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अब चलते चलते नहीं रुकेगा आपका रिक्शा..सरकार ने इस App के खिलाफ लिया बड़ा एक्शन।

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एक ऐसी ऐप जिससे ई रिक्शा रुक जाता है। क्या आपके इलेक्ट्रिक स्कूटर या फिर कार भी हो सकती है? समझते हैं पूरी सच्चाई। आप सुबह अपने ई रिक्शा में सवार होकर सड़क पर जा रहे हैं। सब कुछ सामान्य चल रहा है। तभी कुछ मीटर दूर खड़ा एक व्यक्ति अपना मोबाइल निकालता है। एक ऐप खोलता है और कुछ सेकंड बाद आपका ई रिक्शा अचानक रुक जाता है। ना बैटरी खत्म हुई, ना मोटर खराब हुई और ना ही कोई मैकेनिकल फौल्ट आया।

बस एक मोबाइल ऐप और गाड़ी बंद। सुनने में यह किसी साइंस फिक्शन फिल्मी की कहानी लग सकती है। लेकिन पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो ने लाखों लोगों के मन में यही सवाल खड़ा कर दिया। दावा किया जा रहा है कि बैट बीएएमएस नाम का एक ऐप कुछ ही कुछ ई रिक्शा को दूर से बंद कर सकता है। वीडियो वायरल होने के बाद कई लोगों ने सवाल उठाना शुरू कर दिया कि अगर एक ई रिक्शा रुक सकता है तो क्या कल कोई हमारी इलेक्ट्रिक स्कूटर, बाइक या फिर लाखों रुपए की इलेक्ट्रिक कार भी इसी तरह से रोक सकता है?

क्या यह कोई नई तरह की हैकिंग है? क्या भारत की तेजी से बढ़ती हुई इलेक्ट्रिक व्हीकल इंडस्ट्री किसी बड़े साइबर खतरे की ओर बढ़ रही है? या फिर सोशल मीडिया पर जो दिखाया जा रहा है उसकी सच्चाई कुछ और है। आज हम बिना किसी अफवाह और बिना किसी सनसनी के पूरे मामले को तकनीकी और आसान भाषा में समझाएंगे। सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि बैड बीएएमएस आखिर है क्या? सोशल मीडिया पर इसे हैकिंग ऐप बताया जा रहा है। लेकिन वास्तविकता इससे थोड़ी अलग है। बीएटी बीएएमएस बैट बीएएमएस मूल रूप से एक बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम यानी कि बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम को मॉनिटर करने वाला मोबाइल एप्लीकेशन है। इसका उद्देश्य बैटरी की स्थिति पर नजर रखना है। यह बैटरी का चार्ज लेवल, हर सेल का वोल्टेज, तापमान, करंट, बैटरी की हेल्थ, चार्जिंग और डिस्चार्जिंग जैसी तकनीकी जानकारियां दिखाता है।

यानी जिस तरह से आज लगभग हर स्मार्ट डिवाइस के लिए एक कंट्रोल ऐप होता है। उसी तरह कई लिथियम बैटरी के लिए भी बैटरीियों के लिए भी ऐसे ऐप बनाए जाते हैं ताकि निर्माता, सर्विस इंजीनियर या फिर अधिकृत व्यक्ति बैटरी की स्थिति जांच सके। अब यहां सवाल उठता है कि अगर यह सिर्फ मॉनिटरिंग ऐप है तो विवाद क्यों हुआ? दरअसल कई सस्ते और लोकल स्तर पर तैयार किए गए लिथियम बैटरी पैक में ऐसा ब्लूटूथ आधारित बीएएमएस लगाया जाता है जिसकी सुरक्षा पर्याप्त मजबूत नहीं होती। कई मामलों में ब्लूटूथ हमेशा ऑन रहता है। कई बैटरीियों में डिफॉल्ट पासवर्ड कभी बदले नहीं बदले ही नहीं जाते।

कुछ में तो बिना किसी अतिरिक्त सुरक्षा के कनेक्शन भी संभव हो जाता है और यही सबसे बड़ी कमजोरी है। यदि कोई व्यक्ति ब्लूटूथ की सीमित दूरी के भीतर पहुंच जाए और बैटरी उससे कनेक्ट हो जाए तो वह बैटरी के कुछ कंट्रोल तक पहुंच सकता है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में इसी कमजोरी का प्रदर्शन किया जा रहा है। लेकिन यहां एक बहुत महत्वपूर्ण बात समझनी होगी। सोशल मीडिया पर यह दावा किया जा रहा है कि कोई भी व्यक्ति कहीं से भी किसी भी ई रिक्शा को रोक सकता है। यह दावा पूरी तरह से सही नहीं है। हर ई रिक्शा इस तरह प्रभावित नहीं होता। केवल वही वाहन प्रभावित हो सकते हैं जिनमें ऐसा बीएएमएस लगा हो जो ब्लूटूथ आधारित हो। उस विशेष ऐप के साथ काम करता हो और जिसकी सुरक्षा कमजोर हो।

यदि बैटरी निर्माता ने मजबूत सुरक्षा दी है, पासवर्ड बदले गए हैं या फिर सिस्टम या फिर सिस्टम इंंक्रिप्टेड हैं तो केवल ऐप डाउनलोड कर लेने से कोई भी व्यक्ति वाहन को नियंत्रित नहीं कर सकता। अब समझते हैं कि आखिर बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम यानी कि बीएएमएस होता क्या है? जिस तरह इंसान के शरीर में दिमाग पूरे शरीर को नियंत्रित करता है, उसी तरह किसी भी आधुनिक लिथियम बैटरी का दिमाग बीएएमएस होता है। और यही तय करता है कि बैटरी कब चार्ज होगी, कितनी चार्ज होगी, कब बिजली देना है, कब बिजली देना बंद करेगी, जब कब ओवर हीटिंग से सुरक्षा सक्रिय होगी और कब बैटरी को नुकसान से बचाने के लिए आउटपुट रोक दिया जाएगा। अगर बीएएमएस ना हो तो लिथियम बैटरी में आग लगने, ओवरचार्ज होने या फिर पूरी तरह से खराब होने का खतरा भी कई गुना बढ़ जाता है। और इसीलिए बीएएमएस कोई अतिरिक्त फीचर नहीं बल्कि आधुनिक इलेक्ट्रिक वाहनों का सबसे महत्वपूर्ण सुरक्षा तंत्र है और यहीं से यह कहानी इंटरेस्टिंग हो जाती है।

जिस सुरक्षा फीचर को बैटरी की सुरक्षा के लिए बनाया गया यदि उसी तक किसी अनधिकृत व्यक्ति की पहुंच बन जाए तो वही सुरक्षा फीचर खतरे के कारण में बन सकता है। मान लीजिए बीएएमएस में एक कमांड है जो सुरक्षा कारणों से बैटरी का आउटपुट बंद कर सकती हैं। यदि किसी कमजोर सुरक्षा वाले सिस्टम में कोई बाहरी व्यक्ति उस कमांड तक पहुंच जाए तो वाहन रुक सकता है। हालांकि यह हर बैटरी और हर वाहन में संभव नहीं है। यह पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करता है कि बैटरी निर्माता ने सुरक्षा के कौन-कौन से स्तर अपनाए हैं और यही वजह है कि तकनीकी एक्सपर्ट्स इस पूरे विवाद को केवल एक वायरल वीडियो नहीं बल्कि साइबर सिक्योरिटी से के नजरिए से भी देख रहे हैं। उनका कहना है कि जैसे-जैसे वाहन स्मार्ट होते जाएंगे इंटरनेट और मोबाइल ऐप से जुड़ते जाएंगे वैसे-वैसे उनकी सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण हो जाएगी। आज कारें मोबाइल से लॉक और अनलॉक होती हैं। ऐप से ऐसी चालू हो जाती है। बैटरी की स्थिति देखी जा सकती है। कई कंपनियां ओवर द एयर सॉफ्टवेयर अपडेट भी भेजती हैं। यानी वाहन अब केवल मशीन नहीं रही बल्कि कंप्यूटर और इंटरनेट से जुड़े स्मार्ट डिवाइस भी बन चुके हैं। ऐसे में यदि सुरक्षा मजबूत नहीं होगी तो भविष्य में इस तरह के खतरे और भी बढ़ सकते हैं। लेकिन क्या इसका मतलब यह है कि आपकी जितनी भी गाड़ियां हैं Ola, एथ, TVS, EQube, Bajaj चेतक, VA, Tata C कर्व तमाम ऐसी जो गाड़ियां हैं जैसी आधुनिक इलेक्ट्रिक गाड़ियां भी इसी तरह से किसी मोबाइल ऐप से बंद की जा सकती हैं। यही इस पूरे विवाद का सबसे बड़ा सवाल है। और इसका जवाब जितना सरल दिखाई देता है, वास्तविकता में उससे कहीं ज्यादा तकनीकी और इंटरेस्टिंग है। आधुनिक इलेक्ट्रिक स्कूटर, बाइक और कारों के मामले में स्थिति काफी अलग है। जो तमाम जो गाड़ियां होती है, जो इलेक्ट्रॉनिक वाहन होते हैं, इन वाहनों में मल्टी लेयर सिक्योरिटी, इंक्रिप्शन, ऑथेंटिकेशन, सिक्योर कंट्रोल यूनिट और नियमित सॉफ्टवेयर अपडेट जैसी सुरक्षा व्यवस्थाएं होती हैं।

इसीलिए केवल कोई भी ऐप डाउनलोड कर लेने से इन वाहनों को रोक पाना संभव नहीं है। यदि किसी वाहन में कोई तकनीकी कमजोरी होती भी है तो उसे दूर करने के लिए कंपनियां समय-समय पर सॉफ्टवेयर अपडेट जारी करती हैं। अब तक ऐसा कोई प्रमाण सामने नहीं आया है कि इस बैट बीएएमएस ऐप के जरिए किसी प्रमुख कंपनी की इलेक्ट्रिक स्कूटर, बाइक या फिर कार को दूर से नियंत्रित या फिर बंद किया जा गया हो। हालांकि इस पूरे विवाद ने एक बड़ा सवाल जरूर खड़ा कर दिया है। भारत में बड़ी संख्या में ऐसे ई रिक्शा और इलेक्ट्रिक वाहन इस्तेमाल हो रहे हैं जिनमें अलग-अलग कंपनियां कंपनियों की आफ्टर मार्केट या फिर लोकल लिथियम बैटरीियां लगी हैं।

यदि इनमें कमजोर सुरक्षा वाले बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम का इस्तेमाल किया गया है तो उनका दुरुपयोग किया जा सकता है। और यही वजह है कि एक्सपर्ट्स बैटरी निर्माताओं से मजबूत साइबर सुरक्षा, सुरक्षित ब्लूटूथ, पेयरिंग, डिफॉल्ट पासवर्ड बदलने और बेहतर इनफ्रिक्शन अपनाने की सलाह लगातार दे रहे हैं। वहीं उपयोगकर्ताओं को भी केवल भरोसेमंद बैटरी और अधिकृत सर्विस सेंटर का भी इस्तेमाल करना चाहिए। कुल मिलाकर बैट बीएएमएस विवाद ने यह स्पष्ट कर दिया है कि इलेक्ट्रॉनिक या फिर इलेक्ट्रिक वाहनों का भविष्य केवल बैटरी और मोटर तक नहीं है बल्कि साइबर सुरक्षा पर भी निर्भर करेगा।

तकनीक जितनी स्मार्ट होती जाएगी उसे सुरक्षित बनाना भी उतना ही इंपॉर्टेंट हो चुका है और इसीलिए यह मामला सिर्फ एक वायरल वीडियो का नहीं बल्कि भारत की तेजी से बढ़ती हुई ईवी इंडस्ट्री के लिए एक महत्वपूर्ण चेतावनी है कि अब सड़क पर दौड़ने वाले वाहनों की सुरक्षा केवल मैकेनिकल नहीं बल्कि डिजिटल भी होनी चाहिए।

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