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पूर्व प्रधानमंत्री के बेटे ने एक झटके में गवाएं 78000000 रुपए, जानिए क्या है मामला।

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क्या आप भी डिजिटल धोखाधड़ी के शिकार हैं? एक गलत मैसेज और करोड़ों का नुकसान। पूर्व पीएम के बेटे को कैसे लगा दिया चूना? शातिर ठगों ने कैसे दिया इतना बड़ा धोखा? हैं इन ठगों से? आज हम एक ऐसी कहानी की बात करेंगे जो आपको सोचनेपर मजबूर कर देगी। कभी सोचा है कि जिस व्यक्ति की पहचान ही उसकीताकत हो, ठग उसी पहचान को चुराकर करोड़ों का खेल कर सकते हैं?

बैठे एक बड़े नेता के परिवार के साथ जो हुआ उसने साइबर सुरक्षा के दावों की धज्जियां उड़ा दी हैं। वो भी नेता कोई ऐसे-वैसे नेता नहीं हैं। पूर्व प्रधानमंत्री के बेटे हैं। जी हां, इंद्र कुमार गुजराल के बेटे और पूर्व राज्यसभा सांसद नरेश गुजराल साइबर ठगी का शिकार हुए हैं। सिर्फ उनका नाम नहीं बल्कि उनका डिजिटल चेहरा चुराया और कंपनी के खजाने से 7.8 करोड़ रुपए उड़ा लिए।

खास रिपोर्ट में देखिए आखिर कैसे एक मैसेज [संगीत] ने सब कुछ बदल दिया। यह वारदात किसी फिल्म की पटकथा जैसी लगती है। लेकिन हकीकत में यह 12 जून से 16 जून के बीच का वो काला अध्याय है जिसने गुजराल परिवार को हिला दिया। शातिर स्कैमर्स ने सोशल मैसेजिंग ऐप पर नरेश गुजराल की फोटो [संगीत] चुराई और उनका हूबहू दिखने वाला एक फर्जी अकाउंट खड़ा कर दिया। निशाने पर था उनका वो कर्मचारी जिसके पास कंपनी के फाइनेंशियल एक्सेस की चाबी थी। इतनी सफाई से बात की कि किसी को शक ही नहीं हुआ। मैसेज आया, अर्जेंट बिजनेस डील है, आरटीजीएस करना है। कर्मचारी को लगा कि उनके बॉस का आदेश है।

बिना पुष्टि किए चार दिनों के भीतर एक-एक करके चार बड़े ट्रांजैक्शन कर दिए गए। दफ्तर में हिसाब-किताब का मिलान हुआ तब तक 7.8 करोड़ रुपए ठगों के खाते में पहुंच चुके थे। ईएफआइआर दर्ज की है और आनन-फानन में 4.28 लाख रुपए फ्रीजकराए हैं।

लेकिन बड़ा सवाल यह है कि बाकी के करोड़ों का क्या हुआ? साइबर एक्सपर्ट्स इसे इंपर्सोनेशनफ्रॉड कहते हैं। ठग अब आपकी सोशल मीडिया की डीपी, आपका बात करने का लहजा और आपकी कंपनी की जानकारीतक का इस्तेमाल कर सकते हैं। अक्सर विदेश से या किसी सुरक्षित ठिकाने से यह नेटवर्क चलाते हैं। इनके पास ना केवल आपकी जानकारी होती है बल्कि यह समय का भी सही चुनाव करते हैं जिससे आप हड़बड़ी में गलती करें।

दोस्तों, इस घटना ने एक बात तो साफ कर दी है कि साइबर ठगी का शिकार होने के लिए किसी का अनपढ़ होना जरूरी नहीं है। आप कितने भी बड़े पद पर हो, कितने भी पढ़े-लिखे हो, सतर्कता ही एकमात्र बचाव है। अगर आपके पास भी किसी बड़े अधिकारी, बॉस या परिवार के किसी सदस्य का कोई आपातकालीन संदेश आए जिसमें पैसों की मांग हो तो यह तीन काम जरूर करें। क्रॉस चेक करें।

मैसेज पर भरोसा ना करें। सीधे उस व्यक्ति को फोन लगाएं। जल्दबाजी ना करें। ठग हमेशा अभी के अभी का दबाव बनाते हैं। रुकें और सोचें।

गोपनीयता, अपने फाइनेंशियल एक्सेस को सुरक्षित रखें और हर किसी को पासवर्ड या ट्रांजैक्शन की जानकारी ना दें। ऐसे ही ठगों को हाल-फिलहाल में सीजेआई सूर्यकांत ने फटकार लगाई थी।

उन्होंने साइबर ठगों के पूरे नेटवर्क की धज्जियां उड़ाते हुए कहा था, “तुम लोग वह परजीवी हो जो आम निवेशकों को अपने जाल में फंसाते हो और उनसे करोड़ों रुपए ठग लेते हो। अपराधियों के प्रति हमें बहुत सख्त होना ही पड़ेगा। तुम लोगों का कोई एक ठिकाना नहीं होता।

तमिलनाडु में बैठकर किसी मासूम के साथ फ्रॉड करते हो और पुलिस के पहुंचने से पहले ही जम्मू भाग जाते हो। ऐसे शातिर दिमाग को खुला नहीं छोड़ा जा सकता। समाज का भला इसी में है कि तुम जैसे लोग जेल के अंदर ही बंद रहो। याद रखिए, ठगों की नजर हर उस इंसान पर है जो ऑनलाइन है। आपका एक सेकंड का ठहराव आपको करोड़ों के नुकसान से बचा सकता है।

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