हाथ में सिर्फ एक ब्रेड और एक चुटकी नमक। लेकिन दुनिया के सियासी गलियारों में इसकी ऐसी धमक जिसने पूरे यूरोप को हिला कर रख दिया। तस्वीरें यूरोप के स्लोवाकिया से हैं। जहां पैर रखते ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वो ऐतिहासिक स्वागत हुआ जिसने एक नया रिकॉर्ड बना दिया। साल 1993 यानी आज से करीब 33 साल पहले स्लोवाकिया एक स्वतंत्र देश बना था।
तब से लेकर आज तक किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री ने इस धरती पर कदम नहीं रखा था। लेकिन जब पीएम मोदी यहां पहुंचे तो स्लोवाकिया ने अपनी संस्कृति का सबसे बड़ा सम्मान उनके कदमों में बिछा दिया। इसे कहते हैं खलीब आसोल यानी ब्रेड और नमक की सदियों पुरानी स्लाव परंपरा। पूर्वी यूरोप में ब्रेड का मतलब है जीवन और समृद्धि और नमक का मतलब है एक ऐसी दोस्ती जो कभी खराब नहीं होगी जो अटूट है।
इस एक छोटे से जेस्चर ने यह साबित कर दिया कि भारत का रुतबा आज ग्लोबल स्टेज पर किस लेवल पर पहुंच चुका है। सिर्फ स्वागत ही नहीं स्लोवाकिया के राष्ट्रपति पीटर पल्लगिनी और पीएम रॉबर्ट फिको के साथ मिलकर भारत अब डिफेंस, ऑटोमोबाइल और रेलवे जैसे बड़े सेक्टर्स में यूरोप के इस हिस्से को रिीडफाइन करने जा रहा है।
वहां के लोकल कलाकारों ने जब वंदे मातरम की धुन बजाई तो ब्रातिस लावा की हवाएं भी भारतीय रंग में रंग गई। साफ है भारत अब सिर्फ बड़े देशों से रिश्ते नहीं बना रहा बल्कि दुनिया के हर उस कोने में अपनी मजबूत छाप छोड़ रहा है जहां पहले कभी कोई नहीं पहुंचा। हाथ में ब्रेड और नमक और मैसेज साफ है कि नए भारत से दोस्ती अब सात समंदर पार भी उतनी ही अटूट है।