पश्चिम एशिया की आग अब और खतरनाक रूप ले रही है। मिसाइलें बरस रही हैं, शहर दहल रहे हैं। लेकिन इस अंधेरे के बीच पूरी दुनिया की नजरें एक ही देश पर टिकी हैं। भारत। फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टप से लेकर अमेरिका के दिग्गज कर्नल डगलस मैकग्रेगर तक सब एक सुर में कह रहे हैं कि अगर कोई इस जंग को रुकवा सकता है, तो वह है भारत। आखिर क्यों दुनिया भारत को शांति दूत के रूप में देख रही है?
चलिए डिकोड करते हैं आज की स्पेशल रिपोर्ट में। दुनिया को भारत से उम्मीद क्यों? फिनलैंड के राष्ट्रपति ने साफ कहा है कि भारत को अब अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच मध्यस्था के लिए आगे आना चाहिए। वहीं अमेरिका की राजनीति में प्रभावी आवाज माने जाने वाले कर्नल का मानना है कि भारत एक तटस्थ शक्ति है जिसका कद और प्रभाव लगातार बढ़ रहा है। सिर्फ पश्चिमी देश ही नहीं भारत में यूएई के राजदूत रहे राजनयिक हुसैन हसन मिर्जा भी कुछ ऐसी ही बात कह चुके हैं।
लेकिन भारत में ऐसा क्या खास है जो चीन या अमेरिका के पास नहीं। भारत की सबसे बड़ी ताकत है सबके साथ भरोसे का रिश्ता। भारत की खासियत यह है कि वह सभी देशों से अच्छे संबंध रखता है। इजराइल के साथ मजबूत रक्षा [संगीत] संबंध हैं। ईरान के साथ पुराने सांस्कृतिक और व्यापारिक संबंध हैं। वहीं अमेरिका के साथ रणनीतिक साझेदारी है। भारत किसी एक कैंप का हिस्सा नहीं बनता।
भारत अपने फैसले किसी के दबाव में नहीं करता बल्कि अपने हितों और ग्लोबल शांति के आधार पर लेता है। चीन जहां ईरान की तरफ झुका दिखता है और यूरोप अमेरिका के करीब है वहीं भारत अकेला ऐसा देश है जो सभी पक्षों से आंख में आंख डालकर बात करता है। यह बातें भारत को सबसे खास बनाती हैं। भारत सभी पक्षों से बात कर सकता है। रणनीतिक स्वायता भारत की विदेश नीति का सबसे मजबूत आधार है।
रणनीतिक स्वायत्ता का मतलब है कि किसी खेमे से जुड़ने के बजाय अपने हितों के आधार पर फैसले लेता है भारत। भारत के पास गुटनिरपेक्ष आंदोलन की विरासत है। आर्थिक ताकत के फायदे भी हैं। मजबूत सेना, बेहतर तकनीक, ज्यादा व्यापार, दुनिया में ज्यादा प्रभाव। वहीं आईएमएफ के ताजा आंकड़े चौंकाने वाले हैं। वैश्विक जीडीपी ग्रोथ में योगदान 2026 के अनुमान की बात करें तो 26.6% के साथ चीन पहले स्थान पर रहेगा।
वहीं 17% योगदान ग्लोबल जीडीपी में भारत का होगा। वहीं 9.9% योगदान के साथ अमेरिका तीसरे स्थान पर रहेगा। यह आईएमएफ की रिपोर्ट आई है जिसमें 2026 के लिए अनुमान लगाया गया है। कोविड-19 महामारी के दौरान भारत की अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका लगा था। वित्त वर्ष 2020 से 2021 में ग्रोथ नकारात्मक हो गई थी।
लेकिन इसके बाद भारत ने तेजी से वापसी की। दिसंबर 2025 तिमाही में भारत की जीडीपी 7.8% बढ़ी। वित्त वर्ष 2026 में लगभग 7.6% वृद्धि की उम्मीद है। अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष आईएमएफ के अनुसार भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। खास बात यह है कि जब अमेरिका, चीन और ईयू की अर्थव्यवस्थाओं की रफ्तार [संगीत] सुस्त थी, तब भारत तेजी से आगे बढ़ रहा था।
ग्रोथ की रफ्तार रूस, यूक्रेन युद्ध और वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता के बावजूद जारी है। यही ताकत भारत को वैश्विक मंच पर किंग मेकर बनाती है। इसलिए दुनिया भारत को विनाशकारी युद्ध रुकवाने में सक्षम और सबसे उपयुक्त देश के तौर पर देख रही है। इस पूरे मामले पर आप क्या कुछ सोचते हैं? आपकी क्या राय है? हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताइएगा.