नाराज होते हुए हरवंश राय बच्चन ने जया बच्चन के बारे में अमिताभ बच्चन से कहा कि अगर तुम इस लड़की के साथ त्रिप्पल जाना ही चाहते हो तो सबसे पहले उससे शादी करो और फिर जाओ हां तीन बच्चे संभालने पड़ते हैं अच्छा तीन कौन-कौन से दो हमारे हैं और एक ऋषि कपूर और नीतू सिंह की शादी में रेखा मंगलसूत्र और सिंदूर पहनकर आ गई और अमिताब के पास पहुंचकर उनसे बात करने लगी जबकि उनकी शादी भी नहीं हुई थी यह सब देखकर जया बच्चन से देखा नहीं गया और बिकॉज आई थिंक इट्स वेरी चीप आई मीन यू नो आई हैव बीन इन द इंडस्ट्री आई नो आई मीन आई एम हिज वाइफ आई मीन इट वुड बी अ पिटी आई स्टार्ट क्वेश्चनिंग अबाउ थिंग इंदिरा गांधी ने देवराहा बाबा से एक ताजी बनवाया जिसे एक सफेद कपड़े में लपेटकर अमिताब की तकिए के नीचे रख दिया अमिताब का बहुत खून बह चुका था कई दिन तक होश नहीं आया और डॉक्टरों ने क्लिनिकली डेड घोषित कर दिया 16 फिल्म की ओरिजिनल स्क्रिप्ट में गब्बर ठाकुर को नहीं मारता बल्कि ठाकुर गब्बर को मारने वाला था लेकिन सेंसर बोर्ड [संगीत] 1984 सिख दंगों की पीड़िता जगदीश कौर ने आरोप लगाते हुए कहा कि दूरदर्शन के लाइव टेलीकास्ट में अमिताभ बच्चन ने अपने हाथों को ऊपर उठाते हुए कहा खून का बदला खून से [संगीत] लेंगे नमस्कार मैं श्याम मीरा सिंह अमिताभ बच्चन की लाइफ स्टोरी बहुत इंटरेस्टिंग है इस वीडियो में अमिताभ की जिंदगी के कुछ हिस्सों के बारे में डिटेल में बात की जाएगी पहले बच्चन परिवार और गांधी परिवार के जो फैमिली रिलेशंस थे उनके बारे में दूसरा रेखा
जया और अमिताभ बच्चन के संबंधों के बारे में और तीसरा सिख दंगों में अमिताभ पर लगे आरोपों के बारे में पूरी वीडियो में इंटरेस्टिंग चीजें हैं अब कहानी शुरू करते हैं 11 अक्टूबर 1942 इलाहाबाद में हिंदी के जानेमाने कवि हरिशंकर राय बच्चन और उनकी पत्नी तेजी बच्चन के घर पर उनके पहले बच्चे का जन्म होता है उस समय देश में अंग्रेजों के खिलाफ भारत छोड़ो आंदोलन चल रहा था इसलिए बच्चे का नाम रखा जाता है इंकलाब यानी रेवोल्यूशन हालांकि बाद में दोस्तों के कहने पर बच्चे का नाम बदलकर अमिताभ रख दिया गया यानी अमिताभ बच्चन इलाहाबाद में ही बच्चन परिवार के पड़ोस में मौजूद आनंद भवन में इंडिया का सबसे पावरफुल नेहरू गांधी परिवार रहता था 1942 में कवियत्री सरोजिनी नायडू ने हरवंश राय बच्चन और तेजी बच्चन को नेहरू गांधी परिवार से मिलवाया जहां से दोनों परिवारों के बीच लंबी दोस्ती की शुरुआत होती है खासकर इंदिरा गांधी और तेजी बच्चन के बीच जो एक दूसरे की सबसे क्लोज फ्रेंड्स बन जाती हैं तेजी बच्चन और इंदिरा गांधी दोनों ने अपने धर्म से बाहर शादी की थी तेजी सिख परिवार से आती थी और उन्होंने हिंदू कायस्थ कम्युनिटी से आने वाले हरवंश राय बच्चन से शादी की थी और उनके पिता भी इस शादी के खिलाफ थे इसी तरह इंदिरा गांधी ने पारसी धर्म से आने वाले फिरोज गांधी से शादी की थी और उनके पिता जवाहरलाल नेहरू भी इस शादी को खास पसंद नहीं करते थे बच्चन और गांधी नेहरू परिवार दोनों ही इतने क्लोज थे कि जब जवाहरलाल नेहरू ने अपनी अंतिम सांसें ली थी तब तेजी बच्चन इंदिरा गांधी के साथ वहां पर मौजूद थी इंदिरा और तेजी का रिश्ता ऐसा था कि एक बार जब दिल्ली के गुलमोहर पार्क में बच्चन परिवार की पार्टी के दौरान बिजली कट जाती है तो तेजी ने सीधे प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को फोन कर दिया और बड़ी खराबी होने के बाद भी केवल 35 मिनट के अंदर ही बिजली वापस आ जाती हैं अमिताभ बच्चन उम्र में राजीव गांधी से 2 साल बड़े थे दोनों परिवार लगभग एक ही समय पर इलाहाबाद से दिल्ली शिफ्ट होते हैं और यहां भी दोनों के घर पास ही मौजूद थे अमिताब और उनके छोटे भाई अजिताभ दोनों का प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के आवास यानी तीन मूर्ति भवन में
आना जाना आम बात थी तेजी बच्चन एक सिंगर और थिएटर आर्टिस्ट थी और उन्हीं के कारण अमिताभ को एक्टिंग में इंटरेस्ट आया इलाहाबाद में अपनी शुरुआती पढ़ाई करने के बाद अमिताभ बच्चन नैनीताल के बर्डिंग स्कूल में यानी शेरवुड कॉलेज में पढ़ने के लिए चले जाते हैं और यहीं अमिताब थिएटर भी करने लगे 15 साल की उम्र में ही अमिताव एक्टिंग के लिए अपना पहला अवार्ड जीत चुके थे यानी थिएटर उन्हें बचपन से ही करना आता था इस बीच राजीव और संजय गांधी भी देहरादून के दून स्कूल में पढ़ने के लिए चले गए छुट्टियों के दिनों में अमिताभ बच्चन और राजीव गांधी एक साथ घूमते और रोजाना राष्ट्रपति भवन के पूल में स्विमिंग किया करते थे शेरवुड कॉलेज के बाद अमिताभ बच्चन ने दिल्ली के किरोड़ी मल कॉलेज से डबल एमए की यहां भी अमिताभ बच्चन किरोड़ी मल कॉलेज की थिएटर सोसाइटी यानी द प्लेयर्स से जुड़ जाते हैं और एक्टिंग सीखते हैं कॉलेज की पढ़ाई पूरी होने के बाद अमिताभ बच्चन को बताया गया कि अगर उन्हें अच्छा जीवन जीना है तो कोलकात्ता में एक अच्छी कंपनी में नौकरी पानी होगी इसलिए अमिताभ बच्चन कोलकाता चले गए और यहां श वालेस कंपनी में अपनी पहली नौकरी करने लगे इसके बाद अमिताभ शिपिंग फर्म यानी बर्ड एंड कंपनी में एक फ्रेट ब्रोकर के तौर पर काम करने लगे और यहां अमिताव को शुरुआत में महीने के मात्र ₹ 70 महीने सैलरी मिलती थी इधर 19 6 में राजीव गांधी और सोनिया गांधी की शादी की बातें चलने लगी राजीव से शादी करने के लिए सोनिया इंडिया आ जाती हैं और 43 दिन बच्चन परिवार के यहां पर रहती हैं कारण यह था कि इंदिरा गांधी नहीं चाहती थी कि उनकी होने वाली बहू किसी होटल में रहे या शादी से पहले उनके घर में रहे इसलिए सोनिया गांधी को बच्चन परिवार के यहां पर रखा गया
यानी अमिताभ बच्चन के घर पर सोनिया की शादी के मेहंदी जैसे कुछ रिवाज भी बच्चन परिवार के घर में ही हुए हालांकि सोनिया की मां पाउला माइनो भी इटली से भारत आई हुई थी लेकिन सोनिया की जो मां की रस्में थी जो शादी में वो सब तेजी बच्चन ने निभाई इस सब के कारण सोनिया तेजी बच्चन को अपनी तीसरी मां मानती थी वहीं अमिताभ और अजिताभ को अपना भाई और यही कारण है कि जब राहुल गांधी और प्रियंका गांधी छोटे थे तब वे अमिताभ बच्चन को मामू कहकर बुलाते थे यानी मामा इस बीच अमिताब ने 6 साल तक कोलकाता में नौकरी करने के बाद साल 1968 में ट्रेन पकड़कर बंबई आ गए यहां अमिताभ बच्चन मरीन ड्राइव पर जर्नलिस्ट और एल इंडिया की फाउंडिंग एडिटर नीरजा शाह के फ्लैट पर रहने लगे 6 फुट 3 इंच लंबे अमिताभ को बॉम्बे में अपनी लंबाई और दुबले पतले लुक के कारण रिजेक्शंस का सामना करना पड़ा वह जिस भी फिल्म मेकर के पास जाते सबने कहा कि वे बहुत लंबे हैं और उनका रंग भी फिल्मों में काम करने के हिसाब से काला है अमिताव ने अपनी गहरी और भारी आवाज का भी फायदा उठाने की कोशिश की लेकिन ऑल इंडिया रेडियो ने भी अमिताब को रिजेक्ट कर दिया अब 1969 में जब अमिताब सब कुछ छोड़ने वाले थे तब उनके भाई अजिताभ को पता चला कि डायरेक्टर के ए अब्बास अपनी फिल्म के लिए एक नया चेहरा ढूंढ रहे हैं इस तरह से अमिताव को अपनी पहली फिल्म सात हिंदुस्तान मिलती है इस फिल्म के लिए अमिताभ को ₹ ज मिले थे फिल्म में अमिताभ ने एक मुस्लिम कवि का रोल निभाया जो गोवा को जो कि उस समय पुर्तगालियों के कब्जे में था उन पुर्तगालियों के राज से उसे आजाद कराना चाहता था जब यह फिल्म सिनेमा घरों में आई तो फ्लॉप हो जाती है लेकिन अमिताभ को उनके इस रोल के लिए बेस्ट न्यू कमर का नेशनल अवार्ड मिलता है इसी समय का एक किस्सा है कि एक दिन अमिताब दिल्ली से आए अपने एक दोस्त के साथ कॉमेडी लेजेंड महमूद अली के पास पहुंचते हैं जो उस समय अमिताब के फ्लैट मेट अनवर अली के भाई थे महमूद अली उसी समय नशे में थे और समझ नहीं पा रहे थे कि उनसे क्या कहा जा रहा है
क्या बात हो रही है उन्होंने अपनी जेब से ₹5000000 ये पैसा महमूद के अगले प्रोजेक्ट में काम करने के लिए साइनिंग अमाउंट है ये दोस्त कोई और नहीं बल्कि राजीव गांधी थे इधर अमिताभ के साथ हिंदुस्तान फिल्म फ्लॉप हो चुकी थी और उन्हें अधिक फिल्में नहीं मिल रही थी अमिताभ की मदद के लिए तेजी बच्चन ने इंदिरा गांधी से कांटेक्ट किया जिन्होंने अमिताभ के लिए नरगिस दत्त और सुनील दत्त से बात की इंदिरा गांधी के कहने पर ही दत्त परिवार ने अपनी होम प्रोडक्शन फिल्म यानी रेशमा और शेरा में अमिताभ को रोल दे दिया यह बात 1971 की है प्रोड्यूसर सावन कुमार टाक का दावा है कि तीजी बच्चन और राजीव और संजय गांधी ने उनसे अमिताव को रोल देने के लिए रिक्वेस्ट की थी इस फिल्म में अमिताभ को एक गूंगे आदमी का रोल दिया गया था हालांकि अमिताभ की ये दूसरी फिल्म भी नहीं चली इसलिए अब अमिताभ बच्चन वॉइस ओवर और छोटे रोल्स करके अपना काम चलाने लगे लेकिन इनसे उनके करियर को कोई फायदा नहीं हो रहा था फिर आई फिल्म आनंद आनंद में उस समय हिंदी सिनेमा के सबसे बड़े स्टार राजेश खन्ना लीड रोल में थे और इस फिल्म को क्रिटिकली अलेम किया गया और यह फिल्म भी खूब चली अमिताभ बच्चन ने भी अपनी एक्टिंग से सबको इंप्रेस किया लेकिन बाद में भी उन्हें ज्यादा काम नहीं मिला 1972 में अमिताभ को बॉम्बे टू गोवा में अपना पहला बड़ा लीड रोल मिलता है लेकिन यह फिल्म भी नहीं चलती इसी साल अमिताव ने जया बहादुरी के साथ अपनी पहली फिल्म एक नजर की इस फिल्म के दौरान ही दोनों के बीच प्यार की घंटियां बजने लगती हैं जया पहली मीटिंग से ही अमिताव से इंप्रेस्ड थी और यह लव एट फर्स्ट साइट जैसा मामला था इस तरह एक के बाद एक अमिताभ की लगातार 13 फिल्में फ्लॉप होती हैं लेकिन साल 1973 में आई अमिताभ की फिल्म जंजीर ने पूरा मामला पलट दिया यह फिल्म हिंदी सिनेमा में एंग्री यंग मैन की एंट्री थी अमिताब की जंजीर फिल्म जबरदस्त हिट होती है जंजीर फिल्म की सक्सेस को सेलिब्रेट करने के लिए अमिताभ ने लंदन के लिए एक ट्रिप प्लान की लेकिन जब हरवंश राय बच्चन को पता चला कि इस ट्रिप पर जया भी साथ जाएंगी तो वे बहुत नाराज होते हैं और अमिताब से कहते हैं कि अगर तुम इस लड़की के साथ जाना चाहते हो तो पहले उससे शादी करो और फिर जाओ वरना तुम नहीं जाओगे अमिताभ बच्चन अपने पिता की बात नहीं टालते थे इसलिए उन्होंने अगले ही दिन 3 जून 1973 को जया बच्चन से शादी कर ली अमिताब की शादी में केवल फैमिली मेंबर्स थे और कुछ करीबी दोस्त ही थे नेहरू गांधी परिवार की तरफ से भी सिर्फ संजय गांधी ही इस शादी में शामिल हो सके इस तरह शादी के बाद अमिताब
और जया उसी रात लंदन के लिए निकल जाते हैं लेकिन आगे की कहानी को जानने से पहले मैं आपसे एक जरूरी जानकारी साझा करना चाहता हूं बहुत से लोगों को लगता है कि शेयर मार्केट में आ जाओ और बहुत सारा पैसे कमा लो लोग बिना सीखे ही सीधे शेयर मार्केट में पैसे लगाने लग जाते हैं और यह काफी ज्यादा जोखिम भरा है लेकिन बिनमो एक ऐसा ऐप है जहां पर आप रियल अकाउंट से सीधे पैसा इन्वेस्ट करने के बजाय पहले डेमो अकाउंट से इसकी प्रैक्टिस कर सकते हैं सीख सकते हैं जब ट्रेडिंग सीख जाए तो ही अपने रियल अकाउंट से इन्वेस्ट करें यह फीचर आपको कहीं और किसी ऐप पर नहीं मिलता सिवाय बनम के यहां अकाउंट में आप एक ग्राफ देख सकते हैं जिसमें आपको यह अनुमान लगाना होता है कि मार्केट अब यहां से ऊपर जाएगा या नीचे जाएगा यानी शेयर मार्केट ऊपर जा रहा है या नीचे गिरेगा अगर आपने मार्केट का सही अनुमान लगाया तो आपकी अर्निंग हो जाएगी लेकिन अर्निंग करने के लिए चाहिए प्रैक्टिस बिनोमो ऐप पर आपकी इस अर्निंग को आप एक क्लिक में सीधे अपने अकाउंट में ले सकते हैं इस तरह बनो ऐप पर डेमो अकाउंट से प्रैक्टिस करके आप अर्निंग का एक नया और सोर्स खोल सकते हैं बनो एप की लिंक मैंने डिस्क्रिप्शन बॉक्स और कमेंट बॉक्स में आपके लिए डाल दी है विनोम पर डेमो अकाउंट बनाकर आपका ट्रेडिंग सीखने का अनुभव कैसा रहा इसे कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं अब आगे की कहानी जंजीर के बाद अमिताभ बच्चन को रेगुलर फिल्में मिलने लगी इनमें से ज्यादातर फिल्मों में अमिताभ ने एक एंटी हीरो एक एंग्री यंग मैन का रोल निभाया जो सिस्टम से परेशान होकर कानून के अपने हाथों में ले लेता है और इस रोल को जनता के द्वारा बहुत पसंद किया जाने लगा अपने कैरेक्टर्स के जरिए वो जनता का गुस्सा दिखा रहे थे बेरोजगारी जैसी समस्याओं से लड़ रही जनता को उनमें अपना चैंपियन दिखने लगा जो उस सिस्टम को अटैक कर रहा था जिसने उन्हें गरीबी में रखा हुआ था जिस हाइट और लुक के कारण अमिताव को स्टार्टिंग में काम भी नहीं मिल रहा था उन्हें रिजेक्ट किया जा रहा था अब एंग्री यंग मैन वाली एक्शन फिल्म्स में यही उनकी सबसे बड़ी खूबी बन गई इसी दौरान आई नमक हराम फिल्म के लिए अमिताभ को बेस्ट सपोर्टिंग रूल का अवार्ड मिलता है 1975 में अमिताभ ने अपने करियर की दो सबसे बड़ी ब्लॉकबस्टर्स फिल्में दी एक दीवार और दूसरी सोले फिल्म सोले को क्रिटिक्स ने नेगेटिव रिव्यूज दिए और शुरुआती दिनों में इसे फ्लॉप घोषित कर दिया गया एक न्यूज़पेपर ने लिखा कि अगर 16 जैसी मूवीज बनती हैं
तो बॉलीवुड का कोई फ्यूचर नहीं है लेकिन दर्शकों को यह फिल्म बहुत पसंद आती है और इसने इतिहास रच डाला यह हिंदी सिनेमा की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बनी सोले ने उस समय ₹1 करोड़ कमाए जो किसी भी फिल्म ने नहीं कमाए थे सोले में जब अमिताभ के कैरेक्टर जय की मौत होती है तो सिनेमा घर में लोग रोने लगते हैं जर्मनी से एक लड़के को केवल इसलिए इंडिया लाया गया क्योंकि सोले फिल्म देखने के बाद उसे लगा कि अमिताव सच में मर गए हैं और वह रोए जा रहा था इस तरह सोले ने देश में एक नए सुपर स्टार को जन्म दे दिया अमिताब से पहले राजेंद्र कुमार और राजेश खन्ना जैसे पॉपुलर अभिनेता भी थे लेकिन अमिता बच्चन जैसा कल्ट किसी का नहीं था लोगों पर अमिताव का जादू हो चला था 1979 में कोलकाता में याराना फिल्म के एक गाने की शूटिंग के लिए प्रोड्यूसर्स ने कुछ हजार लोगों को बुलाया था लेकिन अमिताब की पॉपुलर देखिए कि इसके लिए पांच गुना लोग पहुंच गए जब पुलिस ने एक दर्शक को पीट दिया तो हंगामा हो जाता है भीड़ ने दंगा कर दिया जब पुलिस सिचुएशन को कंट्रोल नहीं कर पाई तो अमिताभ बच्चन को बुलाया गया और उन्होंने एक पुलिस इंस्पेक्टर को मुक्का मार दिया भीड़ यह देखकर खुश हो जाती है कि उनका हीरो उनकी तरफ से लड़ रहा है भीड़ शांत हो जाती है बाद में अमिताब ने इंस्पेक्टर से माफी मांगी और कहा कि यह केवल एक मात्र सोल्यूशन था जो मैं उस समय कर सकता था यह अमिताब की एंग्री यंग मैन वाली छवि ही थी जिसमें लोग एक ऐसे आदमी को देख रहे थे जो सिस्टम से लड़ रहा था 1980 तक अमिताभ बच्चन वन मैन इंडस्ट्री बन चुके थे अमिताभ के नाम से ही फिल्में बिकने लगी फिल्मों के डिस्ट्रीब्यूटर्स बिना स्क्रिप्ट पढ़े ही फिल्में खरीद लेते थे हर प्रोड्यूसर अमिताव को ही अपनी फिल्म में लेना चाहता था क्योंकि अमिताव का फिल्म में होना हिट होने की गारंटी था 1978 में अमिताव ने त्रिशूल डॉन और मुकद्दर का सिकंदर के रूप में तीन बड़ी ब्लॉकबस्टर फिल्में दी हालांकि अमिता पर्दे पर तो सिस्टम का विरोध करने वाले हीरो का रोल निभा रहे थे लेकिन असल जि जिंदगी में वे खुद उस सिस्टम के पार्ट थे 1975 में जब इंदिरा गांधी ने 21 महीने के लिए इस देश पर इमरजेंसी लगाई तो अमिताभ बच्चन ने इसे डिफेंड किया इसके कारण मीडिया कहने लगी कि वह अपने दोस्त संजय गांधी के साथ हैं जो इमरजेंसी में कई तरह की ज्यादति यां कर रहे थे जब ऑल इंडिया रेडियो और दूरदर्शन पर किशोर कुमार के गाने बैन कर दिए गए तब भी अमिताव चुप रहे राशिद किदवई अपनी किताब में लिखते हैं कि सालों बाद अर्णव गोस्वामी को टाइम नाव के एक प्रोग्राम में अमिताभ बच्चन ने आपातकाल पर विचार रखे उन्होंने स्वीकार किया कि आपातकाल के डिसीजन से उन्हें गुस्सा नहीं आया था
लेकिन शायद आपातकाल की ज्यादति हों के खिलाफ ना बोलना उनका सही डिसीजन नहीं था ऐसा अमिताव ने अर्णव गु स्वामी को खुद कहा इंटरेस्टिंग अमिताब की 16 फिल्म भी इमरजेंसी के दौरान ही रिलीज हुई थी और डायरेक्टर और राइटर्स को नहीं लग रहा था कि सेंसर बोर्ड इसे इतनी आसानी से पास करेगा क्योंकि इसमें बहुत अधिक वायलेंस था माना जाता है कि यहां पर अमिताव की नेहरू गांधी परिवार के साथ दोस्ती काम आती है और सेंसर बोर्ड ने छोटे-मोटे कट्स के साथ इस फिल्म को पास कर दिया हालांकि सेंसर बोर्ड ने फिल्म की एंडिंग बदलवा ओरिजिनल स्क्रिप्ट में ठाकुर गब्बर को मारने वाला था लेकिन सेंसर बोर्ड को लगा ऐसा वायलेंस माहौल को खराब कर सकता है इसके कारण डायरेक्टर रमेश सिप्पी को फिल्म की एंडिंग दोबारा से शूट करनी पड़ती है जिसमें ठाकुर गब्बर को पुलिस के हवाले कर देता है इमरजेंसी में न्यूज़ पर तो कंट्रोल किया ही जा रहा था फिल्म जजम को भी सेंसरशिप का सामना करना पड़ रहा था अमिताभ और जीनत अमान से रिलेटेड गॉसिप्स को भी न्यूज़पेपर से हटवा दिया गया इमरजेंसी के बाद जब जनता पार्टी की सरकार ने इंदिरा गांधी और संजय गांधी को टारगेट करना शुरू कर दिया तो अमिताभ बच्चन ने खुद को गांधी परिवार से दूर करना शुरू कर दिया राशिद किदवई ने अपनी किताब नेता अभिनेता में लिखा है कि संजय गांधी के बेटे वरुण गांधी बताते हैं कि तब बच्चन परिवार को एक रैली में बुलाने की बात हुई थी लेकिन तेजी बच्चन ने इससे मना कर दिया और कहा कि इससे उनके बेटे ताब के करियर पर यानी फिल्मी करियर पर नेगेटिव असर पड़ सकता है संजय गांधी इससे काफी नाराज होते हैं और कुछ समय के लिए दोनों परिवारों के संबंध टूट जाते हैं इमरजेंसी के दौरान ही अमिताब और रेखा के बीच अफेयर की खबरें आने लगी अमिताब और रेखा ने पहली बार 1973 में आई फिल्म नमक हराम में साथ काम किया था लेकिन इसमें रेखा राजेश खन्ना के अपोजिट थी ना कि अमिताभ बच्चन की हीरोइन नहीं थी इसकी शूटिंग के दौरान अमिताब ने रेखा को वजन कम करने के लिए और अपने डिक्शन यानी उनके उच्चारण को सही करने ने और मेकअप पर काम करने के लिए सजेशन दिया रेखा ने अमिताब की सलाह को बहुत सीरियसली लिया और खुद को एक ऐसे रूप में चेंज कर लिया जिसने अपने जमाने की हेमा मालिनी प्रवीण बाबी
और जीनत अमान जैसी बड़ी-बड़ी हीरोइन को पीछे छोड़ दिया रेखा का ट्रांसफॉर्मेशन इतना ज्यादा ड्रामे िक था कि जब 3 साल बाद 1976 में दो अनजाने फिल्म में उन्होंने पहली बार अमिताब की हीरोइन के तौर पर काम किया तो अमिताब उन्हें देखकर हैरान रह जाते हैं लेकिन अभी भी उनका एडिक्शन उतना सुधरा नहीं था और वह हिंदी और उर्दू के डायलॉग बोलने में अटकती थी एक बार रेखा अपने डायलॉग से याद नहीं कर पाई तो अमिताभ बच्चन उन पर भड़क गई अगले ही दिन रेखा ने एक बड़े डायलॉग को एक ही बार में बोलकर अमिताव को दोबारा से हैरान कर दिया जिसके बाद दोनों अच्छे दोस्त बन जाते हैं अगली फिल्म अलाप तक ये दोनों अच्छे दोस्त एक दूसरे के करीब आने लगे अब दोनों के बारे में बातें उड़ने लगी जो मैगजींस के कब तक पहुंच गई कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया कि शूटिंग के बाद रेखा और अमिताव रेखा के एक दोस्त के बंगले में कई घंटे साथ में गुजारते हैं लेकिन इन दोनों की जोड़ी का फिल्मी करियर ठीक नहीं चल रहा था रेका और अमिताभ की दो अनजाने और अलाप दोनों फिल्म में फ्लॉप हो गई और फिल्म मेकर्स अब इन्हें दोनों को एक साथ लेने में डरने लगे इसी बीच प्रकाश मेहरानी एक बोल्ड स्टेप लेते हुए उनके साथ खून पसीना नाम की एक फिल्म बनाई जो हिट होती है इसके बाद दोनों ने अगले 5 साल में 12 फिल्में साथ में की जिनमें गंगा की सौगंध कसमें वादे मुकद्दर का सिकंदर मिस्टर नटवरलाल और सुहाग जैसी हिट फिल्में में शामिल रही गंगा की सौगंध तक उनकी नजदीकियां और ज्यादा बढ़ चुकी थी उस वक्त की रिपोर्ट्स के अनुसार जब अमिताव अपनी फिल्म की हरिद्वार में शूटिंग कर रहे थे तब एक बदमाश रेखा को गालियां देने लगा अमिताब उसके पास ही बैठे थे और उन्होंने अपनी सीट से उछलकर उसे पकड़ लिया और जमकर पीटा इस घटना के बाद दोनों के बीच अफेयर की खबरें अब और ज्यादा स्ट्रांग हो गई इसी बीच साल 1980 में ऋषि कपूर और नीतू सिंह की शादी में रेखा मंगलसूत्र और सिंदूर पहनकर पहुंचा जाती हैं जबकि उनकी शादी भी नहीं हुई थी यहां वे अमिताव के पास पहुंची और उनसे बात करने लगी जया बच्चन ने काफी समय तक शांत दिखने की कोशिश की लेकिन अंत में उन्होंने सिर झुका लिया
और उनकी आंखों से आंसू आने लगे खबरें छपने लगी कि रेखा और अमिताव ने सीक्रेट शादी कर ली है एक मैगजीन ने तो यह भी छाप दिया कि रेखा प्रेग्नेंट है राशिद किदवई की किताब नेता अभिनेता के अनुसार इन मीडिया रिपोर्ट्स और रेखा के मंगलसूत्र और सिंदूर में आने से जया बहुत अपसेट हुई थी एक दिन उन्होंने रेखा को अपने घर डिनर पर बुलाया और यहां उनसे साफ कह दिया कि वे किसी भी स्थिति में अपने पति को नहीं छोड़ें एक्टर रंजीत बताते हैं कि रेखा ने उनसे उनकी एक फिल्म की शूटिंग को सुबह शिफ्ट करने की रिक्वेस्ट की थी ताकि वे शाम का समय अमिताब के साथ गुजार सकें जब रंजीत ने इससे मना कर दिया तो रेखा ने फिल्म ही छोड़ दी और साइनिंग अमाउंट वापस कर दिया इसके बाद अमिताभ रेखा और जया बच्चन के बीच एक मजेदार कहानी घटती है दरअसल यश चौपड़ा अमिताभ बच्चन के पास सिलसिला फिल्म का प्रोजेक्ट लेकर पहुंचे इस फिल्म में यश चौपड़ा रेखा और जया बच्चन दोनों को ही अमिताभ बच्चन के साथ में रखना चाहते थे फिल्म में रेखा का रोल अमिताभ की गर्लफ्रेंड का था वहीं जया बच्चन का रोल उनकी पत्नी का था कहा जाता है कि जया ने पहले इस फिल्म में काम करने से मना कर दिया था लेकिन बाद में वे इसके लिए तैयार हो गई राशिद किदवई ने अपनी किताब में लिखा है कि बीबीसी को दिए एक इंटरव्यू में यश चौपड़ा ने इसके पीछे का कारण बताया है यानी कि जया बच्चन इस फिल्म में शामिल होने के लिए क्यों रेडी हुई इसका कारण बताया है इसके पीछे का कारण सिलसिला की एंडिंग थी इसमें पति अंत में गर्लफ्रेंड को छोड़कर अपनी पत्नी के पास वापस आ जाता है इस एंडिंग के जरिए जया बच्चन सभी को क्लियर मैसेज देना चाहती थी कि वे अमिताभ की पत्नी है और वे ही अंत में जीतें हुआ भी यही सिलसिला रेखा और अमिताभ की साथ में की गई आखिरी फिल्म साबित हुई इसके बाद उन्होंने कभी साथ में काम नहीं किया फिल्म सिलसिला रिलीज होने के लगभग 30 साल बाद इस फिल्म के प्रोड्यूसर यश चौपड़ा ने रेखा और अमिताब के रिलेशनशिप में होने की बात को कंफर्म किया यश चौपड़ा ने
बताया कि रेखा और अमिताब सिलसिला से पहले से ही रिलेशनशिप में थे मैं हमेशा डरा हुआ रहता था क्योंकि यह एक रियल लाइफ सिचुएशन थी जिसे रियल लाइफ पर उतारा जा रहा था जया बच्चन पत्नी है और रेखा उनकी गर्लफ्रेंड असल जिंदगी में भी यही स्टोरी थी डायरेक्टर प्रकाश मेहरा ने भी रेखा और अमिताव के बीच के अफेयर को कंफर्म किया और कहा कि दोनों की तरफ से अट्रैक्शन था रेखा कई बार अमिताव के लिए अपने प्यार का इजहार कर चुके हैं लेकिन अमिताभ ने कभी भी रेखा के साथ अपने अफेयर को स्वीकार नहीं किया अमिताभ के रिश्ते से इंकार करने पर रेखा ने नवंबर 1984 में फिल्म फेयर मैगजीन को दिए गए अपने एक इंटरव्यू में कहा था वो ऐसा क्यों नहीं करेंगे उन्होंने अपनी इमेज अपने परिवार अपने बच्चों को बचाने के लिए यह किया है पब्लिक को उनके लिए मेरे प्यार और मेरे लिए उनके प्यार के बारे में क्यों जानना है मैं उन्हें प्यार करती हूं और वह मुझे प्यार करते हैं रेखा आगे कहती है कि मिस्टर बच्चन अभी भी पुराने ख्यालात के हैं वह किसी को हर्ट नहीं करना चाहते तो अपनी पत्नी को क्यों करेंगे रेखा और अमिताब के अफेयर की खबरों के बीच जुलाई 24 1982 के दिन कुली फिल्म की शूटिंग के दौरान अमिताभ बच्चन को जानलेवा चोट लग जाती है कोस्टार पुनीत इससर के साथ एक फाइट सीन के दौरान अमिताब एक टेबल के किनारे से टकरा गए जिससे उनका पेट बुरी तरह से घायल हो जाता है अमिताब को सीवियर इंफेक्शन हो गया और उनकी जान पर बनाई अमिताब को तुरंत ही एयरलिफ्ट करके मुंबई के ब्रिज कैंडी हॉस्पिटल ले जाया गया तब तक अमिताब का बहुत ज्यादा खून बह चुका था और वे कई दिन तक बेहोश रहे अमिताब कहते हैं कि उन्हें डॉक्टरों ने क्लिनिकली डेड घोषित कर दिया था द