मीना कुमारी की जिंदगी से जुड़ा यह किस्सा फिल्म पाकीजा की शूटिंग के दौरान का बताया जाता है। विनोद मेहता की जीवनी Meena Kumari – A Classic Biography में दर्ज विवरण के अनुसार, कमाल अमरोही और उनकी टीम मध्य प्रदेश के शिवपुरी इलाके से गुजर रही थी, तभी उनकी कारों में पेट्रोल खत्म हो गया। सुनसान इलाके में रात बिताने का फैसला किया गया, लेकिन आधी रात के बाद अचानक डाकुओं ने उनकी गाड़ियों को घेर लिया।शुरुआत में माहौल बेहद तनावपूर्ण था। कमाल अमरोही ने खुद को फिल्म निर्देशक बताया और समझाया कि वे शूटिंग के सिलसिले में जा रहे हैं। जब डाकुओं को पता चला कि उनके साथ मशहूर अभिनेत्री मीना कुमारी भी हैं, तो उनका रवैया बदल गया। मीना की लोकप्रियता के कारण उन्होंने पूरी टीम के खाने और ठहरने का इंतजाम किया और सुबह पेट्रोल भी मंगवाया।लेकिन विदा होने से पहले डाकुओं के सरदार ने मीना कुमारी से एक अजीब फरमाइश की। वह उनका प्रशंसक था और चाहता था कि मीना उसके हाथ पर अपना नाम लिखें। उपलब्ध विवरणों के अनुसार, उसने चाकू का इस्तेमाल करके हाथ पर ऑटोग्राफ लेने की मांग की। मीना इस असामान्य मांग से घबरा गईं, लेकिन हालात को देखते हुए उन्होंने उसकी बात मान ली। यह किस्सा आज भी मीना कुमारी की लोकप्रियता से जुड़ी हैरान करने वाली घटनाओं में गिना जाता है।#
बॉलीवुड की ‘ट्रैजेडी क्वीन’ मीना कुमारी के एक्टिंग और ख़ूबसूरती के दीवानों की कमी नहीं थी. जब दीवानगी होती है तो प्यार भी होता है और स्टार्स की पूंजी उनके फ़ैंस का प्यार ही होती है. फ़ैंस की उस भीड़ में अगर कुछ अच्छे तो कुछ थोड़े अजीब फ़ैंस भी होते हैं. मीना कुमारी का भी एक ऐसा ही फ़ैन था, जो कोई बीटेक, इंजीनियर या सामान्य नौकरी करने वाला नहीं था, बल्कि एक डकैत था, वो भी चंबल का. इसी से जुड़ा एक क़िस्सा आपको बताएंगे, जिसमें इस डकैत ने मीना कुमारी को आधी रात को बियाबान जगंल में घेर लिया और फिर जानिए कि क्या हुआ?
दरअसल, 1960-70 के दशक में कमाल अमरोही और मीना कुमारी (Meena Kumari) कुछ क्रू मेम्बर्स के साथ ‘पाक़ीज़ा’ की शूटिंग के लिए मध्य प्रदेश के शिवपुरी इलाक़े में थे, तभी रात के समय जब दोनों उसी इलाक़े से गुज़र रहे थे तभी बियाबान इलाक़े के पास उनकी गाड़ी का पेट्रोल ख़त्म हो गया और उन्होंने गाड़ी साइड लगाकर दिल्ली जाने की सोची, तभी चंबल के डाकुओं के एक गिरोह ने आकर उनकी गाड़ियों को घेर लिया. रात के समय जब हथियारबंद दर्जन भर डाकूओं ने उन्हें घेरा तो सबकी सिट्टी-पिट्टी गुम हो गई.
घेरने के बाद डाकुओं ने उन सबको गाड़ी से बाहर आने को कहा तभी कमाल अमरोही बोले कि तुम अपने सरदार से कहो कि वो हमसे कार में ही आकर मिलें. जैसे ही, कमाल अमरोही ने ये बोला तभी सिल्क का पायजामा कुर्ता पहने एक शख़्स उनकी गाड़ी के पास आया और पूछा कि ‘तुम कौन हो?’ उन्होंने बोला ‘मैं कमाल अमरोही हूं और शूटिंग करने चंबल आया हूं.’ ‘शूटिंग‘ सुनते ही वो शख़्स ग़ुस्से में आ गया और सबको पुलिसवाला समझ कर ग़ुस्से से बात करने लगा, क्योंकि उसे लगा कि ये लोग पुलिसवाले हैं और यहां पर हमारा ‘शूट’ यानि एनकाउंटर करने आए हैं.
इस ग़लतफ़हमी के चलते उसका रवैय्या कमाल अमरोही के साथ थोड़ा ग़ुस्से वाला हो गया और कमाल अमरोही समझ गए कि वो डाकुओं के चंगुल में फंस गए हैं. हिम्मत जुटाते हुए कमाल अमरोही ने पूछा ‘आपका नाम’? तो वो शख़्स बोला ‘दस्यु बागी अमृत लाल (Daku Amrit Lal Chambal) सुना है ये नाम तुमने अपनी बंबई में?’
डाकू अमृत लाल उस ज़माने का चंबल घाटी का सबसे क्रूर और निडर डकैत था, जिसके ऊपर बहुत भारी इनामी राशि थी और जिसके नाम से पुलिस भी कांपती थी. फिर इस ग़लतफ़हमी को दूर करते हुए कमाल अमरोही ने अमृत लाल को बताया कि वो कोई पुलिसवाले नहीं है और न ही गोलीबारी करने आए हैं, उनकी शूटिंग का मतलब फ़िल्म की शूटिंग है. ये सुनते ही डाकू अमृत लाल का व्यवहार नर्म हो गया और कमाल अमरोही जैसी मशहूर शख़्सियत को अपने सामने देखकर ख़ुश हो गया. बातचीत करते हुए वो जान चुका था कि दूसरी गाड़ी में एक्ट्रेस मीना कुमारी बैठी हैं.
डाकू अमृत लाल को जैसे ही मीना कुमारी के होने का पता चला उसकी दीवानगी उनके प्रति बढ़ गई क्योंकि वो मीना कुमारी की फ़िल्मों का दीवाना था. इसलिए वो मीना कुमारी से मिलने की ज़िद पर अड़ गया और कहा कि मिलने के बाद ही सबको दिल्ली जाने देगा. ख़ुशी में पागल डाकू अमृत लाल ने उस रात सबके लिए नाच-गाने के साथ-साथ खाने-पीने का भी इंतज़ाम कराया और उनकी गाड़ी में पेट्रोल भी उसके ही आदमियों ने भरवाया और फिर सब जाने की तैयारी करने लग गए.