नमस्कार फिल्म के कारवाला एक बार फिर हाजिर है एक ऐसे किस्से के साथ जो सुनने में किसी दर्दनाक और सस्पेंस से भरी फिल्म स्क्रिप्ट जैसा लगता है लेकिन हुआ बिल्कुल [संगीत] असल जिंदगी में बॉलीवुड का इतिहास जहां कई प्रेम कहानियां अमर हुई है इनमें से कुछ कहानियों को मंजिल मिल गई तो कुछ कहानियां सुखद अंत के लिए फड़फड़ाती रही और आखिरकार वो दम तोड़ गई बिना कोई शक्ल दिए। आज फिल्म की कार वाला भी लाया है ऐसी ही एक प्रेम कहानी। इस कहानी की भी हैप्पी एंडिंग नहीं हुई और कुदरत का इंसाफ देखिए कि इस कहानी को तमगाह मिला बॉलीवुड की सबसे मनहूस प्रेम कहानी का। सोचिए साल 1960 फिल्म मुगले आजम का वो आइकॉनिक सीन शूट हो रहा है। सलीम और अनारकली के बीच का वो रोमांटिक पल जहां दिलीप कुमार और मधुबाला के चेहरे पर एक मुलायम सफेद पंख फेर रहा है। उनकी आंखों में इतनी शिद्दत दिखती [संगीत] है कि उसे देखकर आज भी पर्दे पर आग लग जाती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस सीन के पीछे का खौफनाक सच क्या था? दोस्तों, जब यह दुनिया का सबसे रोमांटिक सीन शूट हो रहा था, तब असल जिंदगी में दिलीप कुमार और मधुबाला एक दूसरे की शक्ल देखना तक पसंद नहीं करते थे। दोनों के बीच बातचीत पूरी तरह से बंद थी। कट बोलने के बाद भी दोनों एक दूसरे से नजर नहीं मिलाते थे। आपके दिमाग में सवाल उठ रहा होगा कि जो दो लोग कभी एक [संगीत] दूसरे की जान हुआ करते थे, जिनके प्यार के चर्चे पूरी फिल्म इंडस्ट्री में आम थे, [संगीत] उनके बीच अचानक ऐसी नफरत की दीवार क्यों खड़ी हो गई? आखिर ऐसा क्या हुआ था कि मोहब्बत दुश्मनी की शक्ल में दिखाई देने लगी। चलिए चलते हैं फ्लैशबैक पर। इससे पहले मैं बताऊं कि क्या था यह पूरा किस्सा। मैं आपसे गुजारिश करूंगा अगर आपको अनसुने अनफिल्टर्ड बॉलीवुड [संगीत] के किस्से सुनने हैं तो फ्लपजी कार वाला चैनल को जरूर सब्सक्राइब करिए ताकि आप ऐसे हैरान कर देने वाले किस्सों से अनजान ना रहें। चलिए शुरू करते हैं कहानी परत दर परत। साल 1951 मुंबई महबूब स्टूडियो का वो चमचमाता सेट और फिल्म थी तताराना। उस वक्त दिलीप कुमार अपने स्टारडम के उफान पे थे। उनकी एक भारी आवाज पर पूरा हिंदुस्तान सिनेमाघर में तालियां पीटता था और दूसरी तरफ थी मधुबाला। एक ऐसी अप्सरा जिसकी बेपनाक खूबसूरती और मुस्कुराहट का जादू फिल्म फिल्म इंडस्ट्री समेत पूरे हिंदुस्तान पे किसी खुमार की तरह छाया हुआ था। शूटिंग के उसी माहौल में रोशनी और कैमरों के बीच दो दिलों की धड़कनें पहली बार एक दूसरे के लिए तेज होने लगी थी। यह वो दौर था जब मोहब्बत इजहार के लिए WhatsApp या मैसेज की मोहताज नहीं थी। मोहब्बत आंखों से बयां होती थी।
कहते हैं एक दिन मधुबाला ने अपने मेकअप आर्टिस्ट के हाथों सबसे छिपकर एक खत एक लाल गुलाब दिलीप कुमार के मेकअप रूम में भिजवाया। उस खत में बहुत ही सादगी और हिम्मत से लिखा था कि अगर आप भी मुझसे प्यार करते हैं तो यह गुलाब कुबूल कर लीजिए। दिल साहब जो खुद उस संगमरमर की मूरत पर अपना दिल हार चुके थे। उन्होंने मुस्कुरा के वो गुलाब अपने पास रख लिया और बस यहीं से शुरू हुई बॉलीवुड के इतिहास की वो सबसे मशहूर सबसे हसीन लेकिन सबसे मनहूस प्रेम कहानी जिसका अंजाम सिर्फ और सिर्फ तबाही था। इनका प्यार इतना परवान चढ़ा कि पूरी इंडस्ट्री में इनकी शादी की बातें होने लगी। यह प्यार कोई ऐसा वैसा नहीं था। जब मधुबाला किसी आउटडोर शूटिंग पर होती थी तो दिलीप कुमार अपना सारा काम छोड़कर मिलो मिलो गाड़ी चलाकर मधुबाला को एक नजर देखने पहुंच जाया करते थे। दोनों ने एक दूसरे के साथ जीने और मरने की कसमें खा ली थी। सब कुछ एक [संगीत] फरी टेल की तरह था। लेकिन हर कहानी में एक ऐसा मोड़ आता है जो सब कुछ पलट कर रख देता है। इस कहानी में मोड़ बनकर आए खुद मधुबाला के पिता अताउल्लाह खान। अत अल्लाह खान एक ऐसे पिता थे जो अपनी बेटी के करियर, उसकी जिंदगी यहां तक कि उसकी हर एक सांस पर भी अपना कंट्रोल चाहते थे।
उनका दिलीप कुमार से कोई जाती दुश्मनी नहीं थी। लेकिन मधुबाला उनके पूरे परिवार के [संगीत] लिए कमाई का इकलौता और सबसे बड़ा जरिया थी। अतला खान को यह डर सताने लगा था कि अगर मधुबाला ने दिलीप कुमार से शादी कर ली तो वह घर को छोड़ देंगी और उनके परिवार की ऐशो आराम की जिंदगी हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी और फिर आया साल 1956 और वो एक फिल्म जिसने इस खूबसूरत मोहब्बत का हमेशा के लिए जनाजा निकाल दिया उस वक्त के दिग्गज डायरेक्टर बी आर चोपड़ा [संगीत] अपनी सबसे फिल्म नया दौर बना रहे थे लीड रोल में साइन किए गए थे दिलीप कुमार और मधुबाला फिल्म का एक बड़ा हिस्सा बॉम्बे से बाहर भोपाल और ग्वालियर के पास के जंगलों में शूट होना था। यहीं अता लौखाने अपना गांव चला। उन्होंने [संगीत] बी आर चोपड़ा को साफ शब्दों में कह दिया कि मधुबाला बंबई से बाहर आउट शूटिंग के लिए नहीं जाएंगे। चोपड़ा साहब ने बहुत मेहनतें की समझाया कि स्क्रिप्ट की डिमांड यही है साहब। जाने दीजिए। लोकेशन बदल नहीं सकते। सेट पर करोड़ों [संगीत] का खर्चा हो चुका है। लेकिन अत अल्लाह खान अपने ईगो पर अड़ गए। बात इतनी बिगड़ गई कि बी आर चोपड़ा जैसे बड़े डायरेक्टर ने वो किया जिसकी किसी को उम्मीद नहीं थी। उन्होंने अपनी फिल्म से मधुबाला को निकाल बाहर किया और उनकी जगह विजयंती माला को साइन कर लिया। साथ ही मधुबाला के खिलाफ कोर्ट में कॉन्ट्रैक्ट तोड़ने का मुकदमा कहा मुकदमा भी ठोक दिया। अब माहौल देखिए। एक तरफ थे दिलीप कुमार [संगीत] के सबसे करीबी डायरेक्टर बी आर चोपड़ा जो अपनी जगह बिल्कुल सही थे और दूसरी तरफ थी वो लड़की जो दिलीप कुमार की जान थी। दिलीप साहब बीच में बुरी तरह फंस गए। उनकी उन्होंने अत अल्लाह खान के पास जाकर हाथ जोड़े मेहनतें की कि मामला अदालत से बाहर सुलझा लें। दिलीप कुमार ने यहां तक ऑफर दिया कि वो अपनी एक प्रोडक्शन कंपनी बना लेंगे और मुनाफे का सीधा हिस्सा उन्हें दे देंगे ताकि उन्हें पैसों की कोई कमी ना रहे।
लेकिन एक घमंडी पिता के ईगो ने अपनी ही बेटी की खुशियों का गला घोट दिया। अत अल्लाह खान किसी कीमत पर नहीं माने और फिर आया वो दिन वो खौफनाक दिन जिसने दोनों के दिलों को हमेशा के लिए पत्थर बना दिया। बॉम्बे का कोर्ट रूम खचाखच भरा हुआ था। देश की सबसे खूबसूरत अदाकारा मधुबाला कटघरे में एक मुजरिम की तरह खड़ी थी। उनकी आंखों में आंसू थे लेकिन दिल में एक उम्मीद थी, एक आस थी कि उनका प्यार, उनका होने वाला शौहर आज इस भरी अदालत में उनका साथ देगा। वो दुनिया से लड़ जाएगा। जज ने गवाह को आवाज दी और गवाह के कटघरे में जो शख्स आकर खड़ा हुआ वो थे [नाक से की जाने वाली आवाज़] दिलीप कुमार। पूरे कोर्ट में सन्नाटा छा गया। सब सांस थामे इंतजार कर रहे थे कि दिलीप साहब क्या बोलेंगे। लेकिन दिलीप कुमार साहब हमेशा से उसूलों के पक्के थे। उन्होंने कुरान शरीफ पे हाथ रखा और बी आर चोपड़ा के पक्ष में गवाही दे दी। दिलीप कुमार ने भरी अदालत में एक ऐसी लाइन बोली जो सीधे मधुबाला के सीने में किसी खंजर की तरह होती। तो उन्होंने कहा कि मधुबाला के पिता का बर्ताव अनप्रोफेशनल है और गलती उन्हीं की है। मधुबाला हैरान रह गई। वो सुन हो गई। जिस इंसान को उन्होंने अपना खुदा मान लिया था। आज उसी ने भरी महफिल में उन्हें और उनके पिता को गला ठहरा दिया। रुसवा कर दिया। लेकिन कहानी का सबसे इमोशनल और रुला देने वाला क्लाइमेक्स अभी बाकी था। गवाही खत्म होने से पहले जज ने दिलीप कुमार से एक ऐसा सवाल पूछा जिसने कोर्ट रूम में सन्नाटा ला दिया। ने पूछा क्या आप मधुबाला [संगीत] से प्यार करते हैं? गिरीप ने मुड़ के मधुबाला की नम आंखों में देखा उन आंखों में जहां अब सिर्फ टूटे हुए खा और बिखरा हुआ काजल था और फिर उन्होंने एक ऐसा स्टेटमेंट दिया कोर्ट में जो [संगीत] सिनेमा के पदे से भी बड़ा था। दिलीप कुमार बोले हां मैं इस औरत से प्यार करता हूं और बहनता प्यार करता हूं और अपनी आखिरी सांस तक सिर्फ इसी से प्यार करता रहूंगा। लेकिन इस बहनता प्यार के इज़हार का अब कोई फायदा नहीं था। अदालत के बाहर निकलते ही दोनों के रास्ते जुदा हो गए। प्यार हार गया था और ईगो जीत चुका था। पर सस्पेंस यहां भी खत्म नहीं होता है।
दोस्तों इसके बाद मुगल आजम के सेट पर जो हुआ वो तो किसी भयानक सपने से कम नहीं था। जिस वक्त यह ब्रेकअप हुआ दोनों मुगले आजम की शूटिंग कर रहे थे। आधी फिल्म बन चुकी थी। करोड़ों रुपए दांव पर थे। डायरेक्टर के आसिफ के तो पसीने छूट गए कि जो दो लोग एक दूसरे की शकल नहीं देखना चाहते वो अब दुनिया के सबसे बड़े और रोमांटिक प्रेमी जोड़े सलीम और अनारकली का किरदार कैसे निभाएंगे। लेकिन यहां इन दोनों ने जो प्रोफेशनल बलिदान दिया वो कोई और नहीं कर सकता था। दोनों सेट पर आते थे। डायरेक्टर रोल कैमरा एक्शन बोलता था तो दोनों एक दूसरे में खो जाते थे। लेकिन जैसे ही डायरेक्टर कट बोलता था दोनों के चेहरे एकदम पत्थर हो जाते थे। बिना एक दूसरे की तरफ देखिए, बिना एक भी शब्द बोले दोनों अपने-अपने टेंट में चले जाते। मुगले आजम के सेट पर मौजूद लोग बताया करते थे उन दोनों के बीच एक इतनी लंबी ठंडी और खौफनाक खामोशी थी जो किसी की भी रूह कपा। यहां तक कि फिल्म के एक सीन [संगीत] में जहां सलीम को अनारकली को थप्पड़ मारना था। कहते हैं दिलीप कुमार ने अपने अंदर की सारी बड़ा सारा दर्द उस एक थप्पड़ में उतार दिया था। यह थप्पड़ इतना जोरदार था कि मधुबाला के गाल पर उंगलियों के लाल निशान छप गए थे। लेकिन कट होने के बाद भी ना कोई माफी मांगी गई, ना कोई शिकायत की गई। बस एक खामोशी छाई रही हमेशा की तरह जिसमें दो टूटे हुए दिलों की ठीक गुंजाई थी। वक्त बीतता गया। इस दर्द और अकेलेपन ने मधुबाला को अंदर से खोखला कर दिया।
इसके चलते उन्हें गंभीर बीमारी हो गई। दिल में छेद। डॉक्टरों ने कह दिया कि वह ज्यादा दिन नहीं जिएगी। दिलीप कुमार को जलाने के लिए या शायद उस बहनता अकेलेपन से बचने के लिए मधुबाला ने जल्दबाजी में किशोर कुमार से शादी कर ली। लेकिन यह फैसला भी गलत साबित हुआ। किशोर कुमार अपने [संगीत] काम में बहुत व्यस्त रहते थे। वो वो टाइम नहीं दे पाते थे जो मधुबाला को चाहिए होता था। बीमारी के उन आखिरी सालों में मधुबाला बिल्कुल अकेली पड़ गई। वो अपने बॉम्बे वाले घर के एक कमरे में लेटी रहती। खून की उल्टियां करती और उनकी आंखें सिर्फ दरवाजे पर टिकी रहती। शायद वो इंतजार करती थी उसी एक शख्स का [संगीत] जिसको उन्होंने टूट कर चाहा था यानी दिलीप कुमार का। साल 1969 आ चुका था। मधुबाला अपनी आखिरी सासे गिन रही थी। उनकी बस एक ही आखिरी ख्वाहिश थी कि मौत से पहले सिर्फ एक बार और आखिरी बार वो दिलीप कुमार का चेहरा देख ले। उन्होंने किसी के हाथ तो दिलीप साहब का पैगाम भी भिजवाया कि वो उन्हें बुला रही हैं। लेकिन बदकिस्मती देखिए साहब दिलीप कुमार उस वक्त मुंबई में नहीं थे। वह मद्रास में अपनी किसी फिल्म की शूटिंग कर रहे थे। जब तक उन्हें वह पैगाम मिला, जब तक वह फ्लाइट पकड़ के पागलों की तरह मुंबई पहुंचे, तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
23 फरवरी 1969 की सुबह वो खूबसूरत [संगीत] फूल हमेशा के लिए मुरझा चुका था। मीना साफ इंडियन सिनेमा इस दुनिया को अलविदा बोल चुकी थी। जब दिलीप कुमार साहब कब्रिस्तान पहुंचे तब तक मधुबाला को मिट्टी में दफनाया जा चुका था। दिलीप साहब उस ताजी मिट्टी वाली [संगीत] कब्र के पास चुपचाप खड़े रहे। उनकी आंखों में आंसू बहते रहे। जिस औरत से उन्होंने भरी अदालत में आखिरी सांस तक प्यार करने का वादा किया था। आज वो उसी के आखिरी दीदार को भी तरस गए थे। वो प्यार जो तराना के एक लाल गुलाब से शुरू हुआ था। वह आज एक [संगीत] कब्र की खामोश मिट्टी में दफन हो गया था। तो ये था वो किस्सा जो बॉलीवुड के रंगीन दुनिया के पीछे छुपे [संगीत] एक गहरे और काले दर्द को बयां करता है। एक ऐसी मोहब्बत जिसने इतिहास तो रचा लेकिन दो लोगों को जीते जी मार डाला। उम्मीद है यह किस्सा आपको पसंद आया होगा। [संगीत] अगर पसंद आया है तो जरूर लाइक और शेयर कीजिए। ऐसे ही अनसुने सच्चे और अनफिल्टर किस्सों के लिए फिल्म की कारवाला को अभी सब्सक्राइब करें। हम फिर मिलेंगे एक और हैरान कर देने वाले किस्से के साथ। तब तक आप अपना और अपनों का रखिए बेहद ख्याल।