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सारे भगवान भारत में ही क्यों पैदा हुए? जानिए इसके पीछे का तार्किक विज्ञान

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हिंदू कहते हैं कि भारत की भूमि बहुत पवित्र है। इसीलिए सारे देवी देवता भगवान आदि यहीं पर जन्म लेते हैं। पर मेरा यह क्वेश्चन है कि भगवान को चाइना, यूरोप और अमेरिका से क्या समस्या है? भगवान तो पूरा ब्रह्मांड चलाते हैं। पूरा संसार भगवान चला रहे हैं तो भगवान यूरोप को भी, भगवान चाइना को भी पवित्र बना लें। भारत को पवित्र बनाने की क्या आवश्यकता है? असल में ज्यादातर हिंदुओं को इसका जवाब नहीं पता है। सैकड़ों वीडियोस हैं YouTube पर लेकिन आपको केवल सुपरस्टिशन, चमत्कार और सूडो साइंस के अलावा कुछ नहीं मिलेगा। लोग दावा करेंगे कि सतयुग से ही पूरी पृथ्वी भारत थी तो भारत में ही जन्म होगा। अच्छा सतयुग में पूरी पृथ्वी भारत थी तो त्रेता युग में भगवान राम लंका में जन्म ले लेते। भाई लंका तो भारत नहीं था ना। और अभी कलयुग में जब कल्कि अवतार होने वाला है तो उनके जन्म का भी दावा भारत में ही किया जाता है। यह कोई हॉलीवुड मूवी है क्या कि विश्व में कभी भी कोई भी एलियन अटैक होगा तो वो अमेरिका में ही होगा और उसको बचाने भी अमेरिका के ही सुपर हीरोज़ आएंगे। तो साथियों ये जो क्वेश्चन है कि सारे भगवान भारत में ही क्यों पैदा हुए? यह देखने में बहुत कठिन लगता है। लेकिन आज की हाइपरकस की वीडियो में चमत्कार, सुपरस्टिशंस इन सब फालतू बातों से दूर मैं आर्कियोलॉजिकल प्रमाणों के साथ और हमारे प्राचीन ग्रंथों के साक्ष्यों के आधार पर मैं आपको बताऊंगा कि भगवान भारत में ही क्यों पैदा होते हैं। तो साथियों आप सभी हाइपर क्रश को सब्सक्राइब कर लें और बेल आइकन को दबाकर नोटिफिकेशंस भी ऑन कर लें जिससे सनातन धर्म की सबसे लॉजिकल वीडियोस, सबसे अच्छी वीडियोस आपको सबसे पहले मिले। तो साथियों बिना किसी विलंब के आज की वीडियो को प्रारंभ करते हैं। तो साथियों हमें सबसे पहले समझना होगा कि भगवान कौन होता है? क्योंकि हिंदुओं के लिए तो भगवान सब कुछ है। वो पत्थर को भी भगवान कहते हैं, पेड़ को भी कहते हैं, वायु को भी कहते हैं। लेकिन यहां पर आपको यह समझना चाहिए कि भगवान तुल्य बहुत ढेर सारी चीजें हैं। लेकिन उनके आगे देव लगाया जाता है। जैसे भगवान तुल्य इंद्र हैं। लेकिन वो इंद्र देव हैं। सूर्य को भी सूर्य देव कहा जाता है। चंद्र को भी चंद्र देव कहा जाता है।

वायुदेव होते हैं। वृक्ष देव होते हैं। और आउट ऑफ रिस्पेक्ट इन्हें भगवान भी कह देते हैं। लेकिन जब बात आती है श्री राम जी की, श्री कृष्ण जी की, तो आप देखिए कि इन्हें रामदेव या कृष्णदेव नहीं कहा जाता। इन्हें भगवान श्री राम या भगवान श्री कृष्ण ही कहते हैं। क्यों? क्योंकि जो देव शब्द है वो संस्कृत के दिव्य धातु से आया है जिसका अर्थ होता है प्रकाश देना, सपोर्ट करना, जीवन देना या कुछ भी ऐसा करना जो जीवन को बनाए रखने में कंट्रीब्यूट करता हो। तो चूंकि सूर्य हमें ऊर्जा देते हैं, वायु ऑक्सीजन देती है, वाटर से जीवन चलता है, वृक्ष हमें अन्न देता है तो इसलिए हम इन सबको देव कहते हैं लेकिन भगवान नहीं कहते। तो भगवान क्या है इसको भी समझते हैं और इसके लिए हिंदुओं के पवित्र ग्रंथ विष्णु पुराण को देखना पड़ेगा और विष्णु पुराण में कहा गया है कि जो व्यक्ति उत्पत्ति और प्रलय इन दोनों से परिचित हो और धर्म और वैराग्य से परिपूर्ण होकर कुछ विशेष गुणों को धारण करता हो तो उसे भगवान कहते हैं। और ये विशेष गुण कौन से हैं? ऐश्वर्य, यश, श्री और ज्ञान। इसके साथ-साथ धर्म और वैराग्य जैसा कि बताया गया। तो ये जो छह विशेष गुण अगर किसी व्यक्ति में है तो उसे भगवान कहा जाता है। अब इसमें ऐश्वर्य का क्या अर्थ होता है? ऐश्वर्य का अर्थ है वैभव। किसी पर अधिकार जमा सकने की क्षमता, शासन करने का गुण। फिर आता है यश। यश मतलब कि आपकी ख्याति, प्रसिद्धि। उसके बाद आता है श्री। श्री मतलब आप साधन संपन्न हैं। समृद्ध हैं।

उसके बाद आता है ज्ञान। ज्ञान मतलब आपको नॉलेज है। और फिर आते हैं धर्म और वैराग्य। वैराग्य का अर्थ है अनासक्ति। इतना सब कुछ होने के बाद भी जो उसमें आसक्त ना हो, लिप्त ना हो वो वैराग्य है। और धर्म क्या है? तो अगर धर्म के विज्ञान को समझना है तो हमें वेदों में जाना पड़ेगा। वेदों में एक कांसेप्ट है रत का। रत क्या होता है? रत का मतलब होता है ये जो पूरा ब्रह्मांड है ये पूरा ब्रह्मांड किसी नियम से चल रहा है और वो जो नियम है उनको रिद्ध कहा जाता है और जब उन नियम को आप सही-सही आइडेंटिफाई कर लेते हैं जब सत्य रूप में आइडेंटिफाई कर लेते हैं तो वो सत्य बनता है और जब उस सत्य को आप अपने जीवन में उतार लेते हैं आपका हर एक एक्शन प्रकृति के अनुसार होता है तब आप धर्म से परिपूर्ण हो जाते हैं और जब ये छह चीजें हो जाती हैं तो आप भगवान बन जाते हैं और अगर आप भगवान श्री राम और भगवान श्री कृष्ण के जीवन को देखें तो उनके कर्मों में उनके जीवन में हमें दिखता है कि वो धर्म के सिद्धांतों का पालन करते हैं। धर्म की स्थापना करते हैं। ये धर्म वो रिलीजन नहीं है हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई ये धर्म वो कॉस्मिक ऑर्डर है जिसको वो सोसाइटी में जिसको वो समाज में स्थापित करते हैं। और यही कारण है कि चाहे फिर वो भगवान श्री राम हो, भगवान श्री कृष्ण हो, भगवान बुद्ध हो, भगवान महावीर हो ये सभी भगवान कहे जाते हैं। ये किसी चमत्कार या अंधविश्वास के कारण भगवान नहीं कहे जाते। इनका जीवन, इनका कर्म धर्म के सिद्धांतों के अनुसार है। इसलिए यह भगवान कहे जाते हैं। लेकिन फिर भी यह प्रश्न बना रहेगा कि यह भगवान फिर भारत में ही क्यों पैदा होते हैं? और इस पर जो डिबेट है वो गली नुक्कड़ से लेकर यूरोप की संसद तक होती रहती है। तो आइए इसका उत्तर मैं आपको देता हूं। अब साथियों अगर आर्कियोलॉजिकल एविडेंसेस भी देखें तो आज से 4000 साल पहले 5000 साल पहले पृथ्वी के बहुत ढेर सारे भूखंडों पर आपको ह्यूमंस जो मिलेंगे वो छोटी-छोटी सेटलमेंट्स में मिलेंगे या आपको ट्राइब्स मिलेंगी और ये जो ट्राइब्स थी या सेटलमेंट्स थे इनमें अकाल पड़ना, भुखमरी होना, कोई प्लेग आ जाना या पेंडेमिक होना यह कॉमन बात थी। लेकिन इसी समय पर अगर आप भारत की तरफ देखते हैं तो भारत में आपको सिंधु घाटी सभ्यता दिखती है। जहां पर आपको एडवांस्ड ड्रेनेज सिस्टम मिलता है। जहां पर आपको स्टैंडर्डाइज्ड वेट मेजरिंग सिस्टम दिखता है। जहां का ट्रेड नेटवर्क आपको मेसोपोटामिया तक दिखता है। और अगर आप यूनेस्को की ऑफिशियल रिपोर्ट्स भी देखें तो धोलावीरा जैसे शहर भारत के इनको एडवांस्ड अर्बन इंजीनियरिंग और वाटर मैनेजमेंट में एक एग्जांपल माना जाता है। तो आप इससे अंदाजा लगा सकते हैं कि जिस समय दुनिया की दूसरी क्षेत्रों में लोग रोटी कपड़ा के लिए स्ट्रगल कर रहे थे। शिक्षा की कोई पारंपरिक व्यवस्था नहीं थी उस समय भारत जैसी सभ्यता में लोग गणित, ज्योतिष, ध्यान, योग, चिकित्सा और चेतना के विभिन्न स्तरों पर हजारों शास्त्रों का निर्माण कर रहे थे। दुनिया के सबसे प्राचीन धार्मिक ग्रंथ कहे जाने वाले वेद जिनको रिलीजियस स्क्रिप्चर कह दिया जाता है।

जबकि आप उनकी स्टडी करेंगे तो उसमें आपको गणित भी मिलेगी। उसमें आपको एस्ट्रोनॉमी भी मिलेगी। उसमें आपको आयुर्वेद भी मिलेगा। उसमें आपको संगीत विद्या मिलेगी। तो ऐसे वेद जो दुनिया के सबसे प्राचीन ग्रंथ माने जाते हैं उनका भी जन्म हो चुका था। और आर्कियोलॉजिकल एविडेंसेस ने यह भी प्रूव किया है भारत में मल्टी क्रॉप एग्रीकल्चर था। यानी यहां पर जो एग्रीकल्चर था वो स्टेबल हो चुका था। तरह-तरह की यहां पर क्रॉप्स उगाई जाती थी। अब मैं आपको ये सब क्यों बता रहा हूं? अगर आप ध्यान दें तो आपने मेस्ॉस हायरार्की ऑफ नीड्स पढ़ा होगा कभी ना कभी। तो उसमें आपको एक पिरामिड दिखाया जाता है जिसमें बताया जाता है कि ह्यूमन नीड्स के डिफरेंट स्टेजेस होते हैं। सबसे पहला स्टेज होता है आपका फिजियोलॉजिकल यानी जहां पर आप अपने लिए फूड, वाटर, सेक्स इन सब चीजों को कवर करना चाहते हैं। जब तक आपके पास ये सब चीजें नहीं होंगी आप ऊपर का सोच भी नहीं पाएंगे। स्वामी विवेकानंद भी कहते थे जिसको रोटी की भूख है आप उसको धर्म का पाठ नहीं पढ़ा सकते। तो सबसे पहले आपका जो फिजियोलॉजिकल नीड है वो कवर होती है। जब वो नीड पूरी हो जाती है उसके बाद आती है सेफ्टी। अब आप सोचते हैं कि चलो मेरा पेट भरा है। मेरी बेसिक सर्वाइवल नीड्स पूरी है। अब मुझे सेफ्टी चाहिए। मुझे घर चाहिए। मुझे हेल्थ इंश्योरेंस चाहिए। मेरी फैमिली प्रोटेक्टेड होनी चाहिए। जब यह भी नीड पूरी हो जाती है तब आप लव बिलॉन्गिंग ढूंढते हैं कि मेरी फैमिली में सबके बीच में प्रेम हो। मुझे अच्छा पार्टनर मिल जाए। मेरे अच्छे दोस्त होने चाहिए। जब वो भी पूरी हो जाती है तब आप अपनी एस्टीम के बारे में सोचते हैं कि अब समाज में मुझे इज्जत भी मिलनी चाहिए। अब मैं क्या चीज अचीव करूं अपनी लाइफ में? किन चीजों को मैं कर सकता हूं? किन चीजों में मैं बेस्ट बन सकता हूं और जब आप वह भी अचीव कर लेते हैं तब फाइनल जो नीड होती है वह सेल्फ एक्चुअलाइजेशन की होती है। इस लेवल पर जाकर लोग फिर क्रिएटिविटी के बारे में फिलॉसफी के बारे में एकिस्टेंस के बारे में सोचना शुरू करते हैं। तो अब आप जैसा कि मैंने बताया कि आज से 4000 5000 साल पहले जिस देश में बेसिक सर्वाइवल नीड हो चुकी हैं। जहां पर स्तर ऊपर जा चुका है वहीं के लोग सेल्फ एक्चुअलाइजेशन की तरफ बढ़ सकते हैं। वहां के लोग नहीं बढ़ सकते जहां पर अभी बेसिक सर्वाइवल मूड ही ऑन है। जहां पर बेसिक सर्वाइवल नीड्स ही खतरे में है। इसलिए भारत में वो व्यवस्था थी, वो माहौल था जहां पर लोग सेल्फ एक्चुअलाइजेशन की तरफ बढ़ सकें। और तभी भारत में बड़े-बड़े दार्शनिक ऋषि पैदा हुए। चाहे वेदव्यास जी हो, चाहे वशिष्ठ हो, चाहे भारद्वाज हो और इसी कारण से दुनिया के दूसरे कोनों से चाहे यूरोप हो, चीन हो, लोग आते थे यहां पर विद्या अर्जित करने के लिए। क्योंकि यहां पर ना केवल दार्शनिक बल्कि वैज्ञानिक और सांसारिक इन सभी क्षेत्रों में। ऐसा कोई क्षेत्र नहीं है। आप उस समय के हिसाब से कोई विषय भी पकड़ लो। उसकी प्रथम ट्रीटी उसका बेस्ट वर्क आपको इंडियन मिलेगा। चाहे काम शास्त्र हो, आयुर्वेद हो, गणित हो, एस्ट्रोनॉमी हो। जितनी भी विधाएं हैं सब में हजारों शास्त्रों की रचना आपको भारत में मिलती है। तो जहां पर ज्ञान होगा वहीं पर उस ज्ञान का पालन करने वाला प्राणी भी मिलेगा। वहां नहीं मिलेगा जहां लोग अन्न के लिए भी भटक रहे हैं। वहां मिलेगा जहां ज्ञान की व्यवस्था है।

अब इसको एग्जांपल से समझिए। अगर मान लीजिए आपको कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के लिए रिसर्च करनी है तो आप कहां जाएंगे? क्या आप रेगिस्तान जाएंगे? या आप किसी जंगल में चले जाएंगे? नहीं। आप एक ऐसा इंस्टट्यूट ढूंढेंगे, एक ऐसी लैब ढूंढेंगे जहां पर आप उस बीमारी पर रिसर्च कर सकें। क्यों? क्योंकि वहां पर रिसोर्सेज होंगे। वहां पर पहले से एस्टैब्लिश्ड ज्ञान उपलब्ध होगा। फिर वहां पर आप कैंसर पर रिसर्च कर सकते हैं। और हो सकता है कि आप इस बीमारी की दवा भी ढूंढ लें और फिर अगर कोई प्रश्न करें कि कैंसर का इलाज उसी इंस्टट्यूट में क्यों हुआ? तो क्या एक मूर्खतापूर्ण प्रश्न नहीं होगा? तो कैंसर के इलाज की दवा कहीं भी खोजी जा सकती है। लेकिन उसका बेस्ट प्लेस क्या है? जहां पर उसके लिए पहले से ज्ञान की उपलब्धि हो। ऐसे ही भगवान इस संसार के किसी भी कोने में पैदा हो सकते हैं। लेकिन भगवान बनने के लिए वो ऐश्वर्य, वो यश, वो श्री, वो ज्ञान, वो धर्म, वो वैराग्य प्राप्त करने के लिए जो ज्ञान उपलब्ध था वो भारत में ही था। वो भारत के गुरुकुलों में था। इसलिए भारत के गुरुकुलों से भगवान राम निकले। भारत के गुरुकुलों से भगवान कृष्ण निकले। और फिर चाहे भगवान बुद्ध क्यों ना हो उन्होंने भी पूरा ज्ञान लिया है। भगवान महावीर को शास्त्रों का ज्ञान था। तो ज्ञान जब उपलब्ध होता है तो उस ज्ञान की पराकाष्ठा पर प्राणी पहुंचता है। आज यूएसए में टेक्नोलॉजी का ज्ञान है तो यूएसए से सबसे ज्यादा बिलेनियर्स निकलते हैं, एंटरप्रेन्यर्स निकलते हैं, टेक्नोलॉजिस्ट निकलते हैं, इनोवेटर्स निकलते हैं। क्यों? क्योंकि यूएसए के पास आज वह साइंटिफिक नॉलेज है। लेकिन जब आध्यात्मिक नॉलेज की बात आती है, दर्शन की बात आती है, ईश्वर तत्व को समझने की बात आती है तो उसमें भारत पराकाष्ठा को छूता है। इसीलिए भारत में ऐसे योगी ऋषि भगवान जन्म लेते हैं और इसी कारण से भारत भूमि समय-समय पर मनुष्यों के साथ देवताओं को भी जन्म देती है। हम आदि शंकराचार्य जी को भगवान आदि शंकराचार्य कहते हैं। क्यों? क्योंकि उन्होंने धर्म पर चलकर दिखाया है और यही परिभाषा है विष्णु पुराण में भगवान की। तो साथियों जैसा कि मैंने वीडियो के प्रारंभ में ही कहा था कि आपको चमत्कार, सुपरस्टिशंस इन सब चीजों में नहीं पड़ना है। हर एक चीज के पीछे आप अगर लॉजिकल दृष्टि रखेंगे तो आप उसका उत्तर पा सकते हैं।

और जब आप उत्तर पाते हैं तो आपको अपने देश और धर्म पर और भी गौरव होता है और ना केवल गौरव होता है बल्कि वैसा बनने के लिए आपको प्रेरणा मिलती है कि अब हम भारत को आज 21 सेंचुरी में भी उसी स्तर पर पहुंचा पाएं और ऐसे प्रश्न केवल कठिन दिखते हैं क्योंकि हमें हमारे धर्म की बेसिक अंडरस्टैंडिंग ही नहीं है। हमें अंडरस्टैंडिंग मिलती है हमारे मम्मी पापा से या पास के कोई पंडित जी हैं वो बताते हैं और उनसे जब हमें सेटिस्फैक्टरी आंसर नहीं मिलता तो हमें लगता है कि धर्म तो अंधविश्वास की बातें हैं। लेकिन अगर हमारे फंडामेंटल्स क्लियर हो हमें धर्म का सटीक ज्ञान हो। हमें हमारी परंपराओं के बारे में पता हो तो कोई ऐसा प्रश्न नहीं है। कितना भी कठिन क्यों ना दिखे जिसका आप उत्तर नहीं दे सकते। लेकिन हमारे साथ यह भी समस्या होती है कि हम कौन से ग्रंथ से पढ़ें? कहां से प्रारंभ करें जिससे हमारे पास ऐसी नॉलेज हो। तो इसी को सॉल्व करने के लिए मैं अपने शिक्षणम प्लेटफार्म पर सनातन धर्म को फ्रॉम स्क्रैच बिल्कुल बिगिनिंग से स्टेप बाय स्टेप फन वे में बताता हूं। शास्त्रों के प्रमाण के साथ जहां पर आपको यह समस्या नहीं होती कि यहां से पढूं या वहां से पढूं और फिर आपको हमारे धर्म का सही-सही ज्ञान हो जाता है। ज्ञान होने से दूसरे प्रश्न करते हैं, आक्षेप करते हैं, उसका तो आप उत्तर देते ही हैं बल्कि अपने जीवन को भी सुंदर करते हैं। तो मैं आग्रह करूंगा कि आप हमारे सनातन धर्म के प्रोग्राम से अवश्य जुड़े।

लिंक आपको नीचे डिस्क्रिप्शन बॉक्स में मिल जाएगी और अगर कोई क्वेरी है तो इस WhatsApp नंबर पर मैसेज करें और साथियों अगर आपको वीडियो पसंद आई है तो लाइक करें और अपने परिवार के साथ जरूर साझा करें क्योंकि हमें यह अंडरस्टैंडिंग पूरे समाज में फैलानी है और अगर आपको किसी और टॉपिक को लेकर कोई कंफ्यूजन है और आप उसके विषय में लॉजिकली जानना चाहते हैं तो आप हमें कमेंट में अवश्य बताएं और वीडियोस देखने के लिए हाइपर रिक्वेस्ट को सब्सक्राइब कर लें। तो साथियों इसी के साथ इस वीडियो को इस टॉपिक को यहीं पर दूंगा विराम। अब मैं मिलूंगा एक नए टॉपिक के साथ नई वीडियो में। तब तक के लिए जय श्री राम।

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