साउथ को लेकर और भी कई तरह की जो खबरें हैं उनमें खबर यह भी थी कि उस वक्त की जो एक्ट्रेस थी मंदाकिनी उनके साथ भी उनका कुछ अफेयर था। इसी तरह से अबू सलीम को लेकर भी था कि उनका भी मोनिका बेदी के साथ था।
तो पहले मैं दाऊद की बात करूंगा कि फिल्म एक्ट्रेस के वो इतना नजदीक पहुंचे और बाद में दोनों के रिलेशन हुआ। उस रिलेशनशिप का क्या बैकग्राउंड था? देखिए उस दौर में कोई भी फिल्म एक्टर या एक्ट्रेस या कोई भी सेलिब्रिटी उनको इंकार करने की हिमाकत नहीं कर सकता था। अच्छा और सीधे पहुंचती थी। लड़की है तो तेरे मुंह पे । मर्द है तो उसको देंगे। और ये वो फिल्म एक्टर एक्ट्रेस को भी दे देते थे। हां बिल्कुल देते थे। क्या है भाई? हमारी मर्जी है।
हम साला बेताज बादशाह हैं के। तुम्हारी औकात क्या है? उनको तो करना क्या है? जा रहे झाड़ू फेर के आ। झाड़ू फेर के आया यानी ली गर करके यूं चलाई सामने जितने 15 20 30 लोग हैं निकल लिए उनको लड़कों को तो कुछ नहीं है वापस लौट के आएंगे 500 लाख 2 लाख 5 लाख जो मिलने हैं वो मिल जाएंगे भाई हमारा तो आजमगढ़ जो है 5-प000 में लड़के करता रहा है करने के लिए दाऊद के के लिए तो वहां तो ₹ लाख मिल गए तो साला जलसा हो जाता है अमृत कुंड में भीग लिया अब तो नहा लिया ऐसी स्थिति हो जाती है तो कौन डर नहीं डरेगा राकेश रोशन को अगर उन्हें मारना होता तो मार ही दी होती ना कार पे क्यों चलाई सिर्फ डराना था कि कार पे मार सकते हैं तो तुम्हें भी मार सकते अगली तेरे सिर पे ही लगेगी वो फोन करके बोला उसे बाकायदा बड़ा शाना बनता है ना तू अभी देख गाड़ी पे चली है अगली बार तेरे ऊपर लगेगी खोपड़ी पे हम क्या काम था उनको रितिक रोशन की जो पहली फिल्म आई थी उस फिल्म की उनको दो डीवीडीज चाहिए थी।
पार्ट वन पार्ट टू ऐसी बनती थी ना डीवीडी एक सिंगल तो बन नहीं पाती थी क्योंकि बेस्ट क्वालिटी जो है एचडी क्वालिटी में तो डीवीडीज के साइज छोटे होते थे तो उसमें दो डीवीडी में आती थी और दो डीवीडी उनको टेबल एडिट चाहिए थी।
इन्हने मना कर दिया कि मेरी फिल्म की हो जाएगी तो मैं नहीं दूंगा वो तब डी कंपनी में उस्ताद थी और बड़ा बिजनेस था मतलब एक डीवीडी एक फिल्म की यानी 10 करोड़ से 20 करोड़ का बिजनेस अब ये जो चली मजबूरन भेजनी पड़ी डीवीडी 25 करोड़ से 30 करोड़ का बिजनेस हुआ उस फिल्म की ब्लैक मार्केटिंग एंड डीवीडी से तो दाऊद को ₹50 की एक और ₹00 का छोकरा भेज के काम करने में अगर 20 करोड़ का या 30 करोड़ का फायदा होता है तो क्यों नहीं करेगा और ये लोग बेचारे तो सॉफ्ट टारगेट हैं सड़क पे किसी हिल पे किसी नदी के किनारे कहीं भी शूटिंग करते पाए जाते हैं। और पुलिस क्या करती है सबके बीच?
मजीरे बजाती है। मतलब क्या करेगी? अगर इतने बड़े लोगों को भी पुलिस प्रोटेक्शन नहीं दे पा रही है। मैं गुलशन कुमार के केस पर तो खैर बाद में आऊंगा। तो मतलब क्या रोल था फिर पुलिस का उस दौरान? देखिए पुलिस का रोल तो अपनी जगह हर जगह अच्छा होता है। पुलिस के सामने प्रॉब्लम यह है कि इंटेलिजेंस भी तो पहुंचनी चाहिए ना कि भैया यह होने वाला है। अब आपके अगर इंफॉर्मेंट अंदर नहीं है, आप वो सब नहीं कर पा रहे हैं तो यह आपका फेलियर है।
वो लोग तो स्मार्ट है ना। ठीक। कई बार तो मैंने यह देखा है कि वो लोग सिर्फ एक किलिंग नहीं जाता है। एक के पीछे दूसरा भी होता है कि अगर पहला फेल हुआ तो दूसरा करेगा। दूसरा करेगा। सुनीत अमर नायक ने दो स्क्वाड बनाए थे। पहला बाइक पे था। सेकंड l जो है वह सुनीत खटाऊ की कार यह खड़ी है। उसके ठीक पीछे नीले रंग की Maruti 800 कार में खुद अमरनाइक मौजूद है और उसके ठीक पीछे एक वाइट कलर की तीसरी कार है जिसमें सेकंड मौजूद है। इतनी उसने व्यवस्था रखी थी। और पहला बंदा आता है बाइक से। गाड़ी रुकती है।
पीछे वाला हैमर निकालता है। उनका कांच जो है वह हैमर से चकनाचूर करता है हथौड़ा मार करके और सीधे गोलियां पंप करनी शुरू हो जाती हैं। और जब यह हो जाता है गाड़ी राइट टर्न लेकर के अस्पताल की तरफ भगाता है उनका ड्राइवर और ये सीधे निकल जाते हैं प्रभा देवी की तरफ। तो इन ये लोग इतने मतलब क्लासिक डिजाइन ऑफ करते हैं के लिए। हम तो आप सोचिए कि उन उनकी इस चीज की भनक किसी को क्यों नहीं पड़ी? जब इतने बड़े-बड़े केसेस हुए हैं तकीउद्दीन वाहिद जो ईस्ट वेस्ट एयरलाइंस का चेयरमैन मैनेज एमडी था उसका हुआ दिन दहाड़े।
रामदास नायक जो कि देश के इतने बड़े यहां बीजेपी के नेता थे और बड़े ब्रांड लीडर थे। उनकी दिन दहाड़े हुई। कितने ही लोग हैं। प्रेम कुमार शर्मा बीजेपी के विधायक थे। उनकी हुई। तो हमारे यहां तो मतलब इस तरह की का पूरा एक वक्त ऐसा आया था जब ये लोग पॉलिटिशियंस पे आने लगे तब उनको लगा कि साला ये खतरा हमारे ऊपर आने लगा है। तब जाकर के पुलिस ऑफिशियल्स को बोला गया कि इसको खत्म करो। और फिर जो छह सात साल सस्टेंड ऑपरेशन चला। उस 5 साल के अंदर इन लोगों ने करीब-करीब 850 फेक एनकाउंटर किए और इन लोगों को मार करके खत्म किया। फेक फेक थे सारे फेक थे ।
सारे लेकिन मेरे हिसाब से जायज थे जायज थे शठम शटठे समाचार चलो उस पर आऊंगा लेकिन मैं पहले वो वाला सवाल का जवाब जो मंदाकिनी के साथ दाऊद इब्राहिम का था उस वक्त में यह हुआ कि मंदाकिनी जो है उसका रिश्ता जो दाऊद इब्राहिम से हुआ वो किसी ऐसी ही सिलसिले में उसको बुलाया गया ओके और मिलना हुआ दाऊद की तरफ से प्रपोजल आया दाऊद की बात मानना उनकी मजबूरी थी।
उस मजबूरी के तहत जो है फिर वह रिश्ता आगे बढ़ा। एक वक्त में आकर के रिश्ता खराब हुआ। फिर दोनों की राहें जुदा हो गई। और अब मंदाकिनी वापस लौट आई है हिंदुस्तान। उनके तीन बच्चे भी हैं। बड़े वाले बेटे को वो फिल्मों में काम दिलाने के लिए उनको स्थापित करने के लिए वो कोशिश भी काफी कर रही हैं। खुद के भी कमबैक के लिए उन्होंने कुछ कोशिशें की हैं।
लेकिन वो जो इतिहास उनके कांधे पे चढ़ के चिपका हुआ जो बैठा हुआ है वो कहीं किसी मोड़ पे उनके लिए परेशानियां तो आयत कर ही रहा है। और अबू सलीम और मोनिका बेदी के केस में भी ऐसा था। अबू सालिम और मोनिका बेदी के केस में हुआ यह था कि मोनिका बेदी को काम मिलना बंद हो चुका था।
और इस बीच में किसी तरीके से अबू सालिम और मोनिका के रिश्ते बन गए थे। और उस रिश्ते को बनाने में मुकेश दुग्गल का बड़ा हाथ था। वो कौन थे? मुकेश दुग्गल प्रोड्यूसर प्रोड्यूसर। ओके। मुकेश दुग्गल एक जमाने में कांधे पे चादरें धो करके और गली-गली सड़क-सड़क बेचने वाला बंदा था। और जब उसकी दाऊद गैंग के कुछ लोगों से मुलाकात हुई तो उनके लिए काम करते करते वो प्रोड्यूसर बन गया था।
ऐसे बहुत सारे लोग हैं मुंबई में जो दाऊद या राजन या अरुण गवली के कारण प्रोड्यूसर बन गए या मेकर बन गए और बड़ा कई अच्छी फिल्में भी बनाई कई काफी पैसा भी कमाया तो मुकेश दुग्गल के कारण इससे संपर्क हो गया और मोनिका उस समय में अबू सालेम को सरदार बोलती थी उसी समय में उसका एक निकनेम या अलायस नेम और भी चलता था।
कैप्टन तो उस समय में इन लोगों के बीच जो है एक रिलेशनशिप बिल्ट होनी शुरू हुई। अच्छा एक बड़ी अजीब सी चीज है ह्यूमन साइकोलॉजी महिलाओं को जो है ना मैचोमैन बड़े पसंद आते हैं। रोग जो कैरेक्टर्स होते हैं ना वो बहुत पसंद आते हैं।
कुछ हद तक तो एक वो चीज थी। लेकिन इसको यह नहीं पता था कि ये बंदा किस लेवल का मतलब खिलाड़ी है। और हां ठीक है। उसको अबू सालिम नाम नहीं बताया था। उसको अरसलान के नाम से मिलवाया था कि इनकी बड़ी पहुंच है और प्रोड्यूसर वगैरह सब कोई इनको ना नहीं बोल सकते। तो उसके जरिए उन्होंने कुछ फिल्में हासिल भी की थी ओके और वो एक बिल्ट हो गया रिलेशनशिप गुटफेथ का है वो रिश्ता और धीरे धीरे धीरे धीरे वो उस स्तर पर पहुंचा कि मोहब्बत हुई है फिर बाद में इन लोगों ने शादीवादी भी की ऐसा कहा जाता है जिसको कि वो इंकार करती हैं दाऊद ये सालेम भी इंकार करता है और फिर ये लिसबन में इनकी गिरफ्तारी होती है जो कि दाऊद के ही लोगों की इंफॉर्मेशन के कारण मतलब वो अरेस्टिंग हुई थी। फिर जेल में ये लोग वहां काफी लंबे समय तक रहे। और मजेदार बात यह है कि जब ये लोग जेल में थे तब मोनिका इसमें रोमन में हिंदी में उसको खत लिखा करती थी।
उन खत की प्रतियां मैंने हासिल कर ली। अच्छा। और हमने एक बड़ी खबर भी चलाई थी उसके ऊपर। [गला साफ़ करने की आवाज़] तो उसमें उसको क्रिश्चियनिटी में कन्वर्ट होने के लिए और इन उन सब चीजों के लिए भी वो लिखा करती थी और उनकी तरफ से मतलब काफी प्लीड होता था और तस्वीरें मतलब स्केच बनाती थी जिसके अंदर वो जमीन पर बैठी हुई है दोनों घुटनों पे और ऐसे करके मतलब वो स्केच बना हुआ है।
कुछ दिल का निशान बने हुए हैं। कुछ तस्वीरें और फूलवूल बने हुए हैं। वो सब का लंबे-लंबे 181 पेज के खत मतलब उन्होंने लिखे हैं जेल की दीवारों के पीछे से वहां पे समय काटने के लिए और होता भी क्या है यही सब कर सकते हैं और जेल के अंदर से ही अंदर खत जो है वुमन वार्ड से मेल वार्ड की तरफ भेजना है उतना ही होता था बैरेक्स में तो वो चले जाया करते थे और वहां पे थोड़ा सा कैदियों को अलग तरीके से रखा जाता है। उनकी ह्यूमन जो राइट्स हैं उनको थोड़ा ठीक से ट्रीट करते हैं।
तो वह उन लोगों को वह फैसिलिटीज़ मिल रही थी। तो वह यह चाह रही थी कि हम लोग अगर क्रिश्चियनिटी कन्वर्ट कर लेंगे यह सब हो जाएगा तो यहां से हमको माफ़ी मिल जाएगी और यह हो जाएगी। जैसा कि विक्की गोस्वामी के केस में हुआ था। जब विक्की गोस्वामी को दुबई में अरेस्ट कर लिया था मेंड्रिक्स का कारखाना चलाते वक्त तो ममता कुलकर्णी ने उससे कहा था कि तुम कृष्ण तुम इस्लाम ग्रहण कर लो तो ये लोग तुमको माफ कर देंगे।
वैसे ही सिलसिला यहां कुछ हुआ था। तो वो सारा चीज चली। उसके बाद में इन लोगों के बीच में दुराव आने लग गया क्योंकि इसको भी समझ में आया मोनिका बेदी को कि मैंने शायद अपनी जिंदगी में एक ये गलत कदम उठा लिया है। उसके पिता और ये लोग सब डॉक्टर हैं और बड़े जहीन बहुत बहुत अच्छी परिवार से है वो। तो उन लोगों ने भी समझाइश वगैरह दी होगी तो उसका नतीजा यह हुआ कि इन लोगों के बीच दराव हो गया। विवेक जब आपकी मैं कुछ किताबों पर आऊंगा और मैं जब आपकी किताबों के टाइटल देख रहा था और उन किताबों में आपने क्या कुछ लगाया तो मैं तो बड़ा हैरान भी हो गया कि इस विषय पर किताबें भी लिखी गई हैं और उसमें कितनी कुछ जानकारी होगी। तो आपकी किताब है क्लीनर के नाम से कि कैसे मर्डर साइड के बाद उसको क्लियर किया जाता है।
को ठिकाने लगाया जाता है और उसके लिए बकायदा लोग होते हैं पूरे होते हैं। तो क्या कुछ फाइंडिंग्स आपकी थी? क्या कुछ है वो जो लोगों को नहीं पता कि किस तरह से चीजें काम करती हैं? देखिए जो है वो एक कॉर्पोरेट हाउस की तरह सिस्टमेटिक तरीके से काम करता है। जब कोई प्लान की जाती है तो उस की प्लानिंग ये नहीं होती है कि जाओ भाई मार दो। हम ऐसा नहीं होता है। पहले अपने सीनियर मोस्ट लोगों को इंफॉर्मेशन आती है कि हां भैया इस आदमी को है।
तो वो लोग उस आदमी की पहले इंफॉर्मेशन निकालने के लिए अपने इंफॉर्मेंट्स या वॉचर लगाते हैं जिनको वो लोग वॉचर बोलते हैं। तो वॉचर जाएगा। उसका एरिया देखेगा। कहां से गाड़ी निकलती है? कौन-कौन सी गाड़ियां निकलती हैं? बच्चा कौन से स्कूल में जाता है? बीवी कौन से मॉल में जाती है।
कौन से हेयर सलूून में जाती है? क्या करती है? वो सारी इंफॉर्मेशन हफ्ता दो हफ्ता 5 हफ्ता 3 महीना एक महीना जितना भी टाइम उनके पास है उसके हिसाब से निकालते हैं। फिर उस इंफॉर्मेशन वो पहुंचती है प्लानर के पास। प्लानर उस इंफॉर्मेशन के आधार पर प्लान करता है कि यह काम कैसे होगा? कौन करेगा? उसके लिए किस तरीके के लगेंगे।
किस तरीके के व्हीकल्स लगेंगे। फिर वो सामान प्रोक्योर करने के लिए थर्ड पर्सन को बोला जाता है। लाने वाला अलग होगा। व्हीकल्स अरेंज करने वाला दूसरा होगा। पैसों का इंतजाम तीसरा करेगा। गेट अवे कार चौथा चलाएगा। आदमी की शिनाख्त करवाने वाला पांचवा होगा। ऐसे हर व्यक्ति के वहां काम बटे होते हैं। यह जो चीजें हैं ।
इसमें दो तरह के एक्सक्यूशन होते हैं या किलिंग्स होती है। एक ये कि हो रहा है आमने सामने का मार दिया ठा चलो भाई निकल लो इसकी मिलने दो ताकि दुनिया को पता चले कि दाऊद ने मारा या राजन गैंग ने मारा या गबली ने मारा या नाईक ने मारा जो भी मनचेकर गैंग ने ठोक दिया तो दुनिया को पता चलना चाहिए। दूसरा यह कि जिनसे हफ्ता लेना है।
उन उनकी लाशें गायब नहीं करवाते क्योंकि उससे शहर में और समाज में बढ़ता है फैलता है जिससे कि उनको पैसा आता है। जैसे गुलशन कुमार की जिस दिन हत्या हुई थी उस अकेली रात में तकरीबन तकरीबन 12.5 करोड़ अबू सालेम को फिल्म इंडस्ट्री से हफ्ता चला गया था। क्योंकि हर एक को फोन यही आया कि तेरा गुलशन कर दूं।
कौन गुलशन करवाना चाहेगा खुद का? वो मतलब वो महीना हर रात पैसा जाता था। हर दिन पैसा उसको हवाला होता था। ऐसी हालत हो गई थी। तो ये सारी चीजें होती हैं। कुछ ऐसे केसेस होते हैं जिनकी डेड बॉडीज नहीं मिलनी चाहिए। वो बॉडीज ना मिले उनको गायब करवाना है। इस काम को करने के लिए स्पेशलाइज टीम होती है जो पोटलेबाज कहलाते हैं। की मुंबई की लैंग्वेज में पोटले करने का मतलब है किसी भी व्यक्ति की गठरी बनाना। पोटला यानी गठरी और उसकी लाश गायब करवा देना।
ओके। अब वो लाश गायब करने के 50ों तरीके हैं। किसी की लाश को आपने गायब किया। बोरीवोरी में किसी में बैग में भरा बैग में और पत्थर बांध करके समंदर में डाल दिया। समुद्री जीवों का नाश्ता हो गया।
किसी को ले गए जमीन में गाड़ दिया। किसी को के ड्रम में उतार दिया। तो किसी को सीमेंट पिघले हुए जो गीला सीमेंट है उसमें डाल के ढक्कन बंद कर दिया और फिर वो कहीं पर डाल दिया या बरी कर दिया उसको जमीन में गाड़ दिया पता ही नहीं चलता इस धरा पे उस नाम का कोई प्राणी आया अभी तक नहीं आया था