क्या आप कभी सोच सकते हैं कि हमारे देश के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपना इस्तीफा हमारे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों में सौंप दिया है? लेकिन इसका मुख्य कारण क्या है? कोई भी आपको गुमराह करे, उससे पहले अगर आप सही कारण समझना चाहते हैं, तो इसे ध्यान से सुनिएगा। मैं आपको सच बताता हूँ। [संगीत] आप देख रहे हैं ‘सा सच कहूँ’, मेरा नाम है पुंज ठक्कर। ‘कोकरोड जनता पार्टी’ जब से बनी है, तब से उनकी एक ही डिमांड थी कि धर्मेंद्र प्रधान का रेजिग्नेशन आना चाहिए। इस डिमांड में अलग-अलग जगहों से बहुत सारे लोग जुड़े थे और विरोधी पक्ष के साथ-साथ बाहरी ताकतें भी यही मांग कर रही थीं कि धर्मेंद्र प्रधान का रेजिग्नेशन चाहिए।
वह रेजिग्नेशन आखिरकार धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दे दिया है और उस लेटर में उन्होंने क्या-क्या लिखा है, यह मैं आपको संक्षेप में समझाता हूँ, पूरा लेटर पढ़ने की जरूरत नहीं पड़ेगी।उस लेटर में स्टूडेंट्स को लेकर उन्होंने यह कहा है कि नीट की एग्जाम, जो हर साल 20 लाख से ज्यादा बच्चे देते हैं, वह अगले साल से अब कंप्यूटर बेस्ड सिस्टम हो जाएगी और इसकी घोषणा उन्होंने थोड़े समय पहले कर दी थी। यह जो पेपर लीक हुआ है, उसकी जिम्मेदारी भी उन्होंने ली है कि भाई, शिक्षा मंत्री के रूप में उनकी जिम्मेदारी बनती है और इसलिए वे इस्तीफा दे रहे हैं। लेकिन वह इस्तीफा देने के उन्होंने कई सारे कारण बताए हैं, मुख्य रूप से चार बातें कहीं हैं।सबसे पहली बात उन्होंने यह कही है कि स्टूडेंट्स का जो यह प्रोटेस्ट था, उस प्रोटेस्ट का एंटी-नेशनल और भारत विरोधी ताकतें गलत फायदा न उठा लें। दूसरा, भारत की एकता बनाए रखने के लिए। तीसरा, वे यह कहना चाहते हैं कि स्टूडेंट्स इस प्रोटेस्ट के चक्कर में किसी कानूनी लड़ाई या ऐसी जालसाजी में न फंस जाएं,
क्योंकि अगर वे इस मायाजाल में फंस गए तो उनके करियर में प्रॉब्लम आ जाएगी। और चौथा, स्टूडेंट्स अपने पढ़ाई और करियर पर फोकस कर सकें। इसलिए उनका कहना है कि अगर मैं इस्तीफा दे देता हूँ तो ठीक रहेगा। भविष्य में मेरी जरूरत पड़ेगी तो मैं राष्ट्र सेवा और देश की सेवा के लिए यहीं मौजूद हूँ।अब यह इस्तीफा आने के बाद सीजेपी (CJP) के फाउंडर अभिजीत दीपक का रिएक्शन कुछ इस तरह का था। पिछले कुछ दिनों में इस मामले में हमने कई सारी चीजें देखी हैं। अभी दो दिन पहले हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक वीडियो शेयर किया था, बहुत ही अलग एंगल से। लेकिन वह जो वीडियो पोस्ट किया था, उस पर 350 मिलियन यानी 35 करोड़ व्यूज आए। शायद यह उनके फीड में भी सबसे ज्यादा व्यूज होंगे। उस वीडियो में वह यही कह रहे हैं कि हम स्टूडेंट्स के लिए कटिबद्ध हैं और फास्ट-ट्रैक कोर्ट शुरू करने की बात कर रहे हैं, ज्यादा सख्त सजा का प्रावधान लाने की बात कर रहे हैं और इसका एक बिल कैबिनेट के साथ बैठकर तैयार करवाएंगे और सोमवार को पार्लियामेंट के मानसून सत्र में उसे टेबल पर भी रखेंगे।इस वीडियो पर 350 मिलियन व्यूज आ गए। यह वीडियो पोस्ट होने के
आधे घंटे के भीतर-भीतर सोनम वांगचुक जी ने भी अपना 26 दिन का अनशन तोड़ दिया और जे.पी. नड्डा जी की उपस्थिति में पहली बार कुछ निवाला अपने मुंह में लिया था। अब एक तरफ सोनम वांगचुक जी सरकार के कदमों से खुश हो गए और उनकी डिमांड पूरी हो गई, तो उन्होंने खाना शुरू कर दिया। लेकिन सीजेपी की डिमांड अभी भी वैसी ही थी कि हमें तो धर्मेंद्र प्रधान का रेजिग्नेशन चाहिए ही चाहिए। अब इसी चर्चा के लिए [गला साफ करते हैं] दो बार मीटिंग भी हो चुकी थी और तीसरी मीटिंग होने वाली थी और थोड़े ही समय पहले रेजिग्नेशन आ गया।अब यहाँ तक मैंने आपको वास्तविक स्थिति बता दी। अब इसके आगे मैं अपना एक छोटा सा ओपिनियन आपके साथ शेयर करना चाहता हूँ।
अगर आप देखना चाहें तो देख सकते हैं, नहीं तो वीडियो यहाँ से एक्जिट कर सकते हैं। मेरा एक छोटा सा ओपिनियन यह है कि शिक्षा मंत्री बदल गए हैं, अब जो नए शिक्षा मंत्री आएं, उन्हें कौन से कदम उठाने चाहिए? सबसे पहले, सिस्टम में पेपर लीक की जो घटनाएं होती हैं, ये पेपर लीक क्यों होते हैं? आर्थिक फायदे के लिए या फिर किसी अपने करीबी की मदद करने के लिए। अब इन घटनाओं पर इतनी सख्त सजा लागू कर देनी चाहिए कि अगर हम किसी एक स्टूडेंट का जीवन खराब करने वाले हैं, उनका जीवन बर्बाद कर देने वाले हैं, तो ऐसा करने वाला अगर कोई पकड़ा जाता है, तो उसके लिए इतनी सख्त सजा होनी चाहिए कि नीचे से लेकर ऊपर तक कोई भी व्यक्ति अगर पेपर लीक करते हुए पकड़ा जाए, तो ऐसे मामलों में उन्हें 10 से 20 साल की जेल हो जानी चाहिए और उनकी सारी संपत्ति सरकार के कब्जे में आ जानी चाहिए
।अगर ऐसी कोई सजा होगी, तो किसी को भी पेपर लीक करने से डर लगेगा कि भाई, इतने लाख रुपयों के लिए मैं अपना जीवन क्यों खत्म कर दूं? और इस तरह पेपर लीक होना रुक जाएगा। एग्जाम भले ही कंप्यूटर बेस्ड हो या फिर कोई दूसरी सिस्टम हो, या फिर चाहे बड़े-बड़े आर्मर्ड ट्रकों में पेपर ले जाए जाएं, लेकिन जिसने पेपर सेट किया होगा, उसे तो पता ही होगा ना कि मैंने यह पेपर क्यों निकाला? हम उन्हें थोड़ा सा भी ऐसा सोचने की गुंजाइश क्यों दें? इसलिए सोमवार को टेबल पर जो बिल आने वाला है, मैं उसे गहराई से स्टडी करने वाला हूँ और देखने वाला हूँ कि उसमें सजा का प्रावधान कैसा लिखा है। पेपर लीक करने वालों के लिए सख्त से सख्त सजा ही होनी चाहिए।यह जो पूरी घटना है, इस घटना को लेकर आप क्या कहना चाहते हैं, मुझे कमेंट में जरूर बताइएगा। हम कमेंट्स में बातचीत करेंगे। फिर मिलेंगे, धन्यवाद। यह वीडियो देखने के बाद अगर आपने चैनल को सब्सक्राइब नहीं किया है और करना बाकी है, तो कर लीजिएगा। ऐसे ही बहुत सारे वीडियो आते रहेंगे।