बॉलीवुड की और टॉप मोस्ट डांसर महज एक आइटम सॉन्ग के लिए फिल्म की हीरोइन से भी ज्यादा लेती थी फीस मेरे लेले जाऊ बहके अगर मैं लूंगी थाम पीले और रंगीले आखिर वह कौन थी जिसके जीवन में इतना उथल-पुथल हुआ जो राजा से रंक बन गई आखिर क्या थी उसकी गलती या यह सिर्फ भाग्य का एक खेल था उस मोहतरमा ने एक इंटरव्यू में कहा था कि मैंने कभी खाने की कद्र नहीं की रोज फाइव स्टार से खाना मंगवा करर दोस्तों को खिलाती थी जो बच जाता वह डस्टबिन में फेंक देती उन्हीं कर्मों का फल है कि आज मैं दाने दाने को मोहताज हूं और सड़कों से गली सड़ी सब्जियां बिनक लाती हूं वही पका कर खाती हूं फिल्म एक्ट्रेस तबस्सुम के सामने अपनी इस हालत को बया किया था उस अभिनेत्री [संगीत] ने नमस्कार आपका स्वागत है
अचीवर जंक्शन सिनेमा पर आप देख रहे हैं सिल्वर स्क्रीन की कहानियां मैं बताऊंगी उस हीरोइन की हकीकत लेकिन अगर आप नए हैं तो पहले हमारे चैनल को सब्सक्राइब कर लीजिए बेल आइकन दबा दीजिएगा जिससे हमारे चैनल की कोई भी कहानी आपसे मिस ना हो ये नैना बाबू किसीके लिए है नीले आसमानी तो जिस आइटम डांसर की बात हम कर रहे थे लोग उनका नाम लेकर मिसाल देते हैं कि लग्जरी लाइफ कैसे जीते हैं कहते हैं कि राह चलते जो घर उन्हें पसंद आ जाता उसे खरीद लेती थी वह बड़े-बड़े हीरो उस दौर में साइकिल से फिल्म के सेट पर पहुंचते थे लेकिन उनके पास अपने कुत्तों के लिए भी लग्जरी कार थी कैबरी डांसर का उन्हें जनक माना जाता है लेकिन वक्त का तमाशा देखिए वक्त बदला तो कूड़े से खाना बिनने के लिए मजबूर होना पड़ा दवाइयों के लिए भी रुपए नहीं थे मौत भी गुमनामी में हुई चंदे से कफन आया फिर हुआ अंतिम संस्कार यह कहानी है 40 से 60 के दशक की मशहूर अभिनेत्री कुकू मोरे की है वो हालत सुधर है ना उनको खबर है
ना हम कुकू मोरे का जन्म 1928 में एक एंग्लो इंडियन परिवार में हुआ जन्म कहां हुआ था इस सवाल पर अब तक एक राय नहीं है कई लोग कोलकाता तो कुछ लोग कराची बताते हैं आजादी से पहले हिंदी सिनेमा ना मत्र का था तब नानू भाई पटेल चर्चित डायरेक्टर हुआ करते थे 1946 में उन्होंने अरब का सितारा फिल्म में कुकू को एंट्री दी लेकिन मशहूर हुई 1948 में आई महमूद खान की फिल्म अनोखी अदा [संगीत] से अगली फिल्म फिर 1948 में आई अंदाज जिसमें पहली बार कुकू को क्रेडिट मिला पहली रंगीन फिल्म आन हलचल आवारा आरजू लैला मजनू जैसी तमाम फिल्मों में कुकू ने आइटम सॉन्ग किए बालमा तार की ठव में मि एक समय था जब पूरी फिल्म के लिए एक हीरोइन 000 फीस लेती थी तब कुकू के एक आइटम सॉन्ग की फीस 000 थी कहते हैं तब का 6000 मतलब आज का लगभग 6 करोड़ रुपया सोचिए कुपू की क्या कीमत थी क्या कमाई थी तब उनका एक आइटम सॉन्ग ही पूरी फिल्म के हिट होने की गारंटी हुआ करता था कुकु की ब ऐसी लचीली थी कि उन्हें रबड़ की गुड़िया कहने लगे थे कोई बताए कहां कसर है पतली कमर है तेर छी नजर है पत यह वो दौर था जब हीरो फिल्म के सेट पर अमूमन साइकिल से आया जाया करते थे तब इस रबड़ की गुड़िया के पास तीन लग्जरी कारें थी एक कार में उनके कुत्ते घूमते थे
दूसरी कार में वह खुद आया जाया करती थी तीसरी कार सामान या दोस्तों को लाने ले जाने में इस्तेमाल होती थी में जा सर सु राजा सर सु लगजरी लाइफ ऐसी थी कि उस दौर में कुकू के पास करीब 8000 ड्रेस थी किसी बड़े शोरूम में अमूमन इतनी ड्रेस नहीं होती है इसी तरह करीब 8000 जूते सैंडल और चप्पलें थी कहते हैं कि कुकू एक बार जो ड्रेस या चप्पल पहन लेती थी उसे दोबारा पहन का मौका नहीं मिलता था कार से जाते हुए कोई घर दुकान या प्रॉपर्टी पसंद आ जाती तो उसी जगह खड़े खड़े पेमेंट कर खरीद लेती थी रूपा के साथ उनका प्यार प्यार ना था मैं रूपा के आंसू नहीं देख सकती फिल्म के जानकार बताते हैं कि हेलन बजंती माला और प्राण जैसे कलाकारों को बॉलीवुड में लाने का श्रेय कुकू को ही जाता है लोग कहते हैं कि कुकू के बुरे दिन की वजह हेलन और बजंती माला भी थी तब कुकू की उम्र ढलान पर थी और हेलन व बजंती माला की उठान पर अपनी खूबसूरती की वजह से हेलन लोगों के दिलों पर राज करने लगी थी कुकू का चार्म कम होने लगा था दूसरी तरफ बजंती माला भी
अलग स्टाइल की डांस की वजह से लोगों की पसंदीदा हीरोइन बन चुकी थी 1958 में विमल रॉय की यहूदी फिल्म आई जिसमें हेलन और कुकू दोनों ने रोल किया लेकिन अहमियत मिली हेलन को जाने क्या था क्या दवा कर बैठे एक आ ठंडी सी भर अगली फिल्म हीरा मोती में भी हेलन को कुकू की अपेक्षा ज्यादा स्क्रीन टाइम मिला कुकू को यह सब बेहद खराब लगा और उनके झगड़े भी बढ़ने लगे फिर काम मिलना लगभग बंद हो गया 70 के दशक में कुकू मोरे के यहां आयकर विभाग ने बड़े स्तर पर छापेमारी की थी मुंबई में उनका आलीशान घर था कई फ्लैट्स दुकाने ज्वेलरी और कारों की जानकारी मिली आयकर विभाग ने यह सब कुछ सील कर दिया कुको से हिसाब मांगा गया तो वे किसी भी प्रॉपर्टी या अपने खर्चे का हिसाब नहीं दे सके इस छापेमारी के बाद उनके बैंक खातों में मामूली रकम बची थी उसी के सहारे कुछ दिनों तक किराए के मकान में रही पैसे खत्म हो गए तो छोटे मकान में चली गई वहां रहने के लिए भी पैसे ना बचे तो सड़क पर भीख मांगने लगी कहते हैं
कि अपनी मुफलिसी के दौर में कुकू सब्जी मंडी में रात में जाती दुकानदार खराब सब्जियों को कुड़े में फेंक देते थे उन्हें बीन करर लाती और पकाक खाती कई बार तो कूड़े से खाना निकालकर खाया है कुछ लोगों का मानना है कि कुको मोरे की कंगाली की वजह आयकर विभाग की छापेमारी नहीं उनकी फिजूल खर्ची थी प्रॉपर्टी खरीदने में हमेशा लापरवाह रही कागज देखे बगैर प्रॉपर्टी खरीद लेती थी उनकी अधिकतर प्रॉपर्टी विवादित थी काम मिलना बंद हो गया लेकिन खर्च पुराने जैसा ही था जमा पूंजी खर्च करने के बाद ज्वेलरी भी बेचना शुरू कर दी अंतिम वक्त के लिए कुछ भी बचाकर नहीं रखा 1963 तक वे लापता हो गई थी 1980 में जब पता चला तो कैंसर से लड़ रही थी उनके पास दवा के लिए भी पैसे ना थे तब किसी ने टाटा मेमोरियल कैंसर संस्थान में भर्ती करा दिया वहीं 30 सितंबर 1980 में उनकी मौत हो गई लोगों ने चंदा करके अंतिम संस्कार कराया लेकिन सिनेमा के उनके दोस्त तब भी नहीं पहुंचे तबस्सुम के चर्चित टॉक शो में कुकू ने कहा था कि मैंने हमेशा सबको तवज्जो दी लेकिन बुरे वक्त में मेरे साथ कोई नहीं है कहते हैं कि एक नामी डायरेक्टर के साथ कुकू की नजदीकिया थी कुकू के बुरे दौर में उस डायरेक्टर ने भी मुंह मोड़ लिया था कररी धड़कन नहीं नहीं सी आहा ई ये दिनिया दो दिन की दो दिन की जीना है तो हस के जिए जा घर तो कैसी लगी यह वीडियो हमें कमेंट करके जरूर बताइएगा और हम फिल्मी सितारों गानों और फिल्मों की अनसुनी दास्ताने और भी बताएंगे देखते रहिए अचीवर जंक्शन सिनेमा नमस्कार