फिल्म पद्मावत बहुत सालों पहले आई थी और जब यह फिल्म आई थी तो एक्ट्रेस स्वरा भास्कर ने संजय लीला भंसाली को एक ओपन लेटर लिखा था जिसमें उन्होंने कहा था कि इस फिल्म के अंदर औरतों को सिर्फ तक ही लिमिट कर दिया गया है। स्वरा भास्कर ने तब काफी कंट्रोवर्सी क्रिएट की थी।
अब सालों बाद एक बार फिर से स्वरा भास्कर उसी सीन के बारे में बात करती नजर आई है और उन्होंने इस बार इस सीन को एक अलग एंगल से उठाया है और कहा है कि पिछली बार जब मैंने इस मुद्दे पर बात की थी तो सिर्फ एक लाइन को ही ज्यादा कोट किया गया था मीडिया में कि लेकिन मैं यह कहना चाहूंगी कि फिल्म में जो कुछ भी जौहर वाला सीन है वो बहुत गलत सीन है और इस तरह का सीन एक्सेप्टेबल ही नहीं है। इस सीन से आप क्या कहना चाह रहे हो कि अगर किसी औरत का हुआ है तो उसे जीने का हक नहीं। यही चीज यह सीन बताता है।
स्वरा भास्कर ने यह बात एक इवेंट में कही जिसकी वीडियो अब तेजी से वायरल हो रही है और सोशल मीडिया पर स्वरा भास्कर की इस बात से एक बार फिर से कंट्रोवर्सी खड़ी हो गई। वाचिंग दिस एंड इज़ ऑल दी 800 वुमेन व्हिच इज द स्टोरी । वाचिंग इट। आई वास लाइक यार, इफ आई आई वास अ । व्हाट इज दिस फिल्म टेलिंग मी?
सो यू आर कुछ लोगों का कहना है कि तब स्वरा को फुटेज नहीं मिली इसलिए अब फिर से सेम ओपन लेटर की बात करके फुटेज हासिल करना चाह रही है स्वरा। वहीं कईयों का कहना है कि स्वरा भास्कर को का मतलब ही नहीं पता। जौहर का मतलब यह था कि वो औरतें जिनके पति में गए हैं या युद्ध में जिनकी हो गई है और वह वापस नहीं लौटना चाहते।
वो औरतें मुस्लिम इनवेडर्स के हाथों नहीं होना चाहती थी क्योंकि उन औरतों को स्लेव बनाकर रखा जाता था और उनकी जिंदगी नर्क से भी बदतर थी। ऐसी जिंदगी जीने से अच्छा तो वो ही जाए और इसीलिए उन औरतों ने आग में कूदकर किया था। बहुत ही डिग्निफाइड डिसीजन था यह तब की औरतों का और स्वरा भास्कर ने इसे सिर्फ से जोड़कर अपनी मानसिकता बता दी है कि उनका आईक्यू कितना कम है।
वहीं सोशल मीडिया पर कई लोगों का कहना है कि स्वरा भास्कर को मंच मिल गया, माइक मिल गया लेकिन उनके पास बोलने का मुद्दा नहीं था। इसीलिए उन्होंने इस मुद्दे को एक बार फिर से छेड़