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करोड़ों दिलों के राजा, फिर अकेले क्यों थे राजेश खन्ना? दर्दनाक राज़, जिसे जानकर रो पड़ेंगे।

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सोचिए एक ऐसा दौर जब किसी अभिनेता की सिर्फ एक झलक पाने के लिए हजारों लोग घंटों सड़क पर खड़े रहते थे। एक ऐसा स्टार जिसकी सफेद कार लड़कियों की लिपस्टिक के निशानों से रंग जाती थी जिसकी कार की धूल तक लोग अपनी दीवानगी की निशानी समझते थे। वोनाम था राजेश खन्ना।

भारतीय सिनेमा का पहला सुपरस्टार। लेकिन जिस इंसान के लिए पूरी दुनिया दीवानी थी, उसकी अपनी जिंदगी में एक ऐसा खालीपन था जिसे शायद करोड़ों फैंस का प्यार भी पूरी तरह भर नहीं पाया। कहानी शुरू होती है 29 दिसंबर 1942 से। अमृतसर के एक संपन्न परिवार में जन्मे इस बच्चे का नाम रखा गया जतिन। [संगीत] लेकिन किस्मत ने बचपन में ही उनके जीवन में एक बड़ा मोड़ ला दिया। जतिन को उनके सगे माता-पिता ने मुंबई में रहने वाले अपने रिश्तेदार चुन्नी लाल खन्ना और लीलावती खन्ना को गोद दे दिया।नए परिवार में उन्हें खूब प्यार मिला।

आलीशान जिंदगी मिली, हर सुख सुविधा मिली। लेकिन बचपन में अपने असली माता-पिता से दूर होने का दर्द कहीं ना कहीं उनके दिल में हमेशा रहा। [संगीत] शायद यही वजह थी कि राजेश खन्ना रिश्तों को लेकर बेहद भावुक और संवेदनशील इंसान बन गए। कहते हैं कि सिर्फ 11 साल की उम्र में उन्हें पहला प्यार हुआ था उनके बिल्डिंग में रहने वाले सुरेखा से। लेकिन यह प्यार ज्यादा वक्त तक नहीं चल पाया। कुछ साल बाद सुरेखा की शादी हो गई और उनका पहला प्यार अधूरा रह गया। लेकिन इसी बीच [संगीत] उनके अंदर का कलाकार जन्म ले चुका था। कॉलेज के दिनों में जब बड़े घरों के बच्चे आराम की जिंदगी जीते थे तब जतिन थिएटर की दुनिया में अपना नाम बनाने के लिए मेहनत कर रहे थे। वे अपनी महंगी कार से नाटकों की रिहर्सल में जाते और लोग हैरान होते कि इतना अमीर लड़का आखिर संघर्ष क्यों कर रहा है? स्ट्रगल क्यों कर रहा है? उनकी आंखों में एक सपना था फिल्मों में अपना नाम बनाना।

साल 1965 में उन्होंने यूनाइटेड प्रोड्यूसर्स और फिल्मफेयर के टैलेंट कॉन्टेस्ट में जीत हासिल की। इसके बाद उनके चाचा ने उनका नाम बदलकर जतिन से राजेश खन्ना कर दिया। फिर शुरू हुआ एक ऐसा सफर जिसने भारतीय सिनेमा का इतिहास बदल दिया। साल 1966जब फिल्म आखिरी खत से उन्होंने बॉलीवुड में कदम रखा। शुरुआत धीमी रही

लेकिन साल 1969 में आई ये फिल्म आराधना ने सब कुछ बदल दिया। स्क्रीन पर उनकी नीली आंखें, हल्की मुस्कान और अलग अंदाज में पूरे देश को अपना दीवाना [संगीत] बना दिया। इसके बाद आनंद, अमर प्रेम, कटी पतंग जैसी फिल्मों ने उन्हें ऐसा स्टार बना दिया जिसकी बराबरी करना [संगीत] मुश्किल था। फिर एक ऐसा समय आया जब उनकी लगातार 15 16 हिट फिल्मों ने उन्हें बॉलीवुड का पहला सुपरस्टार बना दिया। लेकिन सफलता के साथ उनकी जिंदगी में प्यार और दर्द भी आते रहे।

फैशन डिजाइनर अंजू महेंद्र के साथ उनका लंबा रिश्ता रहा। लेकिन रिश्ता टूटने के बाद उनकी जिंदगी में एक नया अध्याय शुरू हुआ और उन्होंने खुद से 16 साल छोटी अभिनेत्री डिंपल कपाडिया से शादी कर ली। हालांकि [संगीत] पर्दे के बाहर राजेश खन्ना का दिल बेहद नरम था। उनके बंगले आशीर्वाद पर अक्सर शाम की महफिलें सजती थी। जहां संघर्ष कर रहे कलाकारों, लेखकों और संगीतकारों के लिए उनके दरवाजे हमेशा खुले रहते थे। उनकी सफलता में किशोर कुमार की आवाज और आर डी बर्मन का संगीत भी बेहद खास रहा। काका खुद मानते थे कि किशोर दा उनकी फिल्मों की जान थी। जब किशोर कुमार का निधन हुआ तो राजेश खन्ना टूट गए थे। उन्होंने कहा था आज मेरी आवाजचली गई लेकिन वक्त हमेशा एक जैसा नहीं रहता। 70 के दशक के बाद बॉलीवुड का दौर बदला। अमिताभ बच्चन के एंग्री यंग मैन वाले दौर ने सिनेमा की दिशा बदल दी और धीरे-धीरे राजेश खन्ना की चमक कम होने लगी।

जिस बंगले के बाहर कभी हजारों फैंस की भीड़ लगी रहती थी, वहां अब सन्नाटा दिखाई देने लगा। लेकिन काका ने कभी खुद को कमजोर नहीं माना। वह कहते थे मैं जैसा जिया राजा की तरह जिया। जब भीड़ थी तब भी मैं वही था और आज जब सन्नाटा है तब भी मैं वही राजा हूं। 18 जुलाई 2012 को भारतीय सिनेमा ने अपना पहला सुपरस्टार [संगीत] खो दिया। उनके अंतिम दर्शन के लिए लाखों लोग उमड़ पड़े। बारिश के बीच ऐसा लग रहा था जैसे पूरा देश अपने चहेते सितारे को आखिरी विदाई दे रहा हो। कहा जाता है कि जिंदगी के आखिरी पल में भी राजेश खन्ना का अंदाज बिल्कुल फिल्मी था। उनकेआखिरी शब्द कहे टाइम हो गया है पैकअप।

जैसे उनकी जिंदगी की फिल्म का आखिरी सीन भी किसी निर्देशक ने पूरी तैयारी के साथ लिखा। राजेश खन्ना चले गए लेकिन उनकी मुस्कान, उनका अंदाज और उनकी फिल्मेंआज भी लोगों के दिलों में जिंदा है। आज भी जब कोई कहता है बाबू मोसाई जिंदगी बड़ी होनी चाहिए लंबी नहीं। तो आंखों के सामने सिर्फ एक ही चेहरा मुस्कुराता हुआ नजर आता है। वो चेहरा जिसने करोड़ों दिलों पर राज किया।

वो नाम जिसने भारतीय सिनेमा को उसका पहला सुपरस्टार दिया। हमारे पहले और आखिरी रोमांटिक सुपरस्टार राजेश खन्ना। उनकी फिल्में उनका अंदाज और उनकी मुस्कान आज भी लोगों के दिलों में जिंदा है क्योंकि कुछ सितारे सिर्फ पर्दे पर नहीं चमकते बल्कि लोगों की यादों का हिस्सा बन जाते हैं।

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