कोई कलाकार इतना बड़ा ऐसे नहीं बन जाता। नहीं नहीं बिल्कुल नहीं वो उनका मतलब जो करियर है जो शुरू हुआ है 60ज में वो आप 2025 में इतने साल बाद भी मतलब आप किसी भी यंग फिल्म मेकर, यंग राइटर, यंग डायरेक्टर से पूछिए आप किसके साथ काम करना चाहेंगे? सभी के नाम पर सभी के जबान पर होगा अमिताभ बच्चन। तो ये दैट्स अ क्रेडिट। उसके बाद आपने शहंशाह के बाद किंग खान को लिया फिल्म में। डॉन जी तो मैं शहंशाह से मतलब नेक्स्ट लेवल पर उसके बाद एक प्रिंस आने वाला है। हां नहीं शाहरुख और मेरी दोस्ती काफी हो गई थी। दिल चाहता है के बाद हमारी मुलाकात शुरू हुई दिलचाता है के बाद और मतलब उनका जो सेंस ऑफ ह्यूमर है आप तो मतलब काफी मिले हैं
उनसे और आपने टीवी पे भी देखा होगा मतलब एक बहुत ही चार्मिंग इंसान है बहुत ही खुश मिजाज के इंसान है तो उनके साथ वक्त बिताने में बहुत मजा आ रहा था और हम बात करते रहते थे कि यार ऐसी फिल्में क्यों नहीं बनती आज जैसे सलीम जावेद लिखते थे तो ये कॉन्वर्सेशनंस होती थी और मेरे माइंड में हमेशा मतलब मैं उन फिल्मों में पे पला बढ़ाऊं और मैं चाहता था कि यार यार इतनी मोहब्बत है मेरी उन फिल्मों के लिए क्यों ना मैं एक फिल्म रिमेक करूं और जो फिल्म मुझे बहुत सही लगी थी उस वक्त कि दोबारा बन सकती है क्योंकि वो काफी मॉडर्न थी
अपने टाइम के लिए भी जब 78 में रिलीज हुई थी काफी मॉडर्न टेमो एक मॉडर्न माइंडसेट था उस फिल्म का तो इसलिए मैंने शाहरुख से बात की मैंने कहा कि यार मैं सोच रहा हूं डॉन बना दूं तो उसने मतलब बिना कुछ सुने कहा कि यार यस यस आई एम ऑन लेट्स डू इट तो ऐसे ही बनी डॉन एंड वी हैव अ वंडरफुल टाइम सर मेकिंग इट उस जमाने में शाहरुख खान, प्रियंका चोपड़ा दो-दो स्टार्स को लेके फिल्म बनाना यंग डायरेक्टर के लिए मुश्किल काम था। सर मैं बच्चन साहब के साथ काम कर चुका था। तो आफ्टर दैट जो मतलब स्टार थे उस वक्त देयर वाज़ नोबडी बिगर देन हिम। लेकिन उनके साथ काम करना, प्रियंका के साथ काम करना, ओमपुरी जी के साथ। मैंने ओमपुरी जी के साथ तीन फिल्में की हैं। डॉन वन, डॉन टू और फिर लक्ष में भी वह थे। उनके साथ भी काम करने में मतलब एक बहुत ही अलग आनंद और एक अलग मजा था क्योंकि वो इतने बेहतरीन कलाकार थे और इतनी मतलब पावर थी
उनके हर परफॉर्मेंस में और वो एक रिस्पेक्ट जो डिमांड करते थे एज एन एक्टर एंड एज अ ह्यूमन बीइंग जब आप सेट पर मिलते मिलते थे उनसे ऐसे लगता था कि यार बिल्कुल अपना ही मतलब बिल्कुल ही इजी नो चिप ऑन योर शोल्डर कि मैं नेशनल अवार्ड्स जीत चुका हूं। में एनएसडी में मतलब मैंने गोल्ड मेडल जीता है। ऐसा कुछ नहीं। तो जब आप इन लोगों से मिलते हैं तो आपको अंदाजा होता है कि यार गॉड विलिंग या मतलब जो जिस चीज में आप बिलीव करते हैं कि आपको कामयाबी मिलेगी, आपको सक्सेस मिलेगा। लेकिन इन लोगों से सीखने को मिलता है कि उसके बावजूद एक हम्ल रहना बहुत-बहुत जरूरी होती है लाइफ में। वो एक चीज इन लोगों से सीख। हम जनता में सवाल ले सकते हैं। एक फरहान सर आपकी मूवीज में पोएट्री बहुत उम्दा होती है। शुक्रिया। तो आपकी फेवरेट पोएम कौन सी है वो हम आपसे सुनना चाहते हैं। मेरी फेवरेट पोएम जो है फिल्मों से वो जिंदगी ना मिली दोबारा में से ही है। जबजब दर्द का बादल छाया जब गम का साया लहराया।
जब आंसू पलकों तक आया जब ये तन्हा दिल घबराया। हमने दिल को यह समझाया दिल आखिर तू क्यों रोता है दुनिया में यूं ही होता है यह जो गहरे सन्नाटे हैं वक्त में सबको बांटे थोड़ा गम है सबका किस्सा थोड़ी धूप है सबका हिस्सा आज तेरी बेकार ही लम है हर पल एक नया मौसम है क्यों तू ऐसे पल खोता है दिल आखिर तू क्यों रोता है फरान अभी हम ब्लड फिल्म की बात कर रहे थे। आपने बड़ी मेहनत की। कई कई महीनों लद्दाख में रहे। अमिताभ बच्चन का भी टाइम खराब किया। वो फिल्म चली नहीं। हां मतलब जिस जो सोचा था कि ये फिल्म जिस तरह की बिजनेस उसे करनी चाहिए बॉक्स ऑफिस में वैसी बिनेस उस फिल्म ने नहीं की। और उस वक्त मैं सच कहूंगा रजत जी मैं मतलब बहुत मतलब मेरा दिल टूट गया था क्योंकि बचपन से सिखाया जाता है आपको कि मतलब आप बिल्कुल दिल से मेहनत से काम करो तो हमेशा जो उसका जो नतीजा है वो परिणाम है वो अच्छा ही होगा लेकिन ऐसा मेरा मानना था उस वक्त कि ऐसा हुआ नहीं और मगर फिर भी मतलब क्योंकि मतलब दुनिया है आपको अपने आप को किसी तरह से संभालकर आगे बढ़ना तो है ही तो ऐसा हुआ लेकिन ये दुख मेरे दिल में बहुत सालों तक रहा वो फिल्म फिल्म की शूटिंग हमने की थी आईएमए में 2003 में।
2004 में फिल्म रिलीज हुई। 2017 में मैं देहरादून गया था और वहां पर एक म्यूजिक का कॉन्सर्ट था मेरा और मैं लगभग 13 साल के गैप के बाद देहरादून वापस जा रहा था। तो मैंने आईएमए से कांटेक्ट किया और कहा कि मैं देहरादून आ रहा हूं। मैं चाहूंगा कि मैं आईएमए विजिट करूं। वहां पर शूटिंग मैं बहुत ही थी। मैं चाहूंगा लोगों से मिलूं। वो फिर से उन लोकेशनेशंस पर जाऊं। तो बहुत प्यार से, इज्जत से, मोहब्बत से उन्होंने हमें रिसीव किया। हमें सारी वो जगहें दिखाई और एक नया मेस वहां तैयार हुआ था विक्रम बत्रा मेस। तो हमें वहां बुलाया और सारे जो कैडेट थे वहां वो वहां इकट्ठा हुए। कुछ 400 500 लड़के होंगे और उन्होंने मुझसे कहा कि व्हाई डोंट यू से अ फ्यू वर्ड्स टू देम? तो मैंने उन्हें कहा कि ले ल जो फिल्म बनी थी वो किस वजह से बनी थी? क्योंकि मेरे फादर जो थे वो सन 2000 में या 2001 में वो कारगिल गए थे। वहां पर वो फॉल सोल्जर के कारगिल मेमोरियल पर एक फूल चढ़ा रहे थे श्रद्धांजलि देने। और वहां उनकी मुलाकात हुई एक काफी एक हाई रैंकिंग ऑफिसर से जिन्होंने मेरे फादर से कहा कि यह देख रहे हैं जावेद साहब पूरी दुनिया में सोसाइटी में लोग कितनी तारीफ कर रहे हैं पूरी इंडियन आर्मी की कि हमने वो कर दिखाया जो मतलब लोग कह रहे थे कि नामुमकिन है। कम मतलब जो सोल्जर्स थे दे आर फाइटिंग अप हिल व्हिच इज़ वेरी वेरीरी डिफिकल्ट। मगर फिर भी हमने वो अपना जो जो मिशनंस थे हमने पूरे किए।