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61 लाख का चाय-नाश्ता? स्कै!म की इस कहानी ने सरकार को हिला दिया।

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61 लाख का चाय नाश्ता कोई कैसे कर सकता है? मैडम ने तो दिया हिसाब किताब। कहते हैं कि आटे में नमक जितना हो तो दुनिया पता क्या करती है? पचा लेती है। लेकिन छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में तो पूरा का पूरा आटा ही में गूंथ दिया गया है। माने सहाना गया है। यहां के एक बैंक में इतने महान भूखड़ हैं। हां, महान है।

भूखड़ कि 61 लाख का खाना और नाश्ता गटक गया। भाई जैसे इनके पास इंसान का पेट नहीं बल्कि समुद्र हो। चौकिए मत। चम चौकिए मत। आपको कोई काल्पनिक कहानी नहीं बता रहा हूं। सब दस्तावेज में लिखित आया है। उसका बता रहा हूं। बल्कि वास्तव में ऐसा ही दिलचस्प मामला सामने आए जिसे सुनकर आपका दिमाग चकरा जाएगा। पूरा खेल आपको विस्तार से बता देता हूं।

ये बिल्हा ब्रांच की कैशियर हैं। वैसे तो इनका नाम तेजवत थिरा पत्तमा है। थिरा पत्तमा लेकिन कागजों पर इन्होंने कुछ ऐसा करिश्मा कर दिखाया है जिसके लिए आप इन्हें लेडी नटवरलाल भी कह सकते हैं। हां [संगीत] भाई बहुत गजब का काम किया है इन्होंने। यह जिस बैंक में काम करती हैं, जिस बैंक से इनका घर चलता है, इन्होंने उसी बैंक को चूना लगाने की साजिश रची है और ₹ करोड़ 6 लाख रुपयों से ज्यादा का घोटाला किया है और इसके लिए जेल की हवा भी खा रही हैं। क्योंकि इनका कहना है कि करोड़ों रुपया में इन्होंने बैंक वालों का पेट भरा है और मरम्मत का काम करवाया है। इनका पूरा खेल आपको बताऊंगा।

लेकिन जिस दो करोड़ को कमाने में पूरी जिंदगी निकल जाती है। आखिर इतने बड़े अमाउंट कोइन्होंने इतनी जल्दी कैसे निकाल लिया? चलिए सबसे पहले आपको यह बता देता हूं। 24 दिसंबर 2024 को तीन बार में कुल 94 लाख 6956 निकाले गए। देख लीजिए पैसा निकल रहा है। इसके बाद 26 दिसंबर 2024 को तीन बार में ₹8954195 निकाले गए और अंत में 30 दिसंबर 2024 को ₹214349 निकाले गए।

जब आप इन पूरे पैसों को जोड़ेंगे तो आंकड़ा ₹ करोड़ 637600 तक पहुंचेगा। जब इतने कम समय के अंदर इतने ज्यादा पैसे निकाले गए तो बड़े अधिकारियों का दिमाग ठनका। उन्होंने मैडम जी से इस भारी भरकम रकम का हिसाब मांगा। तो जवाब क्या मिला जानते हैं? सुनकर आपके होश उड़ जाएंगे। एक बार ध्यान से सुनिएगा।

इन पैसों का हिसाब देते हुए आरोपी ने अनोखे बहानों की लिस्ट पेश कर दी और बताया कि खानेपीने और नाश्ते में करीब ₹61 लाख खर्च हो गया। ₹1 लाख का नाश्ता, पानी, चाय ₹1 लाखों का। सोचिए ऐसा लगता है जैसे दाल, चावल और चाय, नाश्ता नहीं बल्कि सोना चांदी खाया जा रहा हो। भाई साहब इतना खाना तो शायद ग्रेट खली भी ना खा पाए। और ग्रेट खली क्या? इतने में तो पूरे पाकिस्तान का कैबिनेट खा लेता होगा। जितना आएगा टेक्निक बात की जा रही है।

और सुनिए इतना ही नहीं। आगे का हिसाब देते हुए आरोपी मैडम ने कहा कि संपत्ति के रखरखाव और मेंटेनेंस में ₹50 लाख खर्चा आया है। जबकि बैंक जिस मकान में चल रहा था वह किराए का। इसके अलावा भी बाकी पैसों को बैंक से जुड़े अलग-अलग खर्च में दिखाया गया है जो औसत खर्च की तुलना में बहुतज्यादा है। पूरे मामले को लेकर हमारे सहयोगी आशीष दुबे ने एक रिपोर्ट भेजी है। आशीष की रिपोर्ट देखिए। एंटी करप्शन बिलासपुर की टीम ने एसबीआई ब्रांच बिलहा की एक महिला केशियर अधिकारी को गबन के मामले में गिरफ्तार किया है। करोड़ के एक घोटाले का आरोप है।

उस चालान में सिर्फ ₹1 लाख का जो भोजन है, जो खाना है, जो काजू किशमिश है, जो समोसे हैं, उसका जिक्र किया गया है। तो सवाल इस बात को लेकर के है कि आखिर कोई बैंक या ब्रांच ₹61 लाख का खाना आखिर कैसे खा सकता है?

मेरे हाथ में यह जो दस्तावेज है इस दस्तावेज में उन सारी बातों का जिक्र है जिसके तहत जो है ब्यूरो की टीम ने पूरे मामले की जानकारी कोर्ट में दी है। पुलिस की शिकायत यहीं के ब्रांच मैनेजर ने और से की थी। जिसके बाद यह मामला फूट गया है। कोर्ट में चालान पेश कर दिया गया।

अब इसका खुलासा कैसे हुआ? चलिए यह भी आपको बता देता हूं। खातों में लगातार गड़बड़ी और संदिग्ध लेनदेन दिखने पर बैंक मैनेजमेंट को शक हुआ तो विभागीय जांच शुरू की गई और बेल ब्रांच के मैनेजर पीयूष बारा ने एसीबी में शिकायत दर्ज की और पैसों के हेरफेर का पूरा डाटा दिया। इसके एफआई जिसके बाद क्या हुआ? दर्ज करके पूछताछशुरू की गई। फिर महिला कैशियर तेजवत को गिरफ्तार कर लिया गया और बैंक के सभी खर्च का ब्यौरा लेकर टीम ने जब छानबीन की तो घोटाले की पूरी परत खुल गई।

जांच में सामने आया कि 19 दिसंबर 2024 से 2 जनवरी 2025 के बीच बैंक के अंदरूनी खर्च वाले खाते में से करोड़ों रुपए निकाले गए हैं और इन पैसों को सीधे नानिकालकर अलग-अलग बैंकों के खाते में डाला गया है। फिर गड़बड़ी छिपाने के लिए सिस्टम में फर्जी एंट्रियां भी की गई है ताकि घपलेबाजी पकड़ में ना सके।

क्या कह रहे हैं एसीबी के अभियोजन अधिकारी राजीव दुबे सुनिए क्या किया यह ₹ करोड़ ₹ करोड़ 637000 लगभग थे इसने क्या किया इन रुपयों को जो है हमारे जो बैंक के कुछ अंदरूनी खर्च होते हैं जैसे बैंक के जो है फ़ूड में होते हैं आपके पेयजल में होते हैं संपत्ति रखरखाव में होते हैं तो उसने क्या फ़ूड और बेवरेज में कुल ₹61 लाख उसने उसमें दिखा दिए खर्च में जो है और जो है 50 लाख उसने जो है संपत्ति के रखरखाव में दिखा दिया किराए में दिखा दिया जबकि जो है बैंक का जो मतलब भवन है वो किराए में था।

उसके बाद मतलब जो है उसके बाद भी उसके मेंटेनेंस में दिखा रहा है पैसा जो है। इस प्रकार उसने क्या किया अन्य बैंक के ऐसेसे मददों में जो है पैसे को उसने खर्च दिखा दिया। इस प्रकार अपने को बचाने का प्रयास किया। लेकिन इसकी जो एफआईआर हुई की जांच में जो है सब कुछ क्लियर हो गया और उसके बाद इसको जो है 26 दो को गिरफ्तार करके जो है और विवेचना करके अभी 26 मई को इसके खिलाफ अभियोग पत्र पेश किया गया है। अभी विवेचना जारी है और इसके साथ जो अन्य लोग इसमें लिप्त पाए गए हैं।

मतलब लिप्त पाए जाएंगे जिनके खिलाफ सागत किया जा रहा है और सा पर्याप्त पाए जाने पर इनके खिलाफ जो केस लिया जाएगा। चलिए भैया 61 लाख का खाना पीना मत खाइए। कम खाइए सब पता चल जाता है। इतना बड़ा-बड़ा खाएंगे खाना इतने पैसे का तो ठीक नहीं है।

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