Cli

अभिजीत दिपके का PM मोदी को खुला पत्र, कर दी होश उड़ा देने वाली मांग।

Uncategorized

क्या देश के अलग-अलग कोनों में चल रहा प्रदर्शन अब पीएम मोदी को पत्र लिखने तक पहुंच गया है? आखिर किसने लिखा पीएम मोदी को पत्र?आखिर क्या मांग की गई है पत्र लिखकर?

यह सब सवाल इसीलिए हैं क्यों क्योंकि देश में पेपर लीक परीक्षा व्यवस्था पर उठते सवाल और छात्रों की बढ़ती परेशानियों के बीच एक ऐसा खुला पत्र सामने आया है जिसने नई बहस छेड़ दी है। खुद को छात्रों की आवाज बताने वाली कोपरो जनता पार्टी यानी कि सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक भावनात्मक पत्र लिखा है।

इस पत्र में उन्होंने छात्रों की , परीक्षा व्यवस्था की खामियों और जवाबदेही की मांग को लेकर कई बड़े सवाल उठाए हैं। इतना ही नहीं 20 जून को दिल्ली के जंतरमंतर पर फिर से प्रदर्शन का ऐलान किया है। आखिर पत्र में क्या लिखा है? क्या है मांगे? और क्यों चर्चा में है यह

देश में पिछले कुछ वर्षों में पेपर लीक की घटनाएं लगातार सुर्खियों में रही। कई बड़ी परीक्षाएं रद्द हुई। लाखों छात्रों को दोबारा तैयारी करनी पड़ी और कुछ युवाओं ने सोशल मीडिया पर अपनी मानसिक परेशानी भी खुलकर रखी और कई ऐसे मामले भी सामने आए जो झोर रहे हैं।

इसी माहौल के बीच अभिजीत दीपके का यह पत्र सामने आया है जिसने छात्रों की चिंता को एक बार फिर राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे गए पत्र में अभिजीत दीपके ने कहा कि देश के युवा गंभीर मानसिक दबाव से जूझ रहे हैं।

उनका दावा है कि हाल के हफ्तों में कई छात्रों ने की है और इनमें कुछ घटनाएं बहुत कम समय के भीतर हुई हैं। पत्र में कहा गया है कि बार-बार परीक्षाएं होने, अनिश्चितता और भविष्य को लेकर बढ़ती चिंता ने छात्रों पर अतिरिक्त बोझ डाल दिया है।

दीपके ने अपने पत्र में उन परिवारों का भी जिक्र किया जो अपने बच्चों की पढ़ाई के लिए सालों साल की बचत को खर्च कर चुके हैं। कई परिवारों ने शिक्षा के लिए कर्ज लिया।

लेकिन जब परीक्षा प्रक्रिया जो पूरी प्रोसेस है वह विवादों में फंसी या दोबारा परीक्षा की स्थिति बनी तो उनके सामने आर्थिक और मानसिक दोनों तरह की चुनौतियां खड़ी हो गई। पत्र में दावा किया गया है कि ऐसे परिवारों को तत्काल राहत और सहायता की जरूरत है। यही वजह है कि पत्र में सरकार से मांग की गई है कि जिन परिवारों ने ऐसे दर्दनाक हालात का सामना किया है उन्हें आर्थिक सहायता दी जाए।

साथ ही साथ परीक्षा व्यवस्था में सुधार और जिम्मेदारी तय करने के लिए ठोस कदम उठाए जाए। पत्र का सबसे बड़ा संदेश यही है कि छात्रों का भरोसा वापस लाने के लिए केवल बयान नहीं बल्कि जमीन पर बदलाव दिखाए जाए। अभिजीत दीपकी ने अपने पत्र में यह भी कहा है कि छात्रों और इसी के साथ अभिभावकों का विश्वास तभी मजबूत होगा जब व्यवस्था में जवाबदेही दिखाई देगी। उनके मुताबिक अगर लगातार सामने आ रही समस्याओं पर समय रहते कारवाई एक्शन नहीं हुआ तो युवाओं के बीच निराशा और बढ़ सकती है।

उन्होंने यह भी कहा कि देश का भविष्य माने जाने वाले छात्रों की युवाओं की मानसिक सेहत को प्राथमिकता देना बेहद ज्यादा जरूरी है। इसी मुद्दे को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी ने सीजेपी ने 20 जून को दिल्ली के जंतरमंतर पर फिर से प्रदर्शन का ऐलान किया है। पार्टी का कहना है कि देश के अलग-अलग राज्यों से छात्र वहां पहुंचेंगे और परीक्षा व्यवस्था में सुधार, पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग को फिर से दोहराएंगे। पोस्टर में से चलो जंतरमंतर अभियान का नाम दिया गया है जो उन्होंने सोशल मीडिया पर शेयर किया है।

हालांकि इस पूरे मामले में सरकार की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लेकिन इतना जरूर है कि छात्रों की मानसिक सेहत, परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता और पेपर लीक जैसे मुद्दे लगातार चर्चा का विषय बने हुए हैं।

आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा बेहद ज्यादा कि इस पत्र और प्रस्तावित प्रदर्शन का कितना असर पड़ता है और क्या छात्रों की मांगों पर कोई ठोस पहल होती है।

वहीं दूसरी ओर यह भी देखना होगा कि इस खुली चिट्ठी और जंतरमंतर पर प्रदर्शन के बाद क्या कोई बदलाव कोई बड़ा कदम उठाया जाता है या फिर नहीं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *