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लखनऊ में 15 मौतों का ज़िम्मेदार कौन निकला ?

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22 जून के दोपहर लखनऊ के अलीगंज में एक बिल्डिंग में आग लग गई थी जिसमें अब तक 15 लोगों की मौत हो चुकी है और नौ से ज्यादा लोग घायल बताए जा रहे हैं। जिस बिल्डिंग में आग लगी वहां गेमिंग और एनिमेशन का काम होता है और नीचे वाली फ्लोर में पेट स्टोर बना हुआ था। इस घटना में छह लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है और चार लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है। जिन्हें गिरफ्तार किया गया है उनके नाम वीरेंद्र शुक्ला, तशा कृष्णा, रामकृष्ण उपाध्याय और सुरेश कुमार हैं। एफआईआर के मुताबिक बिल्डिंग को केवल रेजिडेंशियल तौर पर इस्तेमाल करने की इजाजत थी। यानी कि आवासीय इस्तेमाल की इजाजत थी। लेकिन इसके बावजूद बिल्डिंग में कमर्शियल काम चल रहा था। नीचे की फ्लोर में पेटी स्टोर और ऊपर की फ्लोर में एनिमेशन और गेमिंग सेंटर था।

आज तक की रिपोर्ट के मुताबिक केस में चार पुलिसकर्मियों को भी सस्पेंड कर दिया गया है। बताया जा रहा है कि आग शॉर्ट सर्किट की वजह से हुई है। अब सुनिए घटना के चश्मदीद आमिर का बयान। सीनियर ने आके बताया कि जो है आग लगी है। थोड़ा यहां से जो है हम लोग यहां से सिस्टम बंद करो। थोड़ा बाहर निकलना है। कुछ गड़बड़ी है। तो उस समय पता नहीं था कि इतनी ज्यादा आग लगी हुई है। जब बाहर निकले हैं तो देखा कि वहां पूरा ऑफिस धुएं से भरा हुआ था और नीचे से ही आग ऊपर की तरफ आ रही थी। धुआ से पूरा कॉरिडोर ब्लॉक हो गया था। हम लोग सांस भी नहीं ले पा रहे थे। तो कितने बच्चे अंदर फसे थे और कम से कम जो है ना 20 लोग अंदर फसे हुए थे। उसमें से 15 की डेड बॉडी आ चुकी है। सब स्टडी कर रहे थे। पढ़ रहे थे। मैं स्टडी नहीं कर रहा था।

सब जो है ना 3D आर्टिस्ट थे। नीचे अलीगंज पेट हाउस का गोदाम था। उसी में कुछ शर्ट थे। वहां पे उन्होंने फूड फूड का डॉग फूड था पूरा गोदाम बना रखा था उन्होंने। शायद उसी में कुछ शॉर्ट सर्किट हुआ था। उसके बाद ही दिए थे। आज पहलना चालू पता नहीं चल पाया। आप लोग फसे कैसे? हम लोग हम लोग बिजली का तार पकड़ के बाहर लटक के आए। अस्पताल में भर्ती एक पीड़िता ने बताया कि एग्जिट का सिर्फ एक ही गेट था। मृतकों को बाहर निकलने का रास्ता ही नहीं मिला। लोगों को तार के सहारे या फिर कूद कर बाहर निकलना पड़ा और कुछ ऐसे भी लोग थे जिन्होंने खुद को बाथरूम में लॉक कर लिया था। घटना के समय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अलीगढ़ में थे। लेकिन ना की खबर सुनकर वह लखनऊ पहुंच गए। पीड़ितों के परिवार वालों से बात की। उन्हें भरोसा दिलाया कि जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त एक्शन लिया जाएगा। मौके पर डिप्टी सीएम बृजेश पाठक भी पहुंचे। उन्होंने क्या बताया वह सुनिए। बहुत ही बड़ी घटना है।

यह झजकोर देने वाली घटना है और घटना की उच्चस्तरीय जांच के साथ-साथ आज ही निर्देश दिए गए हैं। ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति ना हो। तत्काल प्रशासन इसमें एक रिपोर्ट प्रस्तुत करें और इसके अलावा ऐसी जहां भी बिल्डिंग हैं जहां बच्चे एकत्र होते हैं या जहां पर भीड़भाड़ वाला बिल्डिंग है वहां पर जो भी इंतजामात हैं वैकल्पिक निकलने के रास्ते के वो सुनिश्चित किए जाए और इस घटना को हम कभी नहीं भूलेंगे हमारे लिए लेसन है और हर स्थिति में पीड़ित परिवार को न्याय मिलेगा। बीजेपी लखनऊ विधायक डॉ. नीरज बोरा ने बताया कि एनडीआरएफ की टीम बगल के मकान की दीवार को तोड़कर अंदर गई। बच्चों के शवों को बाहर निकाला। एक बच्चे की उम्र 18 साल लग रही है। दूसरे 20 से 22 साल के बीच की उम्र वाले लोग रहे थे। कुछ बच्चों की जान ऑक्सीजन की कमी की वजह से गई है। क्योंकि अधिकतर बच्चों के शरीर पर बर्न इंजरी नहीं थी। आपको यह भी बता

दें कि ज्यादातर लोग जिन्होंने अपनी जान गवाई है, वह बहुत कम उम्र के लोग थे। 22 से 25 साल के बीच की उनकी उम्र थी। प्रधानमंत्री कार्यालय ने घटना पर शोक जताया और पीड़ित परिवारों के लिए आर्थिक मदद का ऐलान किया है। प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष के से हर मृतक के परिजन को ₹ ₹2 लाख दिए जाएंगे जबकि घायलों को ₹00 दिए जाएंगे। ऐसा ऐलान किया गया है। मुख्यमंत्री योगी ने मृतकों के परिजनों को ₹-5 लाख और गंभीर रूप से घायलों को ₹500 की आर्थिक मदद देने का ऐलान किया है। आग कैसे लगी? कहां क्या लापरवाही हुई और कौन-कौन जिम्मेदार है और बाकी जांच के लिए एक एसआईटी टीम बनाई गई है। जो भी अपडेट होगा जांच में जो भी रिजल्ट बाहर आएगा हम आप तक पहुंचाएंगे। इस खबर में इतना ही मेरा नाम है विभानी। देखते रहिए द एलन टॉप। शुक्रिया।

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