एक फिल्म का टीजर रिलीज हुआ सोशल मीडिया पर उसे लेकर खूब गसिप हुई और मामला फिर सीधे दिल्ली हाई कोर्ट पहुंच गया और अब यह पूरी कंट्रोवर्सी पहुंच चुकी है सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे पर। कहानी है फिल्म काला हिरन की जिसे लेकर प्रोड्यूसर अमित जानी और सलमान खान के बीच लीगल बैटल और ज्यादा तेज़ हो गया है। सवाल सिर्फ एक टीज़ का नहीं है। यह मामला पर्सनालिटी राइट्स और क्रिएटिव फ्रीडम का भी है और इसके साथ ही इसमें अटैच है फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेशंस भी। जिसने अब सोशल मीडिया से लेकर मेन स्ट्रीम मीडिया तक कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
दरअसल फिल्म का टीजर आने के बाद सलमान खान की तरफ से इस पर आपत्ति जताई गई थी। आरोप है कि टीज़ में उनकी पर्सनालिटी को दिखाया गया है और उनसे जुड़े हुए रेफरेंस का इस्तेमाल किया गया है। टीज़ में सलमान खान की फिल्मों का भी जिक्र है जिसमें दबंग सिकंदर और इसके साथ ही सबसे बड़ा मामला जो साल 1998 में हुआ था काला हिरण मामला उसकी झलक फिल्म में देखने को मिलती है और यही विवाद की सबसे बड़ी वजह बनी है। इसके बाद सलमान खान की ओर से दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी।
कोर्ट ने 27 जुलाई को एक ऑर्डर पास किया था और मेकर्स को टीजर हटाने के लिए निर्देश दिए थे। कोर्ट ने माना था कि यह पर्सनालिटी राइट्स का उल्लंघन है और इस पर सवाल उठाता है और उनकी पब्लिक इमेज पर सीधा असर इसका पड़ रहा है। लेकिन अब कहानी में एक बड़ा ट्विस्ट आ गया है। फिल्म प्रोड्यूसर अमित जानी ने दिल्ली हाईकोर्ट के इस आर्डर को चैलेंज करते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा दिया है। उनकी तरफ से दायर अपील में सवाल उठाया गया है कि अगर किसी पब्लिक फिगर से जुड़े रियल लाइफ इंसिडेंस पर फिल्म बनाई जाती है तो क्या इसे पर्सनालिटी राइट्स के नाम पर रोक देना सही होगा?
प्रोड्यूसर यानी कि अमित जानी का आर्गुमेंट है कि पर्सनालिटी राइट्स को ऐसा टूर ना बनाया जाए जिससे क्रिएटिव एक्सप्रेशंस और इसके साथ ही पब्लिक डिस्कशन पर रोक लग जाए और यहीं से पूरा मामला और ज्यादा इंटरेस्टिंग हो जाता है क्योंकि काला हिरण की बात की जाए तो यह सिर्फ एक बॉलीवुड की स्टोरी नहीं है बल्कि साल 1998 का जो बहुत ज्यादा फेमस हुआ था काला हिरण मामला है और इसी से इंस्पायर होकर यह फिल्म बनाई गई है।
फिल्म में एक सुपरस्टार के खिलाफ चल रहे लीगल केस कोर्ट रूम प्रोसीडिंग की कहानी को हिस्सा बनाया गया है। वहीं दूसरी तरफ सलमान खान का पक्ष है कि उनकी आइडेंटिटी और इसके साथ ही पर्सनालिटी का इस्तेमाल किया गया है जो कि पूरी तरह से गलत है और इसके साथ ही प्रोड्यूसर का कहना है कि रियल इवेंट्स पर क्रिएटिव वर्क करना अभिव्यक्ति की आजादी का हिस्सा है। यानी कि अब सुप्रीम कोर्ट में सवाल सिर्फ टीजर हटेगा या नहीं इसका नहीं है। सवाल ये है कि आखिर किसी पब्लिक फिगर की रियल लाइफ स्टोरी को फिल्म में दिखाना कितना सही और कितना गलत है और आखिर इसकी सीमा कहां तक है? फिलहाल यह पूरा मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुका है और आने वाले वक्त में कुछ बड़ी अपडेट भी आ सकती है। अब देखना यह होगा कि सुप्रीम कोर्ट इस पूरे मामले पर अपना क्या रुख दिखाता है।