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करिश्मा कपूर की मां बबीता कपूर 35 साल से क्यों घर में है कै!द ?

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बेखुदी में सनम उठ गए जो कदम आ गए। आज यह दास्तान है भारतीय हिंदी सिनेमा के गुजरे और सुनहरे दौर की एक ऐसी अभिनेत्री की जिसकी खूबसूरती दिलकश अदाओं ने हिंदी सिनेमा के साथ-साथ पूरे विश्व को अपना दीवाना बनाया। आओ हुजूर तुमको सितारों में ले चल। बला की खूबसूरत इस अभिनेत्री ने भारतीय हिंदी सिनेमा में अपने खूबसूरती और मनमोहक अंदाज से सजे अभिनय के जादू से हिंदी सिनेमा का वो मुकाम हासिल किया जिसको आज तक इनके नाम से ही याद किया जाता है। लेकिन दोस्तों क्या आप जानते हैं कि इतनी खूबसूरत और आकर्षित इस अभिनेत्री की जिंदगी में ऐसा क्या हुआ था कि इस अभिनेत्री को अपने जीवन में प्यार करने की वो सजा मिली जिसकी वजह से ये अभिनेत्री जिंदगी भर तड़पती रही घर परिवार के लिए। आओ मेरे खरीबा। अब और दोस्तों जिस प्यार को हासिल करने के लिए इस अभिनेत्री को जिंदगी में अपना स्टारडम शोहरत रुतबा सब कुछ छोड़कर चुकानी पड़ी थी जिंदगी की वो भारी कीमत जिसके दर्द से आज तक बाहर नहीं आ पाई है यह अभिनेत्री और क्या आप जानते हैं कि जिस प्रेमी के प्यार में पागल होकर यह अभिनेत्री भिड़ गई भारतीय हिंदी सिनेमा के उस परिवार से जिसकी बदौलत हिंदी सिनेमा का वजूद जिंदा है। उसी प्रेमी ने इस खूबसूरत अभिनेत्री की जिंदगी को बना दिया जहन्नुम। तुम अपने दिल को हल्का करने के लिए चाहो तो मुझे धोखेबाज वादे का झूठा खुद। जो जी में आए कह सकती हो। मैं सुन लूंगा। दोस्तों क्या आप जानते हैं कि इस अभिनेत्री ने कैसे कपूर खानदान में अपने प्यार की वो आग लगाई कि इस परिवार की तीन पीढ़ी खड़ी हो गई एक दूसरे के सामने। मुझे इस घर में कभी स्वीकार नहीं किया जाएगा। कोई तुम्हें स्वीकार करे या ना करे। मैं तुम्हें स्वीकार करता हूं। बर्दाश्त की भी एक हद होती है। मुझे किसी की परवाह नहीं। आओ।

क्यों इस परिवार में इस अभिनेत्री की खातिर दादा, बाप, बेटा हो गए एक दूसरे के खिलाफ। अगर अगर इस लड़की ने अपनी मर्जी से उस लड़की के साथ शादी की तो मैं कह देता हूं मैं यह घर छोड़कर चला जाऊंगा। 19 साल अपने पति से दूर रहने वाली इस खूबसूरत और अभागगन अभिनेत्री की जिंदगी में ऐसा क्या हुआ था कि इस अभिनेत्री को अपनी दोनों बेटियों को हिंदी सिनेमा की हीरोइन बनाने के लिए लड़ना पड़ा अपने ही परिवार से इज्जत और बेइज्जती का युद्ध। अब चले जाइए यहां से। आप मेरी जिंदगी में आंख लगाने आए हैं। मुझे बदनाम करना चाहते हैं। और क्यों आगे चलकर उन्हीं बेटियों के जीवन को बर्बाद कर दिया इस अभिनेत्री ने। क्यों इस अभिनेत्री की बड़ी बेटी को नीलाम कर दिया गया सुहाग रात के दिन? तो दूसरी बेटी ने बदल लिया अपना धर्म। बताएंगे और भी बहुत कुछ इस शानदार, यादगार और किस्मत की मारी इस अभिनेत्री की जिंदगी के बारे में। आप बने रहिए हमारे साथ वीडियो के अंत तक। अकेले हैं चले आओ जहां हो नमस्कार आदाब आभार दोस्तों आज हम अपने इस शो में बात करने जा रहे हैं एक ऐसी नायिका की जिसने हिंदी सिनेमा के रूपले पर्दे पर अपने छोटे से फिल्मी सफर से वो छाप छोड़ी जिसको लोग आज तक याद करते हैं। अपने लाजवाब अभिनय, मनमोहक खूबसूरती, दिलकश अदाओं के आकर्षण में इस अभिनेत्री ने हिंदी सिनेमा में वो नाम, वो पहचान बनाई जिसको आज तक याद किया जाता है बबीता शिव दसानी, यानी बबीता कपूर के नाम से। तुमसे ओ दीवाने कभी मोहब्बत ना मैंने कर ली थी। तुमसे ओ दीवाने। कौन थी बबीता शिवदसानी? कहां से यह आई थी? किस परिवार से इनका ताल्लुक रहा? यह सब आपको मैं बताऊं। उससे पहले हम एक नजर डाल लेते हैं बबीता के परिवार पढ़ाई लिखाई और शुरुआती जीवन पर। होठों पे बात की हाय हाय। मोहब्बत वाला अंखियों में ऐसा डाला कजरे ने बबीता शिव दसानी का जन्म 20 अप्रैल 1948 को पाकिस्तान के कराची में एक सिंधी परिवार में हुआ था। इनके पिता का नाम हरीश शिव दसानी था जो भारतीय हिंदी सिनेमा में एक जाना माना चेहरा रही हैं। बबीता की मां का नाम बारबरा था जो कि एक ब्रिटिश ईसाई थी। बारबरा ने दो बेटियों बबीता और मीना को जन्म दिया था। जहां बबीता आगे चलकर खूबसूरत अभिनेत्री बनी तो दूसरी बहन एक फैशन डिजाइनर बनी। तो वहीं मशहूर दूसरी सफल अभिनेत्री साधना जी रिश्ते में बबीता की विभाजन के दौरान इनके पिता पाकिस्तान को छोड़कर हिंदुस्तान चले आए थे। क्योंकि पिता सिनेमा से जुड़े हुए थे। इसलिए हिंदुस्तान में भी

हरीश शिवदानी हिंदी सिनेमा में अभिनय के क्षेत्र में लगातार काम करते रहे। क्योंकि पिता पहले से ही अभिनेता रहे। इसलिए इनके घर पर अक्सर फिल्म अभिनेता और फिल्म निर्माताओं का आना-जाना लगा रहता था। बबीता भी अपने पिता और चचेरी बहन को फिल्मी पर्दे पर काम करते हुए देखकर खुद भी हिंदी सिनेमा में जाने का मन बना चुकी थी और हिंदी सिनेमा में आने के लिए बबीता शिवदसानी को कभी भी कोई भी खास मशक्कत नहीं करनी पड़ी और मात्र 18 साल की उम्र में बबीता को हिंदी सिनेमा में कदम रखने का मौका मिल गया। दरअसल बबीता के घर पिता हरी शिव दसानी की वजह से अक्सर फिल्मी हस्तियां मिलने आया जाया करती थी और इसी मुलाकात के दौर में एक बार फिल्म निर्माता जीपी सिप्पी बबीता के घर आए और यहां जीपी सिप्पी की नजर पहली बार बबीता के ऊपर पड़ी। बबीता के रंग रूप और खूबसूरती से जीपी सिप्पी इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने कुछ भी नहीं सोचा और बबीता को अपनी फिल्म राज के लिए राजेश खन्ना के साथ एक अभिनेत्री के तौर पर साइन कर लिया। लेकिन दोस्तों राज फिल्म को बनने में कुछ समय ज्यादा लग गया था। लिहाजा बबीता को इस फिल्म से पहले फिल्म 10 लाख में काम करने का मौका मिल गया। गरीबों की सुनो वो तुम्हारी सुनेगा गरीबों और साल 1966 में रिलीज हुई यही फिल्म बबीता के करियर की पहली फिल्म भी बनी। हालांकि बबीता की यह फिल्म उनको वो पहचान नहीं दिला पाई जिसका सपना बबीता की आंखों में था। लग जा गले दिल डूबा कहां रो के चली। इस फिल्म की असफलता के बाद 1968 में बबीता की पहली साइन की हुई फिल्म राज भी रिलीज हुई। दिल संभाले संभलता नहीं आज तो पास आने लेकिन दुर्भाग्यवश इस फिल्म का भी हाल पहली फिल्म जैसा ही रहा और यह फिल्म भी कोई कमाल नहीं दिखा पाई। फिल्म भले ही नहीं चली लेकिन बबीता को और उनके अभिनय खूबसूरती को दर्शकों ने खूब पसंद किया। मेरी हम राज मुझे तुमने वही लगातार दो फिल्मों की असफलता के बाद बबीता एक बार फिर से नजर आई। फिल्म अभिनेता जितेंद्र के साथ फिल्म फर्ज में। तुमसे ओ दीवाने कभी मोहब्बत मैंने कर ली थी। मगर मेरे दिल यह फिल्म उस दौर में एक सफल फिल्म बनी। लेकिन इस फिल्म की कामयाबी का सारा श्रेय और वाहवाही जितेंद्र के सर चली गई थी। मस्त बहारों का मैं आशिक मैं जो चाहे यार करूं चाहे दिलों के साथ। लेकिन बबीता और जितेंद्र की जोड़ी को दर्शकों ने खूब पसंद किया। जिसका नतीजा यह हुआ कि जितेंद्र और बबीता ने आगे चलकर भी कई फिल्मों में एक साथ काम किया। हम तो तेरे आशिक हैं सदियों पुराने। हम तो तेरे आशिक। इधर अब बबीता को अब एक हीरोइन के तौर पर लोग पसंद करने लगे थे। और इसी लोकप्रियता के चलते अब बबीता नजर आई बॉलीवुड के सबसे खूबसूरत हैंडसम एक्टर शशि कपूर के साथ फिल्म हसीना मान जाएगी में। तुम्हें रुकना पड़ेगा। मेरी आवाज सुन। इस फिल्म में बबीता ने अपने अभिनय की वो छाप छोड़ी जिसको आज तक लोग भुला नहीं पाए हैं। बबीता ने इस फिल्म में शानदार और यादगार अभिनय किया था। इस फिल्म के सभी गीत बेहद लोकप्रिय थे जिनको आज भी सुना जाता है। ओ दिलबर जानिए तेरे हैं हम तेरे। ये फिल्म उस समय की उस साल की 10 सुपरहिट फिल्मों में से एक फिल्म थी। इसके बाद बबीता की फिल्मी सफर में आई वो फिल्म जिसकी कामयाबी ने बबीता को हिंदी सिनेमा की एक स्टार नायिका बना दिया था। और वो फिल्म थी डोली। डोली चढ़ के दुल्हन ससुराल चली डोली चढ़ के इस फिल्म में बबीता को एक बार फिर से साथ मिला था राजेश खन्ना का। यह फिल्म बबीता के साथ-साथ राजेश खन्ना की शुरुआती दिनों की सोलो हिट फिल्म मानी जाती है। इस फिल्म में बबीता की अदाकारी को खूब पसंद किया गया। देखिए आप तो पढ़े-लिखे नौजवान हैं। सोचिए कि एक ना एक दिन यह पता चल ही जाएगा कि मेरे पिता बेगुनाह हैं। फिर आप बड़ों की बातों में आकर मेरी खुशियों पर पानी फेर कर क्यों जा रहे हैं? दोस्तों, यह वही फिल्म है जिसमें पहली बार बबीता की बहन मीना को बतौर एक ड्रेस डिजाइनर के तौर पर काम करने का मौका मिला था। इस फिल्म में बबीता ने जितनी भी ड्रेसेस पहनी थी, वह सभी इनकी बहन मीना के द्वारा ही बनाई गई थी और आगे भी भविष्य में मीना ने बबीता के लिए कई और फिल्मों में ड्रेस डिजाइनर का काम किया था। डोली फिल्म की कामयाबी के बाद बबीता को अब कई और बड़े-बड़े फिल्म निर्माताओं की फिल्मों के ऑफर्स आ गए। और उसी कड़ी में अब बबीता नजर आई हिंदी सिनेमा के आज तक के सबसे सफल अभिनेता जुबली सुपरस्टार राजेंद्र कुमार के साथ फिल्म अनजाना में। रिमझिम के गीत सावन गाए आए। बबीता की जोड़ी राजेंद्र कुमार के साथ भी खूब पसंद की गई। अब बबीता की फिल्म अच्छा खासा काम कर रही थी। इनको फिल्म निर्माता अपनी-अपनी फिल्मों की हीरोइन बनाना चाहते थे। जिसका नतीजा यह हुआ कि बबीता उस दौर के सभी मशहूर बड़े-बड़े फिल्म अभिनेताओं के साथ लीड रोल में अभिनय करते हुए देखी जाने लगी। बबीता ने अपने समय में शमी कपूर, राजेंद्र कुमार, राजेश खन्ना, शशि कपूर, धर्मेंद्र, जितेंद्र, संजीव कुमार, संजय खान जैसे दिग्गज अभिनेताओं के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम किया। और बबीता ने किस्मत तुमसे अच्छा कौन है? हसीना मान जाएगी। राज, डोली, एक हसीना, दो दीवाने, औलाद, कल आज और कल। बनकूल जैसी हिट और सुपरहिट फिल्म भारतीय हिंदी सिनेमा को दी। जिसके लिए आज भी बबीता को याद किया जाता है। क्यों ना हो जिस भगवान ने सूरत दी है उसे मिज भी किया है। दोस्तों फिल्मों की कामयाबी ने बबीता को स्टारडम, शोहरत, रुतबा सब कुछ बहुत जल्दी ही उनकी झोली में डाल दिया था। बबीता के पास इतना काम था कि वह अब बड़ी-बड़ी फिल्मों के ऑफर्स को भी नकार दिया करती थी। बबीता अब कामयाबी के सातवें आसमान पर थी। बबीता को अब दुनिया जानने लगी थी। अब बबीता की मेहनत का असर दिखने लगा था। सब कुछ अच्छा चल रहा था।

लेकिन वो कहते हैं ना कि जो किस्मत की लकीरों में लिखा होता है होता वही है। तो ऐसा ही कुछ खूबसूरत अभिनेत्री बबीता की जिंदगी में हुआ कि इनकी जिंदगी में सब कुछ एकदम से बदल गया। तुम्हें क्या पता? मेरे मन में थी कितनी घाव है। दरअसल साल 1971 बबीता के करियर का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुआ था। या आप यूं समझ लीजिए कि दोस्तों यह साल बबीता की जिंदगी की बर्बादी की शुरुआत लेकर आया था। साल 1971 में बबीता ने मशहूर फिल्म अभिनेता और कपूर खानदान के लड़के रणधीर कपूर के साथ एक फिल्म कल आज और कल में काम किया। और कहा जाता है कि इसी फिल्म से शुरू हुई थी बबीता और रणधीर कपूर की प्रेम कहानी। आई लव यू माय डार्लिंग। आई लव यू। मैं तुम्हें अपना जीवन साथी बनाना चाहता हूं। इस फिल्म में बबीता और रणधीर कपूर के अलावा रणधीर कपूर के पिता राज कपूर और दादा पृथ्वीराज कपूर भी थे। और इस फिल्म में इस तरह कपूर खानदान की तीन पीढ़ी एक साथ काम कर रही थी। लेकिन किस्मत की मारी बबीता को क्या पता था कि आगे चलकर उनको इसी खानदान से लंबी लड़ाई लड़नी होगी। इस फिल्म के दौरान बबीता रणधीर की नजदीकियां ऐसी बढ़ी कि दोनों ने हमेशा के लिए शादी के बंधन में बंधने का निश्चय कर लिया, लेकिन यह शादी इतनी आसान नहीं थी, क्योंकि बबीता सिंधी परिवार से आती थी, और दूसरा कपूर खानदान के चिरागों की शादी किसी भी फिल्म अभिनेत्री से कराना कपूर खानदान की परंपराओं के खिलाफ था, लेकिन रणधीर और बबीता तो तय कर चुके थे, शादी की बात को। ये दुनिया वालों की आवाज तो बंद करनी ही पड़ेगी और बंद करने का एक ही रास्ता है। क्या? तेरी मेरी शादी। अच्छा जी। लिहाजा एक दिन रणधीर कपूर ने अपने रिश्ते और शादी की बात अपने पिता राज कपूर के सामने रख दी। यह है मेरी गर्लफ्रेंड मोनिका जिसे मैं प्यार करता हूं और शादी करना चाहता हूं। रणधीर कपूर के इस बात से पूरा परिवार बेहद नाराज हुआ। उन्होंने रणधीर के इस फैसले को नकारते हुए कहा, आज तक इस खानदान में किसी ने मोहब्बत की है जो तुम मोहब्बत करने चले हो। शरीफ खानदान के लोग शादी करते हैं। मोहब्बत नहीं करते। कि इस परिवार में वही होगा जो इसकी परंपरा है। हम बबीता को अपनी फिल्मों की हीरोइन तो बना सकते हैं, लेकिन इस घर की बहू कभी नहीं। और इस फरमान के साथ ही इस परिवार में शुरू हो गया परंपरा का युद्ध। अगर अगर इस लड़के ने अपनी मर्जी से उस लड़की के साथ शादी की तो मैं कह देता हूं मैं ये घर छोड़कर चला जाऊंगा। इधर बबीता भी रणधीर से अलग नहीं होना चाहती थी। नहीं राजेश क्या फायदा? मुझे जाने दो। मुझे इस घर में कभी स्वीकार नहीं किया जाएगा। लिहाजा इन सभी बातों का अंजाम यह हुआ कि बबीता की खातिर कपूर खानदान में दादा, बाप, बेटा, यह तीनों एक दूसरे के खिलाफ हो गए। और बबीता के लिए इन तीनों के बीच नफरत और गुस्से की दीवार खड़ी हो गई। जहां रणधीर प्यार की खातिर पूरे परिवार के खिलाफ अकेले ही लड़े थे और खड़े थे और परिवार का यह युद्ध काफी लंबे समय तक चलता रहा। कोई तुम्हें स्वीकार करे या ना करे मैं तुम्हें स्वीकार करता हूं। बर्दाश्त की भी एक हद होती है। मुझे किसी की परवाह नहीं। आओ। लेकिन बाप और दादा कब तक पत्थर बने रहते? लिहाजा एक दिन बाप और दादा अपने बेटे और पोते की ज़िद के आगे झुक गए। और बबीता के साथ शादी करने की इजाजत दे दी गई। लेकिन अभी यह शादी संपूर्ण नहीं हुई थी क्योंकि परिवार ने शादी कराने के लिए बबीता के आगे ऐसी शर्त रख दी जिसको सुनकर बबीता को बेहद दुख हुआ था। कपूर खानदान ने बबीता से कहा कि रणधीर से शादी करने के लिए उनको हमेशा हमेशा के लिए हिंदी सिनेमा को भूलना होगा। वो कभी भी किसी भी फिल्म में काम नहीं करेंगी। किस्मत की मारी बबीता रणधीर से बेहद प्यार करती थी। लिहाजा बबीता ने उनकी सभी शर्तों को मान लिया और हमेशा हमेशा के लिए हिंदी सिनेमा को छोड़ने के लिए अलविदा कह दिया। बबीता ने जिस वक्त यह फैसला लिया था उस वक्त बबीता करियर के टॉप पायदान और मशहूर लोकप्रिय अभिनेत्री के तौर पर प्रसिद्ध थी। लेकिन बबीता ने प्यार की खातिर अपनी जिंदगी के फिल्मी सफर को यहीं छोड़ते हुए अंदरूनी दुखी मन के साथ 6 नवंबर 1971 को बबीता और रणधीर कपूर ने शादी कर ली और अब बबीता शिव दसानी से बन गई बबीता कपूर।

उनके फूलों का सेहरा बांधने के लिए राज कपूर रणधीर कपूर को ला रहे हैं। बेहद शानदार तरीके से यह शादी हुई। इस शादी में हिंदी सिनेमा के कई नामी गिरामी अभिनेता और अभिनेत्रियां शरीक हुए। बबीता ने अपने हिंदी सिनेमा के सफर में मात्र 19 फिल्में ही की और इसके बाद इनका फिल्मी सफर यहीं खत्म हो गया। बबीता की आखिरी फिल्म सोने के हाथ थी जो साल 1973 में रिलीज हुई थी। सहेली पूछो एक पहेली सहेली पूछो एक पहेली। दोस्तों, जिस प्यार और शादी के लिए बबीता ने अपना स्टारम तक छोड़ दिया, उसी प्यार और शादी के संबंध ने बबीता की जिंदगी में, समस्याओं की एक गहरी नीव रखने का काम किया। बबीता का हिंदी सिनेमा का फिल्मी सफर तो पहले ही अंधकार में डूब चुका था। बबीता जिस उम्मीद के साथ कपूर खानदान की बहू बनी थी, अब उन उम्मीदों के टूटने का समय नजदीक आ चुका था। दोस्तों शादी के बाद बबीता को कभी भी कपूर खानदान के पैतृक घर में नहीं रखा गया था। उनको अलग एक घर में जगह दी गई थी। रणधीर अक्सर देर रात पार्टीज करते और घर भी लेट आने जाने लगे। लेकिन जब बबीता उनकी इन सब चीजों का विरोध करती तो बबीता और रणधीर के बीच झगड़े हो जाते थे और इस बात को खुद रणधीर कपूर ने अपने एक इंटरव्यू में लोगों से साझा किया। लेकिन सूत्रों की मानें तो इस झगड़े की एक वजह यह भी रही थी कि बबीता अपने क्रिश्चियन धर्म के प्रति काफी कट्टर थी और लोगों का कहना था कि बबीता ने अपने पति रणधीर को भी अपने धर्म की तरफ धकेल दिया था और जब यह बात राज कपूर को पता चली तो उन्होंने रणधीर से दूरियां बना ली थी। इधर रणधीर का फिल्मी सफर भी अब खास नहीं चल रहा था। उनको फिल्में भी नहीं मिल रही थी। लिहाजा रणधीर और बबीता के झगड़े बढ़ते चले गए और एक दिन रणधीर बबीता को अकेले छोड़कर अपने पिता राज कपूर के घर वापस लौट आए और बबीता इस तरह अकेली रह गई। जिस प्यार के लिए बबीता ने सब कुछ छोड़ा था उसी प्यार ने आज बबीता की यह हालत कर दी और बेहद दुख तकलीफ से भरे हालातों में उन्हें अकेला छोड़ दिया था। तुम अपने दिल को हल्का करने के लिए चाहो तो मुझे धोखेबाज वादे का झूठा खुदगज़ जो जी में आए कह सकती हो मैं सुन लूंगा। इसके बाद रणधीर शराब के नशे में रहने लगे क्योंकि बबीता तो पहले ही हिंदी सिनेमा छोड़ चुकी थी और इधर रणधीर नशे में रहने लगे तो घर में आर्थिक तंगी भी पैर पसारना शुरू कर चुकी थी और इसी तंगहाली में 25 जून साल 1974 में बबीता ने एक बेटी करिश्मा कपूर को जन्म दिया जो आगे चलकर हिंदी सिनेमा का बड़ा नाम बनी। नीली नीली आंखें मेरी मैं क्या करूं? गोरे-गोरी गाल मेरे मैं। पहली बेटी के जन्म के बाद बबीता ने 21 सितंबर साल 1980 को एक और बेटी करीना कपूर को जन्म दिया, और इनकी ये बेटी भी आगे चलकर बॉलीवुड की टॉप रणधीर कपूर की आदत नहीं बदली। इधर बबीता बच्चों की किसी तरह परवरिश करने में जुटी हुई थी, लेकिन बेटियों को एक अच्छी जिंदगी दे पाना संभव नहीं हो पा रहा था। बबीता इन तकलीफदेह हालातों से टूट रही थी। वह थक हार चुकी थी। पति रणधीर के रवैया ने बबीता को अंदर तकलीफ में धकेल दिया था। लिहाजा एक दिन बबीता ने रणधीर को घर से निकल जाने को कह दिया और साल 1988 को यह दोनों बिना तलाक दिए अलग हो गए। बेहद दुखद जिंदगी में अब बबीता के सामने दोनों बेटियों की जिम्मेदारी थी। बबीता अपनी दोनों बेटियों को हिंदी सिनेमा की टॉप अभिनेत्री बनते हुए देखना चाहती थी। जबकि बबीता को पता था कि कपूर खानदान की कोई भी बेटी फिल्मों में काम नहीं कर सकती। उसके बावजूद बबीता किसी की भी कोई परवाह किए बगैर इसी दिशा में काम करते हुए बबीता ने अपनी बड़ी बेटी करिश्मा कपूर को साल 1991 में फिल्म प्रेम कैदी से लोगों के सामने लॉन्च किया। और आगे चलकर यही बेटी हिंदी सिनेमा की मशहूर और टॉप एक्ट्रेस बनी। कितना सोना है सोने जैसा तेरा मन सुन जा सुन क्या कहती। इसके बाद बबीता ने अपनी दूसरी बेटी करीना कपूर को भी फिल्म रिफ्यूजी के जरिए हिंदी सिनेमा में लॉन्च किया और करीना भी करिश्मा कपूर की तरह हिंदी सिनेमा की खूबसूरत और टॉप की हीरोइन बनी। मैं हीरोइन हूं। मैं हीरोइन हूं।

बबीता ने अपनी दोनों बेटियों के करियर को बनाने के लिए अकेले ही जी तोड़ मेहनत की थी। बबीता नहीं चाहती थी कि उनकी बेटियां भी उनकी तरह अपने फिल्मी सफर को छोड़कर पाई-पाई को मोहताज हो जाए। दोस्तों ये कहा जाता है कि बबीता की ही हिम्मत थी। उन्होंने संघर्ष करते हुए अपनी बेटियों को सफलता के शिखर पर पहुंचाया था। लेकिन दोस्तों शायद बबीता की जिंदगी का दुख कम नहीं बल्कि और बढ़ने वाला था। क्योंकि जैसे ही बबीता कपूर की खुद की निजी जिंदगी काफी खराब और दुख भरी चल रही थी, वैसी ही जिंदगी इनकी बेटी की भी होने वाली थी। वह भी खुद बबीता के एक गलत फैसले की वजह से। दरअसल करिश्मा कपूर अभिनेता अमिताभ बच्चन के बेटे अभिषेक बच्चन से प्यार करती थी। दोनों शादी करना चाहते थे और दोनों परिवार की रजामंदी के साथ इन दोनों की सगाई भी हो गई थी। लेकिन रिश्ता इतना आगे बढ़ने के बाद बबीता के एक फैसले ने सब कुछ बर्बाद कर दिया। दरअसल अमिताभ बच्चन का उन दिनों फिल्मों में अच्छा काम नहीं चल रहा था। उनको व्यापार में काफी नुकसान हुआ था। जिसकी वजह से अमिताभ बच्चन आर्थिक तंगी में आ गए थे और उधर अभिषेक बच्चन भी फिल्मों में वह नाम शोहरत हासिल नहीं कर पा रहे थे। लिहाजा इन सब बातों को देखते हुए बबीता ने अंतिम समय में इस सगाई को तोड़ दिया। हालांकि जया बच्चन और अमिताभ बच्चन ने इस रिश्ते को बनाए रखने की काफी कोशिशें की। लेकिन शायद करिश्मा का जीवन तो अपनी मां के फैसले की भेंट चढ़ना लिखा था। बबीता चाहती थी कि उनकी बेटी किसी रहीस खानदान में शादी करके आगे बढ़ जाए और हुआ भी कुछ ऐसा ही। सगाई टूटने के बाद मात्र 1 साल के अंदर ही मां की बात मानकर करिश्मा ने दिल्ली के एक बड़े बिजनेसमैन संजय कपूर से 29 सितंबर साल 2003 को शादी कर ली। हालांकि करिश्मा कपूर के पति संजय कपूर की ये दूसरी शादी थी। इस शादी से करिश्मा को बेटी समाएरा और बेटा ख्यान हुए। कुछ समय तक तो सब कुछ ठीक-ठाक चला लेकिन कुछ सालों के बाद करिश्मा कपूर और संजय के बीच झगड़े की बात सामने आने लगी और यह बात इतनी बढ़ गई कि करिश्मा कपूर ने शादी के 13 साल बाद अपने पति संजय कपूर से तलाक ले लिया। करिश्मा कपूर ने संजय कपूर के ऊपर कई गंभीर आरोप भी लगाए। करिश्मा ने बताया कि उनके पति ने उनको सुहागरात के दिन ही नशे में अपने दोस्तों के आगे नीलाम कर दिया था। उन्होंने बताया कि उनके पति का किसी और महिला से संबंध है और करिश्मा ने यह भी बताया कि उनके पति उनको मारते-पीटते थे और मारपीट से मिले जख्मों को करिश्मा मेकअप के जरिए लोगों से छिपाती थी। तो वहीं संजय कपूर ने भी करिश्मा कपूर और उनकी मां के ऊपर इल्जाम लगाए। उन्होंने कहा कि मेरी सास यानी कि बबीता कपूर उनकी निजी जिंदगी में ज्यादा हस्तक्षेप करती हैं। संजय ने बताया कि बबीता अपने महंगे शौक और जरूरत सभी करिश्मा कपूर के पैसों पर पूरा किया करती थी और इन्हीं इल्जामों के बीच करिश्मा कपूर की जिंदगी अपनी खुद की मां बबीता कपूर के गलत फैसले की भेंट चढ़ गई। बबीता को अपने इस फैसले के लिए जिंदगी भर शायद अफसोस रहेगा। आप चले जाइए यहां से। आप मेरी जिंदगी में आंख लगाने आए हैं। मुझे बदनाम करना चाहते हैं। तो वहीं बबीता की दूसरी बेटी करीना कपूर ने अपनी मर्जी से फिल्म अभिनेत्री शर्मिला टैगोर के बेटे सैफ अली खान से धर्म बदलकर शादी कर ली। हालांकि सैफ अली खान करीना कपूर से उम्र में 13 साल बड़े हैं।

नजरों से नजरें मिली तो जन्नत। बबीता कपूर की जिंदगी उनकी शादी के बाद से ही काफी दुख और तकलीफ में रही। बबीता का हमेशा अपने ससुराल वालों के प्रति कई सालों तक कड़वाहट बनी रही। कड़वाहट इतनी ज्यादा थी कि साल 2006 में बबीता के देवर यानी कि ऋषि कपूर की बेटी रिदिमा की शादी हुई, तो तब भी बबीता और उनकी दोनों बेटियां शादी में नहीं पहुंची। दोस्तों बबीता ने जब रणधीर कपूर से शादी करने के दौरान अपनी चचेरी बहन साधना से भी अपने रिश्ते बिगाड़ लिए थे। रिश्ते इतने खराब हुए कि साल 2015 में साधना जी का निधन हुआ, तो उनके निधन पर बबीता या उनकी दोनों बेटियों में से कोई भी उनके घर नहीं था। जबकि कपूर खानदान से सिर्फ ऋषि कपूर ही उनकी अंतिम यात्रा में शरीक हुए थे। इन दोनों बहनों में यह लड़ाई क्यों थी? यह हम आपको साधना जी की बायोग्राफी में बता चुके हैं। जिसका लिंक हमने अपने डिस्क्रिप्शन बॉक्स में दे दिया है। दोस्तों, समय के साथ-साथ कई गहरे जख्म सूख जाया करते हैं। धीरे-धीरे बबीता की भी कड़वाहट कम हुई। साल 2007 में बबीता और रणधीर के बिगड़े रिश्तों में भी सुधार आया। और यह दोनों एक बार फिर से सब कुछ भुलाकर एक साथ रहने लगे। बबीता और रणधीर शादी के बाद लगभग 34 साल एक दूसरे से अलग-अलग रहे। लेकिन गुजरते समय के साथ अब यह परिवार और इनके रिश्ते सुधर रहे हैं और अब बबीता कपूर और उनकी दोनों बेटियां भी पूरे कपूर खानदान के साथ दिखाई देती है। और उनके सभी समारोह में भी नजर आती हैं। इसका जीता जागता प्रमाण मिलता है। ऋषि कपूर के बेटे रणबीर कपूर और आलिया भट्ट की शादी से। जहां यह पूरा कपूर खानदान एक साथ तस्वीरों में कैद हुआ था। तू नहीं जाएगा? उम् मैं कहती हूं चला जा। नहीं तो बहुत पछताएगा। जब पछताने का समय आएगा तो पछता लूंगा। अभी तो बड़े मजे में हैं। दोस्तों, यह था बबीता कपूर का पूरा जीवन जिसको हमने आपके सामने रखा है। यह वही बबीता कपूर थी, जिन्होंने प्रेम की खातिर अपने सुख चैन में खुद ही आग लगा ली। इसी प्रेम की खातिर कपूर खानदान की वर्षों पुरानी एक झूठी परंपरा

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