शर्मा के लजा के मैं एक झलक दिखलाऊं हाथ किसी के ना ओ बार-बार देखो हजार बार देखो के देखने की चीज है हमारा दिल जुबा में कैसी बहार है कैसा खुमार है झूम झूम झूम ले ले मजा हूं अभिनय हूं अभिनय हूं अभिनय जवान 1950 और 60 के दशक में एक से बढ़कर एक फिल्मों में काम करने वाली अभिनेत्री शकीला को आज भले ही कोई नाम से ना पहचानता हो लेकिन एक जमाना था कि लोग उनकी चुलबुली और शोक अदाओं के दीवाने थे। बॉलीवुड में उन्होंने अरबी चेहरा और फेरी क्वीन ऑफ इंडियन मूवीज जैसे टैग अपने नाम किए थे। क्यों उड़ा जाता है आंचल क्यों उड़ा जाता है? शकला का जन्म सन 1936 में पहली जनवरी के दिन अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में हुआ था। उनका वास्तविक नाम बादशाह जहां था। उनका कहना था कि उनके दादा ईरान के राज परिवार से जुड़े थे। जब वह बहुत छोटी थी तभी ईरान की राजगद्दी को लेकर हुए एक झगड़े में उनके दादा-दादी और उनकी मां का इंतकाल हो गया।
उनके पिता अपनी तीन बेटियों, बादशाह जहां, नूरजहां व नसरीन जहां और बहन फिरोजा को लेकर भारत आ गए। उन लोगों ने मुंबई में शरण ली और पिता कुछ कारोबार करने की तैयारी ही कर रहे थे कि उनकी भी मौत हो गई। शकला का पालन पोषण उनकी बुआ फिरोजा बेगम ने किया। शकला की प्रारंभिक पढ़ाई लिखाई घर पर ही हुई थी। फिल्मों में प्रवेश के बारे में शकीला बताती थी कि उनकी बुआ को फिल्में देखने का बहुत शौक था और वह उन्हें साथ लेकर फिल्म देखने जाती थी। ऐसे में उनका रुझान भी फिल्मों की ओर हो गया था। मुंबई में अब्दुल राशिद कारदार और महबूब खान जैसे दिग्गज फिल्म निर्माताओं के साथ उनकी बुआ के पारिवारिक संबंध बन गए थे। कारदार साहिब ने 40 के दशक में शकीला की फिल्मों में रुचि को देखते हुए अपनी फिल्म दास्तान में एक 13 14 साल की नवयुवती का रोल करने का प्रस्ताव दिया। इसका नाम है सुशीला रानी मगर प्यार से हम इसे रानी कहते हैं। सारे घर पर इसी का राज है। नमस्ते। यहीं से उन्होंने अपने अभिनय करियर की शुरुआत की थी और उनका असली नाम बादशाह जहां बदलकर फिल्मी नाम शकीला रख दिया गया। यह फिल्म बन ही रही थी कि एक और डायरेक्टर एसएफ हसनैन साहब ने उन्हें अपनी फिल्म दुनिया में काम करने का ऑफर दिया। फिल्म दुनिया 1949 में दास्तान से पहले ही रिलीज हो गई थी।
इस फिल्म में उन्होंने उस जमाने की मशहूर अदाकारा सुरया के साथ काम किया था। 1950 में आई फिल्म दास्तान के बाद शकीला ने गुमास्ता खूबसूरत राजरानी दमती सलोनी सिंध बा दसेला आगोश और अरमान में बतौर बाल कलाकार अभिनय किया था। फिल्म झांसी की रानी में शकला ने अभिनेत्री मेहताब के भूमिका निभाई शहर के सब लोग निराशा में घिरे हुए हैं। कोई दुल्हन अपने सुहाग को और कोई मां अपनी खाली गौत को देखकर रो रही है। वर्ष 1953 में शकीला को पहली बार फिल्म मधमस्त में नायक एन ए अंसारी के साथ बतौर हीरोइन काम करने का मौका मिला था। इसी वर्ष बतौर नायिका उनकी दो और फिल्में राजमहल और शहंशाह भी प्रदर्शित हुई थी। शकीला के चेहरे में मध्य पूर्व एशिया की झलक मिलती थी। इसलिए फिल्मी दुनिया से जुड़े लोगों ने उन्हें अरबी चेहरा का खिताब दे दिया था। तड़पा के दिखा कि मैं नाजो अदा चली जाऊं। लौट के फिर नहीं आऊं। नीना कुमारी के अत्यंत व्यस्त होने के कारण होमी वाडिया ने 1954 में आई अपनी फेंटसी फिल्म अलीबाबा और 40 चोर के लिए शकला को मेहनताने के तौर पर ₹10,000 देकर साइन किया था। यह उन दिनों एक बड़ी रकम थी। ऐसे कह जरा क्यों हमें बेकरार कर दिया। इस फिल्म के हीरो महपाल थे और यह फिल्म इतनी बड़ी सफल रही कि शकीला को फेंटसी और कॉस्ट्यूम फिल्मों के ढेरों ऑफर आने लगे। क्यों शंका जली महफिल ये राग कोई ना जाने ये शकील ने गुलबहार लाल परी लैला नूर महल रत्न मंजरी शाही चोर हातिम ताई खुलजा सिमसिन अलादीन लैला माया नगरी नाग पद्मिनी परस्तान सिमसिन मर्जीना डॉक्टर जेड अब्दुल्ला और बगदाद की रातें जैसी कई फिल्मों में महपाल जयराज दलजीत और अजीत जैसे नायकों के साथ काम किया था। दिल फैलाना जी दिल के दिल मतवाला जी मेरा था। महिपाल के साथ उनकी जोड़ी को दर्शकों ने खूब पसंद किया। शकला ने बतौर नायिका उस दौर के मशहूर अभिनेता देवानंद के साथ फिल्म सीआईडी में काम किया था। आंखों ही आंखों में इशारा हो गया। बैठ-बैठ जीने का सहारा हो गया। गुरुदत्त के साथ वो आरपार में आई थी। इस फिल्म में शकला ने एक ए गैंगस्टर की प्रेमिका यानी वैन की सशक्त भूमिका निभाई थी। मुझे भी गोली से उड़ाओगे? क्यों नहीं?
तुम औरों से अलग थोड़ी हो। अलग हूं या नहीं? ये तुमने जानने की कोशिश ही कब की? इस फिल्म के दो सदाबहार गीत उन पर फिल्माए गए थे। जिनमें पहला था बाबूजी धीरे चलना। बाबूजी धीरे चलना प्यार में जरा संभलना। दूसरा गीत हूं अभी मैं जवान। एक दिल भी खासा लोकप्रिय रहा। हूं अभी मैं हूं अभी मैं हूं अभी मैं जवान। सुनील दत्त के साथ पोस्ट बॉक्स 999 और मनोज कुमार के साथ रेशमी रुमाल में भी उनका अभिनय काफी सराहा गया। आंख में लगता दिल में शरारतबा उन्होंने फिल्म काली टोपी लाल रुमाल में चंद्रशेखर के साथ और टावर हाउस में अजीत के साथ काम किया था। मैं खुशनसीब हूं मुझको किसी का प्यार मिला। राज कपूर के साथ वे फिल्म श्रीमान सत्यवादी में लीड रोल में नजर आई थी। भीगी हवाओं में तेरी अदाओं में कैसी बहार है। कैसा खुमार है झूम झूम। फिल्म चाइना टाउन में उन्होंने शमी कपूर के साथ अभिनय किया। हां जी हां और भी होंगे दिलदार यहां। लाखों दिलों की बहार यहां। इन दिग्गज अभिनेताओं के साथ काम करने के बावजूद शकीला की मेक स्टंट फिल्मों की हीरोइन के तौर पर अधिक बनी। शकीला ने अपने मदहोश कर देने वाले डांस और भावों से दर्शकों पर जादू कर दिया था। शकीला का जादू एक बार फिर चला था। फिल्म सीआईडी के गीत आंखों ही आंखों में इशारा हो गया से। आंखों की आंखों में इशारा हो गया। बैठे-बैठे जीने का सहारा हो गया। इस फिल्म के एक अन्य क्लासिक गाने लेकिन पहला पहला प्यार भर के आंखों में खुार को भी भुलाया नहीं जा सकता। लेके पहला पहला प्यार भर के आंखों में खमार जादू नगरी से आया। फिल्म सीआईडी में उन्होंने एक अमीर घराने की लड़की का किरदार निभाया था जो देवानंद के प्यार में पड़ जाती है। सीआईडी की सफलता के बाद शकला ने बुलंदियों पर कदम रख लिया था। सब अभिनेत्रियों को पछाड़ती हुई शकीला ने अपना मुकाम खुद बनाया। चुपकेचुपके कोई आगे सोना प्यार। बेमिसाल हुस् और अदाकारी उनके पास यह दोनों ही चीजें थी
और जिसके जरिए उन्हें दर्जनों फिल्में मिली। हालांकि उनकी पहचान फेंटसी फिल्मों की नायिका की ही बनी रही लेकिन ब्लैक एंड वाइट सिनेमा के दौरान शकीला का रुतबा किसी सुपरस्टार से कम नहीं था। बसरे की हूर नाचे आगे हुजूर के देखो जी चांद निकला पीछे खजूर के। शकील आखिरी बार बतौर हीरोइन 1963 में रिलीज हुई फिल्म उस्तादों के उस्ताद में नजर आई थी। सवार जन्म लेंगे। सवार शकीला ने 14 साल के अपने करियर में कुल 72 फिल्मों में अभिनय किया है। बताते हैं कि 1966 में शकला की शादी अफगानिस्तान एंबेसी के एक बड़े अधिकारी से हुई थी। जब उनका तबादला हुआ तो शकीला ने फिल्मों से सन्यास ले लिया और वह अपने शौहर के साथ जर्मनी चली गई। लगभग दो दशक तक वह जर्मनी और अमेरिका में रही। फिर उनके शादीशुदा संबंधों में दरार आ गई और वह हमेशा के लिए भारत वापस लौट आई। शकीला मरीन ड्राइव स्थित फेमस आर्ट डेको बिल्डिंग गोविंद महल में रहती थी। लेकिन 1991 में उनकी बेटी मीनाज ने आत्महत्या कर ली तो वह बांद्रा शिफ्ट हो गई थी। ऐसा ये गम भी नहीं कोई पहचान ले। ऐसा उनकी छोटी बहन नूरजहां ने
मशहूर कॉमेडियन बदरुद्दीन उर्फ जॉनी होकर से शादी की थी। अरे वाह वाह वाह ऐसा कैसा होगा? तौबा काहे को करता? तौबा काहे को करता? शकला की सबसे छोटी बहन नसरीन जहां उर्फ गजाला एक हाउसवाइफ थी। शकला बेगम को फिल्मों से अलग हुए। काफी अरसा गुजर गया। लेकिन उन्होंने ऑफर मिलने पर भी कभी फिल्मों में दोबारा काम करने की इच्छा नहीं की। श्यामा वहीदा रहमान नंदा और जमीबीन जलील जैसी अदाकाराओं के साथ शकीला की दोस्ती की चर्चा बॉलीवुड में हुआ करती थी। जिंदगी के आखिरी पड़ाव में वे साइरा बानो और आशा पारिक के संपर्क में रही थी। 20 सितंबर 2017 को शकला बेगम ने दुनिया को अलविदा कह दिया। लेकिन उनकी यादें हमेशा हम सबके साथ बनी रहेंगी। 100 बार जन्म लेंगे। आपको यह वीडियो कैसा लगा हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताइएगा। अगर आपके पास अभिनेत्री शकीला बेगम से जुड़ी कुछ और जानकारी हो तो वह हमसे अवश्य शेयर कीजिएगा। अब दीजिए अपने होस्ट और दोस्त अभिषेक आनंद को इजाजत। नमस्कार। कब आंखें बहार करे मेरा श्रृंगार मुझे प्यार मिला। छ का बिना पैमाने दो हाय हमसे ना पूछो हम कहां चले ये दिल जहां ले चला वहां चले