सर जिस तरीके से उज्जैन में पहले तो खड़े हनुमान जी को लेकर के जिस तरीके से भक्तों की आस्था है अब ये एक पक्ष बड़ा पक्ष ये कह रहा है कि उसे उस जगह से ना । इसी बीच उमा भारती जी ने चिट्ठी लिखी है कि धार्मिक जो जगह हैं और विकास दोनों का सम्मान एक साथ होना चाहिए और पुराना समय का भी उन्होंने याद दिलाया है। और अभी भी कि विकास और धर्म एक ही धुरी पर चलने वाले दोनों पहहिए हैं।
हमारी जिम्मेदारी विकास की भी है और धर्म संस्कार और नैतिकता के संरक्षण की भी। तो, मध्य प्रदेश में चाहे उज्जैन का विषय हो या किसी और शहर का विषय हो, धर्म, आस्था और सम्मान और संस्कृति की रक्षा हमारा कर्तव्य है। उसका हम पालन करेंगे और उसके साथ ऐसा भी रास्ता निकालेंगे कि धर्म की ध्वजा लहराती रहे और विकास का ध्वज भी साथ-साथ चले।
इस पर हम लोग काम करेंगे। जहां तक उमा दीदी का सुझाव है निश्चित तौर पर हम आदर करते हैं तो मध्य प्रदेश में धर्म संस्कार संस्कृति भी सुरक्षित रहेंगे और विकास भी होगा उज्जैन का विषय हो कहीं और का विषय हो स्पष्ट है। सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास और यदि कहीं कोई विधि सम्मत विषय, न्यायिक विषय तो उसका पालन भारतीय जनता पार्टी सरकार करेगी तो सब पक्षों को स्वतंत्रता है कि वो हायर कोर्ट में जाएं।
लेकिन सरकार की बाध्यता है कि यदि कोर्ट ने कुछ कहा तो उसका पालन करें। तो हम कोर्ट का पालन करेंगे। पर फिर भी हमारी प्रथम प्रयास होता है कि किसी भी धर्म का निरादर ना हो। सबका आदर सम्मान बना रहे। की नगरी उज्जैन में इन दिनों 2028 की तैयारियां चल रही हैं। शहर की सड़कों को में आने वाली भीड़ के चौड़ा किया जा रहा है। लेकिन इन विकास के कामों में कई जगह आस्था आड़े आ रही है।
खड़े हनुमान मंदिर की बात करें तो वहां पर जो भक्त हैं उनकी आस्था है कि 170 साल पुराने होने का दावा किया जा रहा है और यह कहा जा रहा है कि हनुमान जी की मूर्ति को वहां से इसी बीच उज्जैन की जिसका 100 साल पुराने होने का दावा है उसको के लिए नगर निगम ने नोटिस दिया। इसी बीच को एक चिट्ठी लिखी है और पूर्व कार्यकाल की याद दिलाई है कि भोपाल में किस तरह से एक को बचाने के लिए विकास के रूट में उसको चेंज किया गया था।
हम उसी जगह पर खड़े हैं भोपाल में जहां पर सड़क चौड़ीकरण की जा रही थी और यह जो आपको नजर आ रही है जिसके बारे में यह दावा किया जाता है कि करीब 150 साल पुरानी यह है और उस समय जब मुस्लिम समाज के लोगों ने इस पर आपत्ति ली कि यह इसके इससे छेड़छाड़ नहीं की जानी चाहिए तो उस समय की सरकार ने इस प्लान में ही बद बदलाव कर दिया और इस केबल ब्रिज का निर्माण किया गया और गया। अब उमा भारती वर्तमान आस्था के साथ-साथ विकास का भी सामंजस्य बैठा लें और कोई बीच का रास्ता निकालें।