भारत ने वैश्विक शिपिंग और समुद्री इंश्योरेंस के क्षेत्र में एक ऐसा ऐतिहासिक कदम उठाया है जिसने लंदन से लेकर न्यूयॉर्क तक के बड़े-बड़े शिपिंग दिग्गजों की रातों की नींद उड़ा दी है। पिछले कई दशक से दुनिया के समुद्री व्यापार और उसके बीमा पर कुछ चुनिंदा पश्चिमी कंपनियों का एकाधिकार यानी मोनोपोली था।
लेकिन अब भारत ने अपना खुद का भारत मेरीटाइम इंश्योरेंस पूल यानी कि बीएएमआईपी एक्टिवेट कर दिया। यह कदम केवल एक आर्थिक घोषणा नहीं बल्कि पश्चिमी देशों की उन कंपनियों को ₹13,000 करोड़ का करारा झटका है जो संकट के समय में भारतीय व्यापार को बंधक बनाने की कोशिश करती थी। अब तक भारत की शिपिंग इंडस्ट्री पूरी तरह से विदेशी पी एंड आई क्लब पर निर्भर करती थी। यह क्लब मुख्य रूप से लंदन, स्वीडन, नॉर्वे और अमेरिका में स्थित हैं।
जब भी दुनिया के किसी बड़े हिस्से में तनाव बढ़ता है तो यह बड़ी कंपनियां मनमाना व्यवहार करने लगती हैं। जब ईरान अमेरिका तनाव शुरू हुआ या रेड सी में संकट आया तो इन पश्चिमी कंपनियों ने हाई रिस्क का हवाला देकर इंश्योरेंस देने से ही मना कर दिया। जो कंपनियां इंश्योरेंस दे भी रही थी, उन्होंने प्रीमियम की दरों को 1000% तक बढ़ा दिया। अब उदाहरण देख लीजिए। जिस शिप का इंश्योरेंस ₹2 करोड़ होता है, उसके लिए ₹20 करोड़ वसूले जाने लगे। भारत का 95% व्यापार मात्रा के हिसाब से समुद्र के जरिए होता है।
विदेशी कंपनियों की इन मनमानी से भारत की सप्लाई चैन पर सीधा खतरा मंडा रहा था। चलिए अब जानते हैं क्या है भारत मैरिटाइ इंश्योरेंस पूल। दरअसल इस संकट को देखते हुए भारत सरकार ने मिड अप्रैल 2026 में एक क्रांतिकारी फैसला लिया। केंद्र सरकार ने ₹1,980 करोड़ की सावरन गारंटी के साथ बीएएमआईपी की शुरुआत की। अब सावरन गारंटी का मतलब इसका अर्थ है कि यदि समुद्र में किसी जहाज के साथ कोई अनहोनी होती है तो उसके पीछे सीधे भारत सरकार खड़ी है।
यह सुरक्षा की सबसे बड़ी गारंटी है। एक्टिवेशन और सफलता लॉन्च होने के महज 1 महीने के भीतर भारत सरकार ने 85 हाई रिस्क इंश्योरेंस पॉलिसीज जारी कर दी। यह इस बात का सबूत है कि भारतीय शिप ओनर्स ने विदेशी क्लबों को छोड़कर अपने देश के सिस्टम पर भरोसा दिखाना शुरू कर दिया है। भारतीय जहाजों और भारत आने जाने वाले कारगो से पश्चिमी इंश्योरेंस कंपनियां हर साल अरबों डॉलर का प्रीमियम वसूलती थी। भारत सरकार के एक अनुमान के अनुसार बीएमआईपी के आने से और भारत के अपने बेड़े को मजबूत करने से पश्चिमी कंपनियों को सालाना लगभग 13,000 करोड़ के राजस्व का नुकसान होने वाला है।
भारत ने केवल इंश्योरेंस ही नहीं दिया बल्कि प्रीमियम में 27% से 48% तक की भारी कटौती भी की है। यानी अब भारतीय व्यापारियों को विदेशी कंपनियों के मुकाबले लगभग आधी कीमत पर बेहतर सुरक्षा मिल रही है। भारत सरकार ने स्पष्ट कर दिया कि दुनिया के किसी भी कोने से भारत आने वाला या भारत से जाने वाला जहाज अब असुरक्षित नहीं है। अब बीएएमआईपी की विशेषता जान लीजिए। दरअसल यह वॉर रिस्क कवर है। बीएमआईपी वॉर रिस्क यानी कि युद्ध के दौरान होने वाला जोखिम को भी कवर करता है।
चाहे जहाज स्टेट ऑफ फार्मूस से गुजरे या मलक्का जलडमरू मध्य से भारत सरकार उसे सुरक्षा कवच प्रदान कर रही है। इसके अलावा अश्विनी वैष्णव ने साफ कहा था कि यह पूल 10 साल की लंबी अवधि के विज़न के साथ बनाया गया है ताकि किसी भी वैश्विक अस्थिरता का असर भारत की अर्थव्यवस्था पर ना पड़े। इसके अलावा फॉरेस्ट की बंपर बचत होगी। विदेशी कंपनियों को प्रीमियम चुकाने के लिए भारत का जो कीमती विदेशी मुद्रा भंडार यानी फॉरेक्स एक्सचेंज बाहर जाता था वो पैसा देश के विकास में काम आएगा।
बीएमआईपी तो केवल एक हिस्सा है। भारत सरकार शिपिंग के इस पूरे इकोसिस्टम को बदलने के लिए युद्ध स्तर पर काम कर रही है। भारत ने अब अपने खुद के कंटेनर्स बनाना शुरू कर दिया है। अब तक हम चीन और अन्य देशों के कंटेनर्स पर निर्भर थे। 51,000 करोड़ के भारीभरकम टेंडर के जरिए नए स्वदेशी जहाजों का निर्माण किया जा रहा है। भारत के बंदरगाहों को दुनिया के बेहतरीन पोर्ट से टक्कर देने के लिए तैयार किया जा रहा है।
खैर भारत ने दिखा दिया कि अब वह किसी के रहमोकरम पर नहीं रहेगा। 13000 करोड़ का यह झटका केवल पैसे का नुकसान नहीं है बल्कि यह पश्चिमी देशों के उस अहंकार पर चोट है जो यह सोचते थे कि वे भारत के समुद्री व्यापार की चाबी अपने पास रखते हैं। अब चाबी भारत के हाथ में है और समुद्र की लहरों पर तिरंगा पूरी शान के साथ आगे बढ़ रहा है।