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क्यों फटी हुई चप्पल पहनकर सालो तक फिल्म सेट पर जाती रही फराह नाज़? रुला देगा ये कड़वा सच।

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इतना हसीन चेहरा तेरा आज यह कहानी है भारतीय हिंदी सिनेमा की हिंदीफिल्मों की एक ऐसी अभिनेत्री की जिसकी बेहद आकर्षित खूबसूरतीऔर दिलकश अदाओं ने हिंदुस्तान के हर उम्र के लोगों को अपना दीवाना बनाया। सुन ले यह सारा जमाना किया प्यार तो क्या शर्माना दिल कहता है 80 और 90 के दशक की 15 साल की इस नाबालिक अभिनेत्री के हुस्न का वो जलवा था [संगीत] कि लोगों और लेखकों ने इनकी तुलना कर दी स्वर्ग की अप्सराओंl से। धीरेधी खोलूंगी मैं सारे। लेकिन दोस्तों क्या आप जानते हैं कि इस अभिनेत्री को स्वर्ग की अप्सरा माना गया वो अभिनेत्री कैसे बन गई कई बड़े-बड़े अभिनेताओं के लिए यमराज का रूप जिसकी तलाश में मैं मुंबई आई हूं और जिसकी लाश देखने के बाद ही मैं यहां से जाऊंगी। क्यों इस अभिनेत्री को कहा जाने लगा था हिंदी सिनेमा की लेडी सनी देओल।

धड़ सिर्फ इसलिए रह गया है क्योंकि इसका सर मैं काटूंगी और इन हाथों से उसे खत्म करने के लिए मैं कराटे सीखना चाहती हूं। दोस्तों जिस अभिनेत्री की बेमिसाल खूबसूरती बेशुमार आकर्षित हुस्न के आगे दुनिया भर के बड़े-बड़े अभिनेता और फिल्म निर्माता हार गए अपना दिल क्यों उसी अभिनेत्री पर लगे थे समगिंग होने के गंभीर आरोप। जिस आग में मैं तप रही हूं उसकी तपिश इस आग से बहुत ज्यादा है। और दोस्तों क्या आप यह जानते हैं कि इस अभिनेत्री की जिंदगी में ऐसा क्या हुआ था कि लाखों करोड़ों रुपए कमाने के बाद भी यह अदाकारा जिंदगी भर रही फटी हवाई चप्पलों में।

तो मैं रोजाना कपड़े अच्छे पहनती थी और नीचे रबर की चप्पल पहन के शूटिंग पे जाती [हंसी] थी। दोस्तों इस बला की खूबसूरत अभिनेत्री के साथ ऐसा क्या हुआ था कि 6 साल की मासूम सी उम्र में हो गया था इस अभिनेत्री के माता-पिता का तलाक कि फिर मां ने पलक तक ना चपकाई मां पापा से बहुत प्यार करती थी भगवान के पासपापा को कौन प्यार देगा शायद ये सोचकर मां भी उनके साथ चली गई आखिर इस अभिनेत्री के माता-पिता पिता का पाकिस्तान से क्या है रिश्ता? दोस्तों क्या आप जानते हैं कि इस अभिनेत्री की जिंदगी में इनके मामा ने कैसे इनकी छोटी बहन की इज्जत लूटने की कोशिश की।

कहीं किसी किताब में तुम्हारे कानून में यह लिखा है कि जिस लड़की की इज्जत लूट जाए तो कौन थमेगा उसका हाथ? कौन डालेगा ऐसे गले में मंगलसूत्र? हां। और आगे चलके वही छोटी बहन अजय देवगन के प्यार में जिंदगी भर रही अकेले तन्हा और अविवाहिता। उनसे मुलाकात हो गई। दोस्तों क्या आप जानते हैं कि इस अभिनेत्री के पास हिंदी सिनेमा के बड़े-बड़े शहंशाहों की सरपरस्ती होने के बाद भी क्यों इनकी बदनसीब किस्मत ने दे दी वो शिकस्त कि हिंदी सिनेमा के इतिहास में लिखी गई इस अदाकारा की गुमनामी में डूब जाने की दर्द भरी कहानी। खुशियां खरीदी बेचे आंसू मेरे आखिर क्या है इस अभिनेत्री के जीवन की वो कहानी जिसमें इस अभिनेत्री को करनी पड़ी असल जिंदगी में दो-दो शादी और क्यों आगे चलकर इन्हीं शादियों से मिला इस अभिनेत्रीको होने का काला दाग।

आज भी मेरी आंखे उन अर्थियों को जाते हुए देख रही है और आज भी मेरी आंखें उस खूनी दरिंदे को तलाश कर रही हैं। दोस्तों क्या आप जानते हैं कि इस अभिनेत्री के उस जख्म की कहानी जिसकी वजह से इस अदाकारा को फिल्म निर्माता करनेलगे थे अपनी फिल्मों से बाहर। अपनी हो या पराए दवा होती है। क्यों हिंदी सिनेमा के दिए हुए दर्द और दुख को भुलाने के लिए यह अभिनेत्री पड़ गई की लत में और कैसे आगे चलकर इस अभिनेत्री के मुस्लिम धर्म ने उजाड़ दी इस अभिनेत्री की हंसती खेलती पूरी जिंदगी टूट ना जाए खाकों की चूड़ियां आखिर क्या है राजेश खन्ना और इस अभिनेत्री के प्रेम संबंध का कड़वा सच सच बताएंगे और भी बहुत कुछ ऐसा जिसे जानकर आप सभी हो जाएंगे हैरान। पूरा सच जानने के लिए आप बने रहिए हमारे साथ इस वीडियो के अंत तक। मैं तुमसे नफरत करती हूं। आई हेट यू।

हम बात कर रहे हैं हिंदी सिनेमा में अपने हुस्न और अभिनय से लाखों दिलों को जीतने वाली एक ऐसी अभिनेत्री की जिसने जिंदगी में कम उम्र में ही जिम्मेदारियों का बोझ उठाया और जिंदगी की हर दुख तकलीफ [संगीत] को झेलते हुए हिंदी फिल्मों में अपने नाम का वह चिराग जलाया जिसकी रोशनी में यह अदाकारा पहचानी गई। बेशुमार हुस्न की मलिका बेजोड़ अभिनय की रानी फरा नाज हाशमी यानी के फरा के नाम से। कौन थी फराह नाज हाशमी? क्या थी इनकी जिंदगी की बर्बादी की दर्द भरी कहानी? और आज यह अदाकारा कहां है? किन हालातों में गुजार रही है अपना जीवन? यह सब मैं आपको बताऊं उससे पहले जान लेते हैं इनकी पढ़ाई लिखाई परिवार और शुरुआती जीवन के बारे में। और इस दिल में क्या रखा है और इस

मैंने भी एक गीत [संगीत] लिखा है तेरी सूरत देखकर। फरानाज़ का जन्म 9 दिसंबर साल 1968 [संगीत] को हैदराबाद में एक मुस्लिम परिवार में हुआ था। इनके [संगीत] वालिद का नाम जमाल अली हाशमी था। जमाल अली हाशमी पाकिस्तानी सिनेमा में काम कर चुके थे। लेकिन पाकिस्तानी सिनेमा उनको रास नहीं आया इसलिए वह हिंदुस्तान आ गए। वहीं फरा नाज की वालदा का नाम रिजवाना नाज हाशमी था। रिजवाना भारतीय हिंदी सिनेमा की फिल्मों का हिस्सा रही हैं।

लेकिन दुर्भाग्यवश फरानाज़ के अब्बू और अम्मी कोई खास पहचान किसी भी सिनेमा में नहीं बना पाए। फरानाज़ की एक छोटी बहन भी हैं जिनका नाम तबस्सुम फातिमा हाशमी है जो आगे चलकर भारतीय हिंदी सिनेमा की मशहूर अभिनेत्री तब्बू के तौर पर जानी गई। राह में उनसे मुलाकातहो गई। हिंदी सिनेमा की मशहूर खूबसूरत अभिनेत्री शबाना आजमी की रिश्ते में फरा और तब्बू भतीजी लगती है। फरानाज़ तकरीबन जब छ साल की बाल अवस्था में थी तो उस वक्त इनके अब्बू और अम्मी का आपसी झगड़े और मनमुटाव के चलते तलाक हो गया था। मेरे पेरेंट्स का डिवोर्स हो गया है। और हमारी मां ने हमको पाला। हालांकि इनके अब्बू ने तलाक के बाद दूसरा निकाह जरूर कर लिया था। लेकिन फरानाज की मां ऐसा नहीं कर पाई थी। क्योंकि उनकी मां के ऊपर दो-दो बच्ची फरा और तब्बू की जिम्मेदारी थी और इसी सब के चलते फरा की मां दुख दर्द के साथ अपने माता-पिता के पास वापस लौट आई। हालांकि फरा के नाना भी पढ़े लिखे थे और शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े हुए थे। लिहाजा फरा की मां रिजवाना वहीं एक स्कूलl में एक अध्यापिका की नौकरी करने लगी। इस नौकरी से रिज़वाना को लगभग ₹125 महीना मिल जाया करते थे। मेरी मम्मी टीचर थी और उनकी तनख्वाह थी कुछ ₹125 लेकिन तेजी के साथ भागते समय में ₹125 में दो-दो बच्ची का पालन पोषण करना बड़ा ही मुश्किल था। लिहाजा स्कूल के बाद रिजवाना कुछ बच्चों को स्कूल के बाद ट्यूशन दे दिया करती थी और इसी सब से लगभग उनको ₹75 और मिल जाया करते थे। तो स्कूल के बाद वो ट्यूशन करती थी। कुल मिला के उनको ₹200 मिल जाते थे और उसमें हम लोगों का गुजारा हुआ। और पूरे महीने में इस तरह से उनकी मां को ₹200 की मामूली कमाई हो जाती थी। और इसी कमाई के साथ परिवार के दिन गरीबी में गुजर रहे थे। सुख कभी और दुख कभी संसार की यह रीत है। शवाना आजमी रिश्ते में रिजवाना की बहन लगती थी।

इसलिए रिजवाना और दोनों बेटी फरा और तब्बू शवाना आजमी के यहां मुंबई आती जाती रहती थी। शवाना आजमी रिज़वाना की खराब हालत और हालातों से अच्छे से वाकिफ थी। इसलिए शबाना आजमी ने तब्बू और फरा को अपने घर [संगीत] में ही जगह दी। एंड आई वास स्टेइंग वि शबाना क्योंकि शबाना फिल्मों में चर्चित अभिनेत्री [संगीत] थी इसलिए फरा और तब्बू अक्सर फिल्मों के सेट पर शूटिंग देखने चली जाया करती थी। शबाना आजमी ने भी उनके लिए हिंदी सिनेमा के रास्ते बनाने शुरू कर दिए थे। शबाना आजमी की कोशिशों के चलते साल 1985 में इत्तेफाकन बड़ी बहन फराज से पहले छोटी बहन तब्बू को अभिनेता देवानंद जी की फिल्म हम नौजवान में काम करने का मौका मिला और इस फिल्म में तब्बू ने देवानंद जी की बेटी का किरदार निभाया था। जो लुट के भी आबाद रहे प्यार वही है। जो भूल के भी याद रहे प्यार वही है।

सांसों की डोर जाने कहां टूट जाए कब जो तेरे मेरे बाद रहे प्यार वही है। देवांद साहब ने फरा को भी देख लिया [संगीत] था और वह फरा की खूबसूरती से काफी प्रभावित थे। लिहाजा उन्होंने फरा को भी अपनी फिल्मों के जरिए हिंदी सिनेमा में लॉन्च करने का फैसला कर लिया था। लेकिन उस वक्त के मशहूर फिल्म निर्माता यश चोपड़ा जी अपनी आने वाली एक नई फिल्म के लिए एक नया चेहरा तलाश कर रहे थे। तो ऐसे में यश चोपड़ा के कानों तक भी यह बात पहुंची कि देवानंद जी अपनी नई फिल्म में एक बेहद खूबसूरत लड़की को बतौर अभिनेत्री लॉन्च करने वाले हैं। लिहाजा देवानंद जी यश चोपड़ा जी से मिले और उन्होंने फराहनाज़ को अपनी नई फिल्म में काम करने के लिए कहा।कि क्योंकि देवानंद और यश चोपड़ा अच्छे दोस्त थे और देवानंद जी की फिल्म को बनने में अभी कुछ वक्त था। इसलिए देवानंद जी ने फरा को यश चोपड़ा की फिल्म में काम करने की इजाजत दे दी और इस तरह से फरानाज़ को यश चोपड़ा की फिल्म फासले के लिए चुन लिया गया। मुझे नहीं सहाता। मैं तुम्हारे बगैर मर जाऊंगी विजय।

प्यार करना आसान है। निभाना मुश्किल है। क्योंकि फरा पहली बार फिल्मों में कदम रख रही थी और वह अभिनय के बारे में कुछ नहीं जानती थी। इसलिए उनके अभिनय को और निखारने और उसकी बारीकियों को सिखाने के लिए फराहनाज़ को महबूब स्टूडियो में एक दूसरे फिल्म युद्ध के सेट पर ले जाया गया। मैं स्टूडियो में एक पिक्चर का सेट लगा था युद्ध का। बहुत बड़ा सेट था और उसके बड़े चर्चे हो रहे थे और मैंने लाइफ में सेट नहीं देखा था। तो यश जी का पूरा स्टाफ था यू नो असिस्टेंट्स थे। हीरो भी था रोहन। एंड दे सेड फरा तुमने सेट देखा है आज तक? मैंने कहा नहीं बोले चलो देखते हैं अपना रिकॉर्डिंग पे टाइम है। फरा फिल्म के सेट पर पहुंची तो वहां फिल्म यूनिट के लोगों में शोर हो गया कि यश चोपड़ा जी की आने वाली फिल्म फासले की हीरोइन उनके बीच आई हुई है। तो फरा फरा हो गया कि यश चोपड़ा ने एक बहुत अच्छी लड़की ली है और खूबसूरत है और यह है और वो है अच्छी एक्ट्रेस है फरा मैडम का। और इसी शोर के चलते उसी सेट पर फिल्म से जुड़े एक इंसान ने यश चोपड़ा जी के सहायक कर्मी से कहा कि भाई यश जी अपनी फिल्म के लिए किसी बेहद खूबसूरत लड़की को साइन किए हैं। उसको हमसे भी मिलवाओ। जो असिस्टेंट थे यश जी के उनसे कहा कि यार सुना यश चोपड़ा ने बहुत अच्छी लड़की साइन की एंड शी इज़ टैलेंटेड और यह वो तो उन्होंने बोला हां हां अच्छी है।

मिलाओ यार हमको भी लड़की से मिलाओ। फिर क्या था? पास ही खड़ी फरा नाज़ को सहायक कर्मी ने बुलाया और उनसे मिलवा दिया। अरे मेरा नहीं यही है ना फरा ये फलाना फलाना है। एंड शी इज फरा। जिसके बाद उस इंसान ने फरानाज़ को ऊपर से लेकर नीचे तक देखा और उसके बाद बड़े ही दिल तोड़ शब्दों में यह कहते हुए वहां से चले गए कि यश चोपड़ा जी भी न जाने किस-किस को फटी चप्पल में हीरोइन बनाने ले आते हैं। और मेरी चप्पल टूटी हुई थी। मतलब उसका जो अंगूठा होता है वो निकला हुआ था। और उधर स्टे कर गया। और फिर वो वापस ऊपर देखा है एंड ही सेड यही यस चोपड़ा की हीरोइन है। यह बात सुन फरा को बहुत बुरा लगा कि वो वहीं रोने लगी सभी के सामने। मुझे रोना आ गया यार कि मैं तो क्या हुआ? इसके बाद फरा अपने घर आ गई और घर आकर भी फरा का रोना बंद नहीं हुआ।

क्योंकि उस वक्त फिल्म के सेट पर फराह नाज़ की गरीबी का भद्दा मजाक बनाया गया था। और मैं घर आ गई और मैं रोई उधर बैठ के कि मैंने बोला ठीक है भाई मेरे पास नहीं है तो नहीं है इसके बाद परिवार वालों ने फरा को समझा बुझा के शांत किया इसके बाद फासले फिल्म की शूटिंग शुरू हुई इस फिल्म में फरा के हीरो थे गायक महेंद्र कपूर के बेटे रोहन कपूर रोहन कपूर भी इस फिल्म [संगीत] से अपनी शुरुआत कर रहे थे इसके आगे कुछ ना सोचे शूटिंग खत्म होने के बाद 27 सितंबर साल 1985 को यह फिल्म रिलीज हुई।

यश चोपड़ा के निर्देशन में बनी इस फिल्म को दर्शकों का उतना प्यार और सम्मान नहीं मिला जिसकी उम्मीद लोग कर रहे थे। मैंने तेरे लिए क्या-क्या सपने फिल्म का बॉक्स ऑफिस कलेक्शन हालांकि गिरावट में रहा लेकिन इस फिल्म में फरहान नाज की खूबसूरती सभी के दिल में घर कर गई [संगीत] और फरा की इसी खूबसूरती के आकर्षण के चलते कई बड़े-बड़े फिल्म निर्माताओं की नजर उन पर टिक गई और फासले फिल्म के बाद फरा की झोली में दर्जन भर फिल्म आ गई। कभी हम ना ठहरे से पहले। इसके बाद साल 1986 में फराहनाज़ की लगभग तीन फिल्म नसीब अपना-अपना पाले खान लव 86 जैसी फिल्म रिलीज हुई और यह सभी फिल्म उस वक्त की सुपरहिट फिल्म बनी थी।

मेरे सनम तेरा खत मिला खत में तूने और इन फिल्मों से फरानाज़ को [संगीत] हिंदी सिनेमा और अभिनय में मजबूती मिली थी। हो रखे सलामत तुझको [संगीत] खुदा खत में तूने इन फिल्मों की कामयाबी के बाद फराहनाज़ की अगले साल यानी के साल 1987 में पांच फिल्म ईमानदार मरते दम तक दिल जला 7 साल बाद और विजेता विक्रम जैसी फिल्म रिलीज हुई।

इन फिल्मों में फरा ने बड़े-बड़े अभिनेताओं के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम किया। छोड़ेंगे ना हम तेरा हाथ उठा के मरते दम इस फिल्म के बाद साल 1988 में फरा की लगभग आठ फिल्में रिलीज हुई। हालांकि इनमें कुछ फिल्म सफल रही तो कुछ फिल्म सफल नहीं हो पाई। [संगीत] फरा के कदम अब हिंदी सिनेमा में मजबूत हो चले थे और यह हर साल लगभग दर्जन भर फिल्मों में नजर आने लगी। फराकी, रखवाला, दो कैदी, कालाबाज़, मजबूर, नकाब जैसी फिल्म बड़े-बड़े अभिनेताओं की मौजूदगी में दर्शकों के बीच आई और फरा इन सभी फिल्मों के लिए दर्शकों के बीच खूब पसंद की गई। मोहब्बत हमने की है मोहब्बत हमने की है आज हम फिल्मों को दिन प्रतिदिन कामयाबी मिल रही थी तो फराह नाज को भी टॉप अभिनेत्री का मुकाम हासिल हो रहा था और इन्हीं हिंदी फिल्मों के शानदार प्रदर्शन और लोगों के बीच मिली लोकप्रियता ने फरानाज़ को वो इज्जत और सम्मान बख्शा जिसकी वजह से फराहनाज़ को आज भी लोग याद करते हैं और उनको बहुत प्यार करते हैं तुम जैसी कोई सुंदर इस दुनिया में ना होगी। मैं तुमसे अगर दिल मांगू फराहनाज ने हिंदी सिनेमा के लगभग सभी बड़े-बड़े अभिनेताओं अभिनेत्रियों के साथ-साथ सभी फिल्म निर्माताओं के साथ काम किया और 80 का दशक हमेशा श्रीदेवी जया प्रदा मीनाक्षी शेषाद्री पद्मिनी कोल्हापुरी माधुरी दीक्षित जूही चावला रेखा डिंपल कपाडिया अमृता सिंह रति अग्निहोत्री स्मिता पाटिल जैसी बेहद खूबसूरत अभिनेत्रियों के नाम से याद किया जाएगा और फराहनाज ने इसी दशक में इन दिग्गज अभिनेत्रियों के बीच टॉप अदाकारा का मुकाम हासिल किया था।

जिसको हमेशा पूरी दुनिया यूं ही दिल से सलाम करती रहेगी। तो यह तो था फराहनाज का वो हिंदी सिनेमा का यादगार सफर जिसको हमने आपके सामने रखा। अब बात करते हैं फराहनाज़ के उस निजी जीवन की जिसकी वजह से इस अभिनेत्री को वह सब कुछ देखना और झेलना पड़ा जो शायद फराहनाज़ ने सोचा नहीं था। कैसे इस शानदार अभिनेत्री की जिंदगी आसमान की ऊंचाइयों से गिरकर अंधकार के उस सागर में चली गई जहां से शायद फराहनाज़ अब कभी नहीं लौट पाएंगी ।

वहां लौट कर ना ही तो मैं एक औरत रहूंगी [संगीत] और ना ही तबा दोस्तों यह तो हम सब जानते हैं कि फराहनाज़ खूबसूरत अभिनेत्री हैं। लेकिन यह सब बहुत कम लोग जानते हैं। जितनी खूबसूरत यह है, उससे ज्यादा यह गुस्सैल मिजाज की अभिनेत्री रही है। और इसी गुस्से ने फराहनाज़ को जिंदगी के कई दुख दर्द नसीब कराए हैं। मुंबई शहर में इंसान और हैवान दोनों को छुपने की जगह मिलती है। यहां की भीड़ में सारे चेहरे अनजान हो जाते हैं। फरानाज़ ने अपनी जिंदगी खूब कामयाबी और धन दौलत हासिल की। यह फिल्म की शूटिंग पर लाखों रुपयों की कीमत के कपड़े पहन कर जाती थी। लेकिन पैरों में हमेशा वही फटी हवाई चप्पल पहनती थी जो वो अपनी पहली फिल्म फासले के दौरान पहन कर गई थी।

फरानाज़ का मानना था कि यह फटी चप्पल इनको अपनी कामयाबी और बेइज्जती दोनों को याद दिलाती हैं। इसीलिए यह चप्पल हमेशा उनके पास रहती हैं। उसके बाद जब मैं स्टार बनी जब मैंने पिक्चरें की और मेरे पास पैसा बहुत आ गया तो मैं रोजाना कपड़े अच्छे पहनती थी और नीचे रबर की चप्पल पहन के शूटिंग पे [हंसी] जाती थी। और जितनी भी अच्छी चप्पलें होती थी वो मैं अपने घर में सजा के रखती फराहनाज ने जब यश चोपड़ा की पहली फिल्म की थी, उस वक्त फिल्म के लिए फराहनाज़ को जो पैसे मिलने वाले थे, वह पैसे फरा ने एक साथ ना लेकर ₹500 प्रति महीने के हिसाब से यश चोपड़ा जी से लिए थे। यश जी से मैंने बोला था कि मेरा कॉन्ट्रैक्ट का एक पैसा था। आप मुझे एक साथ नहीं देना। आप मुझे महीना जैसा तनख्वाह देते हैं वैसा दे देना। ₹500 मुझे महीना दे देना। हालांकि उस वक्त ₹500 फरा के लिए बड़ी बात थी।

क्या ₹500 मेरे लिए बहुत बड़ी बात थी? फरा उस ₹500 में से ₹300 अपनी मां को हैदराबाद भेज दिया करती थी। उसमें से मैं ₹300 अपनी मां को भेजती थी मनी ऑर्डर करके और अपने पास सिर्फ ₹200 ही रखा करती थी और उसी से वो अपने सारे काम करती थी। और ₹200 अपने लिए रखती थी। एंड आई वास स्टेइंग वि शबाना। और बस अपना जो भी साबुन तेल ऑटो भाड़ा जो भी होता था क्योंकि फरा नाज ने शुरुआत से अपने घर में बहुत गरीबी देखी थी इसलिए वह एक एक रुपए की कीमत को समझती थी। फरा जब फिल्मों की कामयाबी से एक बड़ी सुपरस्टार बन गई तब उन्होंने अपने पैसे से एक घर खरीदा और उसके बाद उन्होंने अपनी मां को अपने पास बुला लिया।

मैंने बहुत पैसा कमा लिया। मैंने मेरी जो एंबिशंस थे घर के घर चाहिए, गाड़ी चाहिए, पैसे चाहिए। सब हो गया। मम्मी सेटल्ड हो गई। जिसके बाद इस परिवार को जिंदगी का सुख और प्यार नसीब हो पाया। फरानाज़ को जिंदगी में सब कुछ मिल चुका था। जिसका सपना लेकर अक्सर हर लड़की मुंबई आती है। लेकिन बेशुमार कामयाबी दौलत के साथ-साथ अब फरानाज़ का मिजाज भी पहले जैसा नहीं रहा। जैसा कि वह पहले सीधी साधी फराहनाज़ हुआ करती थी। बल्कि यह इसके बिल्कुल उलट उस दौर की हिंदी सिनेमा की सबसे गुस्सैल अभिनेत्री बन चुकी थी। कब किस बात पर इनका मूड खराब हो जाए कहा नहीं जा सकता था। फरानाज़ का गुस्सा हमेशा उनकी नाक पर रहता था और उस गुस्से में वो बेकाबू हो जाती थी। और इसी गुस्से में इन्होंने कई मौकों पर जाने-माने फिल्म अभिनेता और निर्माताओं की सरेआम पिटाई की। तो किसी को सरेआम बेइज्जत किया। मुझे नहीं मालूम था कि एक सूखी टहनी जिस पर कभी कोई कांटा भी ना उगा हो वो भला एक हरेभरे पौधे को देखकर कैसे खुश हो सकती है। फरा की इन्हीं हरकतों के चलते भारतीय हिंदी सिनेमा में इनको लेडीज सनी देओल कहा जाने लगा था।

धर सिर्फ इसलिए रह गया है क्योंकि इसका सर मैं काटूंगी। फरानाज़ का पहला विवाद फिल्म अभिनेता चंकी पांडे के साथ जुड़ा है। साल 1989 के फिल्म कसम वर्दी की शूटिंग के दौरान उन्होंने चंकी पांडे की पिटाई कर दी थी। बताया जाता है कि इस फिल्म के दौरान चंकी पांडे फरा को कुछ भद्देभद्दे इशारे करते थे। हालांकि फराहनाज़ ने कई बार उनको ऐसा ना करने की सलाह दी। लेकिन जब चंकी पांडे अपनी इन हरकतों में कोई सुधार नहीं कर पाए तो फराहनाज़ ने अपना आपा खो दिया और उन्होंने फिल्म के सेट पर ही पूरी यूनिट के सामने चंकी पांडे को पीट दिया। हालांकि उस वक्त बीच-बचाव करा दिया गया लेकिन मामला यहीं शांत नहीं हुआ और फरा ने चंकी पांडे को जान से मारने तक की धमकी दे डाली और इसी लड़ाई के चलते फराह नाज़ और चंकी पांडे ने दोबारा कभी भी एक साथ काम नहीं किया और इन दोनों के बीच यह मनमुटाव आज भी जिंदा है। सिर्फ गलतफहमी ही नहीं बहुत कुछ दूर हो गया है। थैंक यू मिस पूजा।

चंकी पांडे के बाद इस गर्म मिजाज अभिनेत्री के गुस्से का निशाना एक फिल्म निर्माता भी बने। बताया जाता है कि फिल्म निर्माता जेपी दत्ता की पार्टी चल रही थी। इस पार्टी में हिंदी सिनेमा के बड़े-बड़े नाम मौजूद थे। फरा भी यहां पहुंची और इस पार्टी में फिल्म निर्माता फारुख नाडिया वाला ने फरा को शराब पीने का ऑफर दिया। लेकिन फरा ने इंकार कर दिया। लेकिन फारुख ने जिद पकड़ ली थी शराब पिलाने की। तो फिर क्या था? फरा ने कुछ नहीं देखा और सबके सामने फारुख को जोरदार तमाचा रसीद कर दिया। तमाचा इतना जोरदार था कि सब बड़ी-बड़ी हस्तियां फरा को देखने लगी और उनका यह रूप देखकर सभी लोग हैरान रह गए। आप चुप रहिए। कभी आईने में अपनी शक्ल देखी है? अक्ल और शकल दोनों से अजूबा नजर आते हो। इस विवाद के बाद साल 1989 में आई फिल्म रखवाला, जिसमें फरा की जोड़ी बनी थीअनिल कपूर के साथ, और यही फिल्म इन दोनों की एक साथ काम करने की आखिरी फिल्म भी बनी। निर्माता ने फरा को उनकी लोकप्रियता के चलते फिल्म में साइन किया था।

लेकिन वहीं अभिनेता अनिल कपूर इस फिल्म में फरा की जगह माधुरी दीक्षित को लेने का दबाव बना रहे थे। लेकिन फिल्म निर्माता नहीं माने और यह फिल्म फरा के साथ ही बनी। लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण यह फिल्म फ्लॉप हो गई। और ऐसे में अनिल कपूर ने यह कह दिया कि इस फिल्म में फरा की जगह अगर माधुरी दीक्षित होती तो यह फिल्म चल जाती और यह बात जब फरा के पास पहुंची तो फरा गुस्से में आग बबूला हो गई और अपने घर से निकल गई। उस वक्त अनिल कपूर एक जगह कुछ मीडिया कर्मियों के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे थे। फरा उसी प्रेस कॉन्फ्रेंस में पहुंची और जाते ही बिना कुछ सोचे समझे अनिल कपूर के साथ हाथापाई शुरू कर दी। बीच-बचाव किया गया और इस समय अनिल कपूर ने फरा को खूनी कह दिया और वहीं फरा ने अनिल कपूर और माधुरी दीक्षित के रिश्तों को नाजायज तक बता दिया। और इस सब घटना के बाद ना तो कभी अनिल कपूर और ना ही माधुरी दीक्षित ने फरानाज़ के साथ काम किया। किस दुनिया किस समाज में भेजना चाहते हो मुझे? फरा का नाम विवादों की सुर्खियों में था। एक विवाद शांत नहीं होता उससे पहले दूसरा खड़ा हो जाता। ऐसा ही कुछ हुआ फिल्म खुदा गवाह के दौरान।

अमिताभ बच्चन की एक फिल्म खुदा-गवाह के लिए फरा को साइन किया गया। फिल्म के कुछ सीन शूट भी कर लिए गए। लेकिन इस बीच फरा का झगड़ा फिल्म निर्माता से हो गया। जिसका नतीजा यह हुआ कि इनको इस फिल्म से निकाल दिया गया। इसके बाद फरा ने एक इंटरव्यू के दौरान अपना गुस्सा अमिताभ बच्चन के ऊपर उतार दिया। फरा ने अमिताभ बच्चन को भी नहीं छोड़ा और उनको खूब भला बुरा कहा। फरा ने यहां तक कहा कि अमिताभ बच्चन एक टुच्चे इंसान है। जिसके बाद बात ऐसी बिगड़ी के अमिताभ बच्चन फरा से इतने नाराज हुए कि आज तक नहीं माने हैं। क्या इसी दिन के लिए इंसान औलाद मांगता है इसी दिन के लिए? इसके बाद एक ऐसी घटना और हुई जिसने फरा को खूब चर्चाओं में ला खड़ा किया।

दरअसल फरा नाज़ अपनी छोटी बहन तब्बू के साथ फिल्म अभिनेता डेनी के घर एक पार्टी में गई। जहां मशहूर फिल्म अभिनेता जैकी श्रॉफ भी आए थे। जैकी श्रॉफ ने इस पार्टी में खूब ज्यादा शराब पी ली थी और इसी शराब के नशे में वो तब्बू के करीब जाने की कोशिश करने लगे। उस वक्त तब्बू की उम्र लगभग 16 साल थी। तब्बू ने अपने साथ हुई इस दुर्व्यवहार को अपनी बहन फरा को बताया। यह बात सुन फरा आग बबूला हो गई और वह सीधे जैकी के पास पहुंच गई। उनको पीटने के लिए। लेकिन इसी बीच इस लड़ाई में डेनी आ गए और उन्होंने फरा को समझा बुझा के घर वापस भेज दिया। लेकिन फरा तो फरा थी। उन्होंने अगले दिन एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की और उस प्रेस कॉन्फ्रेंस में जैकी श्रॉफ की इज्जत की धज्जियां उड़ा दी।

इसके बाद मीडिया ने जैकी श्रॉफ से कई सवाल किए। लेकिन जैकी श्रॉफ हमेशा शांत रहे और कभी कोई जवाब नहीं दिया। लेकिन इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद से आज तक फरा, तब्बू और जैकी श्रॉफ के बीच गुस्से और मनमुटाव की लकीर खींच गई जो आज तक बरकरार है। माफ करना जो भूल हो जाए। अभी तक तो फरा के मारपीट के किस्से ही लोग सुन रहे और देख रहे थे। लेकिन इस बार तो कुछ ऐसा हुआ कि किसी को भी इस बात पर यकीन नहीं हुआ। दरअसल एक इंग्लिश मैगजीन के लिए फरानाज़ और अभिनेत्री खुशबू सुंदर ने एक साथ एक फोटो शूट किया जिसमें यह दोनों एक अश्लील चुंबन के साथ दिखी। लोगों ने इनके इस फोटो का विरोध किया और कुछ मैगजीन ने तो फरानाज़ को एक समलैंगिंग अभिनेत्री बता दिया।

हालांकि इस बात पर कभी फरा ने कोई भी प्रतिक्रिया नहीं दी और यह सवाल आज भी ज्यों का त्यों बना हुआ है। मेरे [संगीत] साथ जो करे उसे हम और इन्हीं तमाम बातों और विवादों के चलते फरा की छवि बहुत ज्यादा खराब [संगीत] हो गई। इंडस्ट्री में दोस्त कम होते चले गए और दुश्मन और नफरत करने वालों की तादाद बढ़ती गई। फिल्म अभिनेता और निर्माता उनके साथ काम करने से डरने लगे और धीरे-धीरे फराहनाज़ का हिंदी सिनेमा का सफर थम गया। फरानाज़ हिंदी सिनेमा की पहली ऐसी अभिनेत्री थी जिन्होंने अपने जीवन की बर्बादी और गुमनामी में डूब जाने की कहानी खुद ही लिख डाली थी। फरानाज़ के गुस्सैल मिजाज और रवय ने कभी इनको भरने नहीं दिया और इन्होंने खुद की खूबसूरत जिंदगी को बदनसीबी की चादर उड़ा दी। अब तो है तेरे हाथ में रिश्तों की। दोस्तों अब अगर बात करें फरहान नाज की जिंदगी में आए कुछ मर्दों की तो उनमें कई नाम शामिल हैं। इनमें जावेद जाफरी, राजेश शेट्टी, संजय दत्त और एक हैरान कर देने वाला नाम राजेश खन्ना जी का भी रहा है।

लेकिन राजेश खन्ना और फरा का यह रिश्ता कभी किसी को समझ नहीं आया। तो वहीं संजय दत्त ने फरा के सामने शादी तक का प्रस्ताव रख दिया था। लेकिन फरा संजय दत्त के आशिक मिजाज को जानती थी और इसीलिए उन्होंने संजय दत्त के इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया था। इस दिल में क्या रखा है और इस लेकिन इन सब अभिनेताओं के बीच एक ऐसा गुमनाम नाम भी था जो फरा की जिंदगी को सात फेरों के बंधन में बांध कर ले गया। और वह नाम था मशहूर अभिनेता और पहलवान दारा सिंह के बेटे बिंदु तारा सिंह। फरा और बिंदु की प्रेम कहानी भी बड़ी दिलचस्प है।

इन दोनों की इस प्रेम कहानी की नीव रखी उनकी छोटी बहन तब्बू ने। दरअसल बिंदु और तब्बू क्लासमेट थे और सबको पता था कि तब्बू फरा की छोटी बहन है। बिंदु तारा सिंह फरा के बहुत बड़े फैन थे। इसलिए वह हमेशा तब्बू से अपनी बहन फरा से मिलने की बात किया करते थे। लेकिन बिंदु फरा से नहीं मिल पा रहे थे। एक दिन फरा और तब्बू एक फिल्म देखने बाहर गए। आई वास लाइक यार अभी कहां जाओ? तो शी सेड नहीं आप चलो। पिक्चर देखने चलते हैं। ऐसा ठीक है। कौन सी पिक्चर? कयामत से कयामत तक। जहां इत्तेफाक से इस फिल्म के सभी टिकट्स खत्म हो चुके थे। उधर गए तो टिकट नहीं मिला। तो वो बोली अब मुझे पिक्चर देखनी है। आई सेड नहीं अभी मैं जाके कोई मैनेजर से बात नहीं करूंगी। पूरे थिएटर को पता चल जाएगा फरा ही है और क्या राइट्स हो जाएंगे। लेकिन तभी बिंदु ना जाने कहां से आ गए और उन्होंने फरा और तब्बू के लिए टिकट का इंतजाम कर दिया। रुक जाओ मैं लेके आता हूं। वो भागा दौड़ा पता नहीं ब्लैक में लिया क्या किया एंड ही गॉट द टिकट सेशन मैम प्लीज और यहीं पहली बार बिंदु की फरा से मुलाकात भी हो गई आई तब्बू फराबा जी यह बिंदु है और यह मेरे क्लासमेट हैं और यह आपके बहुत बड़े फैन हैं। इसके बाद दूसरी मुलाकात में बिंदु ने सीधे फरा को शादी के लिए प्रपोज कर दिया। यह बात फरा के लिए बड़ी ही चौका देने वाली थी क्योंकि फरा बिंदु को अभी ठीक से जानती भी नहीं थी।

तो हम लोग शादी कब कर रहे हैं? आई वास लाइक, कौन शादी? आप कब शादी कर रहे हैं? बट हम दोनों आई वास लाइक कि यार बच्चा है। ऐसे नहीं हूं करके मैं खास हो गई। तो नहीं नहीं आई एम सीरियस। हम लोग कब शादी कर रहे हैं। पता नहीं मुझे क्या पसंद आया। मैं पता नहीं बड़े-बड़े बोल बोल दिए। हम लोग मिलते मिलते मिलते हमें प्यार हो गया। लेकिन इसी बीच बिंदु भी फिल्मों में हाथ पैर मार रहे थे। तो ऐसे में उनके पिता के निर्देशन में बनी पंजाबी फिल्म फरा और बिंदु को एक साथ काम करने का मौका मिला। इसी फिल्म के दौरान इन दोनों की नजदीकियां बड़ी बात शादी तक पहुंची। खैर 2 साल अफेयर चला हम लोगों का और उसके बाद एक दिन में बैठे-बैठे बोर हो गए। मैंने कहा शादी करते हैं। तो बोला ठीक है। लेकिन दोनों परिवार इस शादी के लिए राजी नहीं थे। क्योंकि एक तो बिंदु का फिल्मों में संघर्ष और दूसरा धर्म जो इस रिश्ते में आगे आ रहा था। उनके डैडी ने बोला भाई फेरे होंगे। मेरी मां ने बोला निकाह होगा। फिर हम फंस गए। लिहाजा कुछ समय तक तो दोनों ने परिवार वालों की बात मानी लेकिन कुछ समय बाद दोनों से दूरियां बर्दाश्त नहीं हुई और फरा और बिंदु ने कोर्ट मैरिज कर ली। बोले ठीक है हम रजिस्टर मैरिज करेंगे। बस एक दिन पहले डिसाइड हुआ। दूसरे दिन गए पता नहीं किसकी ड्यूटी लगाई वकील को लाओ रजिस्ट्रार को लाओ इसको लाओ उनको किडनैप करके लाया गया और शादी हो गई कोई इनविटेशन नहीं छपा हालांकि कोर्ट मैरिज के बाद इस शादी का एक छोटा सा प्रोग्राम रखा गया जिसमें परिवार वालों के साथ-साथ कई बड़े नाम और हस्तियां शामिल थे।

बताया जाता है कि जिस वक्त यह शादी हुई उस वक्त फरा गर्भवती थी। कुछ समय बाद फरा ने एक बेटे फतेह को जन्म भी दिया। शादी के बाद फरा के ऊपर उनके ससुराल वालों की तरफ से फिल्मों में ना काम करने का दबाव डाला जाने लगा। रिश्तों को बनाए रखने के लिए फरा ने भी फिल्मों से दूरी बना ली थी। लेकिन इस सब के बाद भी फरा का शादीशुदा जीवन अच्छा नहीं चल रहा था। इनके इस रिश्ते में खटास पड़ गई और यह खटास कब कड़वाहट में बदल गई पता ही नहीं चला और इन्हीं सब के चलते साल 2003 में फरा और बिंदु का तलाक हो गया। यह तलाक क्यों हुआ? क्यों रिश्ते खत्म हुए? इस पर फरा ने तो कभी भी कोई बात नहीं की। लेकिन उनके पति बिंदु दारा सिंह ने जरूर लोगों के सामने सनसनीखेज खुलासे किए।

बिंदु बताते हैं कि उनके पिता दारा सिंह की बात सही थी और उनको अपने पिता की बात मान लेनी चाहिए थी। उनको फरा से शादी नहीं करनी चाहिए थी क्योंकि उनके पिता कहते थे कि दो अलग-अलग धर्मों के लोग जब शादी करते हैं और शादी के बाद जब दोनों में से कोई एक भी अपने धर्म के प्रति ज्यादा मजहबी या कट्टर हो जाता है तो रिश्तों में बदलाव आ जाता है। आगे चलके अगर एक भी कोई ज्यादा रिलीजियस हो गया तो दूसरे को प्रॉब्लम आ जाती है। बिकॉज़ दे आर बोर्न इन दैट रिलजन। बिंदु के मुताबिक फरा पहले ऐसी नहीं थी। वह पहले सिगरेट और शराब भी पिया करती थी जो कि मुस्लिम धर्म में हराम माना जाता है।

बिंदु इस सब के लिए मना करते थे। लेकिन फरा कभी भी इन सब चीजों को अपनी जिंदगी से दूर नहीं कर पाई थी। लेकिन एक दिन फरा ने बिंदु से कहा कि वह उनको एक बार हज पर जाने दें और जिसके बदले फरा नशा छोड़ देंगी। बिंदु ने भी फरा की यह शर्त मान ली और उनको हज पर भेज दिया। तू हज पे भेज देगा मैं सिगरेट छोड़ दूंगा। तो इसमें बहुत बड़ी बात है। मैंने फटाफट सिस्टम किया दोस्त के साथ। उसने कहा डन हज पे इसको भेज दिया। लेकिन बिंदु के मुताबिक हज से लौटने के बाद फरा वो फरा नहीं रह गई थी। वह पूरी तरह से बदल गई। वह अब बहुत ज्यादा मजहबी हो गई थी। वह धर्म के प्रति बहुत कट्टर हो गई थी।

बिंदु तो फरा के व्यवहार को देखते हुए यहां तक कहते हैं कि उनको फरा फरा नहीं बल्कि एक आतंकवादी की तरह लगती थी। हज पे गई वापस आई अलग ही औरत वापस आई जिससे मैंने प्यार किया था मुझसे अलग ही और शायद इन दोनों के इस रिश्ते का अंत भी ज्यादा मजहबी माना गया। तुम मुझसे दूर रहो। मैं बहुत मनूस हूं। मेरी [हंसी] किस्मत बहुत गहरी काली स्याही सी लिखी हुई है। तलाक के बाद जहां बिंदु ने दूसरी शादी कर ली थी तो वहीं फरा की जिंदगी अपने बेटे के आसपास उसकी परवरिश में गुजरने लगी। मुश्किलों से भरा समय था फरा का। तो ऐसे दुख दर्द के बीच फरा मिली अभिनेता सुमित सहगल से जो उनके साथ फिल्मों में भी काम कर चुके थे। मेरी हसरतों का [संगीत] जनाजा उठा के सुमित सहगल भी अपनी जिंदगी में ज्यादा खुश नहीं थे।

उनकी हालत भी कुछ-कुछ फरा जैसी ही थी। इनका भी तलाक हो चुका था और इनकी भी एक बेटी थी। सुमित और फरा की मुलाकातें और दुख दर्द एक दूसरे के साथ मिलता गया और साल 2005 में इन दोनों ने शादी कर ली। फरा और सुमित सहगल की शादी से एक बात तो साफ हो गई थी कि बिंदु दारा सिंह ने फरा को लेकर जो मजहबी बात कही थी वह शायद कहीं से कहीं तक सच नहीं थी। क्योंकि अगर ऐसा होता तो फरा कभी भी दोबारा फिर से एक हिंदू लड़के से शादी नहीं करती और अगर ऐसा होता कि उनके रिश्ते में उनका मजहब आड़े आ रहा है तो वह कभी दोबारा इस शादी को सफल नहीं कर पाती। इस बात से यही अंदाजा लगाया जा सकता है कि बिंदु ने फरा के लिए जो बात कही थी उन बातों के बीच कुछ ना कुछ अधूरापन है जो शायद तब तक रहेगा जब तक कि खुद फरा सच नहीं बताती है।

अब क्यों हमदर्द बनते हो मेरे? तुम्हारी यह हमदर्दी मेरे जख्मों पर नमक का काम करती है। लेकिन फरा अब अपने पति और परिवार के बीच खुश हैं और वो अपने पति के साथ फिल्म प्रोडक्शन के क्षेत्र में खूब अच्छा काम कर रही हैं। हालांकि अब फरानाज़ की मां का निधन हो चला है। देना [संगीत] हश में भी मुझे और वहीं छोटी बहन तब्बू एक सुपरस्टार अभिनेत्री बन गई है और बॉलीवुड का बहुत बड़ा नाम है। तुम जो ना आते हम तो मर जाते। दोस्तों कहा जाता है कि फरा के गुस्से ने उनको बहुत नुकसान पहुंचाया है।

फरा की जिंदगी में एक वक्त ऐसा भी आया था जब इनसे सब ने दूरियां बना ली थी। तो ऐसे में इनको कुछ फिल्मों में आइटम सॉन्ग का सहारा तो कुछ फिल्मों में साइड रोल भी करने पड़े थे। और जब बात और बिगड़ती गई, [संगीत] तो बाद में फरा ने कुछ टीवी शोज़ में भी काम करना शुरू कर दिया था। आज तक चारों तरफ लुटेरे ही देखे हैं मैंने। इस समाज में इस पतित औरत का हमदर्द कौन बनेगा भला? अगर बात की जाए फरा की आखिरी फिल्मों की, तो फरा आखिरी बार शिखर और हलचल फिल्म में दिखाई दी थी। कपड़ा भी नहीं बदल सकती क्या? फूटे बर्तन के साथ तू भी टूटे फूटे। सत्यानाश हो तेरा और उसके बाद से आज तक यह किसी भी फिल्म का हिस्सा नहीं बनी है।

फरानाज़ ने अपने समय के सभी सुपरस्टार के साथ काम किया था और अपने काम की वजह से यह टॉप एक्ट्रेस की रेस में शामिल हुई थी। लेकिन आज फराहनाज फिल्मी पार्टियों और प्रोग्राम से दूर रहती हैं। उनके चाहने वालों को उनकी एक झलक कई कई सालों के अंतराल पर देखने को मिलती है। फराज भी बेहद खूबसूरत नजर आती हैं। बाजी कहीं शहनाई तो दोस्तों यह थी हिंदी सिनेमा की बेहद खूबसूरत और अभिनय के गुरु

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