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क्या करिश्मा के गम में आज तक कुंवारे हैं अक्षय खन्ना? सालों बाद खुला वो राज

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आखिर क्यों आज तक कुंवारे हैं 50 साल के अक्षय खन्ना? क्या गंजापन किसी सुपरस्टार का पूरा करियर खा सकता है? क्या ऐश्वर्या राय और करिश्मा कपूर जैसी दिग्गज अभिनेत्रियों के साथ नाम जुड़ने के बावजूद एक इंसान पूरी जिंदगी अकेले रहने का फैसला कर सकता है? दोस्तों, आज हम बॉलीवुड के उस सबसे रहस्यमई और अंडररेटेड एक्टर की कहानी की परतें खोलने जा रहे हैं जिसने कभी स्टारडम के पीछे भागना छोड़ दिया था। लेकिन आज स्टारडम खुद उसके पीछे भाग रहा है। यह कहानी है विनोद खन्ना के बेटे अक्षय खन्ना की जिसके पास ना कोई पीआर एजेंसी है ना सोशल मीडिया अकाउंट लेकिन फिर भी क्यों आज हर जुबान पर उन्हीं का नाम है। अक्षय खन्ना की कहानी को समझने के लिए हमें उस दौर में जाना होगा जब उनके पिता विनोद खन्ना का स्टारडम सातवें आसमान पर था। 1975 में जब अक्षय का जन्म हुआ तो उन्हें चांदी का चम्मच तो मिला लेकिन वो कांटों से भरा था। अक्षय का बचपन किसी फिल्मी ड्रामे से कम नहीं था। जब वो महज 5 साल के थे। उस उम्र में जब एक बच्चे को पिता के कंधे की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। विनोद खन्ना ने सब कुछ छोड़ दिया। वो सेक्सीी सन्यासी बन गए और ओशो यानी आचार्य रजनीश के पीछे पागल होकर अपना परिवार अपना करियर और अपने बच्चों को मुंबई में छोड़कर अमेरिका के ओरेगोन चले गए। घर पर रह गई उनकी पहली पत्नी गीतांजलि और दो छोटे बेटे अक्षय और राहुल। उस 5 साल के बच्चे के लिए यह समझना नामुमकिन था कि आखिर सन्यास किस बला का नाम है और क्यों उसके पिता ने उसे त्याग दिया। इसी दौरान विनोद और गीतांजलि का तलाक हुआ और विनोद खन्ना ने बाद में कविता से दूसरी शादी कर ली जिनसे उन्हें दो और बच्चे साक्षी और श्रद्धा हुए। इस पारिवारिक उथल-पुथल और पिता की गैर मौजूदगी ने अक्षय के अंदर एक गहरा खालीपन भर दिया। जिसने उन्हें एक बहुत ही शांत, अंतर्मुखी और ओंड बॉल इंसान बना दिया। जब विनोद खन्ना वापस लौटे तो उन्हें अपने किए का पछतावा था या बेटे के करियर को बनाने की जिद्द यह कहना मुश्किल है। लेकिन 90 के दशक में उन्होंने ठान लिया कि वह अक्षय को बॉलीवुड का सबसे बड़ा लॉन्च देंगे। फिल्म का नाम था हिमालय पुत्र जो सिर्फ एक फिल्म नहीं बल्कि विनोद खन्ना का एक जुनूनी प्रोजेक्ट था। विनोद खन्ना की दीवानगी का आलम यह था कि वह इस फिल्म के लिए कोई आम चेहरा नहीं चाहते थे। किस्सा मशहूर है कि फिल्म की हीरोइन ढूंढने के लिए विनोद खन्ना

ने भारत की लड़कियों को रिजेक्ट कर दिया था और लंदन पहुंच गए थे। वहां उन्होंने बाकायदा अखबारों में इश्तहार दिया और सैकड़ों लड़कियों का ऑडिशन लिया। तब जाकर उन्हें अंजला जावेरी मिली। इतना पैसा, इतनी मेहनत और लंदन तक की दौड़ भाग यह सब सिर्फ इसलिए था ताकि दुनिया देख सके कि विनोद खन्ना का बेटा आ रहा है। लेकिन कुदरत का खेल देखिए। रियल लाइफ में फिल्म की कहानी एक बेटे अभय द्वारा अपने खोए हुए पिता को ढूंढने की थी। जो असल जिंदगी में अक्षय के दर्द से डरावनी हद तक मिलती थी। 1997 में जब फिल्म रिलीज़ हुई, तो उम्मीदों का यह हिमालय ताश के पत्तों की तरह ढह गया। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर ओंधे मुंह गिरी और अक्षय खन्ना का पहला ही कदम एक बड़ी विफलता बन गया। सन 1997 अक्षय खन्ना के लिए किसी विडंबना से कम नहीं था। एक तरफ उनके पिता की अरबों की लागत वाली हिमालय पुत्र बॉक्स ऑफिस पर दम तोड़ चुकी थी। लेकिन उसी साल कुछ ऐसा हुआ जिसने सबको चौंका दिया। जेपी दत्ता अपनी मल्टीस्टारर फिल्म बॉर्डर बना रहे थे। अंदर की खबर यह है कि जिस रोल सेकंड लेफ्टिनेंट धर्मवीर ने अक्षय को स्टार बनाया उसे पहले सलमान खान, आमिर खान, अक्षय कुमार और यहां तक कि अजय देवगन ने ठुकरा दिया था। इन बड़े स्टार्स को लगा कि सनी देओल के सामने वो सिर्फ साइड किक बनकर रह जाएंगे। लेकिन जो रोल इन दिग्गजों ने छोटा समझ कर छोड़ा, वही अक्षय के लिए जैकपॉट बन गया। बॉर्डर ब्लॉकबस्टर साबित हुई और जो अवार्ड उन्हें अपने पिता की फिल्म से नहीं मिला, वो इस मल्टीस्टारर फिल्म ने उन्हें दिला दिया। लेकिन बॉलीवुड इतनी आसानी से किसी को सिर पर नहीं बिठाता। बॉर्डर की सफलता के बाद अक्षय पर शनि का ऐसा साया पड़ा कि उन्हें इंडस्ट्री में बॉक्स ऑफिस पोइज़न कहा जाने लगा। 1997 से 1999 के बीच डोली सजा के रखना, लावारिस और कुदरत जैसी लगातार आधा दर्जन फिल्में डिजास्टर साबित हुईं। लोग कहने लगे थे कि ये लड़का सिर्फ मल्टीस्टारर में चल सकता है। अकेले अपने दम पर फिल्म हिट कराना इसके बस की बात नहीं। तभी एंट्री हुई शो मैन सुभाष घई की और फिल्म थी ताल। ताल में अक्षय का किरदार मानव इतना रईस और क्लासिक था कि उन्होंने अनिल कपूर जैसे दिग्गज के सामने भी अपनी अलग पहचान बना ली और सिर्फ स्क्रीन पर ही नहीं ऑफ स्क्रीन भी अक्षय का दिल कहीं और धड़क रहा था। यह वो दौर था जब अक्षय और ऐश्वर्या राय के रोमांस की अफवाहें उड़ी थी। खुद अक्षय ने बाद में करण जौहर के शो पर यह कबूल किया कि वह ऐश्वर्या की खूबसूरती से इस कदर मंत्रमुग्ध थे कि पागलों की तरह लाइक अ ल्यूनेटिक उन्हें घूरते रहते थे। उन्होंने ऐश्वर्या को इंडस्ट्री की सबसे सेक्सीी लड़की बताया था। हालांकि यह इश्क परवान नहीं चढ़ा क्योंकि ऐश्वर्या का नाम उस वक्त सलमान खान के साथ जुड़ने लगा था। लेकिन ताल ने अक्षय को फ्लॉप फिल्मों के दलदल से बाहर निकालकर वापस ए लिस्टर्स की लाइन में खड़ा कर दिया। सन 2001 में आई दिल चाहता है ने बॉलीवुड को देखने का नजरिया बदल दिया। लेकिन इस फिल्म के पीछे की कास्टिंग का ड्रामा किसी थ्रिलर से कम नहीं था। फरहान अख्तर की पहली पसंद के मुताबिक जो आकाश का बेफिक्र किरदार आमिर खान ने निभाया वो असल में अक्षय खन्ना के लिए लिखा गया था और रितिक रोशन को शांत सिड बनना था। लेकिन बॉलीवुड में बड़ी मछलियां अक्सर छोटी मछलियों का दाना खा जाती हैं। जब रतिक ने फिल्म छोड़ी और आमिर खान की एंट्री हुई तो आमिर ने साफ कह दिया कि उन्हें आकाश का ही रोल करना है। ऐसे में किसी भी स्टार किड का ईगो आड़े आ सकता था। लेकिन अक्षय ने बिना किसी नखरे के चुपचाप सिड का रोल स्वीकार कर लिया और देखिए किस्मत का खेल फिल्म में मजे सारे आमिर और सैफ ने किए लेकिन इज्जत और अवार्ड अक्षय खन्ना ले गए। एक तलाकशुदा और शराबी महिला डिंपल कपाडिया से प्यार करने वाले एक अंतर्मुखी लड़के का किरदार निभाकर उन्होंने साबित कर दिया कि वह अपनी उम्र से कहीं ज्यादा परिपक्व थे। लेकिन जहां स्क्रीन पर वह परिपक्व हो रहे थे, वहीं असल जिंदगी में वह एक ऐसे शारीरिक और मानसिक आघात से गुजर रहे थे जो किसी भी हीरो के लिए मौत समान होता है।

गंजापन सोचिए एक लड़का जो सिर्फ 19 से 20 साल का है जिसका पूरा करियर उसके चेहरे और लुक्स पर टिका है उसके बाल मुट्ठियों में भरकर झड़ने लगे। अक्षय ने बाद में अपने इस दर्द को बयां करते हुए कहा था कि यह ऐसा था जैसे किसी पियानिस्ट पियानो वादक की उंगलियां काट दी जाएं। वह सुबह उठकर आईने में खुद को देखते और महसूस करते कि उनकी जवानी और करियर रेत की तरह फिसल रहा है। इंडस्ट्री के लोग जो कल तक उनकी खूबसूरती की कसमें खाते थे, अब दबी जुबान में उनके विग और हेयर ट्रांसप्लांट की बातें करने लगे थे। इसी हीन भावना ने शायद उन्हें रोमांटिक हीरो बनने से रोका और वो विलेन या करैक्टर रोल्स की तरफ मुड़ गए जो अनजाने में उनके लिए वरदान साबित हुआ और अगर करियर और लुक्स का तनाव काफी नहीं था तो उनकी निजी जिंदगी में एक बहुत बड़ा दिल टूटने वाला हादसा हुआ। 90 के दशक के अंत में जब करिश्मा कपूर का अजय देवगन से ब्रेकअप हुआ था, तब उन्हें अक्षय खन्ना में एक सहारा मिला था। बात डेटिंग से आगे बढ़कर शादी तक पहुंच गई थी। करिश्मा के पिता रणधीर कपूर को अक्षय बहुत पसंद थे और उन्होंने खुद विनोद खन्ना के घर रिश्ता भेजा था। दोनों खानदान तैयार थे। पत्रिकाएं छपने ही वाली थी, लेकिन फिर एंट्री हुई विलिन की। करिश्मा की मां बबीता। बबीता उस वक्त करिश्मा के करियर की डोर अपने हाथ में रखती थी। उन्होंने देखा कि उनकी बेटी नंबर वन हीरोइन है और अक्षय खन्ना की फिल्में लाइन से फ्लॉप हो रही हैं। एक क्रूर व्यावहारिक फैसला लेते हुए बबीता ने अपनी बेटी के सुरक्षित भविष्य के लिए प्यार की बलि से चढ़ा दी और यह रिश्ता हमेशा के लिए टूट गया। यह बॉलीवुड का वह कड़वा सच था जिसने अक्षय को यह सिखा दिया कि यहां इश्क भी बॉक्स ऑफिस कलेक्शन देखकर किया जाता है। बॉलीवुड में कहावत है कि यहां कोई किसी का सगा नहीं होता और अक्षय खन्ना के साथ जो 2007 में हुआ वह इस कहावत का सबसे बड़ा सबूत है। यह किस्सा उनके करियर का सबसे बड़ा व्हाट इफ यानी क्या होता अगर वाला क्षण है। उस साल लेखक अमोल गुप्ते ने एक फिल्म लिखी थी तारे जमीन पर। गुप्ते के दिमाग में डिस्लेक्सिक बच्चे के संवेदनशील टीचर रामशंकर निकुंभ के रोल के लिए सिर्फ और सिर्फ अक्षय खन्ना का चेहरा था। अक्षय की दिल चाहता है वाली आर्टिस्टिक इमेज इस रोल के लिए एकदम फिट थी। अमोल गुप्ते आमिर खान के पास सिर्फ इसलिए गए थे ताकि वो उन्हें अक्षय खन्ना से मिलवा सकें या उनका नंबर दे सकें। लेकिन यहां एक ऐसा खेल खेला गया जिसे सुनकर आप दंग रह जाएंगे। आमिर खान जो अक्षय के अच्छे दोस्त माने जाते थे ने अमोल गुप्ते से कहा कि पहले मुझे स्क्रिप्ट सुनाओ। जैसे ही आमिर ने स्क्रिप्ट सुनी, उन्हें अंदाजा हो गया कि यह फिल्म इतिहास रचने वाली है। उन्होंने न सिर्फ फिल्म को प्रोड्यूस करने का फैसला किया बल्कि वो रोल जो अक्षय के लिए लिखा गया था खुद ले लिया। सबसे हैरान करने वाली बात यह थी कि ये सब अक्षय की पीठ पीछे हुआ। जब तक अक्षय को भनक लगती, फिल्म की शूटिंग शुरू हो चुकी थी। बाद में खुद आमिर खान ने अक्षय से मुलाकात की और बिना किसी शर्मिंदगी के कबूल किया। अक्षय, मुझे स्क्रिप्ट इतनी पसंद आई कि मैंने अमोल को तुम्हारे पास आने ही नहीं दिया और मैंने फिल्म खुद कर ली। सोचिए आपके हाथ से एक नेशनल अवार्ड विनिंग फिल्म छीन ली गई हो

और छीनने वाला आपका अपना दोस्त हो। कोई और एक्टर होता तो मीडिया में हंगामा खड़ा कर देता। लेकिन अक्षय खन्ना की शराफत या शायद उनका भोलापन देखिए कि उन्होंने इसे चुपचाप स्वीकार कर लिया और कोई बवाल नहीं किया। यह घटना यह बताने के लिए काफी है कि अक्षय खन्ना इंडस्ट्री के शार्क टैंक में तैरने के लिए कितने सीधे थे। वह टैलेंटेड तो थे, लेकिन उनके पास वह चालाकी और भूख नहीं थी जो खान तड़ी के पास थी। इस एक घटना ने उनके करियर का ग्राफ बदल दिया। जहां आमिर मिस्टर परफेक्शनिस्ट बन गए। वहीं अक्षय खन्ना को यह एहसास हुआ कि इस इंडस्ट्री में टैलेंट से ज्यादा जरूरी है अपनी जगह के लिए लड़ना जो वो कभी कर नहीं पाए। इसी दौर में उन्होंने गांधी माय फादर जैसी बेहतरीन फिल्में भी की। लेकिन बॉक्स ऑफिस को तो सिर्फ मसालेदार नंबर्स की भाषा समझ आती थी और धीरे-धीरे अक्षय रेस में पिछड़ते चले गए। इसके बाद का दौर यानी 2008 से 2011 तक का समय अक्षय के करियर का वह काला अध्याय था जहां वह मल्टीस्टारर फिल्मों की भीड़ में खो गए। उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि वह किस दिशा में जाएं। उन्होंने रेस 2008 की जिसमें उनकी एक्टिंग की तारीफ तो हुई लेकिन सारी लाइमलाइट सैफ अली खान ले गए। प्रियदर्शन जिन्होंने उन्हें कॉमेडी स्टार बनाया था। उन्होंने भी आक्रोश 2010 में उन्हें अजय देवगन के साथ कास्ट किया। आक्रोश में अक्षय ने एक करप्ट पुलिस वाले का रोल इतनी शिद्दत से निभाया था कि देखने वालों के रोंगटे खड़े हो गए। लेकिन फिल्म की मार्केटिंग और गलत रिलीज टाइमिंग की वजह से यह बेहतरीन फिल्म भी बिना शोर मचाए फ्लॉप हो गई। हद तो तब हो गई जब उन्होंने 2010 में फराह खान की 30 मार खान की। इसमें उन्होंने एक ऑस्कर और अब्सेड्ड एक्टर का रोल किया था। विडंबना देखिए उस पूरी फिल्म में सिर्फ अक्षय खन्ना की एक्टिंग ही थी जो बर्दाश्त करने लायक थी। उनका काम शानदार था लेकिन फिल्म इतनी बड़ी डिजास्टर थी कि उसका धब्बा उनके करियर पर भी लगा। लोगों ने कहना शुरू कर दिया कि अक्षय खन्ना अब खत्म हो चुके हैं। साल 2012 में एक फिल्म आई थी गली-गली चोर है। यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर तो डिजास्टर साबित हुई ही लेकिन इसके बाद अक्षय खन्ना ने जो किया उसने पूरी इंडस्ट्री को सन्न कर दिया। इस फिल्म की रिलीज के बाद अक्षय खन्ना अचानक गायब हो गए। यह कोई छोटा-मोटा ब्रेक नहीं था। यह एक पूर्ण अज्ञातवास था। 4 साल तक ना कोई फिल्म, ना कोई पार्टी, ना कोई इंटरव्यू और ना ही किसी अवार्ड शो में उनकी झलक जैसे धरती उन्हें निगल गई हो। बॉलीवुड जो गॉसिप का भूखा है ने तुरंत अपनी कहानियां गढ़नी शुरू कर दी। बाजार में यह खबर आग की तरह फैली कि अक्षय खन्ना को शराब की भयानक लत अल्कोहलिज्म लग चुकी है और वह अपनी सुधबुध खोकर किसी रिहाब सेंटर में भर्ती हैं। लोगों ने कहना शुरू कर दिया कि विनोद खन्ना का बेटा भी उसी रास्ते पर चल पड़ा है जिस पर कई स्टार किड्स चलकर बर्बाद हो चुके हैं। मैगजीनंस में आर्टिकल छपने लगे कि कैसे एक होनहार एक्टर अपने ही डिप्रेशन और नशे के प्याले में डूब गया है। लेकिन इन बंद दरवाजों के पीछे की सच्चाई उन अफवाहों से कहीं ज्यादा गहरी और दर्दनाक थी। सच्चाई यह थी कि अक्षय खन्ना किसी नशे में नहीं बल्कि एक रचनात्मक घुटन क्रिएटिव सफोकेशन में जी रहे थे। उन्होंने बाद में खुलासा किया कि वह कैमरे के सामने एक्टिंग करते-करते थक चुके थे। लेकिन इस गायब होने की सबसे बड़ी और निजी वजह कुछ और थी।

जिसे उन्होंने दुनिया से छिपा कर रखा था। उनके पिता विनोद खन्ना की जानलेवा बीमारी। रिपोर्ट्स के मुताबिक यही वो दौर था जब विनोद खन्ना का स्वास्थ्य तेजी से गिर रहा था। उन्हें ब्लैडर कैंसर था। जिसका निधन 2017 में हुआ। जिस पिता ने बचपन में उन्हें ओशो के लिए छोड़ दिया था। उसी पिता के अंतिम वर्षों में अक्षय ने सब कुछ छोड़कर उनके साथ वक्त बिताने का फैसला किया। उन्होंने मुंबई की चकाचौंध और शोरशराबे को त्याग दिया और अलीबाग में अपने फार्म हाउस पर एकांत में रहने चले गए। वहां उन्होंने गार्डनिंग की, किताबें पढ़ी और खुद को उस मसाला हीरो की इमेज से तोड़ा जिसमें वह कभी फिट नहीं हो पा रहे थे। उन्होंने अपनी शर्तों पर एक ऑडबॉल या अजीब व्यक्ति बनकर जीना स्वीकार किया जिसे लोगों से मिलनाजुलना पसंद नहीं था। दुनिया जिसे उनका पतन और नशा समझ रही थी वह असल में उनका पुनर्जन्म यानी रिबूट होने का तरीका था। वह शेर की तरह पीछे हटे थे ताकि एक लंबी छलांग लगा सकें। 4 साल के लंबे वनवास और सन्नाटे के बाद जब 2016 में अक्षय खन्ना वापस लौटे तो वो वो पुराने लवर बॉय नहीं थे जो पेड़ों के पीछे गाना गाते थे। उन्होंने समझ लिया था कि अगर इस नई इंडस्ट्री में टिकना है तो उन्हें अपनी कमजोरी को ही अपनी ताकत बनाना होगा। उनकी वापसी हुई फिल्म ढिशूम से जिसमें उन्होंने वाघा नाम के एक स्टाइलिश और सनकी विलेन का किरदार निभाया। अक्षय ने बाद में एक इंटरव्यू में कहा था कि 4 साल बाद सेट पर लौटना उनके लिए शून्य से शुरुआत करने जैसा था। उनके हाथ पैर कांप रहे थे जैसे वह कोई न्यू कमर हो। लेकिन जैसे ही कैमरा रोल हुआ, दर्शकों ने देखा कि शेर बूढ़ा जरूर हुआ है। लेकिन शिकार करना नहीं भूला। यह एक संकेत था कि अब अक्षय खन्ना ने हीरो बनने का मोह छोड़ दिया है और अभिनेता बनने की ज़िद पकड़ ली है। इसके बाद उन्होंने मॉम और इत्तेफाक जैसी फिल्मों में ऐसे पुलिस अफसर के किरदार निभाए जो चिल्लाते नहीं थे बल्कि अपनी आंखों से मुजरिम की रूह को स्कैन कर लेते थे। लेकिन असली गेम चेंजर साबित हुई 2019 की कोर्ट रूम ड्रामा सेक्शन 375। यहां उन्होंने एक बचाव पक्ष के वकील की भूमिका निभाई। आलोचकों ने मान लिया कि यह बंदा एक्टिंग की एक अलग ही लीग में खेल रहा है। फिर आया 2022 का वह तूफान जिसने बॉक्स ऑफिस के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए।

दृश्यम दो। इस फिल्म में चुनौती बहुत बड़ी थी। सामने थे अजय देवगन जैसा सुपरस्टार और तब्बू जैसी दिग्गज एक्ट्रेस। दर्शकों को लगा था कि अक्षय का रोल छोटा होगा। लेकिन जब वो आईजी तरुण बनकर स्क्रीन पर आए तो पूरा थिएटर सन्न रह गया। बिना किसी फाइट सीन के सिर्फ अपनी बुद्धिमानी और उस कैलकुलेटिव यानी गणात्मक सन्नाटे से उन्होंने अजय देवगन के पसीने छुड़ा दिए। फिल्म ने 240 करोड़ की ब्लॉकबस्टर कमाई की और इसका एक बड़ा श्रेय अक्षय खन्ना के उस शतरंज के खिलाड़ी वाले अवतार को दिया गया जो इंडस्ट्री कल तक उन्हें खत्म मान चुकी थी। अब वही प्रोड्यूसर्स उनकी तारीखें लेने के लिए लाइन में खड़े थे। मशहूर डायरेक्टर प्रियदर्शन ने भी कहा कि अक्षय हमेशा से उनके पसंदीदा रहे हैं। लेकिन अवार्ड शोज़ ने उन्हें हमेशा नजरअंदाज किया। इस दौर ने साबित कर दिया कि अक्षय ने अपने गंजेपन और बढ़ती उम्र को छिपाया नहीं बल्कि उसे एक ऐसे रौबदार व्यक्तित्व में बदल दिया जिसके सामने अच्छे-अच्छे यंग हीरोज़ पानी भरते नजर आए। कहानी का क्लाइमेक्स आता है साल 2025 में। जब 50 साल की उम्र में अक्षय खन्ना ने वो कर दिखाया जो बॉलीवुड के इतिहास में शायद ही किसी एक्टर ने किया हो। एक ऐसा पुनरुत्थान जिसे देखकर यंग जनरेशन के स्टार्स भी कांप गए। फरवरी 2025 में रिलीज हुई ऐतिहासिक फिल्म छावा में जब विक्की कौशल छत्रपति संभाजी महाराज बनकर शेर की तरह दहाड़ रहे थे तो उनके सामने औरंगजेब बनकर खड़े अक्षय खन्ना चिल्ला नहीं रहे थे बल्कि उनकी खामोशी स्क्रीन फाड़ रही थी। आलोचकों ने लिखा कि उन्होंने औरंगजेब को एक कैरिकेचर नहीं बल्कि एक चलता फिरता मौत का साया बना दिया। फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर ₹601 करोड़ की भारी कमाई की और इसका बहुत बड़ा श्रेय अक्षय की उस आत्मनियंत्रित स्थिरता को गया जिसने विक्की कौशल की आग को टक्कर दी लेकिन अक्षय का असली जादू उस साल के अंत में चला जब दिसंबर 2025 में आदित्यधर की फिल्म धुरंधर रिलीज हुई। इसमें उन्होंने रहमान डकैत नाम के एक पाकिस्तानी क्राइम लॉर्ड की भूमिका निभाई। सोशल मीडिया पर वो क्लिप आग की तरह वायरल हुई जिसमें अक्षय बहरीनी रैप गीत एफ ए नोएल पर एंट्री लेते हैं।

फिल्म में रणवीर सिंह जैसे एनर्जी के पावर हाउस मुख्य भूमिका में थे। लेकिन थिएटर से बाहर निकलने वाली पब्लिक और सोशल मीडिया रिव्यूज ने एक सुर में कहा कि अक्षय खन्ना शो स्टीलर थे और वह रणवीर सिंह पर भी भारी पड़ गए। बिना अपना खुद का Instagram अकाउंट बनाए, बिना किसी फालतू के पीआर स्टंट के अक्षय ने साबित कर दिया कि शेर की दहाड़ के लिए शोर की जरूरत नहीं होती। 278 करोड़ की कमाई के साथ 2025 आधिकारिक तौर पर अक्षय खन्ना का साल घोषित हो गया। 50 साल के अक्षय खन्ना आज भी कुंवारे हैं और बहुत शान से अकेले हैं। लेकिन दोस्तों एक सवाल तो आपके मन में भी गूंज रहा होगा कि क्या अक्षय खन्ना सच में करिश्मा के इंतजार में आज 50 साल की उम्र तक कुंवारे बैठे हैं? क्या वह बॉलीवुड के असली देवदास हैं? दरअसल सच्चाई इससे कोसों दूर है। अक्षय ने खुद कई इंटरव्यूज में इस बात का खुलासा किया है कि उनका कुंवारापन किसी ब्रेकअप का सदमा नहीं है बल्कि वह खुद को मैरिज मटेरियल मानते ही नहीं है। उनका साफ कहना है कि शादी एक इंसान की जिंदगी और उसकी आजादी पर बहुत बड़ा ब्रेक लगा देती है और वह अपनी जिंदगी का पूरा नियंत्रण अपने हाथों में रखना चाहते हैं। अक्षय को बच्चे पैदा करने या अपनी व्यक्तिगत स्वतंत्रता छीन जाने वाली लाइफ लाइन बिल्कुल पसंद नहीं है। जो यह साबित करता है कि उनका कुंवारा रहना करिश्मा के लिए कोई वफादारी का शौक नहीं बल्कि उनकी खुद की चुनी हुई एक शांत और आजाद जीवन शैली है। और दोस्तों अगर आपको बॉलीवुड के इन अनकही कहानियों और गहरे राजों को जानना पसंद है तो अभी इस वीडियो को लाइक करें और हमारे चैनल को सब्सक्राइब करके बेल आइकन दबाना ना भूलें। ने

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