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30 साल बाद खुले ‘दिव्या भारती’ की मौ!त के पर्दे, सामने आई चौकाने वाली बात।

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फिल्म इंडस्ट्री में ऐसे बड़े कम हुए हैं। बहुत सारे मिस्ट्री है। बहुत सारी ऐसी हुई हैं जिनके ऊपर पर्दा पड़ा हुआ है। लेकिन इतनी जवान मौत, इतनी यंग डेथ मिसाल कब मिलती है। सिर्फ 19 साल उम्र थी दिव्या भारती की जब उनकी हुई। टोटल दो साल का करियर 1990 के आसपास वो फिल्मों में आई।

शुरुआत साउथ की फिल्मों से की, तेलुगु फिल्में की, तमिल फिल्में की और उसके बाद फिर वह मुंबई आती हैं। और मुंबई में एक साल में ही 10 फिल्में वो कर लेती हैं। और टोटल हिंदी जो फिल्में हैं वो 14 फिल्में थी उनकी जिनमें से तीन फिल्में उनकी के बाद रिलीज हुई जिसमें वो 80% से ज्यादा काम कर चुकी थी। कई फिल्में ऐसी थी जिसमें वो काम कर रही थी और उस फिल्म को दोबारा बनाना पड़ा अलग-अलग हीरोइन को लेकर। से एक आंदोलन फिल्म थी। वो नाडियाटवाला की ही फिल्म थी और उस आंदोलन की शूटिंग हो चुकी थी लगभग 80% लेकिन उसके बाद हो गई तो उस पूरी फिल्म को दोबारा बनाना पड़ा और दिव्या भारती की जगह फिर श्रीदेवी को उस फिल्म में काम मिला और श्रीदेवी ने उस आंदोलन फिल्म में एक्टिंग की।

हालांकि यह भी एक इत्तेफाक देखिए कि दिव्या भारती जब हिंदी फिल्म में आई थी तो इस वजह से आई थी कि लोग उन्हें श्रीदेवी की कॉपी कहती थी। श्रीदेवी से बहुत शक्ल मिली थी और श्रीदेवी तब एकदम उरूज पर थी। स्टारडम उनका एकदम चारों तरफ था और ऐसे वक्त में दिव्या भारती आती हैं और श्रीदेवी की हमशक्ल लोग उन्हें कहते हैं और एक के बाद एक फिल्में करती हैं।

जिसमें दीवाना जो शाहरुख खान और ऋषि कपूर के साथ फिल्म थी। इसके अलावा जो उनकी पहली फिल्म थी वो विश्वात्मा थी जिसमें सात समंदर पार एक गाना जो था वो बहुत पॉपुलर हुआ था। तो 2 साल में ही करीब 14 हिंदी फिल्में की। छह उन्होंने साउथ इंडियन फिल्में की। तो कुल 20 फिल्मों का सफर, तीन साल का करियर और इसी दौरान एक फिल्म थी।

शोला और शबनम बहुत हिट फिल्म थी गोविंदा की। मैंने कई बार देखी कॉमेडी फिल्म थी। उसके प्रोड्यूसर थे साजिद नाडियाडवाला। तो उस फिल्म की शूटिंग चल रही थी जब से प्रोड्यूसर थे वो। तो सेट पर आए थे गोविंदा से मिलने। गोविंदा ने उनको इंट्रोड्यूस कराया पहली बार दिव्या भारती से। दिव्या भारती से इंट्रोड्यूस कराया। उसके बाद कहते हैं कि साजिद नाडियाडवाला और दिव्या भारती में प्यार हो गया और थोड़ी देर के बाद फिर दिव्या भारती ने कहा कि हम शादी करेंगे जबकि साजिद नाडियाडवाला की ऑलरेडी शादी एक हो चुकी थी।

फिर भी साजिद नाडियाडवाला ने 92 के आखिर में 1992 के आखिरी के या तो अक्टूबर नवंबर दिसंबर के महीने में दिव्या भारती से शादी की। इस्लामिक तरीके से की काजी ने निकाह पढ़ाया और दिव्या भारती का जो नाम हो गया वो फिर सना नाडियाडवाला लेकिन इस शादी को शुरुआत में छुपा के इसलिए रखा गया था क्योंकि साजिद नाडियाडवाला का कहना था कि दिव्या भारती की फिल्मों पे असर पड़ेगा और इससे फिल्म इंडस्ट्री में होता है अक्सर ग्लैमर और इन सारे चक्करों में आप हीरोइन अपनी शादी या हीरो अपनी शादी को कई बार छुपा लेते हैं ताकि उनकी फिल्मों के बिजनेस पे असर ना पड़े और दिव्या भारती एकदम नई थी सिर्फ 19 साल उम्र थी 2 साल फिल्मों का करियर था।

14 फिल्में उनके खाते में थी तो और शोला शबनम की शूटिंग चल रही थी और वह नहीं चाहते थे कि इस फिल्म के रिलीज़ से पहले यह खुलासा हो। तो ये सारी चीजें हुई थी। फिर यह तय हुआ था कि शादी के बाद बता देंगे दुनिया को कि ये शादी हो चुकी है।

तो 93 में जब ये शादी हुई थी तब एक फ्लैट लेकर साजिद नाडियाडवाला ने दिया था दिव्या भारती को जो वसोवा इलाके में था और ये पांचवी मंजिल पे था। और वहां दिव्या भारती रहती थी। कभी उनके भाई एक कुणाल भारती हैं। वह आया करते थे। इनके मां-बाप अलग रहते थे। और यह फ्लैट किसी और के नाम पे था। यह साजिद नाडियाडवाले के भी नाम पे नहीं था और दिव्या भारती के भी नाम पे नहीं था। तो वहां पर टेनेंट थी और वहीं रहती थी पांचवी फ्लोर पे। और वसोवा के जिस ये पांचवी मंजिल पे रहती थी वो तुलसी अपार्टमेंट था। उस बिल्डिंग का नाम।

तो तुलसी अपार्टमेंट की पांचवी मंजिल पे दिव्या भारती एक तीन रूम बेडरूम के फ्लैट में रहती थी। 5 अप्रैल 1993

की सुबह हैदराबाद में उनकी कुछ फिल्मों की एक साथ हिंदी और साउथ इंडियन दोनों फिल्में करती थी तो हैदराबाद में उनकी फिल्म की शूटिंग चल रही थी तो 5 अप्रैल की सुबह वो शूटिंग करके वापस दिन में मुंबई पहुंचती हैं दोपहर बाद 5 अप्रैल 1993 को उसके बाद वह अपने घर जाती हैं तुलसी अपार्टमेंट की पांचवी मंजिल पे और उनके पैर में एक शूटिंग वटूिंग के दौरान चोट लग गई थी उनकी उंगलियों में तो बैंडेज बैंडेज लगा हुआ था इत्तेफाक से उसी दिन 5 अप्रैल 1993 को दिव्या भारती अब तक करीब 14 फिल्में कर चुकी थी ।

और काफी पॉपुलर हो गई थी फिल्मों लगातार उन्हें फिल्में मिल रही थी तो पैसे भी काफी आ गए थे तो उन्होंने चार बेडरूम का एक घर मुंबई में ही एक फ्लैट उसी दिन डील किया और वो बहुत खुश खुश थी। ये सारी जब उनकी की इन्वेस्टिगेशन हुई उसमें ये सारी चीजें बाहर आई। तो वो रह रही थी जिस फ्लैट में किराए पे उस जगह को छोड़ के एक फोर बडरूम फ्लैट उन्होंने बाकायदा परचेस किया खरीदा और वहां पे वो उनको शिफ्ट होना था और उसी दिन यह डील हुई तो इनके भाई जो कुणाल थे वो उसको घर पे बुलाया कुणाल को बधाई दी और दिव्या भारती बेहद खुश बेइंतहा खुश कि यह एक अपना घर होगा मुंबई जैसे शहर में कभी सोचा नहीं था और वहां हम अब रहेंगे मां-बाप भी उनके खुश सबको इनफॉर्म किया।

तो 5 अप्रैल की यह बात है। अब अगले दिन 6 अप्रैल को उन्हें शूट के सिलसिले में फिर मुंबई से बाहर जाना था। लेकिन एक तो पैर में थोड़ी सी चोट लगी हुई थी। दूसरा यह फ्लैट की खुशी खरीदने की। तो दिव्या भारती चाहती थी कि उसको एक दिन पोस्टपोन कर दें। तो उन्होंने उस फिल्म के प्रोड्यूसर से ये कहा भी कि एक दिन आगे अगर टाल दें आप 6 अप्रैल की जगह 7 अप्रैल। तो प्रोड्यूसर भी शायद इस बात को मान गया था। अब दिव्या भारती 5 अप्रैल को मुंबई के अपने घर में रहती हैं। तभी उनके एक दोस्त हैं फैशन डिजाइनर नीता लुल्ला दिव्या भारती की सारी फिल्मों में ज्यादातर जो उनके कॉस्ट्यूम है।

वही डिजाइन करती थी वही तो इनके साथ ये प्रोफेशनल रिश्ते के साथ-साथ उनकी दोस्ती भी गहरी हो गई तो नीताल उल्ला का फोन आता है वो जो फिल्म थी एक दो आगे जो साइन किया हुआ था उसके लिए उनका जो कैरेक्टर था उस हिसाब से कुछ ड्रेस के बारे में बात करनी थी और साथ में दोस्ती भी गहरी थी और नीता लुला के जो हस्बैंड है वो डॉक्टर हैं डॉक्टर श्याम लुल्ला तो वो लोग बैठ के बात करना चाहते थे तो दिव्या भारती ने कहा आप घर आ जाइए तो ये लोग शाम को करीब 9:00 बजे रात को नीता लुल्ला और डॉक्टर श्याम लुल्ला उनके हस्बैंड ये दिव्या भारती के घर तुलसी अपार्टमेंट के उस पांचवी मंजिल पर पहुंचते हैं।

यह दोनों ड्राइंग रूम में बैठे होते हैं। साथ में दिव्या भारती भी बैठी होती हैं। उसके बाद इनके घर में एक मेड थी दिव्या भारती की शुरू से ही तो वह वहां पर थी तो अब घर में टोटल चार लोग थे और इसके बाद जो कहानी अब शुरू होती है वही कि वो अपना बिजनेस की सारी बातें हो रही थी और साथ में चल रहा था। एक ब्लैक लेवल की बोतल थी और एक वोतका था जो मॉरीशियन ब्रांड का एक था बल्कि वो का नहीं तो दिव्या भारती रम पी रही थी और जो दोनों हस्बैंड वाइफ हैं डॉक्टर श्याम लोला और उनकी वाइफ ये दोनों स्कॉच पी रहे थे और बातचीत चल रही थी सब कुछ इसके बाद इनकी मेड जो है वो किचन में थी तब और मेड जो है वो अपना स्नैक्सनक्स बना रही थी।

सब कुछ खानावाना भी चल रहा था। मतलब जो ड्रिंक के साथ जनरली चलता है। तो घर के अंदर टोटल चार लोग थे। अब ये ड्राइंग रूम में बैठकर ये तीनों ड्रिंक कर रहे हैं। दिव्या भारती और डॉ. श्याम लुल्ला और साथ में नीता लुल्ला। इसके बाद बीच-बीच में दिव्या भारती अपनी मेट को भी आवाज देती। फिर उससे स्नैक्स मंगाती। करते-करते रात के करीब 11:00 बज गए। 11:00 बजे जो कहते हैं कि तब तक बहुत ज्यादा ले ली थी इन लोगों ने। खासतौर पे दिव्या भारती ने। उसके बाद दिव्या भारती किचन में जाती हैं। किचन में इनकी जो इनकी जो मेड थी दिव्या भारती की वो बचपन से दिव्या भारती के घर में रही।

मतलब पहले मां-बाप के साथ थी तो जब दिव्या भारती मुंबई फिल्मों में आई तो वो मेड यहां पर आ गई और वह साथ रहने लगी। तो एक तरह से वह बच्चे की तरह पाला था और इस मेट की खास बात यह है कि जब दिव्या भारती की मौत हो गई उसके एक महीने के ठीक 1 महीने के बाद उस मेट की भी से हो गई तो दिव्या भारती किचन में जाती हैं और उस पूरे बिल्डिंग में जिस फ्लैट में यह रहती थी दिव्या भारती उसमें सिर्फ एक किचन के पास ही एक विंडो था जिसमें ग्रिल नहीं लगा हुआ था लोहे का बाकी आप मुंबई में अगर आप लोग जानते हैं अच्छे तरीके से तो वहां मुंबई के जितने भी फ्लैट्स हैं और यह वहां पे लोहे के ग्रिल जनरली खिड़कियों में होते हैं। फिर शीशे का ग्लास भी होता है।

एक तो चारों तरफ समंदर और उसकी हवाएं तो और फिर अगर वो आपने खुला छोड़ दिया तो फिर एसी भी काम नहीं करता ह्यूमिडिटी तक। तो किचन के पास जो विंडो था उसमें ग्रिल काम ग्रिल नहीं था लोहे का। तो दिव्या भारती वहां पर क्योंकि कई बार वह आवाज दे रही थी अपने मेट को तो वह किचन में उठ के जाती हैं 11:00 बजे के करीब और उस विंडो पे जो करीब 12 इंच चौड़ी थी विंडो की जो दीवार थी वो करीब 12 इंच चौड़ी थी तो विंडो के ऊपर जाकर ये विंडो का की खिड़की खोलते हैं जो दरवाजा है ग्रिल है नहीं लकड़ी का जो भी है और शीशे का और वो उस विंडो के ऊपर पीठ उनका बाहर की तरफ और फेस जो है वह किचन की तरफ है जिधर मेड है। तो वह इस तरीके से जैसे मैं ऐसे बैठा हुआ हूं और यह घर का अंदरूनी हिस्सा और मेरे पीछे बाहर का हिस्सा है। तो मैं बाहर की तरफ नहीं देख रहा हूं। मैं यूं ऐसे करके उस 12 इंच की जगह पर बैठने की कोशिश कर रहा हूं।

यह बयान है अभी तक उस घर के और उसके बाद जो पुलिस ने सारी इन्वेस्टिगेशन दी तो कहते हैं कि इस तरीके से बैठने के चक्कर में अचानक दिव्या भारती का बैलेंस बिगड़ता है और वो पीछे की तरफ जाती हैं और पांचवी मंजिल से नीचे गिरती हैं। उस विंडो के नीचे जहां से दिव्या भारती नीचे गिरी। हमेशा वो पार्किंग की जगह है। वहां पर कई गाड़ियां खड़ी होती हैं। उस सोसाइटी की तुलसी अपार्टमेंट में जो लोग रहते हैं। तो वह गाड़ियां नीचे खड़ी रहती है। मतलब अगर ऊपर से कोई गिरे तो गाड़ी पर ही गिरेगा और जनरली गाड़ी वहां 24 घंटे किसी ना किसी की खड़ी होती है।

5 अप्रैल 1993 को उस विंडो के नीचे उस पार्किंग स्लॉट में एक भी गाड़ी नहीं खड़ी थी। और फर्श कंक्रीट का तो दिव्या भारती सीधे फर्श पर गिरती हैं। उनके बैक पे और पूरा सर में चोट लगती है। उधर वो गिरती है उधर मेड चीखती है। इधर जब दिव्या भारती किचन में बैठने की कोशिश कर रही थी और ये सारी चीजें जब अपने दोनों गेस्ट को छोड़ के नीता लुल्ला और श्याम लुल्ला को छोड़ के जब वो वहां पे पहुंची विंडो पे और वहां से गिरी। इस पूरी चीजों में 3 मिनट का वक्त लगा था।

टोटल 3 मिनट। इस दौरान नीता लुल्ला और उनके हस्बैंड जो है डॉ. श्याम लुल्ला वह ड्राइंग रूम में बैठकर टीवी देख रहे थे और टीवी में ही खोए हुए थे जो उनका स्टेटमेंट है। तो अच्छा बीच में इससे पहले भी एक दो बार दिव्या भारती उठकर गई थी। कई बार वाशरूम गई किचन की तरफ गई। ये लोग भी कई इन्होंने भी वाशरूम का यूज़ किया। फिर वापस आके बैठते तो उन्हें लगा कि यह भी एक चंख है। यह अभी गई हैं। ये फिर वापस आएंगी और वो 3 मिनट का वफा था। 3 मिनट का पूरा वो था। लेकिन इस बार दिव्या भारती जाती हैं।

और विंडो के ऊपर बैठने की कोशिश करती हैं और गिर जाती हैं और नीचे जो पार्किंग स्लॉट उस दिन एक भी अब इत्तेफाक कहें साजिश कहें या हैरान कर देने वाली चीजें कहें कि एक भी गाड़ी पार्क नहीं थी तो उसके बाद खैर दिव्या भारती जैसी गिरती है मेड चिल्लाती है दोनों मेहमानों को पता चलता है सब नीचे भागते हैं पड़ोसी नीचे आते हैं फिर गार्ड आता है और वहीं पे एक कूपर करके कोई शायद हॉस्पिटल था निय अरेस्ट तो वहां पे दिव्या भारती को गाड़ी में डाल के ले जाते हैं। तब तक दिव्या भारती की सांसे चल रही थी और वो जिंदा थी। लेकिन बुरी तरह बह रहा था सर से बहुत तेजी से बट सांसे चल रही थी। लेकिन जैसे ही हॉस्पिटल ले जाया जाता है। हॉस्पिटल में डॉक्टर चेक करते हैं तो पता चलता है कि उनकी हो चुकी है।

मतलब गिरने के बाद वो जिंदा थी। हॉस्पिटल जाने के बाद उनकी डेथ हो चुकी थी। तो इस पूरे मामले की इसके बाद जब होती है तो जाहिर सी बात है दिव्या भारती जैसी एक्ट्रेस की खबर आग की तरह फैलती है। अब इस पूरे मामले की जो जांच सौंपी जाती है क्योंकि ये वसोवा पुलिस स्टेशन के तहत यह जुरिसडिक्शन था जो तुलसी अपार्टमेंट जो घर था वो मामला वहां का था। तो वसोवा पुलिस स्टेशन इसकी जांच करती है।

इंस्पेक्टर जाधव थे जे जी जेजी जाधव जो इसके आईओ उन्होंने इन्वेस्टिगेशन किया। अब उसमें यह था कि घर के अंदर सिर्फ चार लोग थे। दिव्या भारती, उनकी मेड नीता लुल्ला और उनके हस्बैंड श्याम लुल्ला। दिव्या भारती गिर के उनकी हो चुकी है। अब बचते हैं तीन। तो इन्वेस्टिगेशन यहीं से शुरू होती है। इन लोगों से बातचीत की जाती है। तो वो यही कहानी दोनों बयान देते हैं। हस्बैंड वाइफ भी और मेड भी जो मैंने आपको बताया कि किस तरीके से वह आते हैं, करते हैं। वो किचन में आती है। फिर विंडो कोपर हॉस्पिटल के जो डॉक्टर त्रिपाठी तो उन्होंने जो अपनी शुरुआती रिपोर्ट दी थी वो ये था कि ये अननेचुरल कॉजेस हैं।

अननेचुरल तरीके से हुई। तो अब अननेचुरल अगर मेडिकल टर्म में आप जाएंगे तो उसमें ये है कि आप नेचुरल तरीके से मतलब आदमी यूं ही मर गया। सोएस-सोए मर गया। कोई बीमारी है सारी चीजें। लेकिन यहां पेकि गिरने से हुई तो इतना कहकर उन्होंने छोड़ दिया। तो हालांकि उस वक्त इसको लेकर बड़ा वो हुआ था कि अननेचुरल के बहुत सारे मायने लोगों ने अलग-अलग निकाले। लेकिन येकि एक एक्सीडेंट के तहत हुआ था। अब गिरने से हुआ क्या था यह किसी को पता नहीं। तो जो लिखा गया था वो जो डॉक्टर त्रिपाठी ने अपनी रिपोर्ट दी थी उसमें अननेचुरल लिखा था। उसके बाद सारी इन्वेस्टिगेशन शुरू होती है।

इन्वेस्टिगेशन के बाद दो तीन चीजें आती हैं। अब पहली चीज यह थी जो पूरी सीन जो तरीके जिस तरीके का बयान था चाहे वो मेट का हो या फिर गेस्ट का हो कि दिव्या भारती विंडो पर बैठने की कोशिश कर रही थी। उन्होंने ज्यादा कर रखी थी। नशे की वजह से वह बैलेंस नहीं बना रखी है और वह 12 इंच की जो मोटी दीवार थी विंडो की वह उसके ऊपर ठीक से बैठ नहीं पाई और बैलेंस बिगड़ गया और वो पीछे की तरफ गिर गई क्योंकि उनका मुंह आगे की तरफ था और वो बिना देखे हुए पीछे की तरफ बैठने की कोशिश कर रही थी विंडो पे। तो इससे क्लियर हुआ कि यह जो है यह एक्सीडेंट है। लेकिन अब जांच होती है तो फिर कई चीजें एक साथ आती है।

एक ये होता है यह भी हो सकता है। और ये उनके घर वालों ने मतलब अलग-अलग जब थ्योरी चीजें आई तब पुलिस ने के एंगल से जांच किया तो क्यों? कोई वजह तो हो। थोड़े दिन पहले शादी की है। फिल्मी करियर अच्छा चल रहा है। उसी दिन दिव्या भारती ने एक चार बडरूम का मुंबई में फ्लैट खरीदा है। इसका मतलब है वो खुश है। तो ऐसी कोई वजह नहीं है।

जिसकी वजह से सुसाइड करें। लेकिन फिर अंदर से खबर आती है। खबर यह थी कि उस वक्त साजिद नाडियाडवाला अंडरवर के साथ कुछ लिंक को लेकर कुछ ऐसे खबरें आ रही थी कि लिंक है और वो पैसेवैसे की बातें हो रही थी कि फिल्म में ये लगाना वगाना। उसको लेके कहते हैं कि ये बहुत परेशान थी। दिव्या भारती दूसरा साजिद नाडियाड वाले की जो मां थी उनके साथ दिव्या भारती के रिश्ते अच्छे नहीं थे। उन शादी के करीब जब उनकी डेथ हुई उससे पहले करीब 8 महीने पहले शादी हुई थी। तो दिव्या भारती के घर वालों का कहना था कि मां के साथ साजिद निडवा के कभी अच्छे रिश्ते नहीं रहे और वो उस रिश्तों को लेके बहुत परेशान थी कि आगे क्या होगा।

तो दो चीजें एक के साथ रिलेशन को लेकर एक डाउट और वह परेशानी और दूसरा मां के साथ रिश्ते और तीसरी इन्हीं से जोड़ के कि इसकी वजह से उनके अपने घरेलू जो रिश्ते थे एक साजिद नाडियाडवाला और दिव्या भारती के बीच हस्बैंड वाइफ के वो बहुत ज्यादा खराब हो गए थे और सिर्फ 19 साल की उम्र तो ये सारी चीजें शायद दिव्या भारती ने से बर्दाश्त नहीं हुआ तो दूसरी थ्योरी आई कि यह इसलिए सुसाइड भी कर सकती है लेकिन यह कहानियां इसमें सारी थी। एस्टैब्लिश कभी नहीं हुआ।

जैसे एक्सीडेंट की सारी कहानियां थी। पुख्ता सबूत इस्टैब्लिश कभी नहीं हुआ। अब एक तीसरी थ्योरी आई कि ना यह है ना ये एक्सीडेंट है। यह मर्डर है। अब मर्डर क्यों है? तो दो-तीन चीजें उसमें पहले जो मैंने अभी आपको कहा कि जिस दिन हुई उसी दिन चार बडरूम का फ्लैट खरीदा है। तो इसका मतलब है दिव्या भारती खुश थी। और अगर करना होता तो वह उस दिन वह डील ना करती क्योंकि जिसे यह पता है कि मुझे मरना है इतनी देर के बाद मरना है फिर वो दुनियावी ये सारी चीजों में नहीं पड़ेंगे। दूसरा कि क्यों? तो उसमें ये था कि जो स्टोरी प्लांट हुई उस वक्त सारी जो आई मीडिया में सारी चीजें जो जिसके ऊपर खास तौर पर मैं सिर्फ अफवाहों की बात नहीं करूंगा। बाकायदा पुलिस ने इन एंगल से इस पहलुओं की जांच की तो पुलिस ने सुसाइड के एंगल से जांच की।

पुलिस ने एक्सीडेंट के एंगल से जांच की। फिर पुलिस ने मर्डर के पहलू से जांच की। और मर्डर के पहलू को क्या सामने रखा कि क्या साजिद नाडियार्ड वाला का अंडरवल के साथ कोई कनेक्शन था? है क्या अंडर वर्ल्ड ने क्योंकि दिव्या भारती बहुत तेजी से ऊपर उठ रही थी और फिल्मों में का कितना दखल होता है यह आप सब जानते हैं तो फिल्मों में काम करने के लिए किस तरीके से या साजिद नाडियाड वाले के थ्रू फ़ किया और दिव्या भारती ने मना किया तीसरा क्या इस शादी के बाद साजिद नाडियाड वाले पे फैमिली की तरफ से इतना फ़ आया उनकी पहली बीवी और मां की तरफ से और कुछ ऐसी चीजें हुई जिसका असर पड़ा चौथा था। क्या 2 साल के अंदर 14 हिंदी फिल्में करने के दौरान दिव्या भारती के किसी और हीरो के साथ इस तरह के कोई अफेयर रिलेशन की बातें आई जो साजिद नाडिया वाले को बाद में पता चला और वो गुस्सा हुए। तो इन सारे पहलुओं को पुलिस ने रख के सामने जांच शुरू की।

औरकि मीडिया में लगातार खबरें आ रही थी तो किसी भी पहलू को वो छोड़ना नहीं चाहते थे। तो उन्होंने सारे पहलू को जांच की। इसके अलावा जो एक सबसे इंपॉर्टेंट चीज आई सामने वो यह कि जिस फ्लैट में तुलसी अपार्टमेंट के दिव्या भारती की हुई थी, जिस विंडो से गिर के मौत हुई थी, उस विंडो में एक ऑटो स्टॉपर था। आप कई बार देखते होंगे कई जगहों पे जैसे आप विंडो को आप खोलें और धक्का दें तो वापस अपने आप बंद हो जाता है। तो जब पुलिस ने जांच की और वहां मेड से और सब लोगों से पूछा तो पता चला कि हां इसमें भी वो था ऑटो स्टॉपर लगा हुआ था कि आप एक बार ऐसे खोलते हैं। उसके बाद वो अपने आप मारता है और फिर बंद हो जाता है। उस दिन वो ऑटो स्टॉपर नहीं लगा हुआ था। वो गायब था।

अब यह इत्तेफाकन था या जानबूझ के था यह कभी भी प्रूफ नहीं हो पाया पुलिस ने लेकिन इस पहलू को भी सामने रखा था क्योंकि अगर मान लीजिए कि उस विंडो पर बैठना और दिव्या भारती को यह पता है कि मैं ऐसे धक्का दूंगी और यह विंडो फिर मुझे वापस करेगा तो मैं उधर की तरफ नहीं जाऊंगी मैं अंदर की तरफ ही आऊंगी और शायद वह पहले ऐसा कर चुकी हो लेकिन अगर उस स्टॉपर का कोई स्क्रू या जो भी उसका वो है वो हटा दिया गया तो वह बिल्कुल ही फ्री हो गया और आपने यूं किया क्योंकि अगर मुझे यह है कि यह थोड़ा सा फोर्स लगाने से पीछे जाएगा तो मैं उसी हिसाब से बैठूंगा और मुझे यह पता है कि नहीं इसके बैठते ये सीधे जाएगा तो फिर मैं ज्यादा एतियात से बैठ तो ये इन्वेशन का हिस्सा था इसको प्रूफ जांच की गई लेकिन वो भी कुछ नहीं हुआ इसने कुल मिलाकर एक्सीडेंट सुसाइड और मर्डर तीनों पहलू से मामले की जांच की पांच 5 अप्रैल को ये रात करीब 11:00 बजे का वाकया है। डेथ हुई थी। 7 अप्रैल को सारी फॉर्मेलिटीज के बाद दिव्या भारती की बॉडी सौंपी गई घर वालों को।

हालांकि दिव्या भारती की शादी हो चुकी थी और उनका नया नाम सना नाडियाडवाला था। लेकिन उसके बावजूद फिर सारे उस वक्त सवाल उठे। नाडियाडवाला शक के घेरे में सबसे आगे तो 7 अप्रैल को ही फिर दिव्या भारती की अंतिम संस्कार भी कर दिया जाता है। उसके बाद पुलिस जांच करती है। 93 से लेकर 98 तक 5 साल तक पुलिस इन्वेस्टिगेशन करती है पूरे मामले की हर पहलू से सैकड़ों लोगों को खंगाला जाता है।

दिव्या भारती के जितने को थे उन सब से पूछताछ की जाती है। हर एक से बात होती है। जो डॉक्टर ने किया उससे बात होती है। में यह निकला था कि बहुत ज्यादा अल्कोहल पाया गया था दिव्या भारती के विरा से जो रिपोर्ट आई थी कि बहुत ज्यादा की मात्रा थी। डॉक्टर की रिपोर्ट और यह सारी चीजें देखी जाती है। तो 1998 तक पुलिस इस मामले की जांच करती है। फिर डॉक्टर लास्ट में अपनी जो एक रिपोर्ट देते हैं, वह यह है कि बेहद नशे की वजह से दिव्या भारती गिरी या गिराई गई।

यह साबित करना बड़ा मुश्किल काम है। विटनेस और कोई ऐसा मिला नहीं। कोई ओरल या इस तरह के रिटन डॉक्यूमेंट्स मिले नहीं जो कि इस पर रोशनी डाल सकें। तो पुलिस ने जब हर पहलू से जांच कर ली। फिर जो मेडिकल रिपोर्ट थी वो सामने आई तो उसमें भी से पहले कोई इंजरी मार्ग और उस तरह की कोई चीजें नहीं थी। मौत ऊंचाई से गिरने की वजह से हुई। एक्सेस ब्लड की वजह से हुई। सर में गहरी चोट की वजह से हुई। यह पोस्टमार्टम रिपोर्ट थी। तो कुल मिलाकर पुलिस ने जो लास्ट में अपनी रिपोर्ट दी वो यही दी फाइनल रिपोर्ट 1998 में कि दिव्या भारती की एक्सीडेंटल डेथ यानी वो गिरने से हुई और एक्सीडेंट की वजह से गिरने से हुई। मानी मतलब यह कि वह अपने आप को बैलेंस नहीं बना सकी उस विंडो पर और एक तो हुई थी तो में थी और इस वजह से वो होश खो बैठी और बैलेंस नहीं होने की वजह से वो नीचे गिरी और उनकी हो गई।

यह आखरी में करके कि दिव्या भारती की ना है ना डर है ना किसी साजिश का नतीजा है बल्कि एक एक्सीडेंट रहता है कहकर पुलिस ने 1998 दिव्या भारती की मौत के ठीक 5 साल के बाद इसकी क्लोज कर आज भी इसका स्टेटस कि ये क्लोज है यह अपने किसी अंजाम नहीं पहुंचा है हालांकि पुलिस की यह है कि एक्सीडेंटल डेथ है लेकिन पुलिस ने कहा कि अगर कभी भी हमें कोई नया सुराग मिलता है तो हम जरूर जरूर इसको करेंगे। लेकिन वो दिन आज 25 साल हो गए। 93 में हुई थी। 25 साल को हो गए। और 98 में केस क्लोज किया गया। मतलब 20 साल केस क्लोज किए हुए हो गए। आज तक यह केस का स्टेटस वही है और जो सवाल है वह भी यही है कि क्या दिव्या भारती की एक हादसा या कत्ल इसका जवाब किसी के पास नहीं है। और उस घर में जो तीन लोग थे विटनेस जो मेड थी दिव्या भारती की मौत के ठीक एक महीने के बाद उनकी भी अटैक से डेथ हो गई और जो डिजाइनर नीता लुल्ला और उनके हस्बैंड डॉक्टर संजय लोल्ला उनका यह कहना था कि वो बेडरूम में वो ड्राइंग रूम में बैठकर टीवी देख रहे थे उस वक्त वो कर रहे थे और वो किचन में थी ।

तो इसलिए आखिरी के 3 मिनट में क्या हुआ वो उन्होंने नहीं देखा लेकिन उनके हिसाब से जब वो बातचीत कर रहे थे तो दिव्या भारती कहीं से भी ऐसी निकली थी कि वो l में है या कुछ और है। तो सारे बयान दर्ज हुए थे। इवन साजिद ना डडवाला के बयान दर्ज हुए। बहुत दिन तक वो रडार पे रहे।

लेकिन आखिरी में पुलिस ने केस क्लोज करके हर एक को इसमें क्लीन चिट दे दी और यही माना कि यह मौत एक एक्सीडेंटेड डेथ है। तो आप में से बहुत सारे लोगों की ये फरमाइश थी दिव्या भारती की कहानी। तो ये थी पूरी कहानी कि एक घर के अंदर इसमें कई चीजें मिलती है। जैसे आरुषि में भी एक घर के अंदर चार लोग थे। हालांकि उसमें दो मौत हो गई। दो जिंदा बचे थे। इस घर में भी चार लोग थे।

लेकिन इनमें से एक दिव्या भारती की मौत हुई। तीन वहां थे। एक मेड तो बिल्कुल वहीं पर थी। लेकिन उसके बावजूद अगर यह सारी सच्चाई है तो क्यों नहीं लोग यकीन करते हैं ये अभी तक एक रहस्य बना हुआ है कि हां वाकई दिव्या भारती इस तरीके से इनकी हो सकती है। अह लेकिन यह सवाल आज भी है और दिव्या भारती ने उसके बाद कुछ जो फिल्में अधूरी रह गई थी। बाद में अलग-अलग हीरोइनों ने की।

जैसे मैंने आपको बताया आंदोलन श्रीदेवी ने उनकी फिल्म पूरी की थी। तो 1991 से 93 के बीच में कुल कुल जो है 14 हिंदी फिल्में उन्होंने की जिसमें से 1992 में अकेले 10 फिल्में रिलीज हो गई थी। हिंदी ये भी अपने आप में कमाल है। और बाकी के छह साउथ इंडियन फिल्में थी। एक उभरती हुई बहुत और 16 साल की उम्र में उन्होंने साउथ इंडियन फिल्मों में काम किया।

19 साल 17 साल की उम्र में हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में आई। 18 साल की उम्र में उन्होंने साजिद नाडिया वाले से शादी की और 19वें साल में उनकी हो गई। मतलब अजीब अफसोसनाक एक उभरती हुई बहुत अदाकारा ऐसी एक्ट्रेस जिसको लोग बहुत पसंद करते थे। उसका एक अफसोसनाक अंत हुआ था।

तो अब आपको लगता है अगर इसमें कुछ सवाल है तो आप जरूर पूछ लीजिए। मैं जितनी जानकारी है आपको जवाब दूंगा। पर ये जितनी चीजें थी ये केस फाइल से और पुलिस के रिकॉर्ड से जो मुझे लगा कि जितना मैं सच क्योंकि इसमें गसिप और भी बहुत सारी है बट जिसका सिर पैर नहीं है जिसके तथ्य मेरे पास नहीं है वो शेयर करना बेकार की बात है। जी सर एक दर्शन शिवालय है वो बोलते हैं कि सर क्या हमारी जांच प्रक्रिया इतनी सक्षम नहीं है कि इतना टाइम होने के बाद भी हम कोई ठोस निर्णय ना दे सके। नहीं जांच प्रक्रिया की बात नहीं करेंगे कि हम इतनी सक्षम नहीं है। कई बार ऐसे सरकमस्ट्ससेस होते हैं।

कई ऐसे केसेस होते हैं जिसमें कोई कुलू या कुछ नहीं मिलता। या फिर यहां पे मैं एक इसको पलट के किन्होंने सवाल किया था दीपेंद्र दीपेंद्र जी सर। तो कई बार ऐसा भी होता है कि चलिए मैं 1% को आपको मान लीजिए सर कि यह पुलिस ने जो लास्ट में कहा एक्सीडेंटल डेथ है। हकीकत यही होगा। तो कई बार क्या होता है कि कुछ सच्चाई को हम लोग एक्सेप्ट नहीं करते हैं और हमें लगता है कि नहीं ऐसा हो ही नहीं सकता। जैसे आरुषि का केस ले लीजिए उसमें बहुत सारे ऐसे होते हैं कि हमेशा कहते हैं नहीं ये गलत है ये नहीं है।

तो यहां पे अगर आप एक एक मिनट के लिए आप थोड़ी देर के लिए मान के चलिए कि चलिए दिव्या भारती खड़की पे बैठ रही थी। में थी लड़खड़ा गई गिर गई डेथ हो गई। बट इस सच को हम में से बहुत लोग नहीं मानना चाहता है। मानता भी नहीं है। तो यहां पर फिर हम इन्वेस्टिगेशन का क्या करें? सर डॉक्टर ईशान भारद्वाज वो बोल रहे हैं कि सर गुड इवनिंग सर और प्लीज डू टेल दैट कैन इट पॉसिबल दैट विद इन द मनी पावर द इन्वेस्टिगेशन एंड अदरिंग रिलेटेड टू द केस मच मैनपुलेटेड पैसों की वजह से क्या इस केस में कुछ मैनपुलेशन करी गई है।

डॉ ईशान भारद्वाज साहब कैसे हैं आप उम्मीद है अच्छे होंगे आपकी पूरी टीम को मेरा अच्छा लगा आपका सवाल सुनकर देखिए फिर मैंने वही कहा कि जब केस क्लोज है मोटिव पता नहीं चल रहा तो अब यह सारी हम धारणाएं और तमाम चीजें बोल सकते हैं। इसमें पैसा भी हो सकता है। इसमें अंडरवर्ड भी हो सकता है। इसमें पर्सनल रिश्ते भी हो सकते हैं। बट किस बिहाफ पे कहें? क्योंकि जो केस जहां पे आकर ठहर गया 1998 में उसके बाद से इसमें कुछ नया नहीं है। तो हमारी सोच कहीं भी जा सकती है।

लेकिन मेरा यह फर्ज है कि मैं सिर्फ अफवाहों पे या ख्यालों पे उस पे बात ना करूं। फैक्ट्स हो तो मैं जरूर बताऊं कि हां ये हो सकता है। सर मुरली है। मुरली कांडपाल वो बोल रहे हैं गवाहों गवाहों के बयान पर यकीन क्यों नहीं किया जा किया किया जा रहा इस केस में इतने केस क्यों लगाए जा रहे हैं मुरली जी इसमें गवाहों के बयान पे यकीन क्यों नहीं किया जा रहा है ये भी आपका सवाल है जो मैंने फिर वही कहा कि अभी जो मैंने कहा कि अगर मान लीजिए मेड कह रही कि हां वो लड़खड़ाते हुए गिरी लेकिन यहां पे मेड ने भी जो एक बयान दिया था वो थोड़े से पुख्ता नहीं थे क्योंकि मेड उस वक्त स्नैक्स बना रही थी किचन में और उसी किचन के पास खिड़की पे दिव्या भांति थी तो एग्जैक्ट वो गिरने का जो पल था वो उसने नहीं देखा था।

लाइव तो फिर उसने जो भी बताया वहां से वहां तक आने का खिड़की तक पहुंचने का उसने तो सारी चीजें बताई लेकिन वो नहीं बताया था कुछ तो इस वजह से भी इसमें कंफ्यूजन रही अब इसमें बहुत सारे मेरे पास आज मुझे किसी ने फोन दे दिया कि आप देखें भीम दाग साहब प्रिया राजवंश की मैं भीम साहब आपको बताऊं ऐसे बहुत सारी लंबी लाइनें हैं फिल्म इंडस्ट्री में जो मिस्ट्री है मर्डर और मौत मैं बारी-बारी आपको सबकी कहानी सुनाऊंगा चाहे वो सिल्क सिमिता हो आपने जैसे अभी प्रिय राज वंश की बताई जिया खान हैं लैला खान है बनर्जी प्रत्युषा बनर्जी जो फिल्म एक्टर टीवी एक्ट्रेस हैं तो

मैं आपको सबका सुनाऊंगा आलोक कुमार साहू साहब हैं आलोक कुमार साहू साहब लीजिए आपका नाम ले लिया आप कह रहे हैं नाम नहीं लेते लेकिन आप सवाल भेजा कीजिए राजा है महारानी है। वाह एक का राजा एक महारानी पीयूष भंबू साहब हैं। योगेश पुजारी हैं। अंकुर शुक्ला है। दूध वाली विपिन है। बहुत अच्छा नाम है। सही मैं पढ़ रहा हूं। जी दूध वाली वीपी एन। ओके। अंकुर शुक्ला हैं। दर्शन शिवाले हैं।

यह आपका सवाल भी लिया था। अभी हरप्रीत सिंह हैं। प्रशांत त्रिपाठी हैं। आलोक कुमार हैं। पीयूष भामू हैं। अभिषेक शर्मा हैं। देन नेत्र गुलेरिया है, पवन है, योगेश मोहित भट्ट उसके अलावा सांख्या मेंल देन विपिन लखेड़ा, पूजा अग्रवाल, कल्पना बहल अमित कुमार बातिश विश्वास WhatsApp चैट भी एक नाम से है कुछ समीर पांडा, संदीप कुमार, योगेश पुजारी ललित कुमार अभिषेक शर्मा रोमेश कुमार सलमान दलवी रॉकस्टार प्रवीण राज हिमांशु जोशी नवीन बलोदा शिवांगी श्रीवास्तव डॉ ईशान भारद्वाज अभी बात हुई आपसे अंकुर हैं आलोक यादव हैं बहुत सारे आप लोग हैं और जाहिर सी बात है मैं सबका जब जब मौका मिलेगा नाम लूंगा।

मैं कुछ सवाल भी देख लेता हूं। एक कॉमन सवाल अगर इस सारी चीजों में हो। अमित सिंह जयराम नायक सचिन कुमार अंकुर हंडू तनवीर शेख अभिषेक जंगी सागर धर्मवीर गुप्ता रामा विश्वास भाटी अखिलेश कुमार आयुष्मान द्विवेदी यादव हरीश अनीश सिंह रमेश कुमार नवनीत कुमार संदीप पटेल विनय करदे विकास त्रिपाठी संदीप यादव एमके फिल्म्स हेयर एक्सप्रेस आयुष्मान द्विवेदी सागर गौरव शर्मा अक्षय मनास श्रेया शर्मा शर्मा रूपी मलिक अनिल शर्मा आदर्श सिंह अमित गोयल विजय उतेतकर अंकुर हांडू मंगेश देशमुख हिमांशु जोशी नरेंद्र ढाका विजय उतरेकर सुमित कुमार ठाकुर सलमान दलवी ये सारे आप लोगों के हैं और कुछ सवाल ऐसे हैं कि जो कॉमन मैं अगर देख पाऊं ज्यादातर आप लोग हाय हाय हाय कर रहे हैं। मतलब वह वाला हाय नहीं हाय आप भेज रहे हैं।

सर एक हिरन जी का इसमें सवाल आया हां के सर जो मेड थी हां क्या उसकी दिव्या भारती की मौत के एक महीने बाद हो गई थी हम एक ये भी है कि आसाराम की भी कहानी सुनाएं मैंने कहा था कि मैं सारे बाबाओं की कहानी सुनाऊंगा एक है कि इसमें विदेशी ताकतों का हाथ हो सकता है अनिल शर्मा का अगर अंडरवर्ड है तो बिल्कुल हो सकता है लेकिन मैं कह नहीं सकता हूं धर्मवीर गुप्ता है इन्होंने कहा सर आज सब्सक्राइब किया है मेरा नाम लीजिए धर्मवीर साहब बहुत-बहुत नमस्कार अच्छे रहिए और इसी तरह से बस आप देखते रहिए सब्सक्राइब कीजिए ना कीजिए चलेगा बस आप लोगों का प्यार मिलता रहे यही काफी है लेकिन आपने किया बहुत-बहुत शुक्रिया राजा आर्यन साहब धनंजय फांसी केस 2002 गुजरात राइट थोड़ा डिटेल में बताइए किसी दिन एक्चुअली मैंने एक दिन तीन फांसी की कहानी एक साथ सुनाई थी मुझे नहीं मालूम आप लोगों से एक साथ कितने सुनी एक धनंजय की थी।

एक अफजल गुरु की थी और एक याकूब मेमन की थी। अगर आप लोगों को लगता है कि अलग-अलग सुनानी चाहिए तो मैं जरूर किसी दिन आपको सुनाऊंगा। 2017 में उयन मर्डर केस हुआ था भोपाल में एक एपिसोड। अभिनव कहरे कह रहे हैं ठीक है। कोशिश करता हूं साहब। एक नीलकंत कहते हैं क्या श्रीदेवी का रोल इसमें बिल्कुल भी नहीं है।

ऐसा नहीं है क्योंकि ये चीजें कभी आई नहीं। सर म्यूट हो रहा एक दर्शन शिवालय कह रहे हैं कि क्या सर हम भी श्रीदेवी और दिव्या भारती की मौत एक जैसा ही समझे दर्शन साहब ने यहां पे एक मुझे नई दिशा दे दी है बहुत अच्छा दर्शन साहब थैंक यू कई बार हम लोग भी कुछ चीजें इंपॉर्टेंट भूल जाते हैं इसीलिए मैं आपको थैंक्स बोल रहा हूं 1% को मान लीजिए कि दिव्या भारती की मौत एक्सीडेंट है वो विंडो पे गई में थी और नीचे गिर के मौत हो बात 1993 की है।

दिव्या भारती फिल्मों में इसलिए आई और इसलिए उनको लोगों ने पसंद किया क्योंकि उनके अंदर श्रीदेवी की झलक देखा करती थी। 2018 आता है। 25 साल बाद श्रीदेवी की मौत 18 में ही हुई है ना? 25 साल हो गए। श्रीदेवी की मौत वो दिव्या भारती की मौत हुई। 25 साल बाद श्रीदेवी की दुबई के एक पांच सितारा होटल में स्वीट में उसके बाथरूम में बाथ टप के अंदर होती है। रिपोर्ट जो आती है वो ये कहती है कि वो अनकॉशियस थी और उनके बॉडी से मिला था। अब देखिए मैं किसी कुछ नहीं कहने जा रहा हूं। मैं सिर्फ दो चीजें कहना चाहूंगा। दोनों हमशक्ल दोनों की शक्ल एक दूसरे से मिलती हुई श्रीदेवी के नाम पर दिव्या भारती फिल्म इंडस्ट्री में आती हैं। छा जाती हैं और उनका करियर कम था। श्रीदेवी का बहुत लंबा था।

जिस दिन हुई दिव्या भारती की से भी मिला और दिव्या भारती एक एक्सीडेंटल हुई। 25 साल बाद उनकी आइडियल श्रीदेवी की होती है। वह भी जो है मिलता है और वो भी एक्सीडेंटल । यहां गिरने से, यहां बाथम में डूबने से। मतलब इसको क्या कहूं क्या इत्तेफाक करूं? इसलिए मैंने थैंक्स बोला जिन्होंने भी इस सवाल को मुझसे पूछा था। मेरे ज़हन में ही नहीं था कि मैं इसको जोड़ सकूं और मैं बता सकूं। लेकिन आपने अच्छा किया। मैं सिर्फ इत्तेफाक बता रहा हूं कि दिव्या भारती 25 साल पहले जिस हालात में जिनकी मौत हुई 25 साल बाद थोड़ा सा सिर्फ मैं वो बदल दूं कि एक की ऊंचाई से गिरने से होती है।

दूसरी की डूबने से होती है। वहां पे भी अल्कोहल था। यहां पे भी अल्कोहल था। वहां भी एक्सीडेंटल डेथ कहकर 1998 में दिव्या भारती के केस को क्लज़ कर दिया गया। 25 साल बाद 2018 में श्रीदेवी के केस को भी एक्सीडेंटल डेथ कहा गया। दुबई अथॉरिटी ने यही लिखा है उनकी डेथ सर्टिफिकेट पे कि दिस इज़ एक्सीडेंटल । ऐसा इत्तेफाक मैंने नहीं देखा कि दो जिनकी शक्लें एक दूसरे की वजह से जानी जाती हैं। दोनों की मौत ऐसी संदिग्ध, दोनों की वजह ऐसी संदिग्ध और दोनों के आखिरी पल ऐसे संदिग्ध आगे मुझे नहीं मालूम।

लेकिन यह मैं आपसे कह सकता हूं कि अभी जो और भी सवाल आए थे कि ऐसे फिल्म इंडस्ट्री में बहुत सारे ऐसे केसेस हैं जिनकी एक रहस्य है। कम से कम मुझे याद है कि दर्जन भर तो मैंने ऐसे ही एपिसोड बना रखे हैं अलग-अलग जुर्म में और वारदात में। तो वो सारी मैं आपको एक-एक करके जबजब मौका मिलेगा मैं जरूर उसकी इंसाइड स्टोरी और वो कैसे क्या हुई यह मैं

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