सेंसर बोर्ड की कैंची को लेकर कई मशहूर किस्से हैं। हाल ही में तिग्मांशु धूलिया ने फिल्म इंडस्ट्री और सेंसर बोर्ड के बारे में बात की, जिसमें उन्होंने दिलीप कुमार की फिल्म ‘गंगा जमुना’ से जुड़ा एक संस्मरण साझा किया। दोस्तों, वीडियो में आगे बढ़ने से पहले कृपया मेरे चैनल को सब्सक्राइब करें और बेल आइकन दबाएं। तो चलिए दोस्तों, वीडियो शुरू करते हैं।सेंसर बोर्ड के काम करने के तरीके पर हाल ही में नहीं, बल्कि बरसों से सवाल उठते रहे हैं। हाल ही में
फिल्ममेकर तिग्मांशु धूलिया ने भारतीय सिनेमा में सेंसरशिप के इतिहास पर बात की। उन्होंने उस घटना को याद किया जब सेंसर बोर्ड दिलीप कुमार की फिल्म के लिए एक बाधा बन गया था। उन्होंने दिलीप कुमार के मुस्लिम होने की वजह से उन्हें “हे राम” कहने से रोकने की कोशिश की थी। यह मामला इतना बढ़ गया कि पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू तक जा पहुंचा।’द वायर’ के एक कार्यक्रम में तिग्मांशु धूलिया ने मीडिया और फिल्म इंडस्ट्री की स्थिति पर चर्चा की।
उन्होंने आज़ादी के आंदोलन में फिल्मों की भूमिका को भी याद किया। उन्होंने बताया कि उस समय के निर्देशकों और कहानीकारों ने उन मुद्दों को कैसे उठाया जिन्होंने आज़ादी की लहर को मजबूत किया। जब आज़ादी की लड़ाई चल रही थी, तो फिल्ममेकरों ने ऐसी फिल्में बनाईं जिनसे लोगों को प्रेरणा मिली; गीतकारों ने ऐसे गाने रचे जो आज़ादी की लड़ाई के लिए बहुत अहम साबित हुए। अंग्रेज इन फिल्मों और गानों को समझ नहीं पाए और संदेश आसानी से जनता तक पहुंच गया।तिग्मांशु धूलिया ने याद किया कि कैसे दिलीप कुमार की मशहूर फिल्म ‘गंगा जमुना’ के समय सेंसर बोर्ड ने एक अजीबोगरीब आपत्ति जताई थी। उन्होंने आपत्ति जताई कि दिलीप कुमार के किरदार ‘गंगा’ ने मरते समय “हे राम” कहा। चूंकि अभिनेता एक मुस्लिम हैं, इसलिए उन्होंने सवाल किया कि वह ऐसा कैसे कह सकते हैं। दिलीप कुमार की फिल्म को लेकर विवाद बढ़ने लगा, तो मेकर्स ने समझाया कि दिलीप कुमार एक हिंदू किरदार ‘गंगा’ का रोल निभा रहे हैं
और उनके लिए यह डायलॉग जरूरी था। लेकिन सेंसर बोर्ड इसे मानने के लिए तैयार नहीं था।यह बहस इतनी बढ़ गई कि मामला प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू तक पहुंच गया। तब जवाहरलाल नेहरू ने बीच में आकर फिल्म देखी। उन्होंने तब कहा था कि इसमें कोई समस्या नहीं है।तिग्मांशु धूलिया ने अपना खुद का अनुभव भी साझा किया। उन्होंने बताया कि उन्होंने साल 2017 में ‘राग देश’ बनाई थी। यह राज्य सभा टीवी के लिए बनाई गई थी।
यह फिल्म इंडियन नेशनल आर्मी (INA) के मुकदमों और INA के अधिकारियों पर आधारित थी। जब फिल्म सेंसर बोर्ड के पास गई, तो निर्देशक ने मुझे गले लगाया और कहा, “क्या फिल्म बनाई है आपने!” एक भी कट नहीं लगाया गया। लेकिन बाद में पता चला कि फिल्म को रोक कर रखा गया था।इतना ही नहीं, उन्हें खुद भी अपनी पेमेंट के लिए लंबे समय तक इंतजार करना पड़ा। उन्हें लगभग 7 साल बाद अपनी फीस मिली। वह भी तब जब उन्होंने बहुत मिन्नतें कीं।तो दोस्तों, आज के वीडियो को यहीं समाप्त करते हैं। मिलते हैं अगले वीडियो में। तब तक आप सभी को अलविदा। अपना ख्याल रखें।