट की तरफ भागे। लेकिन तब तक कैप्टन स्मिथ बुरी तरह घायल हो चुके थे।
उनके शरीर पर चाकू के कई घाव थे और वह खून से लथपथ होकर कॉकपिट के फर्श पर गिर चुके थे। इसके बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं छोड़ी। फर्श पर पड़े-पड़े कैप्टन स्मिथ ने अपनी बची हुई ताकत जुटाई और कॉकपिट का इमरजेंसी लॉक रिलीज करने वाला बटन दबा दिया। दरवाजा अनलॉक होते ही बाहर मौजूद यात्री और क्रू मेंबर्स को अंदर पहुंचने का रास्ता मिल गया। इसके बाद जेका मानेस और दूसरे यात्री कॉकपेट के अंदर पहुंचे। यानिव ह्यू नाम के एक प्लंबर ने हमलावर को पीछे से पकड़ लिया और उसे चौकहोल्ड में जकड़ लिया। कॉकपिट के अंदर जमकर हाथापाई हुई। कई यात्रियों को चोटें आई और खून भी बहा लेकिन आखिरकार हमलावर को काबू कर लिया गया। दूसरी तरफ कैप्टन स्मिथ की हालत काफी गंभीर थी। तभी विमान में मौजूद डेंटिस्ट आसिफ रजवान उनकी मदद के लिए आगे आए।
उन्होंने तुरंत कैप्टन को फर्स्ट एड देना शुरू किया और तेजी से बह रहे खून को रोकने की कोशिश की। इसी दौरान एक यात्री ने अपने चेहरे पर खून के निशान के साथ सोशल मीडिया पर वीडियो मैसेज भी डाला। उसने बताया कि विमान हाईजैकिंग जैसी स्थिति में फंसा हुआ है। हमलावर को काबू कर लिया गया है और अब विमान लैंड करने वाला है। उसने तुरंत मदद भेजने की अपील की। आखिरकार विमान को सऊदी अरब के तबुक में इमरजेंसी लैंड कराए गए और विमान में सवार सभी लोग सुरक्षित बाहर निकल गए। इस घटना के बाद कैप्टन स्मिथ मच्छार के साथ उन यात्रियों की भी जमकर तारीफ हुई जिन्होंने हमलावर को रोकने के लिए अपनी जान जोखिम में डाल दी। इजराइल के राष्ट्रपति इसहाक हरजोग ने तीन नागरिकों यनिफ हन जेकम मानेज और आसिफ रिजवान को प्रेसिडेंशियल अवार्ड फॉर सिविलियन हीरोइज़्म से सम्मानित करने का ऐलान किया है।
लेकिन इस पूरी कहानी में सबसे खास बात वो छ साल की बच्ची नीना है जो सिर्फ टॉयलेट जाने के लिए कॉकपिट के पास पहुंची थी। अगर उस वक्त उसकी मां ने अंदर का नजारा नहीं देखा होता। अगर उन्होंने शोर नहीं बचाया होता तो शायद कॉकपिट के अंदर चल रही लड़ाई का पता यात्रियों को और देर से चलता।
सच ही कहा गया है कि कभी-कभी किस्मत भी सही वक्त पर सही लोगों को एक साथ खड़ा कर देती है। अगर उस दिन छ साल की नीना की वो जिद ना होती, उसकी मां की वो चीख ना होती, लहूलुहान पड़े कैप्टन स्मिथ की वो आखिरी हिम्मत ना होती और आम यात्रियों का वो असाधारण साहस ना होता, तो शायद आज नतीजा कुछ और ही होता। इस कहानी ने बता दिया कि जब इंसानियत और जिंदा दिल्ली एक साथ आ जाए तो हवा में मंडराता बड़े से बड़ा खौफ भी हार मान लेता है। कैप्टन स्मिथ और उन जांबाज यात्रियों को इस जज्बे का सलाम।