सीता के पति का नाम ले-लेके नीता के पति का काम कर रहे हैं। [हौसला बढ़ाने की आवाज़] यह वीडियो दिल्ली के जंतर-मंतर का है। जहां पर्यावरण विद और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक पिछले 19 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे हैं। 15 जुलाई को स्टैंड अप कॉमेडियन कुणाल कामरा भी सोनम वांगचुक से मिलने जंतर-मंतर पहुंचे। उन्होंने मंच से प्रदर्शनकारियों को संबोधित किया। लेकिन अपने भाषण के दौरान उन्होंने एक ऐसा बयान दिया जिसने अब सोशल मीडिया पर नई बहस छेड़ दी कुणाल कामरा ने कहा, वह एक बार फिर से सुन लीजिए। का नाम ले-लेके नीता के पति का काम कर रहे हैं। [हौसला बढ़ाने की आवाज़] इस बयान के सामने आने के बाद पूरे आंदोलन का फोकस बदलता नजर आया।
सीजेपी यानी कि कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन से ज्यादा अब कुणाल कामरा की इस टिप्पणी पर चर्चा हो रही है। सोशल मीडिया पर कई लोग दावा कर रहे हैं कि इस बयान में भगवान राम और उद्योगपति मुकेश अंबानी की ओर इशारा [संगीत] किया गया है। इसके बाद इस बयान की क्लिप तेजी से वायरल हो गई और इसे लेकर बहस तेज हो गई है। वीडियो वायरल होते ही हजारों लोगों ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया देनी शुरू कर दी। ने आरोप लगाया कि कुणाल कामरा ने एक बार फिर हिंदू देवी-देवताओं का मजाक उड़ाया है। कुछ यूजर्स ने लिखा कि जब मुद्दा शिक्षा व्यवस्था और सोनम वांगचुक के आंदोलन का है तब भगवान राम और माता सीता का नाम लेने की क्या जरूरत थी? कई लोगों ने कहा कि ऐसे बयान आंदोलन के असली मुद्दे से लोगों का ध्यान भटका देते हैं। कुछ यूजर्स ने तो कुणाल कामरा के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की भी मांग की। वहीं कुछ लोगों ने उनका बचाव भी किया और
कहा कि उनके बयान को अलग तरीके से पेश किया जा रहा है। यानी सोशल मीडिया पर इसे लेकर दो राय साफ नजर आ रही है। उस आंदोलन की जिसकी वजह से यह पूरा विवाद [संगीत] खड़ा हुआ। सोनम वांगचुक पिछले 19 दिनों से भूख हड़ताल पर है। उनका कहना है कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर कोई ठोस फैसला नहीं लेती तब तक वह अपना अनशन खत्म नहीं करेंगे। लगातार अनशन की वजह से उनकी तबीयत जरूर कमजोर [संगीत] हुई है, वजन भी कम हुआ है। लेकिन डॉक्टरों की निगरानी में उनका इलाज और जांच लगातार चल रही है। इस बीच कई बड़े नेता, सामाजिक कार्यकर्ता उनसे मिलने पहुंच चुके हैं। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने उनके समर्थन में पत्र लिखा। भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर आजाद भी जंतर-मंतर पहुंचे। इससे पहले अभिनेत्री स्वरा भास्कर भी अपना समर्थन दे चुकी हैं। वहीं सोशल मीडिया पर कई सेलिब्रिटी भी समर्थन देते नजर आए। पूरब झा, राघव जुयाल और विशाल ददलानी। कामरा की मौजूदगी और उनका यह बयान पूरे आंदोलन की सबसे ज्यादा चर्चा वाली बात बन गया है। सोनम वांगचुक ने लोगों से अपील की है कि अगर कोई उनका समर्थन करना चाहता है,
तो उनसे अनशन खत्म करने की अपील करने के बजाय 20 जुलाई को होने वाले शांतिपूर्ण संसद मार्च में उनका कहना है कि अगर वह अभी अनशन तोड़ देते हैं तो सरकार को गलत संदेश जाएगा कि बिना जवाब दिए भी आंदोलन खत्म कराया जा सकता है। गौर करने वाली बात यह है कि भूख हड़ताल का 19वां दिन होने के बावजूद सरकार की तरफ से अब तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। आंदोलनकारी लगातार मांग कर रहे हैं कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें
और परीक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय की जाए। फिलहाल इस पूरे मामले में दो बातें सबसे ज्यादा चर्चा में है। सोनम वांगचुक का लगातार जारी अनशन और दूसरी कुणाल कामरा का विवादित बयान जिसने सोशल मीडिया पर नई बहस छेड़ दी है। नजर 20 जुलाई को होने वाली संसद मार्च पर है। देखना होगा कि सरकार इस आंदोलन पर क्या रुख अपनाती है और कुणाल कामरा के बयान पर आगे क्या कार्रवाई होती है। मामले पर आपकी क्या राय है? क्या कुणाल कामरा के बयान से आंदोलन का मुद्दा पीछे छूट गया या फिर या फिर इसे बेवजह विवाद बनाया जा रहा है। आपकी राय हमें कमेंट करके जरूर बताइए और देखते रहिए प्रभात खबर। मेरा नाम है कीर्ति। prabhatkhabar.com विश्वास वही, रफ्तार नई। [संगीत]