अरब देशों में, विशेषकर सऊदी अरब और यमन में, ऊंट के मूत्र (Camel Urine) को पारंपरिक चिकित्सा के रूप में कैंसर, हेपेटाइटिस, बालों की समस्याओं और पेट की बीमारियों के इलाज के लिए पिया जाता है। यह परंपरा पुरानी मान्यताओं और हदीस के संदर्भों से जुड़ी है, लेकिन विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और वैज्ञानिक अध्ययनों ने इसे जानलेवा बताया है। यह वीडियो बताता है कि क्यों कुछ लोग ऊंटनी का पेशाब पीने का समर्थन करते हैं:
अरब देशों में क्यों पीते हैं ऊंट का मूत्र?पारंपरिक चिकित्सा (Traditional Medicine): मरुस्थलीय क्षेत्रों में लंबे समय से ऊंट के दूध और मूत्र को एक आयुर्वेदिक या पारंपरिक औषधि (औषधीय गुण) माना जाता रहा है।मान्यता और हदीस: कुछ इस्लामिक हदीसों में ऊंट के दूध
और मूत्र को बीमारियों के इलाज के रूप में उल्लेख किया गया है, जिसके कारण लोग इसे धार्मिक मान्यता के रूप में अपनाते हैं।कैंसर का इलाज: कुछ लोग इसे कैंसर के वैकल्पिक उपचार के रूप में देखते हैं, हालांकि इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इस वीडियो में ऊंटनी के दूध और मूत्र के पारंपरिक उपयोग के बारे में बताया गया है:
WHO की चौकाने वाली चेतावनीविश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने ऊंट का मूत्र पीने के खिलाफ सख्त चेतावनी जारी की है: MERS-CoV वायरस: ऊंट का मूत्र और कच्चा दूध मिडिल ईस्ट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम (MERS-CoV) नामक घातक वायरस फैला सकते हैं,
जो कोरोना वायरस के समान ही एक श्वसन संक्रमण है।जानलेवा संक्रमण: इसमें खतरनाक बैक्टीरिया और वायरस होते हैं जो किडनी फेलियर, निमोनिया और मौत का कारण बन सकते हैं।वैज्ञानिक असहमति: अध्ययनों ने यह साबित किया है कि ऊंट के मूत्र का कैंसर या अन्य बीमारियों के इलाज में कोई औषधीय लाभ नहीं है।