इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजमिन नेतन्या के दो बड़े राजनीतिक विरोधियों ने ऐलान किया है कि वह अक्टूबर में होने वाले चुनाव में एक साथ लड़ेंगे। इजराइल के पूर्व प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट और हियार लेपिड विपक्ष के लीडर जो हैं उन्होंने 26 अप्रैल को बयान जारी करके अपनी पार्टियों के विलय की घोषणा की। इस गठबंधन का मकसद बिखरे हुए विपक्ष को एकजुट करना है। फिलहाल विपक्ष में ज्यादा समानता नहीं है सिवाय इसके कि सभी नेतन्याओं के खिलाफ हैं। बेनेट के ऑफिस ने बताया कि नई पार्टी का नाम टुगेदर होगा और इसके लीडर खुद बेनेट होंगे। बेनेट ने कहा कि अगर वे चुनाव जीतते हैं तो 7 अक्टूबर 2023 को हुए हमास हमले से पहले की नाकामियों की जांच के लिए एक राष्ट्रीय जांच आयोग बनाएंगे। मौजूदा नेतयाू सरकार ने ऐसी जांच से इंकार किया है। लेपिड और बेनेट दोनों ही हमले के बाद से जंग को संभालने के तरीके को लेकर नेतया की आलोचना करते रहे हैं। लापिड ने ईरान के साथ हुए दो हफ्ते के युद्ध विराम को पॉलिटिकल डिजास्टर बताया था। बेनेट और लापिड पहले भी साथ आ चुके हैं।
2021 के चुनाव में उन्होंने मिलकर नितन्या के लगातार 12 साल के शासन को खत्म किया था। लेकिन उनके गठबंधन सरकार सिर्फ करीब 18 महीने ही चल पाई थी। इससे पहले 2013 में भी दोनों नेतया की सरकार में शामिल हुए थे। इसके बाद नेतया के पारंपरिक अल्ट्रा ऑर्थोडॉक्स सहयोगी बाहर हो गए थे। धुरदक्षिणपंथी सहयोगी। 23 अप्रैल के हुए N12 न्यूज़ के सर्वे के मुताबिक 122 सीटों वाली संसद नेसेसट में बेनेट को 21 सीटें मिलती दिख रही हैं। जबकि यूनथिया की पार्टी लिक्विड को 25 सीटें मिल सकती हैं। लापिड की पार्टी को सिर्फ सात सीटें मिलने का अनुमान है। अब खबर अमेरिका से ब्रिटेन के राजा चार्ल्स थर्ड पत्नी कैमिला के साथ 4 दिन की स्टेट विजिट पर अमेरिका पहुंचे हैं।
मौका है अमेरिका की आजादी के 250 साल पूरे होना। यानी ब्रिटेन अपनी ही हार के सेलिब्रेशन के लिए अपने राजा को अमेरिका भेज रहा है। खैर, यात्रा के दौरान किंग चार्ल्स अमेरिका की संसद कांग्रेस को भी संबोधित करेंगे। भाषण का मकसद हाल ही में अमेरिका और ब्रिटेन में बढ़े तनाव को खत्म करना है। यह भाषण ऐसे समय में हो रहा है जब ट्रंप ने यूके यूएस ट्रेड डील तोड़ने की धमकी दी है। रॉयल नेवी का मजाक उड़ाया है और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री की स्टारमर पर कई बार सवाल उठाए हैं। ट्रंप की नाराजगी की बड़ी वजह है स्टारमर का ईरान के खिलाफ अमेरिका इजराइल की जंग में शामिल होने से इंकार करना। यह चार्ल्स का राजा बनने के बाद अमेरिका का पहला दौरा है। वहीं यह सिर्फ दूसरी बार है जब किसी ब्रिटिश सम्राट ने अमेरिकी कांग्रेस के संयुक्त सत्र को संबोधित किया है। इससे पहले क्वीन एलिजाबेथ सेकंड ने 1991 में ऐसा किया था। अब बात पाकिस्तान की। एक तरफ तो पाकिस्तान ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्था कराने की कोशिश कर रहा है। शांतिदूत बन रहा है। दूसरी तरफ अपने ही पड़ोस में लड़ने में लगा हुआ है।
हम नहीं कह रहे बल्कि अफगानिस्तान का दावा है। काबुल ने बताया कि 27 अप्रैल को पाकिस्तान की तरफ से उत्तर पूर्वी अफगानिस्तान में मोटार और मिसाइल दागी गई। हमलों में एक यूनिवर्सिटी और आम लोगों के घर निशाना बनाया गया। इसमें सात लोगों की मौत हो गई। जबकि करीब 85 लोग घायल हुए। पाकिस्तान ने इस आरोप को खारिज किया है कि उसने किसी यूनिवर्सिटी को निशाना बनाया। अफगान सरकार के डिप्टी प्रवक्ता हमदुल्लाह फितरत ने कहा कि यह हमला कुनार प्रांत की राजधानी असदाबाद और आसपास के इलाकों में हुआ। घायलों में महिलाएं, बच्चे और सैयद जमालुद्दीन अफगानी यूनिवर्सिटी के छात्र भी शामिल हैं। यह हमला इस महीने की शुरुआत में चीन की मध्यस्थता में हुई शांति वार्ता के बाद पहली बड़ी हिंसक घटना है। चीन के अलावा तुर्की कतर यूएई और सऊदी अरब भी अलग-अलग समय पर मध्यस्थता में शामिल रहे हैं।
इससे पहले पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच मार्च में लड़ाई कुछ कम हो गई दोनों देशों ने ईद उलफितर के मौके पर अस्थाई युद्ध विराम का ऐलान किया था। यह सीज फायर 17 मार्च को काबुल में एक ड्रग ट्रीटमेंट सेंटर पर हुए पाकिस्तानी एयर स्ट्राइक के बाद आया था। अफगानिस्तान का कहना था कि उस हमले में 400 से ज्यादा आम नागरिक मारे गए थे। जबकि पाकिस्तान ने नागरिक ठिकानों को निशाना बनाने से इंकार किया था। पाकिस्तान आरोप लगाता है कि अफगानिस्तान ऐसे आतंकियों को पनाह देता है जो पाकिस्तान में हमले करते हैं। खासकर तहरीक तालिबान पाकिस्तान यानी टीटीपी। यह संगठन तालीबान से अलग है लेकिन उसका सहयोगी माना जाता है। हालांकि काबुल इन आरोपों से इंकार करता है। आज का दुनियादारी यहीं समाप्त होता है। अपना और अपनों का ख्याल रखिए। शुक्रिया। शुभ रात्रि।