नमस्कार, मेरा नाम है अंशु शर्मा और आप देख रहे हैं दैनिक जागरण। देश भर में जारी नीट विवाद लीक विवाद के बीच शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना इस्तीफा सौंप दिया है। सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर इसकी पूरी जानकारी देते हुए उन्होंने साफ लिखा है कि पिछले 10 दिनों के घटनाक्रम से उनका मन अत्यंत व्यथित और दुखी था। उन्होंने यह भी साफ कहा कि वह बिल्कुल नहीं चाहते थे कि कोई भी राष्ट्र विरोधी ताकतें इस स्थिति का फायदा उठाएं
या देश के किसी भी युवा का भविष्य किसी भी तरह की कानूनी पेजिदगियों में उलझे। अपने त्यागपत्र में धरे प्रधान ने बताया कि वे पिछले चार दशकों से अधिक लंबे वक्त से छात्र, शिक्षक और शिक्षा सुधार के लिए पूरी तरह से समर्पित रहे। उनका हमेशा से यही अटूट विश्वास रहा है कि एक सशक्त समावेशी और दूरदर्शी शिक्षा व्यवस्था की किसी भी सशक्त राष्ट्र की मुख्य आधारशिला होती है। वे देश के सभी युवाओं की आकांक्षाओं, भावनाओं और उनकी सभी न्यायोचित अपेक्षाओं का बहुत गहरा सम्मान करते हैं। भारत की युवा पीढ़ी के सपनों को साकार करना हम सभी के राजनीतिक और जीवन का एक बड़ा नैतिक संकल्प रहा है और प्रधानमंत्री मोदी के बहुत ही दूरदर्शी नेतृत्व में राष्ट्र की सेवा करने का
जो बहुमूल्य अवसर उन्हें प्राप्त हुआ उसके लिए उन्होंने प्रधानमंत्री जी का तहे दिल से आभार प्रकट किया है। धर्मेंद्र प्रधान ने नीट पेपर लीक की इस पूरी घटना का जिक्र करते हुए कहा कि भारत सरकार ने इसको तुरंत संज्ञान में लेते हुए इसकी जांच सीबीआई को सौंप दी थी और परीक्षा को रद्द करके दोबारा परीक्षा की तिथि घोषित की गई थी। उन्होंने यह भी बताया कि पेपर लीक को हमेशा के लिए रोकने के उद्देश्य से अब अगले साल से इस परीक्षा को सीबीटी मोड में कराने का एक बड़ा निर्णय लिया गया है। शिक्षा मंत्री ने यह भी कहा था कि पहले ही दिन से उन्होंने इस पूरी बात की नैतिक जिम्मेदारी ली और इस कठिन परिस्थिति से कभी मुंह मोड़ा नहीं है। उनका मुख्य संकल्प यही था कि हम किसी भी मेधावी छात्र की संभावना को किसी भी परीक्षा माफिया के कारण खराब नहीं होने देंगे और किसी भी
छात्र के साथ कोई अन्याय नहीं होने देंगे। इसके बाद सभी छात्रों, अभिभावकों और माता-पिता के पूर्ण सहयोग से 21 जून 2026 को यह परीक्षा पूरी तरह से संपन्न हुई थी। इसके बाद 16 जुलाई को घोषित किए गए नीट यूजी के परिणाम बहुत ही संतोषजनक रहे। जिसमें गरीब पृष्ठभूमि से आए कई मेधावी छात्रों को भी बड़ी सफलता हासिल हुई। परंतु इस दौरान भी कई छात्रों को गुमराह करने के लिए जिम्मेदार पदों पर बैठे कुछ लोगों ने जानबूझकर बाधा डालने की कोशिश की। जिससे उनका मन अत्यंत व्यतीत हुआ है। वे हमेशा से ही हमारे प्रजातंत्र की असली शक्ति में अटूट विश्वास रखने वाले रहे हैं और देश के युवाओं की आकांक्षाओं, सपनों और अपेक्षाओं का हमेशा से गहरा सम्मान करते आए हैं। धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि देश के युवा केवल भारत का आने वाला भविष्य ही नहीं है बल्कि एक नए और पूरी तरह से विकसित भारत के बहुत बड़े वाहक निर्माता और भविष्य के असली शिल्पकार हैं। पिछले 10 दिनों का सारा घटनाक्रम देखकर उनका मन सचमुच बहुत दुखी हुआ है और यह उनके लिए किसी भी प्रकार की व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का विकल्प भी बिल्कुल भी विषय नहीं है। भारत की असली युवा शक्ति ही देश की सबसे बड़ी ताकत है और वे देश की इस युवा शक्ति को किसी भी तरह के भ्रम के कुचक्र में बिल्कुल भी फंसने नहीं देना चाहते। यही उनका सबसे बड़ा संकल्प है। जंतरमंतर पर और देश भर में जो वर्तमान स्थिति बनी है वे बिल्कुल नहीं चाहते कि इस स्थिति का कोई भी राष्ट्र विरोधी ताकतें गलत लाभ उठाएं।
देश की एकता हमेशा बनी रहे। भारत के एक भी विद्यार्थी का भविष्य किसी भी कानूनी पेचदगियों में ना उलझे और हमारे सभी बच्चे अपना सारा समय केवल पढ़ाई में लगाएं और अपने करियर को बनाने पर ही पूरा फोकस करें। इन्हीं सभी बातों पर गंभीरता से विचार करते हुए उन्होंने अपना त्यागपत्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेज दिया है। अंत में उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन, विश्वास और निरंतर सहयोग के लिए अपनी हार्दिक कृतज्ञता व्यक्त की है और मंत्री परिषद के सभी सहयोगियों, मंत्रालय के अधिकारियों और उन सभी लोगों का आभार व्यक्त किया जिसके साथ उन्होंने काम किया है। उन्होंने कहा कि राष्ट्र सेवा ही उनके लिए जीवन की सर्वोच्च प्राथमिकता है और वे भविष्य में भी प्रभु श्री जगन्नाथ के आशीर्वाद से भारत माता उड़ीसा की जनता और देश के युवाओं की सेवा के लिए पूरी तरह समर्पित रहेंगे। तो यह थी धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की खबर। इस खबर पर आपकी क्या राय है? हमें कमेंट्स करके जरूर बताइए। बाकी देश दुनिया की तमाम बड़ी खबरों के लिए देखते रहिए दैनिक जागरण।