यह कहानी है एक ऐसे शख्स की जो डोंगरी की तंग गलियों से निकलकर मुंबई अंडरवर का बादशाह बन गया। 70 का दशक मुंबई अंडरवर में जब हाजी मस्तान की पकड़ कमजोर हो रही थी। उसी वक्त 19 साल का एक लड़का तूफान बनकर उभर रहा था। इस लड़के ने ना सिर्फ हाजी मस्तान की गैंग को बुरी तरह तबाह कर दिया बल्कि आगे चलकर करीम लाला की पठान गैंग से सीधी टक्कर लेकर मुंबई की सड़कों पर गैंग वॉर छेड़ दी। सैकड़ों लोग मारे गए। जिसमें से एक उसका बड़ा भाई भी था जिसकी मौत का बदला उसने करीम लाला के भाई को मार कर लिया। मुंबई के लोगों में उसका खौफ जितना बढ़ रहा था वो खुद उतना ही बेखौफ होता जा रहा था। स्मगलिंग, वसूली, रियलस्टेट और मैच फिक्सिंग के जरिए उसने करोड़ों रुपए कमाए। वो बॉलीवुड की फिल्मों में अपनी ब्लैक मनी लगाकर उसे वाइट करवा लेता और एक्टर्स से लेकर प्रोड्यूसर्स तक हर किसी को हफ्ता देना पड़ता। और जब कोई हफ्ता देने से मना करता तो यह सरेआम उसकी हत्या करवा देता। जैसा कि इसने संगीतकार गुलशन कुमार को दिन दहाड़े मरवा दिया था। उसने अनीता अय्यूब और मंदाकिनी जैसी खूबसूरत अदाकारों को अपने प्यार या डर के जाल में फंसाया और अपने आतंकवाद का साम्राज्य पूरी दुनिया में फैला दिया। और जब मुंबई पुलिस ने उसके खिलाफ बड़ी एक्शन ली तो वो पाकिस्तान भाग गया। और वहां से उसने 1993 के मुंबई ब्लास्ट करवाए।
जिसमें 250 से ज्यादा लोग मारे गए। आज उस शख्स को भारत, अमेरिका समेत दुनिया के कई देशों की जांच एजेंसियां ढूंढ रही हैं। लेकिन वो कहां है कोई नहीं जानता। यह कहानी है मुंबई के अंडर वर्ल्ड के सबसे खूंखार डॉन दाऊद इब्राहिम कास्कर की जो एक पुलिस कांस्टेबल का बेटा था। लेकिन छोटी-मोटी चोरियों से शुरुआत करके डी कंपनी का सरगना और मुंबई अंडरवर का बेताज बादशाह बन गया। साल था 1955, मुंबई की तंग गलियों वाला एक इलाका डोंगरी जहां दिन में भी सूरज की रोशनी मुश्किल से नीचे पहुंचती थी। वो डोंगरी जहां उस वक्त हाजी मस्तान, करीम लाला और वरद राजन मुदलियार जैसे नामों की तूती बोलती थी। इसी भीड़भाड़, गली कूचों और गरीबी के बीच एक बच्चे ने जन्म लिया। नाम था दाऊद इब्राहिम कास्कर। पिता इब्राहिम कास्कर पुलिस के हेड कास्टेबल थे और मां अमीनाबाई एक सख्त लेकिन धार्मिक औरत घर बड़ा नहीं था लेकिन ख्वाब बहुत बड़े थे। समय बीतता गया और इब्राहिम के घर में बच्चों की संख्या बढ़ते हुए 12 तक पहुंच गई। सालों पहले इब्राहिम अपनी बीवी के साथ निराले शाह बाबा से मिलने गए। जिन्होंने उनसे भविष्यवाणी करते हुए यह कहा था कि उनके छह बेटे होंगे। उनमें से उनका दूसरा बेटा आगे चलकर बहुत ही फेमस होगा और पैसे वाला आदमी बनेगा। और यह बेटा था दाऊद इब्राहिम। इसलिए इब्राहिम ने बाकी बच्चों को साधारण स्कूल में भेजा। लेकिन दाऊद के लिए चुना एक इंग्लिश मीडियम स्कूल।
लेकिन वक्त का खेल निराला होता है। साल 1966 में एक हाई प्रोफाइल मर्डर केस सॉल्व ना कर पाने की वजह से इब्राहिम को सस्पेंड कर दिया गया और अचानक घर की हालत डगमगा गई। कभी-कभी भूखे रहने तक की नौबत आ जाती थी। इसी दौर में दाऊद की पढ़ाई छूट गई और शुरू हुई उसकी असली कहानी। डूंगरी की गलियों में उसका मेलजोल कुछ ऐसे लड़कों से हुआ जो चोरी और ठगी करते थे। 14 साल की उम्र में दाऊद ने पहली बार चोरी की और पकड़ा गया। पिता ने पुलिस बेल्ट से पिटाई की पर कुछ असर ना हुआ। धीरे-धीरे चोरी से लेकर ठगी फिर गुंडागर्दी तक दाऊद हर हद पार करता गया। मेहता मार्केट में उसने अपने दोस्त के साथ एक दुकान खोली जहां विदेशी घड़ियों के नाम पर लोगों को ठगने का धंधा चलता था। नाम बढ़ा डर फैला और दाऊद बना डोंगरी का बदनाम छोकरा। कुछ वक्त बाद वह बासू दादा नाम के लोकल डॉन के गिरोह में शामिल हुआ। लेकिन ताकत मिलते ही उसी से टकरा गया। बाशू ने एक दिन उसके पिता और भाई शब्बीर को खुलेआम अपमान किया और उसी दिन दाऊद ने कसम खाई कि अब डर नहीं सिर्फ बदला। उसने बासू दादा को रास्ते से हटाया और खुद डोंगरी का नया कंग बन बैठा। अब वह छोटा-मोटा गुंडा नहीं रहा बल्कि उसने अंडरवर में कदम रख लिया था। 1970 के दशक में दाऊद ने कुछ समय के लिए हाजी मुस्तान के लिए भी काम किया। वही मस्तान जो बिना हथियार उठाए भी पूरी मुंबई पर राज करता था। पर दाऊद को मस्तान की यह शांति रास नहीं आई। वो डर नहीं दबदबा चाहता था। मौका मिला जब हाजी मस्तान ने उसके दो दोस्तों को पठान गैंग से पिटवा दिया। बदला लेने के लिए दाऊद ने प्लान बनाया।
खबर थी कि हाजी मस्तान की ₹5 लाखों से भरी अटैची मरीन लाइन में मालाबार हेल्थ जा रही है और 19 साल की उम्र में दाऊद ने अंडरवर के बादशाह की गाड़ी रुकवाकर वह अटैची लूट ली। जो असल में हाजी मस्तान की नहीं बल्कि बैंग की थी। इसलिए मामला सीधा पुलिस तक पहुंच गया और जो पुलिस टीम इस केस की इन्वेस्टिगेशन कर रही थी उसमें उसके पिता इब्राहिम कास्कर भी थे। जब उन्हें पता चला कि इस लूट का मास्टरमाइंड कोई और नहीं बल्कि उनका बेटा है तो वह दाऊद की पुलिस वाली बेल्ट से पिटाई करते हुए उसे थाने ले गए और बड़े पुलिस ऑफिसरों के सामने अपने बेटे के काले कारनामे के लिए माफी मांगी क्योंकि उसके पिता ने खुद उसका सरेंडर करवाया था। इसलिए वह कुछ ही दिनों में छूट गया। लेकिन बेइज्जती और पिता की पिटाई के बाद भी दाऊद पर कोई असर नहीं पड़ा और बाहर निकलने के बाद उसने ऐसे-ऐसे कारनामे किए कि अंडरवर्ल्ड की दुनिया में उसके नाम का डंका बजने लगा। 70 के दशक के आखिर में दाऊद का और उसका भाई शब्बीर बासू दादा के करीबी थे। लेकिन वक्त के साथ-साथ उन्होंने अपना रास्ता अलग बनाया। खालिद पहलवान के साथ मिलकर खुद का गैंग खड़ा किया। वही गैंग जो आगे चलकर डी कंपनी के नाम से पूरी दुनिया में मशहूर हुआ। उधर हाजी मस्तान ने अंडरवर छोड़कर राजनीति की राह पकड़ ली। जिससे दाऊद के लिए स्मगलिंग, गोल्ड ट्रेड और एक्सटॉरशन पर अपनी पकड़ मजबूत करने के दरवाजे खुल गए। धीरे-धीरे उसकी ताकत इतनी बढ़ी कि पुराने डॉन करीम लाला को नुकसान झेलना पड़ा। पहले जिन धंधों पर पठान गैंग का राज था, अब वहां दाऊद का सिक्का चलने लगा था। यही शुरुआत थी मुंबई के सबसे खूनी गैंग वॉर की। सड़कों पर गोलियां चलने लगी। दोनों ओर लाशें गिरने लगी। हाजी मस्तान ने कई बार बीच बचाव की कोशिश की लेकिन नफरत और व्यक्तिगत हो चुकी थी। एक बार करीम लाला के आदमियों ने दाऊद को पकड़ कर बुरी तरह पीटा। उस दिन उसे सिर्फ चोट नहीं लगी थी बल्कि अपमान का जख्म भी मिला था और वही जख्म उसके अंदर बदले की आग बन गई। आने वाले सालों में यह दुश्मनी एक-एक कर सब पर भारी पड़ी। 1981 में मनिया सुरवे और पठान गैंग ने उसके भाई शब्बीर की हत्या कर दी। इसके बाद दाऊद का दिमाग सनक गया। उसने पुलिस से हाथ मिला लिया और दुश्मनों की जानकारी देकर उनके गैंग को एक-एक करके खत्म करवा दिया। 1982 में मन्या सुर्वे एनकाउंटर में मारा गया बल्कि दाऊद का हिसाब अभी पूरा नहीं हुआ था। 1984 में करीम लाला के भतीजे समद खान को उसने
19 गोलियां दाग कर मौत के घाट उतार दिया और 2 साल बाद करीम लाला के भाई अब्दुल रहीम खान को भी मरवा दिया। अब पूरा अंडरवर उसके कब्जे में था। दाऊद ने मुंबई, गुजरात और दमन के तटों से इलेक्ट्रॉनिक गुड्स, ड्रग्स और गोल्ड स्मगलिंग पर कब्जा जमा लिया और इसी से उसने करोड़ों का साम्राज्य खड़ा कर लिया। इसी दौरान उसने मुंबई की एक लड़की जुबैना जरीन से शादी की और अंडरल वर्ल्ड से निकलकर क्रिकेट और बॉलीवुड तक अपनी पहुंच बना ली। इसी दौरान दाऊद इब्राहिम का नाम कई बॉलीवुड हसीनाओं के साथ भी जुड़ा। उसके इश्क के किस्से भी खूब मशहूर हुए। जैसे कि 1985 में जब राज कपूर ने अपनी फिल्म राम तेरी गंगा मैली में नीली आंखों वाली मंदाकिनी को लॉन्च किया, तो देश भर में उस नई हीरोइन की चर्चा होने लगी। दाऊद भी मंदाकिनी पर फिदा था और कुछ सालों में ही उनकी तस्वीरें भी वायरल हुई जिसके बाद मंदाकिनी को दाऊद की प्रेमिका कहा जाने लगा। दाऊद मैच फिक्सिंग से लेकर फिल्मों में पैसे लगाने तक हर जगह अपनी पकड़ बनाता जा रहा था। यहां एक दिलचस्प किस्सा यह है कि शारजा में भारत-पाकिस्तान के फाइनल मैच से पहले दाऊद भारतीय अभिनेता महमूद के साथ भारतीय टीम के ड्रेसिंग रूम तक पहुंच गया। खुद को बिजनेसमैन बताकर उसने कहा कि अगर इंडिया जीता तो हर खिलाड़ी को Toyota कोरोला दूंगा। लेकिन तभी कप्तान कपिल देव गुस्से में बोले, यह आदमी कोने से बाहर निकालो। अगले ही पल दाऊद को कमरे से निकाल दिया गया। बाद में यह वाकया शारजा ड्रेसिंग रूम स्कैंडल के नाम से मशहूर हुआ। साल 1986 आते-आते दाऊद इब्राहिम का नाम मुंबई पुलिस के हिट लिस्ट में सबसे ऊपर पहुंच चुका था। उसके खिलाफ मर्डर, स्मगलिंग, वसूली, एक्सटॉरशन जैसे दर्जनों केस दर्ज थे। मुंबई के पुलिस कमिश्नर पी एस सोमेन ने उसके खिलाफ फौरन वारंट जारी किया और शहर के हर कोने में उसके ठिकानों पर रेड मारनी शुरू की, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। क्योंकि पुलिस डिपार्टमेंट के अंदर ही किसी ने खबर लीक कर दी थी। दाऊद अपने परिवार और कुछ भरोसेमंद लोगों को लेकर उस रात भारत छोड़कर दुबई भाग गया। दुबई से उसने अपने गैंग को और मजबूत बनाया और वह सिर्फ मुंबई नहीं बल्कि पाकिस्तान, नेपाल और खाड़ी देशों में भी अपने नेटवर्क फैला चुका था। वहीं से डी कंपनी का हर ऑपरेशन कंट्रोल होता था। मुंबई में उसके लिए छोटा राजन, छोटा शकील और शरद शेट्टी जैसे लोग काम करते थे। उस वक्त छोटा राजन उसका दाया हाथ माना जाता था। दाऊद ऑर्डर देता और छोटा राजन बिना सवाल किए काम अंजाम देता। लेकिन साल 1992 में एक ऐसा हादसा हुआ जिसने सब कुछ बदल दिया। दिसंबर में बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद पूरे देश में दंगे भड़क उठे। मुंबई में सैकड़ों लोग मारे गए और इसी माहौल का फायदा उठाकर दाऊद ने बदला लेने की साजिश रची। लेकिन उसने इस हमले की प्लानिंग से अपने दाहिने हाथ छोटा राजन को दूर रखा। उसने टाइगर मेनन और मोहम्मद डोसा के साथ मिलकर इस हमले की तैयारी की और पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई भी इस आतंकी हमले की प्लानिंग में जुड़ गई। 12 मार्च 1993 मुंबई के दिल में एक के बाद एक 12 बम धमाके हुए। शेयर मार्केट, एयर इंडिया बिल्डिंग, सिनेमा हॉल्स हर जगह तबाही मच गई।
250 से ज्यादा लोग मारे गए और हजारों घायल हुए। बाद में जांच में खुलासा हुआ कि इन धमाकों की पूरी प्लानिंग दुबई और कराची से हुई थी और इसके पीछे था अंडरवर डॉन दाऊद इब्राहिम। भारत सरकार ने उसे मोस्ट वांटेड टेररिस्ट घोषित कर दिया। तब से लेकर आज तक इंटरपोल और भारतीय एजेंसियां उसे दुनिया के कोने-कोने में तलाश रही हैं। लेकिन वह अब तक हाथ नहीं आया है। उधर 1990 के दशक के आखिर तक दाऊद की डी कंपनी दो हिस्सों में बंटने लगी थी। एक तरफ था छोटा राजन जिसने खुद को अलग दिखाना शुरू किया और दूसरी तरफ छोटा शकील जो दाऊद की और करीब आता जा रहा था। शरद शेट्टी और छोटा शकील दाऊद के कान भरते थे। राजन अब भरोसेमंद नहीं रहा। धीरे-धीरे शक बढ़ा और रिश्ते जहर बन गए। साल 1998 में छोटा राजन ने दाऊद पर हमला करवाया लेकिन वह बच निकला। फिर 1999 में जब छोटा राजन बैंकॉक में था तो दाऊद के लोगों ने उस पर हमला कराया। गोलियों की बरसात में राजन किसी तरह खिड़की से कूद कर बच निकला लेकिन उस दिन से दोनों के बीच हमेशा के लिए जंग शुरू हो गई। डी कंपनी अब दो हिस्सों में बट चुकी थी। एक तरफ दाऊद जो पाकिस्तान में अपने आतंकी नेटवर्क को चला रहा था और दूसरी तरफ छोटा राजन जो भारत की एजेंसियों के साथ मिलकर उसी नेटवर्क को तोड़ने में लगा था। कभी एक दूसरे के लिए मरने को तैयार यह दोनों अब एक दूसरे के पतन की वजह बन गए थे। देखते ही देखते मुंबई पुलिस ने डी कंपनी और बाकी गैंग्स का सफाया करके मुंबई से अंडरवर की जड़े उखाड़ फेंकी। लेकिन इन सबके बीच दाऊद का रहस्य और बढ़ गया। कोई कहता वो कराची में है। कोई बताता उसने पहचान बदल ली है। लेकिन सच्चाई कोई नहीं जानता था। साल 2003 में भारत और अमेरिका ने दाऊद को वैश्विक आतंकी घोषित कर दिया और उसके सिर पर 25 मिलियन का इनाम भी रखा। कई साल बीते और 26 नवंबर 2008 के दिन मुंबई में एक बार फिर आतंकी हमले हुए। जिसमें 166 बेकसूर लोग मारे गए। इस हमले की जिम्मेदारी पाकिस्तान के आतंकी संगठन लश्कर तबा ने ली लेकिन रिपोर्ट्स की मानें तो जांच आगे बढ़ी तो पता चला कि इस हमले की साजिश में दाऊद भी शामिल था और पाकिस्तान में बैठे दाऊद के नेटवर्क्स ने यह सारी साजिश की थी और मुंबई में आतंकियों की मदद भी। चाहे वो वो लॉजिस्टिक सपोर्ट देना, फाइनेंसिंग करना या लोकल चैनल्स के जरिए उनकी मूवमेंट्स को आसान बनाना।
कई रिपोर्ट्स में यहां तक दावा किया गया कि डी कंपनी के कुछ पुराने गुरों ने हमले से पहले मुंबई में आतंकी किरियानी जासूसी में भी मदद की थी। लेकिन दाऊद फिर भी गायब रहा। बीते 20 सालों में भी कभी कोरोना कभी हीट अटैक तो कभी ज़हर से दाऊद इब्राहिम के मारे जाने की अफवाएं उड़ी हैं। लेकिन हर बार यह खबरें झूठी साबित हुई। 1992 में भारत से भागने के बाद दाऊद दर्जनों बार अपना नाम और पहचान बदल चुका है। और यह भी कहा जाता है कि पकड़े जाने के डर से उसने हुलिया बदलने के कई बार अपने चेहरे पर प्लास्टिक सर्जरी भी करवाई है। यानी इस वक्त हम दाऊद की जो तस्वीरें देखते हैं शायद अब वो इससे बिल्कुल अलग दिखता हो। और इसी दुनिया में आम इंसानों के बीच साधारण इंसान बनकर घूम रहा होगा। हालांकि रिपोर्ट्स की मानें तो भारत सरकार और रॉ दाऊद को पकड़ने और मारने की करीब छह बार कोशिशें कर चुकी हैं। इसके अलावा दुनिया भर की कई देशों की एजेंसियों और अंडरवर के डॉन दाऊद को मारने की कोशिश कर चुके हैं। लेकिन वह हर बार बच निकलता है और आज दाऊद की उम्र करीब 70 साल है। तो क्या डी कंपनी का गैंगस्टर दाऊद कभी पकड़ा जाएगा या नहीं? और क्या अब मुंबई में अंडरवर्ल्ड का पूरी तरह से खात्मा हो चुका है या पर्दे के पीछे इनके लूट, चोरी, किडनैपिंग, धमकाने और ड्रग्स के ऑपरेशंस आज भी चल रहे हैं? अपनी राय हमें कमेंट्स में बताइए। उम्मीद है आपको यह वीडियो पसंद आया होगा। अगर हां, तो इसे लाइक और शेयर करके 15,000 लाइक्स जरूर करवा दीजिए। और ऐसी ही रोचक वीडियोस के लिए हमारे चैनल को सब्सक्राइब करके पास वाली घंटी बजाना मत भूलिएगा। जय हिंद, जय