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सुभाष चंद्र बोज की पत्नी कभी भारत में क्यों नहीं रहीं?

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तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा यह नारा देने वाले हमारे महान आजादी के नेता सुभाष चंद्र बोस के बारे में सोचते ही आपके दिमाग में एक इमेज बनेगी जिसमें एक शख्स आंखों पर गोल चश्मा लगाए फौज की वर्दी पहने लोगों को आजादी के लिए लड़ने का जोश जगा रहा होगा लेकिन इन्हीं सुभाष चंद्र बोस की लाइफ का एक ऐसा पहलू भी है जिससे बहुत कम लोग वाकिफ हैं यह पहलू है उनके प्रेम का पहलू उनकी निजी जिंदगी से जुड़ा हुआ जो सालों तक एक सीक्रेट रहा उनके बेहद खास लोगों को भी उनकी प्रेम कहानी के बारे में पता नहीं था यही नहीं सुभाष बाबू की यह कहानी इतनी सीक्रेट थी कि उनकी प्रेमिका जो बाद में उनकी पत्नी भी बनी व भारत में कभी नहीं रही यहां तक कि उन्होंने कभी भी सुभाष चंद्र बोस से अपने रिश्ते को सार्वजनिक नहीं किया पब्लिक नहीं किया तो आज के इस वीडियो में हम जानेंगे सुभाष चंद्र बोस की लाइफ से जुड़ा ये पहलू कौन थी नेताजी की वाइफ कैसे हुई थी उनकी पहली मुलाकात और क्यों

वो कभी भी भारत में नहीं रही यह सब जानने के लिए वीडियो को एंड तक देखना होगा तो स्किप बिल्कुल भी मत कीजिएगा क्योंकि अपना इतिहास नहीं जानोगे तो खुद को कैसे पहचानोगे तुम पहली महिला हो जिससे मैंने प्यार किया भगवान से यही चाहूंगा कि तुम मेरे जीवन की आखिरी स्त्री भी रहो साल 1934 में यह लाइन सुभाष चंद्र बोस ने एक लेटर में लिखी थी उस लड़की के लिए जिसके साथ वह अपना जीवन बिताने वाले थे इसी साल उनकी मुलाकात इस लड़की से भी होने वाली थी सवीना वज्ञ आंदोलन के दौरान सुभाष बाबू को जेल में डाल दिया गया यहां उनकी तबीयत बिगड़ने लगी उनकी बिगड़ती तबीयत को देखकर अंग्रेज सरकार उन्हें इलाज के लिए यूरोप भेजने पर मान गई फिर सुभाष बाबू

अपने खर्चे पर ऑस्ट्रिया की राजधानी वियना गए यहां उन्होंने तय किया कि वह यूरोप में रहने वाले इंडियन स्टूडेंट्स को आजादी की लड़ाई के लिए एकजुट करेंगे इसी दौरान एक यूरोपियन पब्लिशर ने उन्हें द इंडियन स्ट्रगल नाम से बुक लिखने को कहा सुभाष बाबू को इस काम के लिए एक हेल्पर की जरूरत महसूस हुई जो अंग्रेजी भी जानता हो और जिसे टाइपिंग भी आती हो इसके लिए उन्हें दो लोगों का फरेंस दिया गया दोनों के इंटरव्यू के बाद दूसरे कैंडिडेट को नौकरी दी गई यह एक 24 साल की खूबसूरत ऑस्ट्रिया लड़की थी इसी साल जून से इस लड़की ने बोस के साथ काम करना शुरू कर दिया इस लड़की का नाम था एमिली शेंकल यही वो लड़की थी जो सुभाष बाबू की लाइफ में एक अलग मोड़ लाने वाली थी उस वक्त सुभाष बाबू की उम्र थी 37 साल वह पूरी तरह से देश की आजादी के काम में लगे हुए थे

इसी बीच एमिली ने उनकी लाइफ को बदल कर रख दिया सुभाष बाबू को इससे पहले कई लड़ यों से शादी के ऑफर आए थे लेकिन उन्हें किसी में भी दिलचस्पी नहीं थी लेकिन सुभाष बाबू को एमिली में कुछ अलग दिखा नेताजी के भाई शरद बोस के पोते सुगत बोस ने सुभाष बाबू पर एक किताब लिखी है हिज मजेस्टी अपोनेंट सुभाष चंद्र बोस एंड इंडियाज स्ट्रगल अगेंस्ट एंपायर इसमें उन्होंने एमिली के हवाले से लिखा है प्यार की पहल सुभाष चंद्र बोस की ओर से हुई थी और धीरे-धीरे हमारे रिश्ते रोमांटिक होते गए 1934 के मध्य से लेकर मार्च 1936 के बीच ऑस्ट्रिया और चेकोस्लोवाकिया में रहने के दौरान हमारे रिश्ते मधुर होते गए हालांकि एमिली का परिवार नहीं चाहता था कि उनकी बेटी किसी भारतीय के यहां पर काम करें लेकिन सुभाष चंद्र बोस से मिलने के बाद वह उनकी पर्सनालिटी के फैन हो गए फिर सुभाष और एमिली के बीच का यह प्रेम संबंध और भी प्रगाढ़ होता गया और वह एक दूसरे को खत भी लिखने लगे एमिली उन्हें मिस्टर बोस लिखती थी और सुभाष बाबू लिखते थे मिस शंकल या पल शंकल इस दौरान के पत्र में सुभाष बाबू ने वो चिट्ठी भी लिखी थी जिसका जिक्र मैंने अभी कुछ देर पहले किया था हालांकि उस दौर में लेटर्स को सीक्रेट रखना बहुत ज्यादा जरूरी हुआ करता था क्योंकि यूरोपियन कंट्रीज से मदद मांगना यानी कि ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ बगावत करना था और इसीलिए सुभाष बाबू और एमिली बहुत ज्यादा सावधानी से अपने लेटर्स एक्सचेंज करते थे इन लेटर्स में दोनों की अपनी चिंताएं भी होती थी कि आगे उनकी इस प्रेम कहानी का क्या होगा ऐसे ही एक लेटर में सुभाष बाबू ने मिमली को लिखा था कि मुझे नहीं

मालूम कि भविष्य में क्या होगा हो सकता है पूरा जीवन जेल में बिताना पड़े मुझे गोली मार दी जाए या मुझे फांसी पर लटका दिया जाए हो सकता है मैं तुम्हें कभी ना देख पाऊं हो सकता है कि कभी पत्र ना लिख पाऊं लेकिन भरोसा करो तुम हमेशा मेरे दिल में रहोगी मेरी सोच और मेरे सपनों में रहोगी अगर हम इस जीवन में नहीं मिले तो अगले जीवन में मैं तुम्हारे साथ रहूंगा इसी लेटर के अंत में सुभाष ने लिखा है कि मैं तुम्हारे अंदर की औरत को प्यार करता हूं तुम्हारी आत्मा से प्यार करता हूं तुम पहली औरत हो जिससे मैंने प्यार किया इस लेटर के अंत में सुभाष ने इस पत्र को नष्ट करने का अनुरोध भी किया था लेकिन एमिली ने इस लेटर को नष्ट नहीं किया बल्कि संभाल कर रख लिया जाहिर है कि दोनों को एक दूसरे से बेइंतहा प्रेम था लेकिन इसके बावजूद भी वह अपने आजादी के आंदोलन को भूले नहीं थे उनका ध्यान भारत को आजादी दिलाने पर था लेकिन एमिली के साथ भी उन्होंने कोई समझौता नहीं किया सुभाष दोनों ही रास्ते पर साथ-साथ चले हां यह बात जरूर है कि एमिली को सुभाष के लक्ष्यों के आगे कुछ समझौते जरूर करने पड़े 26 ंबर 1937 को दोनों ने ऑस्ट्रिया में एक पसंदीदा रिजॉर्ट में शादी कर ली यह शादी बहुत ही ज्यादा सीक्रेट ढंग से की गई थी इतनी सीक्रेट कि सुभाष बोस के भतीजे अमय बोस जो उस वक्त ऑस्ट्रेलिया में ही थे उन्हें भी इसके बारे में काफी बाद में पता चला रुद्रांश मुखर्जी इस बारे में कहते हैं कि इसके पीछे की वजह शायद यह रही होगी कि सुभाष बाबू इसका असर अपने राजनीतिक करियर पर नहीं पड़ने देना चाहते होंगे किसी विदेशी महिला से शादी की बात आने पर उनकी छवि पर असर पड़ सकता था और ऐसा उन्होंने इसलिए भी कहा होगा क्योंकि 1938 में वह कांग्रेस के अध्यक्ष बने लेकिन उनकी शादी का पता चलने पर कई लोगों को झटका लगा था कुछ भी हो दोनों के बीच में गहरा प्रेम था हालांकि एमली सुभाष बाबू के व्यक्तित्व के बराबर नहीं ठहरती थी पर सुभाष उन्हें बहुत पसंद करते थे लेकिन देश की आजादी की लड़ाई में बजी नेताजी एमिली को कभी बहुत वक्त नहीं दे पाए साल 1934 से 1945

के बीच दोनों का साथ महज 12 साल का रहा और इसमें भी दोनों साथ में 3 साल से भी कम समय तक रह पाए 29 नवंबर 1942 4 के दिन एमिली ने एक बेटी को जन्म दिया जिसका नाम रखा गया अनीता यह नाम इटली के क्रांतिकारी गैरी बाल्डी की पत्नी के नाम पर रखा गया था जो बहुत बहादुर महिला थी दिसंबर 1942 में सुभाष ने विएना पहुंचकर अपनी बेटी को पहली बार देखा फिर उन्होंने खत लिखकर अपने भाई शरद चंद बोस को अपनी पत्नी और अपनी बेटी के होने की खबर दी और यहां से वह निकल गए अपने मिशन पर आजाद हिंज फौज को लेकर अपने देश के लिए लड़ने के लिए यह उनकी पत्नी से उनकी आखिरी मुलाकात थी इसके बाद वोह कभी लौटकर वापस नहीं आ पाए इधर एमिली ने भी अपने प्रेम को पूरी शिद्दत के साथ निभाया व सीक्रेट उन्होंने हमेशा बनाकर रखा जो उनके प्रेम की शुरुआत से बना रहा 1996 तक की लंबी जिंदगी जीने वाली एमिली ने एक टेलीग्राफ हाउस में काम करके अपनी जिंदगी बिता दी अपनी शादी को सीक्रेट रखने के चलते ही वह कभी भी भारत वापस नहीं आई उनकी बेटी अनीता को उन्होंने पाल पोस करर बड़ा किया और आज वह जर्मनी की मशहूर इकॉनमिका के साथ सुभाष और एमिली का रिश्ता शुरू हुआ था उसे एमिली ने म से दम तक निभाया था तो दोस्तों यह थी कहानी सुभाष बाबू के प्रेम की जिसके बारे में बहुत कम लोगों को पता है आपको ये कहानी कैसी लगी हमें कमेंट करके जरूर बताइएगा वीडियो को लाइक और शेयर करना ना भूले और ऐसी तमाम इंटरेस्टिंग कहानियों के लिए हिस्ट्री कनेक्ट को सब्सक्राइब जरूर करें धन्यवाद

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