कोई आंख मिला के देखे कोई प्यार जता के देखे दोस्तों आज के इस में हम बात करेंगे हिंदी सिनेमा के 60 के दशक के एक प्रतिभाशाली अभिनेत्री के बारे में दिल वालों लेके आई हूं मैं अ जिनकी प्रतिभा और किस्मत में हमेशा मल होता रहा हम नजर तक चाहते थे तुम तो दिल पर छ गए लेकिन इस अभिनेत्री ने जब 60 के दशक में हिंदी सिनेमा के सिल्वर स्क्रीन पर कदम रखा तो उतरते ही एक सनसनी मचाते थे हमारे दम से ही दुनिया इश्क है कायम हमारे लेकिन दोस्तों क्या आप जानते हैं कि इस अभिनेत्री की तीन पीढ़ियां हिंदी फिल्मों से जुड़ी रही।
लेकिन इस अभिनेत्री की बदकिस्मती यह थी दोस्तों कि इतने बड़े-बड़े स्टार्स के साथ काम करने के बाद भी उन्हें कभी बड़ी फिल्मों की हीरोइन का दर्ज नहीं मिल पाया मुझे मिली रोशनी मुझको नौबत यहां तक आ चुकी थी इस अभिनेत्री के जीवन में कि अपना घर चलाने के लिए बी और सी ग्रेड की फिल्मों में अभिनय करना पड़ा तकदीर ने तो जान के धोका दिया मुझको और उसी दौरान एक फिल्म निर्माता से इन्होंने शादी करली इस अभिनेत्री को हिंदी सिनेमा में दो नामों से जाना जाता है शादी के पहले किसी और नाम से यह मशहूर थी और शादी के बाद इन्होंने अपना नाम नाम और धर्म दोनों बदलकर दूसरी वजह से मशहूर हो गई तेरा मेरा मेरा तेरा प्यार नम ना बन जाए अफसाना इस अभिनेत्री की शादी के बाद जीवन बिल्कुल एक नई पटरी प आ चुकी थी लेकिन अचानक एक दिन इस अभिनेत्री के निर्माता पति ने ही अपनी पत्नी को से उड़ा दिया और इस तरह इनका पूरा परिवार तबाह और बर्बाद हो गया तुम्हारा प्यार मेरी जिंदगानी का सहारा है।
अनवरी बेगम अनवरी बेगम भी एक कलाकार थी लेकिन दोस्तों सईदा खान के पिता के बारे में कोई जानकारी नहीं मिलती परिवार बहुत ही गरीबी में गुजर बसर कर रहा था इसलिए सईदा खान की पढ़ाई लिखाई भी ठीक से नहीं हो पा रही थी सईदा को बचपन से ही फिल्मों में काम करने का शौक था और दोस्तों संयोग वर्ष ऐसा हुआ कि कलकत्ता के एक फंक्शन के दौरान सईदा खान की मुलाकात तब के मशहूर फिल्म निर्माता निर्देशक हरनाम सिंह रवल से हुई उस फंक्शन में रवल साहब की नजरें सईदा खान पर टिक गई और सईदा उन्हें बेहद पसंद आई और उन्होंने बगैर कोई देरी किए फिल्मों में काम करने के लिए उन्हें बंबई बुला लिया रवैल साहब ने सईदा खान को अपनी फिल्म कांच की गुड़िया में काम करने का मौका दिया।
लेकिन दोस्तों इस फिल्म के बनने में थोड़ी देर हो गई इसी बीच सईदा खान को दूसरी फिल्म मिल गई और फिल्म का नाम था अपना हाथ जगन्नाथ जो 1900 60 में रिलीज हुई और जिनके हीरो थे किशोर कुमार आई टा बिजली कड़की ककी शरा फिल्म अपना हाथ जगन्नाथ में इन दोनों की जोड़ी को खूब पसंद किया गया।
ह बेशर्म उधर लेबर वेलफेयर ऑफिसर और इधर लेब लेबर और इसी बीच साल 1961 में फिल्म कांच की गुड़ भी जो इनकी पहली फिल्म थी वो भी रिलीज हो गई नींद किसे अब चैन कहां और इस तरह फिल्मों में सईदा खान की शुरुआत बहुत अच्छी रही दोस्तों इस फिल्म में उनके साथ मनोज कुमार नजर आए थे दरअसल इस फिल्म से ही मनोज कुमार को ब्रेक मिला थाती है क्या नजरों की जुबा साथ दोस्तों सईदा खान ने अपने करियर में राजकुमार मनोज कुमार किशोर कुमार फिरोज खान विश्वजीत जैसे कई सुपरस्टार्स के साथ काम किया और सभी को एक्टर्स और दर्शकों ने इनके काम को पसंद भी किया लेकिन सबसे अफसोस जनक बात यह रही दोस्तों कि इतनी अच्छी-अच्छी फिल्मों में काम करने के बावजूद सईदा खान को अच्छी फिल्में मिलनी कम हो गई इसके पीछे की वजह यह मानी गई कि उस दौर में बेहद खूबसूरत और अच्छी डांसर अभिनेत्रियों की एंट्री हिंदी सिनेमा में होने लगी थी।
सईदा खान मासूम और चुलबुली जरूर दिखती थी पर ना ही वह बहुत ज्यादा खूबसूरत थी और ना ही उन्हें कोई क्लासिकल डांस का अनुभव था दोस्तों अच्छी फिल्मों में काम ना मिलने के कारण सईदा खान ने बी और सी ग्रेड की फिल्मों में काम करना शुरू कर दिया ग वहां का हर आदमी तुम्हें पहचानता है।
संजय पार्टी का नया मेंबर है उस पर किसी को शक नहीं हो सकता और इसकी भी एक वजह थी और वह वजह थी गरीबी सईदा फिल्मों से जो कुछ भी कमाती थी।
उसी से उनकी मां और बहन का खर्च चलता था फिर बिना काम के ना भूखों मरना जैसा था मुझे तो मिलाना त का कोई हो दोस्तों हिंदी सिनेमा के कलाकारों के लिए एक त्रास दी है हिंदी सिनेमा बहुत जल्द अपने कलाकारों को एक ठप्पा लगा देता है फिर उस थप्पे के अनुसार ही हिंदी सिनेमा उस कलाकार को ता उम्र रोल दिलाने लगता है सईदा खान के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ उन्हें हिंदी सिनेमा के बी और सी ग्रेड की अभिनेत्रियों का एक ठप्पा लग गया जिसके कारण अच्छी फिल्मों के अच्छे रोल उनसे कोसो दूर हो गए ।
जिसके कारण सईदा भी में जाने लगे इसका कारण उनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि रही है दरअसल समाज की नजरों में वह एक बदनाम मां की बेटी थी अनवरी बेगम को लोग अच्छी नजरों से नहीं देखते थे क्योंकि उनका अतीत एक बदनाम रहा था।
जिसका नुकसान अनवरी बेगम से ज्यादा सैदा खान को हुआ आप भी यही जाते हैं लक्षमी देवी कि मैं जिस गंदी नाली में पैदा हुई हूं उसी में मुझे जीना भी चाहिए उन्हें लोगों के अक्सर ताने भी सुनने को मिलते थे सैदा की आखिरी फिल्म थी वासना जो 1968 में रिलीज हुई थी जिसमें वह राजकुमार साहब को रिझाने वाली चमेली बाई के साइड रोल में थी मैं सदके जाऊ मेरे सैया तुम आओ इसी बीच उन्होंने फिल्म हनीमून मॉडर्न गर्ल मैं शादी करने चला चार दरवेश जिंदाबाद अलीबाबा और आलादीन ये जिंदगी कितनी हसीन है और कन्यादान में अच्छे रोल किए अपने 60 साल के करियर में महज 17 और 18 फिल्मों में ही हिस्सा बन पाए दोस्तों जब सईदा खान बहुत डिप्रेशन में थी तो उनके जिंदगी में आए प्रोड्यूसर डायरेक्टर ब्रज सदाना जिन्होंने सैदा की काफी मदद की फिर उसके बाद ब्रज सदाना ने उन्हें शादी के लिए प्रपोज कि दोस्तों इस में ब्रस सदाना के बारे में थोड़ी सी जानकारी ले लेते हैं जिन्होंने 60 और 70 के दशक में दो भाई यह रात फिर ना आएगी एक से बढ़कर एक विक्टोरिया नंबर 203 नाइट इन लंदन यकीन और प्रोफेसर प्यारेलाल जैसी हिट फिल्में बनाई थी सईदा ने बृज सदाना के शादी के प्रपोजल पर बहुत सोचा और फिर उसके बाद सईदा ने अपनी सारी मजबूरी प्र सदाना के सामने रख दी कि उन्हीं की कमाई से सैदा का पूरा परिवार का खर्च चलता है।
तो उनके लिए शादी करना आसान नहीं है बताया जाता है कि ब्रज सदाना ने सैदा को यकीन दिलाया था कि उनके परिवार का ख्याल रखेंगे उन्हें कोई परेशानी नहीं होने देंगे सईदा इस बात से खुश हो गई और उसके बाद उन्होंने तुरंत शादी के लिए हां कर दी सईदा खान ने ब्रज सदाना से शादी कर लिया शादी के बाद सईदा खान ने धर्म और अपना नाम दोनों बदलकर सईदा खान से सुधा सदाना बन गई दोस्तों सब कुछ अच्छा चल रहा था सुधा उर् सैदा ने अब फिल्मों में काम करना बंद कर दिया दिया था अपने परिवार की देखभाल में लग गई ।
सुधा और ब्रिज के दो बच्चे हुए बेटी नम्रता और बेटा कमल आएगी मेरी याद जब होगा बुरा हाल तो देख के दोस्तों सुधा जब भी किसी पार्टी या गैदरिंग में जाती थी तो सबसे कहती थी कि मेरे पति बहुत अच्छे हैं मुझे बहुत प्यार करते हैं लेकिन दोस्तों कुछ साल के बाद एक ऐसी ही पार्टी में एक ऐसी घटना घटी जिसने ने सईदा खान की जिंदगी की असली दास्तान सबके सामने लाकर रख दी अतीत के पन्ने पलटे जाने लगे थे फिर उसके बाद परत दर परत अजीबोगरीब कहानियां सामने आई जिसने पूरे बॉलीवुड को चौका कर रख दिया दोस्तों वाकया ऐसा था कि 21 अक्टूबर 1990 को सुधा के बेटे कमल का 20वां जन्मदिन था उस दिन वह अपने दोस्तों के साथ अपने कमरे में पार्टी कर रहे थे पार्टी करने के दौरान ही बेटे कमल को अचानक कमरे के बाहर अपने मम्मी पापा के लड़ने की आवाज सुनाई दी उन्होंने दोस्तों से कहा कि रुको मैं जरा देख कर आता हूं वो बाहर आ ही रहे थे कि गोली चलने की आवाज आई कमल जब भाग कर पहुंचे तो देखा
के में धुत उनके पिता के हाथ में कन है और उनकी मां सईदा और बहन नम्रता दोनों खून में लथपथ पड़ी छटपटा रही हैं उनके पिता ने पहले सैदा को गोली मारी थी फिर मां को बचाने के लिए दौड़ी बेटी नम्रता को भी वृत सदाना ने मौत के घाट उतार दिया था यह खौफनाक नजारा देख कमल के मुंह से चीख निकल गई तभी पिता ने कमल को भी देखा ब्रज सदाना ने कमल पर भी एक गोली चला दी जो कमल के कान को छूती हुई निकली थी और कमल वहीं बेहोश होकर गिर पड़े तब तक कमल के दोस्त भी बाहर आ चुके थे पर यह खतरनाक मंजर देख सबके होश उड़ चुके थे।