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35 हजार फीट की ऊंचाई.. 9 घंटे हवा में लहराता रहा विमान.. फिर 250 मुसाफिरों के साथ जो हुआ ..!

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आसमान में करीब 35,000 फीट की ऊंचाई पर उड़ते एयर इंडिया विमान में अचानक ऐसा क्या हुआ कि 250 यात्रियों की सांसे अटकगई। दिल्ली से अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को के लिए उड़ान भरने वाली एयर इंडिया की फ्लाइट एआई73में उस वक्त हड़कंप मच गया जब विमान का सबसे बड़ा सुरक्षा कवच यानी कि टक्कर रोकने वाला सिस्टम फेल हो गया। विमान चीन के एयरस्पेस में पहुंच चुका था। लेकिन खतरे की गंभीरता को देखते हुए इसे बीच रास्ते से ही वापसदिल्ली मोड़ा गया। विमान करीब 9 घंटे तक हवा में लहराता रहा।

तारीख 27 मई वक्त तड़के 3:09। दिल्ली के आईजीआई एयरपोर्ट से एयर इंडिया के चमचमाते बोइंग 777 विमान ने सैन फ्रांसिस्को के लिए उड़ान भरी। विमान में करीब 250 यात्री सवार थे जो अमेरिका जा रहे थे। शुरुआती सफर बेहद सामान्य था। विमान ने धीरे-धीरे रफ्तार पकड़ी और भारत की सीमा को पार कर गया। सब कुछ ठीक चल रहा था कि अचानक कॉकपिट में खतरे की घंटी बजी। [संगीत] पायलट्स के सामने लगे स्क्रीन पर एक ऐसा अलर्ट आया जिसने पायलट के माथे पर पसीना ला दिया। विमान का टीसीएएस यानी कि ट्रैफिक कोजन अवॉयडेंस सिस्टम ने काम करना बंद कर दिया था।

अब आपको समझाते हैं कि आखिर यह टीसीएएस क्या होता है? और विमान में इसका ठीक रहना क्यों? जिंदगी और मौत के बीच का अंतर बन जाता है। टीसीएएस यानी कि ट्रैफिक कोजन अवॉयडेंस सिस्टम। यह आसमान में उड़ते विमानों का वो अदृश्य सुरक्षा कवच है जो दो विमानों को आपस में टकराने से रोकता है।

जब आसमान में हजारों की संख्या में विमान उड़ रहे होते हैं तो यह सिस्टम दूसरे विमानों से लगातार संपर्क बनाए रखता है और उनकी दूरी ट्रैक करता है। अगर गलती से भी दो विमान एक दूसरे के खतरनाक रूप से करीब आ जाए तो यह सिस्टम खुद ब खुद एक्टिव हो जाता है। यह एक विमान के पायलट को ऊपर जाने का निर्देश देता है तो दूसरे विमान के पायलट कोनीचे जाने का। अंतरराष्ट्रीय एिएशन नियमों के मुताबिक नॉर्थ अटलांटिक जैसे बेहद बिजी और संवेदनशील रूट पर बिना एक्टिव टीसीएएस के उड़ान भरने की सख्त मनाही है और एयर इंडिया के इस फ्लाइट का यही सुरक्षा कवच हवा में जवाब दे चुका था।

विमान चीन के आसमान में करीब 3 घंटे का सफर तय कर चुका था। खराबी का पता चलते ही एयर इंडिया के हेड क्वार्टर और पायलट्स के बीच में इमरजेंसी बातचीत शुरू हुई। आगे का सफर बेहद लंबा था और बिना सुरक्षा कवच के प्रशांत महासागर और संवेदनशील हवाई क्षेत्रों को पार करना एक आत्मघाती फैसला हो सकता था। यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए एयर इंडिया ने एक बड़ा और कड़ा फैसला लिया।

विमान को तुरंत वापस दिल्ली बुलाया गया। लेकिन यह फैसला जितना जरूरी था उतना ही भारी भी था। विमान को मुड़ने और वापस दिल्ली आने में घंटों का वक्त लगना था। यात्री हैरान परेशान थे कि आखिर विमान वापस क्यों जा रहा है। विमान पूरे 9 घंटे तक हवा में मंडराता रहा। इस दौरान ईंधन की भी भारी खपत हुई। एिएशन एक्सपर्ट्स के मुताबिक बोइंग ट्रिपल7 विमान 1 घंटे में करीब 8 से 9 टन ईंधन खर्च करता है।

यानी इस एक तकनीकी खराबी की वजह से एयर इंडिया को करोड़ों रुपए का भारी भरकम आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा। बुधवार दोपहर जब फ्लाइट एआई73 ने दिल्ली के रनवे को छुआ तो ग्राउंड स्टाफ से लेकर यात्रियों तक ने चैन की सांस ली।

हालांकि मंजिल पर ना पहुंच पाने और घंटों हवा में रहने की वजह से यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। एयर इंडिया ने तुरंत एक्शन में आते ही प्रभावित यात्रियों के लिए दिल्ली एयरपोर्ट पर रिफ्रेशमेंट, होटल्स में ठहरने और टिकट रशेड्यूल करने जैसे वैकल्पिक इंतजाम किए।

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