की सजा, गिरफ्तारी का खतरा और फिर भी बांग्लादेश वापस लौटने का ऐलान। पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने कहा है कि वो बांग्लादेश वापस जाएंगी। जबकि उनके खिलाफ की सजा का फैसला पहले ही सुनाया जा चुका है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब लौटते ही गिरफ्तारी और की प्रक्रिया शुरू हो सकती है तो आखिर शेख हसीना इतना बड़ा जोखिम क्यों उठा रही है? तो चलिए पूरे मामले को समझ लेते हैं।
आप देख रहे हैं एबीपी लाइव और मैं साइमा पब्लिक। बांग्लादेश के पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने ऐलान कर दिया है कि वो इस साल के आखिर तक अपने देश लौटेंगे और वहां जाकर सरेंडर कर देंगी। यह फैसला इसलिए हैरान करने वाला है क्योंकि उनके खिलाफ पहले ही की सजा सुनाई जा चुकी है।
यानी अगर वह बांग्लादेश लौट जाती है और उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर ऐसा कौन सा कारण है जिसकी वजह से शेख हसीना यह बड़ा जोखिम उठाने को तैयार है। अब चलिए समझते हैं कि शेख हसीना को की सजा क्यों सुनाई गई?
साल 2024 में बांग्लादेश में छात्रों के नेतृत्व में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए थे और आरोप है कि उस दौरान आंदोलन को दबाने के लिए पुलिस और सुरक्षा बलों ने हिंसक कारवाई की थी और इसी मामले में ढाका की इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल ने शेख हसीना को मानवता के खिलाफ अपराध का दोषी मानते हुए गैर मौजूदगी में सजा सुनाई और यह बांग्लादेश के इतिहास में पहली बार था ।
जब किसी पूर्व प्रधानमंत्री को ऐसी सजा मिली हो। शेख हसीना के लौटने के ऐलान पर बांग्लादेश के अंतरिम सरकार ने प्रतिक्रिया दी है। प्रधानमंत्री के सलाहकार जाहिद उर रहमान ने कहा कि सरकार शेख हसीना की वापसी का स्वागत करती है।
लेकिन उन्हें दुनिया का सबसे अच्छा वकील साथ लेकर आना चाहिए। उनका कहना है कि शेख हसीना को अदालत की पूरी प्रक्रिया का सामना करना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि देश के लोग चाहते हैं कि अदालत द्वारा सुनाई गई मौत की सजा पर अमल किया जाए। अब आपके मन में भी यही सवाल होगा कि जब इतना बड़ा खतरा सामने है तभी शेख हसीना लौटना क्यों चाहती है? खुद शेख हसीना का कहना है कि उन्हें मौत का डर नहीं है। उन्होंने कहा कि 1975 में उन्होंने अपने पूरे परिवार को खो दिया था। 21 अगस्त को उन पर ग्रेनेड हमला हुआ लेकिन हर मुश्किल के बावजूद वो राजनीति में डटी रही। उनका दावा है कि उन्होंने पांच बार जनता के वोट से सरकार बनाई और उनकी पूरी जिंदगी बांग्लादेश और उसकी जनता के लिए समर्पित रही है।
लेकिन इस फैसले के पीछे राजनीतिक गणित भी माना जा रहा है। आवामी लीग पर भले ही बैन लगा हो लेकिन पार्टी के कार्यकर्ता धीरे-धीरे फिर से एक्टिव होते दिखाई दे रहे हैं। हाल ही में पार्टी ने अपना स्थापना दिवस मनाया। हालांकि कई कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर लिया गया। इसके बावजूद पार्टी के नेताओं का दावा है कि जनता का एक वर्ग अभी शेख हसीना के शासनकाल को बेहतर मानता है और यही उनकी सबसे बड़ी राजनीतिक उम्मीद है। हालांकि अगर शेख हसीना बांग्लादेश लौट जाती है तो उनके सामने कानूनी रास्ता अब भी खुला रहेगा। की सजा सुनाए जाने के बाद भी ट्रिब्यूनल के फैसले को ऊपरी अदालत में चुनौती दी जा सकती है। यानी वापसी के बाद भी उन्हें तुरंत फांसी नहीं दी जाएगी। पहले गिरफ्तारी फिर कानूनी प्रक्रिया और अपील जैसे कई चरण होंगे।
इसलिए यह लड़ाई सिर्फ राजनीतिक ही नहीं बल्कि अदालत के भीतर भी लंबी चल सकती है। यानी इस पूरे मामले को दो हिस्सों में समझा जा सकता है। पहला हिस्सा शेख हसीना अपनी बेगुनाही साबित करने और अदालत का सामना करने की बात कह रही हैं। वहीं दूसरा फैसला उनकी वापसी को राजनीतिक रणनीति भी माना जा रहा है ताकि वो अपने सपोर्टर्स को संदेश दे सके कि वह अभी भी मैदान छोड़ने वाली नहीं है।
इसलिए उनकी वापसी सिर्फ एक पूर्व प्रधानमंत्री का घर लौटना नहीं बल्कि बांग्लादेश के राजनीति में एक नए संघर्ष की शुरुआत बन सकती है। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या शेख हसीना सच में बांग्लादेश लौटेंगी? और अगर लौटती है तो आगे क्या होगा?
क्या उन्हें तुरंत गिरफ्तार किया जाएगा? क्या अदालत में उनकी अपील सुनी जाएगी या यह मामला बांग्लादेश की राजनीति को एक बार फिर बड़े टकराव की ओर ले जा सकता है? इन सभी सवालों के जवाब आने वाले दिनों में मिल पाएंगे।