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9 साल की बच्ची कैसे बनी खौफनाक डकु? क्यों कांपती थी पुलिस?जानकार रूह कांप जाएगी।

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आज यह दास्ता है 80 के दशक के उस गुजरे दौर की एक ऐसी नायिका और खलनायिका की जिसने अपनी खूबसूरती से नहीं बल्कि अपने और खौफ से हिंदुस्तान के शासन और प्रशासन को अपनी की नोक पर नचाया हिंदुस्तान के अब तक के इतिहास में जो सजा इस खलनायिका को समाज और इसके घर वालों ने दी वह ना तो पहले किसी और को दी ना आगे कभी दी गई क्योंकि इस नायिका को अपनी जिंदगी में गुजरना पड़ा उस दुख तकलीफ और लोगों की दरिंदगी से जिसे सुनकर आज भी कांप जाती है एक-एक महिला की रूह इस बेहद चर्चित और खौफनाक नायिका के साथ जिंदगी में ऐसा क्या हुआ था कि इसको बचपन में ही 9 साल की उम्र में इनके माता-पिता ने 35 साल के पुरुष के साथ बाल विवाह करके डाल दिया था.

इनका जीवन दुख और तकलीफ के सागर में क्यों इस मासूम सी बच्ची को बेहद कम उम्र में झेलना पड़ा दहेज प्रथा का दर्द इसको नायिका की जिंदगी में ऐसा क्या हुआ था कि लोगों ने और बिरादरी ने इतने अत्याचार इस पर किए कि इस बेबस और लाचार नायिका के शरीर से पसीना नहीं बल्कि बहने लगा था क्यों इस नाबालिक नायिका को खुद के पिता ने पहुंचा दिया जेल क्यों उसी जेल में इस बेबस और बेशुद्ध लड़की के साथ तीन दिन तक किया गया उसकी इज्जत का वो नंगा नाच जिसे सुनकर आज भी रो पड़ती है.

हिंदुस्तान की महिलाएं वक्त की मारी सीधी साधी इस नायिका को क्यों सबके सामने पूरे गांव में घुमाया गया बिल्कुल निर्वस्त्र क्यों इस नायिका के साथ सात दिनों तक 30 से ज्यादा पुरु ने किया था अपना मुह काला क्यों इस नायिका की वजह से देना पड़ा था उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को तीफा क्यों इस नायिका को पकड़ने के लिए खुद इंदिरा गांधी को करना पड़ा था हस्तक्षेप और कैसे यह नायिका बीहड़ से निकल कर पहुंच गई भारतीय संसद में और कैसे इस नायिका को दिल्ली के सरकारी आवास के बाहर भून दिया गया से बताएंगे और भी बहुत कुछ इस और बेबस नायिका की जिंदगी के बारे में जिसे जानकर सुनकर निकल आएंगे आप सभी की आंखों से आंसू तो

आज हम अपने इस शो में पहली बार एक ऐसी बेबस लाचार दुख हारी और वक्त की बेरहमी को झेलती आई उस नायिका को कि जिंदगी को लेकर आए हैं जिसे आज से पहले किसी ने भी उजागर नहीं किया हिंदुस्तान की यह पहली ऐसी महिला जिसने अपने सगे संबंधियों शासन प्रशासन और मर्दों के जुल्मो सितम को झेलते हुए जब उसकी सहन शक्ति जवाब दे गई तो उसने भी बहा दी रक्त की नदियां बीहड़ में अपने नाम का डंका बजाकर दिल्ली की संसद तक पहुंची इस नायिका को दुनिया में किसी ने पह जाना फुलवा तो किसी ने बैंडिट क्वीन लेकिन इतिहास के पन्नों में यह जानी गई दसीय सुंदरी फूलन देवी के नाम से मेरा नाम फूलन देवी है लोग बैंडिट क्वीन के नाम से जानते हैं कौन थी.

फूलन देवी किस परिवार से यह ताल्लुक रखती थी क्या थी इनकी पढ़ाई लिखाई कैसे इनका साधारण सा जीवन बन गया खून का सागर यह सब हम आपको बताएं उससे पहले एक नजर डाल लेते हैं इनके जन्म और शुरुआती जीवन पर फूलन देवी की जय फूलन देवी की जय फूलन देवी की कहानी शुरू होती है उत्तर प्रदेश के जालौन जिले से जहां गोरहा का पूर्वा नाम का छोटा सा गांव है इस गांव को फूलन देवी के नाम से जाना जाता है लेकिन इससे पहले यह गांव पूरी तरह से गुमनाम था .

इसी गांव में में 10 अगस्त 1963 को फूलन का जन्म मल्लाह परिवार में हुआ था फूलन के पिता देवी दिन मल्हा के परिवार में उनकी पत्नी के अलावा चार बच्चे थे जिनमें सबसे बड़ी उनकी एक बहन थी उसके बाद दो लड़के थे और इन सब में सबसे छोटी थी फूलन देवी देवीदीन मल्हा के पास जमीन का एक छोटा सा टुकड़ा था जिस पर वो थोड़ी बहुत खेती किया करते थे किसी तरीके से परिवार का गुजारा हो रहा था.

बाकी वो नाव चलाकर भी अपने परिवार का पालन पोषण कर रहे थे फूलन देवी जिस बिरादरी से आती हैं उस बिरादरी में फूलन देवी का परिवार गरीब से भी ज्यादा गरीब वाली स्थिति में था इसलिए फूलन कभी भी किसी भी स्कूल या फिर कॉलेज नहीं जा पाई थी फूलन बचपन से ही अपने परिवार में सबसे अलग थी वो कभी भी गलत बात को बर्दाश्त नहीं कर पाती थी.

हर गलत बात का वो विरोध करती थी फूलन देवी के पिता के पास जो जमीन थी उसके कुछ हिस्से पर उनके चाचा ने कब्जा कर रखा था और इधर फूलन धीरे-धीरे बड़ी हो रही थी तो फूलन की शिकायतें भी घर तक पहुंचने लगी थी क्योंकि फूलन एक छोटी जाति से आती थी फूलन को बड़ी जाति के लोग बचपन से ही काफी परेशान किया करते थे फूलन बड़ी जाति के लड़कों से अपनी बेइज्जती बर्दाश्त नहीं कर पाती थी लिहाजा वोह उनसे लड़ बैठती थी और ईंट का जवाब पत्थर से देती थी आगे चलकर समय की ऐसी मार पड़ी कि फूलन देवी के दोनों भाइयों की अचानक हो गई और ऐसे दुख के समय में उनके चाचा जमीन के टुकड़े को लेकर फूलन के परिवार को परेशान करने लगे अपने चाचा के खिलाफ इस परिवार में छोटी सी फूलन ही सीना तानकर खड़ी हो जाती थी.

फूलन अपने पिता से भी उनका सामना करने के लिए कहती थी लेकिन फूलन की इन बातों से उनके पिता उनसे बेहद नाराज हो जाते थे और वह फूलन को ही गलत साबित कर देते थे बाल अवस्था में ही फूलन के यह तेवर देखकर फूलन के पिता ने मात्र 9 साल की फूलन की शादी नजदीकी दूसरे गांव के एक व्यक्ति पुत्ती लाल से कर दी पुत्ती लाल फूलन से उम्र में तीन गुना बड़ा था उस वक्त पुत्ती लाल 36 साल का था.

यह वो वक्त था जब हिंदुस्तान में बाल विवाह की प्रथा जोरों पर थी नौ साल की फूलन अपने ससुराल पहुंची जहां इस मासूम सी बच्ची का 36 साल के पुत्ती लाल ने इज्जत का चीर हरण कर दिया फूलन इस दुख तकलीफ से परेशान होकर अपने घर भाग आया करती थी लेकिन बेदर्द पिता उसको बिना कुछ सोचे समझे ससुराल छोड़ आते जहां फूलन को दिन रात नोचा जाता फूलन बार-बार ससुराल से भागकर अपने घर आ जाती इस बात से परेशान उसके पिता गुस्से में अपनी बेटी के ही खिलाफ नजदीकी कोतवाली में और छो छोटी शिकायत दर्ज करवा बैठे जिसके बाद फूलन को पकड़कर लॉकअप में कर दिया गया.

लेकिन इस लॉकअप में फूलन के साथ वो हुआ जिसकी वजह से फूलन की जिंदगी और ज्यादा तकलीफ के सागर में डूब गई बताया जाता है कि इस पुलिस थाने में ही फूलन को तीन दिन रखा गया और तीन दिन तक इसी थाने में फूलन की इज्जत को बारी-बारी से लूटा गया उसे वो दुख तकलीफ दी गई जिसकी कल्पना करना भी समझ से परे है फूलन के साथ जो हुआ उसकी आवाज किसी ने नहीं उठाई फूलन और उसकी आवाज दोनों को दबा दिया गया थाने से रिहा होने के बाद फूलन के पिता उसको फिर उसके ससुराल छोड़ आए.

लेकिन जब फूलन ससुराल पहुंची तो पता चला कि पुत्ती लाल ने तो दूसरी शादी कर ली है फूलन ने जब सवाल जवाब किया तो फूलन को बहुत मारा गया और इस बार उसको उसके सामान के साथ घर से बाहर निकालकर वापस भेज दिया गया फूलन अब ससुराल से भी अलग हो गई और उधर उसके पिता भी उसका साथ नहीं दे रहे थे अपने परिवार का ऐसा व्यवहार और पुलिस थाने में जो भी फूलन के साथ हुआ इन तमाम बातों ने उसे भीतर से बागी बना दिया हर तरफ जिंदगी की मार झेल रही फूलन को समझ नहीं आ रहा था कि व आखिर करे तो क्या करें तो ऐसे में फूलन का संपर्क कुछ ऐसे अनजान और अजनबी लोगों के साथ हुआ जिन्होंने उसे एक अलग ही रास्ते पर चलने ने के लिए मजबूर कर दिया फूलन जिन लोगों के संपर्क में आई थी वह लोग मल्लाह जाति से ही थे.

एक दिन अचानक फूलन गायब हो गई और चंबल की बीहड़ में पहुंच चंबल के बीहड़ों ने फूलन देवी को बाबू गुर्जर गैंग में पहुंचा दिया इस गैंग में बाबू गुर्जर के बाद विक्रम मल्लाह का नंबर आता है विक्रम मल्लाह फूलन देवी की जाति से ही था और उसे फूलन के साथ जो जो हुआ था वह सब कुछ मालूम था इसलिए उसके मन में फूलन के लिए कुछ कोमल भावनाएं थी लेकिन इस का सरदार बाबू गुर्जर की गिद्द जैसी नजर फूलन देवी के ऊपर थी एक रात जब वह फूलन देवी के साथ जबरदस्ती करने की कोशिश कर रहा था तब वहां विक्रम मल्लाह पहुंच गया उन दोनों के बीच झगड़ा हुआ और फाइनली विक्रम मल्लाह ने बाबू गुर्जर को जान से मार दिया अब इस का नया सरदार विक्रम मल्लाह बन गया हालांकि विक्रम मल्लाह पहले से शादीशुदा था लेकिन अब इस में विक्रम मल्लाह ही लीडर था.

अब फूलन को विक्रम का साथ मिल गया था बीहड़ में ही विक्रम और फूलन एक दूसरे को पसंद करने लगे और दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ गई और इनके प्यार के चर्चे पूरे बीहड़ में मशहूर होने लगे विक्रम मल्लाह ने फूलन को दुनिया से लड़ने के लिए प्रेरित किया एक डाकू क्या होता है उसकी जिंदगी क्या होती है ये सारी बातें उसे विक्रम मल्लाह ने सिखाई और इन सबके बाद जन्म हुआ एक नई फूलन का जो आगे चलकर बन गई थी फूलन देवी हालांकि यह रास्ता जुर्म का था जिसका अंत सिर्फ था लेकिन फूलन अपने पर हुए अत्याचार का बदला लेना चाहती थी इसलिए फूलन जिंदगी की परवाह नहीं कर रही थी और जुर्म के रास्ते पर निकल पड़ी थी एक दिन फूलन देवी विक्रम मल्ला और अपने के साथ अपने ससुराल यानी कि पुत्ती लाल के घर पहुंचती हैं और वह अपने पति को गांव के चौराहे पर लाकर बुरी तरह से मारती हैं और उसे अधमरा करके छोड़ देती हैं और गांव में एक भरी चिट्ठी लिखकर छोड़ जाती हैं कि गांव के किसी भी अधेड़ बुजुर्ग मर्द ने अगर किसी छोटी बच्ची से शादी की तो भूलन देवी उसे से मार देगी चि लेपी को बाबू गुर्जर के में सभी जाति के लोग थे लेकिन इस में राजपूतों का वर्चस्व सबसे ऊपर था इस

के दो लोग श्रीराम और लालाराम जो कि जेल में थे जब वह जेल से छूट कराए तो उन्हें यह पता चला कि विक्रम मल्लाह ने फूलन देवी के चक्कर में सरदार को मार दी है तो इस बात से खार खाए श्रीराम और लालाराम ने में जाति के आधार पर चोरीचोरी दरार डालने की कोशिश की जिसका नतीजा यह हुआ कि राजपूत जाति के ज्यादातर लोग एक तरफ हो गए और एक दिन विक्रम मल्लाह को धोखे से मार दी गई और विक्रम मल्लाह और फूलन की प्रेम कहानी यहीं पर अधूरी र रह गई विक्रम मल्लाह की के बाद श्रीराम और लालाराम फूलन को जबरदस्ती उठाकर यूपी में अपने गांव बेहमई ले आए यहां उन्होंने फूलन को एक कमरे में बंद कर दिया और यहां फूलन के साथ व हुआ जिसकी कल्पना भी करू तो रूह कांप जाती है.

फूलन के साथ इस बंद कमरे में हैवानियत की वह सभी हदें पार की गई जिसकी कभी फूलन ने कल्पना भी नहीं की थी कई दर्जनों लोगों ने फूलन की इज्जत को दिन रात लूटा फूलन दर्द से छटपटा रही थी लेकिन दरिंदों पर उसकी चीख पुकार का जरा सा भी असर नहीं पड़ा फूलन दर्द से बेहोश हो जाती तो उसे फिर से होश में लाकर फिर उसकी इज्जत को लूटा जाता और जब इन दरिंदों का मन नहीं भरा तो लालाराम और श्रीराम ने फूलन को पूरे गांव में बिल्कुल निर्वस्त्र घुमाया फूलन की किसी ने कोई भी मदद नहीं की उसी गा में एक मल्लाह जाति का फूलन का परिचित रहता था जब उसे फूलन के बारे में पता चला कि फूलन की हालत बहुत खराब है तो वह फूलन से मिला और उसको वहां से सबकी नजरों से छिपे छिपाते फूलन देवी को वहां से निकाल लाया और फूलन को विक्रम मल्लाह के कुछ लोगों से फिर से मिला दिया

ये लोग फूलन देवी को लेकर एक बार फिर चंबल के बीहड़ में आ गए यहां एक बार फिर से यह सभी मल्लाह जाति के लोगों को इकट्ठा करके एक नया बनाते हैं और इस बार इस मल्ला की लीडर बनी खुद फूलन देवी फूलन देवी को जो उस गांव से बचाकर लाया था उसका नाम था मानसिंह जो विक्रम मल्लाह का दोस्त था मानसिंह हमेशा फूलन के साथ रहता और अब विक्रम मल्लाह की जगह मानसिंह ने ले ली 14 फरवरी 1981 का वो दिन जब बेहमई गांव में एक राजपूत परिवार में शादी थी यह वही था जहां फूलन की इज्जत को मिलकर लूटा गया था.

फूलन अपने साथ हुई इस दर्दनाक घटना के ठीक सात महीने बाद फूलन देवी का इस गांव पर पुलिस की वर्दी में हमला कर देता है और फूलन इस गांव में उन सभी लोगों की तलाश करने लगी मगर गांव में इनमें से कोई नहीं मिला केवल दो लोग ही फूलन देवी के पकड़ में आए थे इसके बाद फूलन देवी ने शादी में आए हुए दूसरे राजपूत मर्दों को पकड़ा और गांव के चौराहे पर उन सभी को एक लाइन में खड़ा किया 22 राजपूतों को के घाट उतार दिया इस ने तो पूरे देश को हिलाक रख दिया था.

शासन प्रशासन सबके पैरों तले जमीन निकल गई फूलन देवी का एक ही रात में पूरी दुनिया में नाम गूंज गया इसके बाद से पूरे देश में फूलन देवी का नाम घर-घर लिया जाने लगा बेहमई ने फूलन देवी को दय सुंदरी के तौर पर प्रसिद्ध कर दिया तो वहीं मीडिया ने पहली बार फूलन देवी को बैंडिट क्वीन का नाम दे दिया और अब चंभर का पूरा बीहड़ फूलन देवी के नाम से डरने लगा अब फूलन देवी की तूती इन बीहड़ों में खौफ बनकर डाकुओं के सीने में बस गई फूलन को पकड़ने के लिए कई राज्यों की पुलिस ने मिलकर बीहड़ में फूलन की तलाश की लेकिन फूलन कभी किसी के हाथ नहीं आई .

जिस समय यह घटना हुई उस समय दिल्ली में इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री के पद पर थी और यूपी में सिंह मुख्यमंत्री के तौर पर थे इस घटना के बाद मुख्यमंत्री ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया स्टेट की पुलिस फूलन देवी की तलाश करने लगी लेकिन वह पकड़ में नहीं आ रही थी मध्य प्रदेश के भिंड जिले के एसपी राजेंद्र चतुर्वेदी अपने सूत्रों के जरिए फूलन देवी के संपर्क में थे और वह उसे सरेंडर करने की कोशिश करवा रहे थे प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने पहल की कि बातचीत होनी चाहिए फूलन देवी ने सरेंडर करने की इच्छा तो जाहिर की लेकिन अपनी कुछ शर्तें भी रखी उसने कहा कि वह महात्मा गांधी और दुर्गा मां की प्रतिमा के सामने डालेंगे के किसी भी सदस्य को 8 साल से ज्यादा जेल में नहीं रखा जाएगा और जेल से निकलने के बाद उन्हें जमीन या प्लॉट दिया जाएगा.

जिसके आधार पर वह शराफत की जिंदगी जी सके फूलन देवी के सरेंडर के समय उनका पूरा परिवार वहां मौजूद था फूलन देवी यूपी में सरेंडर नहीं करेंगी बल्कि एमपी में सरेंडर करेंगी के किसी भी सदस्य को की सजा नहीं होगी ऐसी कुछ शर्तों के साथ बात सरकार तक पहुंची सरकार मान गई और फरवरी 1982 को फूलन देवी ने अपने पूरे के साथ भिंड जिले में सरेंडर कर दिया सरेंडर के बाद फूलन देवी को जेल ले जाया गया लेकिन बीहड़ की यह दसीय सुंदरी बैंडिट क्वीन गरीब लोगों के लिए उनके सुख दुख की मसीहा बन गई मशहूर फलन देवी अपनी के साथ डालने को आई है फूलन के जेल जाने के बाद 11 सालों तक इस मामले पर कोई कार्रवाई नहीं हुई और फूलन देवी जेल में ही रह रही थी लेकिन जब साल 1994 में यूपी में मुलायम सिंह यादव की सरकार बनी तो उन्होंने फूलन देवी पर दर्ज 48 मुकदमे वापस ले लिए जिसके बाद फलन देवी और उनके साथियों को रिहा कर दिया गया बिना मुकदमा तय किए बिना सजा तय किए 11 साथ जेल में रखा अब फूलन देवी एक आजाद नागरिक की तरह रहने लगी इस दौरान फूलन देवी की जिंदगी पर एक फिल्म भी बनी जिसे बैंडिट क्वीन का नाम दिया गया शेखर कपूर की बनाई हुई यह फिल्म काफी हिट रही लेकिन इस फिल्म को बनाने से पहले फूलन देवी से पूछा भी नहीं गया साल 1995 में फूलन देवी ने बौद्ध धर्म स्वीकार करते हुए उमेद सिंह नाम के व्यक्ति से शादी कर ली फूलन देवी का नाम था लोग उनको मानते थे क्योंकि वह दुखी लोगों की फरियाद सुनती थी और फूलन की यह अच्छाई फूलन को ले आई.

राजनीति में 1996 में फूलन देवी ने समाजवादी पार्टी की टिकट पर मिर्जापुर सीट से चुनाव लड़ा और जीतकर लोकसभा में पहली बार अपना कदम रखा और ऐसा पहली बार था कि चंबल की चुनाव जीतकर भारतीय संसद तक पहुंच गई थी अभी तक फूलन की जिंदगी में सब कुछ ठीक-ठाक चल रहा था राजनीति और जनता के बीच फूलन काफी लोकप्रिय बनी हुई थी लेकिन शायद भगवान को कुछ और ही मंजूर था क्योंकि फूलन की जिंदगी में अब वो होने वाला था जिसका अनुमान किसी को भी नहीं था.

दरअसल 25 जुलाई 2001 को दिल्ली स्थित फूलन के सरकारी आवास के सामने फूलन देवी की से ढूंढकर कर दी गई फूलन की ने देश भर को हिलाक रख दिया के बाद आरोपी फरार हो गए और एक बार फिर से पुलिस की नाकामी देश को देखने को मिली और अफसोस के साथ कहना पड़ते हैं 11 साल उसने जेल में रहने के बाद 11 साल उसको जिंदा नहीं रख पाए और जहां स्वच्छ स्थान वहां नहीं रख पाए इस घटना के दो दिन बाद आरोपी शेर सिंह राणा ने देहरादून में पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया पुलिस के अनुसार राणा ने बेहमई में फूलन के हाथों मारे गए 22 राजपूतों की का बदला लेने के लिए फूलन की की थी इस प्रकार फूलन देवी उसी का शिकार हुई जिस की गूंज पूरे चंभर के बीहड़ों में गूंजती थी फूलन देवी कभी भी अपनी मर्जी से डाकू नहीं बनी थी फूलन को इस हालात में पहुंचाने वाले वो लोग थे जिन्होंने फूलन की इज्जत को तार-तार किया उसके मान सम्मान को ठेस पहुंचाई उसकी अंतर आत्मा को घायल किया लोगों के जुल्मो सितम ने मासूम सी फुलवा को बना दिया हमेशा हमेशा के लिए कभी ना मिट पाने वाली फूलन देवी जिसे पूरी दुनिया और आने वाली पीढ़ी इतिहास में चंभर की रानी बैंडिट क्वीन के नाम से याद रखेगी

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