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जल्द AI पी जाएगा 130 करोड़ लोगों का पानी UN ने दी बड़ी चेतावनी।

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यूएन की एक नई रिपोर्ट आई। उन्होंने ऐसा खुलासा किया है कि आने वाले समय में एआई 130 करोड़ लोगों का पानी पी जाएगा। अभी तक हम पढ़ते हैं कि भाई एआई लोगों का रोजगार खा जाएगा। एआई की वजह से बेरोजगारी हो जाएगी।

कल मैंने आर्टिकल पढ़ा कि एआई की वजह से सबसे ज्यादा अगर किसी को खतरा है वो है मिडिल क्लास। और कुछ समय पहले एक आर्टिकल था जिसमें था कि भाई एआई सिर्फ एआई की मतलब एआई की नौकरी तो खा ही गया। लोगों की नौकरी भी खा रहा है। एक कंपनी थी जिसके सीईओ ने क्या किया था? के क्लाउड एआई का उपयोग करने की असीमित परमिट दे दिया था अपने एंप्लाइजज़ को और उन्होंने लगभग उन्होंने लगभग एक महीने में इतना बिल बना दिया कि लगभग आधा अरब डॉलर के आसपास बिल बना दिया था।

तो सीईओ की भी नौकरी खा गया। लेकिन आज हम बात करने वाले हैं कि आखिरकार एआई पानी से कैसे रिलेटेड है? पानी को कैसे पी जाएगा? यह हमें समझना है। तो, यह जितने भी आप नाम देख रहे हैं, यह सारे ही इंटेलिजेंस एआई के ही फॉर्मेट हैं जो आपके जो है एजेंट के रूप में काम करते हैं। आप जब भी कुछ भी पूछते हैं ना, सारे जवाब देते हैं।

अब ये डाटा सेंटर्स हैं और डेटा सेंटर ही पानी की खपत को बढ़ा रहे हैं। यह हम यहां पे बात करने वाले हैं। अगर देखेंगे तो पूरी दुनिया में पूरी दुनिया में लगभग 11,000 डाटा सेंटर्स हैं। कितने? लगभग 11,000 डाटा सेंटर हैं। सबसे ज्यादा आपको देखने को मिलेंगे यूएसए में 4000 से ज्यादा है।

लगभग 4100 समथिंग कुछ है। एग्जैक्ट नंबर मुझे याद नहीं है। अगर बात करते हैं यूपी सॉरी यूपी कह रही हूं इंडिया की तो 246 डाटा सेंटर्स 2026 के एंड तक हो जाएंगे। यूपी का नाम मैंने इसलिए लिया क्योंकि यूपी लगातार काम कर रहा है कि भाई हम तीन से चार डाटा सेंटर्स अभी बना चुके हैं और आठ से नौ डाटा पार्क बनाएंगे।

आपने पढ़ा होगा कि यूपी लगातार काम कर रहा है। डाटा सेंटर्स बनाएंगे और बढ़ा चढ़ा करके खूब न्यूज़ हम यहां पे पढ़ते हैं। तो देखो यहां पर कितने हैं? 4K। अब एक जो न्यूज़ अभी पढ़ने में आई थी जब यू यूएसए के लोगों से पूछा गया कि भाई आप लोग डाटा सेंटर्स बनाने के पक्ष में हैं या विपक्ष में हैं? तो 71% लोगों ने बोला कि भाई हमारे आसपोस में कहीं पर भी आप डाटा सेंटर्स मत बनाइएगा। क्यों? क्योंकि सिर्फ डाटा सेंटर्स पानी को नहीं इस्तेमाल करते हैं।

पानी के अलावा बिजली इस्तेमाल करते हैं और बिजली के अलावा सबसे बड़ी समस्या है हीट आइलैंड की। अभी तक हम पढ़ते आए कि हीट आइलैंड जो इफेक्ट है वो होता है कि सड़कें हैं जो है बिल्डिंग्स बनी हुई हैं, ग्रीनरी नहीं है। मतलब कोई ऐसी जगह जो सीमेंटेड पूरी बनी हुई है और कहीं पर भी हीट अब्सॉर्ब नहीं हो पाई तो वो हीट आइलैंड बन जाता है।

लेकिन एक नई रिपोर्ट निकल कर के आई कि अगर आपके आसपोस में कहीं पर भी कहीं पर भी डाटा सेंटर्स हैं, डाटा हब है तो वह आपके इलाके का तापमान 2 से 9° सेंटीग्रेड तक बढ़ा सकते हैं। और यह जो अफेक्टेड इलाका है लगभग 10 कि.मी. रेडियस का हो सकता है। समझ रहे हैं आप कि वहां के जो लोग हैं वह सारा जो है गर्मी ज़्यादा झेलेंगे क्योंकि वहां पे डाटा सेंटर है तो पहले तो पानी की कमी बिजली की ज्यादा खपत हो रही है और दूसरा गर्मी भी बढ़ाते जा रहे हैं।

तो बहुत सारी चीजें हम यहां पे वन बाय वन कवर करते चलेंगे। मैंने आपको जो है बता दिया है कि क्या और कैसे हो रहा था और यह रिपोर्ट क्यों प्रकाशित की गई है। तो एआई कुड कंज्यूम इनफ ऑफ़ वाटर फॉर 1.3 बिलियन। अब देखो होता क्या है जो एआई के डेटा सेंटर्स होते हैं ना वो बहुत बड़ी-बड़ी मशीनें होती हैं।

तो उन बड़ी-बड़ी मशीनों में बहुत ज्यादा काम होता है जिसकी वजह से बहुत ज्यादा हीट जनरेट होती है। उनको ठंडा रखने के लिए पानी की जरूरत पड़ती है। पहले के अगर आप पास्ट टाइम देखेंगे तो पहले भी डेरा सेंटर्स होते थे लेकिन उनको ठंडा रखने के लिए बस पंखे वगैरह ही सफिशिएंट होते थे क्योंकि उनका आकार बहुत छोटा होता था।

लेकिन आज के समय में इतने सारे एआई हैं। उन सबको जो है चलाना है। जैसे आप कुछ भी पूछते हो ना चैट जीपीटी से कि भाई आपने जो है दो लाइंस लिखी कि मुझे फला फला चीज के बारे में बताओ। तो माना जाता है कि थोड़े से लगभग 250 शब्द जब आप जो है टाइप करते हो उसके बदले में एआई 1 लीटर पानी कंज्यूम करता है।

जैसे चावल की खेती करते हैं ना वैसे ही सिमिलर जो है यहां पे चल रहा है। एआई डाटा सेंटर्स कुड यूज़ एज मच वाटर एज 1 23 बिलियन पीपल बाय 2030 तो एक 130 करोड़ लोगों का पानी यह अकेले कंज्यूम करने वाला है। अब देखो एआई जो डाटा सेंटर्स बनाए जाते हैं सबसे बड़ी खामी इनकी यह है।

जब इन पे बोला गया कि भाई आप जो है शहरों के बीच में मत बनाओ। गर्मी बहुत जनरेट करते हैं। इन्होंने वीरान जगहों पर बनाना शुरू किया क्योंकि वहां पे जमीन सस्ती मिल जाती है और कई ऐसी जगहों पर बनाया जहां पर पानी की ऑलरेडी किल्लत थी। वीरान इलाके हो गए, रेगिस्तानी इलाके हो गए तो वहां पर पानी की ऑलरेडी बहुत कमी थी और इन्होंने वहां पर डाटा सेंटर्स बना करके पानी की कमी को और बढ़ा दिया।

तो यह हिडन वाटर क्राइसिस है जिसके बारे में कोई बात नहीं करता। जब भी हम एआई की बात करते हैं तो हमारे दिमाग में बस एक चीज आती है कि यह तो लोगों की नौकरी खा रहा है। लेकिन यह लोगों की जिंदगी भर बरात कर सकता है। आने वाले समय में पानी के क्राइसिस को और बढ़ा देगा। यह यहां पर किसी ने नहीं बता। देखो मेकिंग एआई लेस थस्टी। तो क्या बोला जा रहा है?

अब इस समस्या को हमें समझा सुलझाना होगा क्योंकि समाधान तो निकालना पड़ेगा। पहले हम बात कर लेते हैं एआई क्या है? आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस। तो इंटेलिजेंस जो है एक शब्द है जो इंसानों के लिए इस्तेमाल होता था। अब उसका आर्टिफिशियल मतलब नकल की जा रही है। इसी वजह से हम इसको इस नाम से जानते हैं। यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस होता है। एक ऐसी मशीन जो बुद्धिमान हो खुद से डाटा एनालिसिस करती है। एजेंट्स के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।

वही सारा हम यहां पे पढ़ रहे हैं। देखो अलग-अलग जगह पर है कि सॉफ्टवेयर है, पीआर है, राइटिंग है, एडिटिंग है, डिजाइनिंग जितने भी प्रकार की नई-नई चीजें आप देखते हो, हर जगह एआई का इस्तेमाल किया जा रहा है और ज्यादा खतरा बनता भी जा रहा है। भारत में 78% प्रोफेशनल वर्कर फोर्स यह मानता है कि एआई जिस तकनीकी के साथ काम करने के वर्तमान में उनके पास टैलेंट नहीं है। अभी आप देखेंगे चाइल्ड जीपीटी हो गया और जेमिनाई हो गया। मैक्सिमम ऑफिस में भी लोग इसी का इस्तेमाल करते हैं। सबसे इजी है।

बाकी एआई कोर्सेस मिल रहे हैं लेकिन लोगों के पास अभी क्या है? सीखने की क्षमता नहीं है। और 70% अह भारती ऐसे हैं जो सीखना तो चाहते हैं लेकिन अभी सीख नहीं पाए। ये सारा जो है यहां पर लिखा हुआ है। अब हम बात करते हैं पानी को लेकर के कि क्या है और कैसे जो है इस समस्या को बढ़ा रहा है।

डाटा सेंटर्स आप देख रहे हैं। यही जो है आपके डेटा को एनालाइज करते हैं। जैसे क्या होता है एआई जो है बहुत बड़े मॉडल पर काम करता है। आप कुछ भी सीखते जो भी आपने एआई से सीखा है। ए को सिखाने के लिए बड़े-बड़े डाटा सेंटर्स बनाए गए हैं। समझिए कि जैसे हमारे लिए लाइब्रेरीज़ होती हैं और लाइब्रेरीज़ में आपने जो सीखा है सारा ज्ञान कहीं ना कहीं किसी ना किसी किताब में रखा होता है। लेकिन हम सब नहीं सीख पाते हैं फिर भी। तो डाटा सेंटर्स वैसे ही कुछ होते हैं जिसमें बहुत सारी करोड़ों लोग करोड़ों प्रकार की अरबों प्रकार की जानकारियां इकट्ठा की जाती हैं।

ताकि जब भी आप जर्मनी से चैट जीपीटी से कोई प्रश्न पूछो तो वो आपके प्रश्नों का जवाब दे पाए। अब हमने देखा कि एआई जो है वह सिर्फ प्रश्नों का जवाब देने के काम नहीं कर रहा है। जो एजेंटिक एआई है वह रिसर्च करता है, डाटा कलेक्ट करता है, फाइल बनाता है, फिर आपको रिपोर्ट देता है। यह होता है एडवांस एआई और इसके लिए बहुत ज्यादा ही जानकारी चाहिए जिसकी वजह से इनको बड़े-बड़े डाटा सेंटर्स बनाने पड़ रहे हैं।जैसे हम बात करते हैं डिजिटल गवर्नेंस की कि स्वास्थ्य सुविधाओं को डिजिटल कर देंगे। जो सरकारी सुविधाएं हैं उनको हम डिजिटल कर देंगे। सरकार सारे कामों को डिजिटल करना चाहती है।

यूपीआई वगैरह को भी हम बात करते हैं यह भी डिजिटल ही हमारा है। और हम कई बार बात करते हैं कि हम अपने भारतीयों का डाटा यूएसए की किसी कंपनी में हम स्टोर नहीं करना चाहते हैं। हम डाटा सेंटर्स खुद भारत में बनाना चाहते हैं। यह सब बनाएंगे अगर आप तो वही समस्या है। बिजली, पानी और क्या हो गया यहां पर? लोगों का रोजगार भी छीनने की संभावना है। अब बात करते हैं एआई डाटा सेंटर्स वर्सेस ट्रेडिशनल। ट्रेडिशनल वाले बहुत इजी थे।

छोटे-छोटे से थे भाई पंखा लगा होता था और पंखा चलता रहता था। यह ठंडे होते रहते थे। देखो लिखा हुआ है छोटे थे। लो लेटेंसी नेटवर्किंग यहां पर काम करती थी। फिजिकल एंड थर्मल इंफ्रा बना हुआ था। बहुत ज्यादा डिजिटल नहीं थी चीजें। इस वजह से इनको मेंटेन करना थोड़ा सा इजी रहता था। लेकिन आजकल के जो हैं वो बहुत बड़ी-बड़ी मशीनंस होती हैं जिनको ठंडा रखने के लिए आपको क्या करना पड़ता है?

पानी का और कूलेंट्स का इस्तेमाल करना पड़ता है। इसी वजह से यह एक समस्या बनते जा रहे हैं। किसी ने देखो कमेंट किया है कि क्या समंदर का पानी इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं? आप यह बताओ आपको एक फैक्ट्री बनानी है या आपको कोई भी चीज सेटअप करनी है। आप जमीन पे सस्ते में सेटअप कर पाएंगे या समंदर के बीच में जाके सेटअप कर पाएंगे। ये लोग समंदर में बना सकते हैं। लेकिन वहां पर बहुत महंगा पड़ता है। इसलिए वो लोग वहां नहीं बना रहे। अदरवाइज समंदर में तो पानी की कमी ही नहीं। आराम से जो है सारा सेटअप बना करके इस्तेमाल करें। लेकिन लागत बहुत आ जाएगी। तो ये पैसा बचाने के चक्कर में ये सारा काम कांड कर रहे हैं। अब जो भी देखो पानी वगैरह इस्तेमाल होता अब आपके मन में आ रहा होगा 130 करोड़ लोगों का पानी मतलब लगभग 100 मीट्रिक टन के आसपास या इससे ज्यादा ही पानी इस्तेमाल होगा। यह पानी जाएगा कहां?सब इवापोरेट हो करके क्या हो जाएगा? वाष्पीकरण हो करके बादलों का निर्माण करेगा।

और यह ज़रूरी नहीं है कि जहां पर यह इस्तेमाल हुआ हो बादल वहीं रहे। मतलब समझिए कि हिंद महासागर का पानी है। वाष्पीकरण बन वाष्पीकृत हुआ ऊपर गया और बादल बना। लेकिन वर्षा कहां जाकर के? वर्षा मान लीजिए जो है उसकी बारिश अमेरिका में हो गई। साउथ अमेरिका में हो गई। अफ्रीका में हो गई या ऑस्ट्रेलिया के आगे आप चले आइए। चाइना के आसपास जो है जापान या साउथ कोरिया के आसपास बारिश हो गई।

तो पानी तो हमारे यहां का इस्तेमाल हुआ। पानी यहां का इवापोरेट हुआ और कहीं बारिश और हो गई। तो यही होता है कि भाई जो सूखे इलाके हैं वहां का पानी और जो है भर-भर के बाहर इवापोरेट किया जा रहा है। अब बात करते हैं कि एआई डाटा सेंटर्स इतना अधिक पानी क्यों खपत करते हैं? वही बार-बार प्रश्न पूछा है कि क्यों? तो डाटा सेंटर्स अत्यधिक गर्मी उत्पन्न करते हैं। जैसे आपने देखा है जहां पर बहुत सारी मशीनें लगी होती हैं और वहां पे आप खड़े होकर देखिए तो आपको समझ में आ जाएगा कि भाई कितनी गर्मी है। तो सिमिलर यहां पर भी चल रहा है। जैसे ये जो आप डिस्प्ले देख रहे हैं यह भी एक मशीन है।

अगर यहां पे एसी ना चले तो इसके पास खड़े होकर के 5 मिनट बढ़ाना इंपॉसिबल हो जाता है क्योंकि ये बहुत गर्मी जनरेट करता है। लेकिन एसी चल रहा है तो नॉर्मल है। तो वैसे ही जो मशीनरीज होती हैं वो भी तापमान बढ़ाती हैं। शक्तिशाली चिप्स होती हैं। विशेष रूप से उच्च स्तरीय ग्राफ़िक प्रोसेसिंग यूनिट्स है। भारी लोड के तहत काम करते समय प्रत्येक जो है 300 से अधिक या 700 वाट तक गर्मी का उपभोग और उत्सर्जन करता है। इतना एक जो है डिब्बा जो छोटा सा वहां रखा हुआ है यह 300 से 500 वाट गर्मी उत्पन्न करता है।

अब इसको अगर ठंडा नहीं रखेंगे तो जाहिर सी बात है वहां पे तो मतलब इतनी गर्मी हो जाएगी कि यह सारे विस्फोटित हो जाएंगे तो जलाना भी नहीं बचा के रखना है। इसी वजह से इनको जो है नियंत्रित रखने के लिए पानी वगैरह का उपयोग किया जाता है सर्वसर्स का ताकि ये ठंडे रहें। अब बात करते हैं जब कोई व्यक्ति देखो यहां पे लिखा है जब कोई व्यक्ति चैट जीपीटी का उपयोग करता है और आप उससे पूछते हैं 100 शब्दों का ईमेल लिखता है तो लगभग जो है 519 मिलीलीटर पानी इस्तेमाल होता है। जो आप पूछते रहते हो ना कि अच्छा यह भी बताओ यह भी बताओ। जब अगली बार आप कुछ पूछिएगा तो याद रखिएगा जितना ज्यादा आप चैट जीपीटी से कुछ भी पूछेंगे वो उतना ही ज्यादा पानी का इस्तेमाल कर रहा है। ठीक है?

यह जो है आपको याद रखना है। यह अनुमान जो है कैलिफोर्निया के विश्वविद्यालय रिवर साइड्स के माध्यम से किया गया था जो अभी जो है माननीय भी है। लोग मानते भी हैं। अब बात करते हैं कौन-कौन से एआई हैं और कैसे-कैसे काम कर रहे हैं और कितना जो है पानी कंज्यूम किया जा रहा है क्योंकि बहुत सारे हमारे पास विकल्प है। यह सारा हमने ऑलरेडी समझ लिया है। तो Google ने वर्ष 2024 में 37 अरब लीटर पानी का उपयोग किया। देखो लिखा है 29 अरब लीटर पानी भाप बनकर उड़ गया। यह जो है मात्रा लगभग 16 लाख लोगों की वार्षिक घरेलू खपत जल आवश्यकता के बराबर था। यह Google ने इस्तेमाल किया।

Microsoft ने जो है यहां पर देखो लिखा हुआ है 2025 में 150 अरब लीटर पानी इस्तेमाल किया गया है। बेंगलुरु जैसे शहर अगर आप देखेंगे कि भारत में जो 246 के आसपास डाटा सेंटर्स की मैंने बात की है वो हैदराबाद हो गया, बेंगलुरु हो गया, एनसीआर दिल्ली वगैरह में आप देखेंगे यही सब बनाने की बात कही जा रही है। यह जो है खपत लगातार यहां पर बढ़ती जा रही है। ठीक है? चलो यह सब हमने समझ लिया है। अब हम बात कर लेते हैं यहां पर। यह देखो पानी पीते हुए यह बनाया गया है। कि डाटा सेंटर्स को ठंडा रखने के लिए पानी का उपयोग यह हमने समझ लिया एआई मॉडल्स पर हम काम करते हैं।

सर्वर बहुत गर्म ना हो ठंडा हो इस वजह से इसका उपयोग किया जाता है। बिजली उत्पादन में जल उपयोग। तो देखो यहां पर क्या है? एक तो यह बिजली खपत भी कर रहा है। तो जिस पानी का इस्तेमाल करके हम बिजली बना सकते हैं। तो यह पानी भी खा रहा है और बिजली भी खत्म कर रहा है। दो तरफ़ा हम नुकसान यहां पे देखने को मिल रहा है। रियल टाइम प्रोसेसिंग के दौरान अप्रत्यक्ष जल का उपयोग किया जाता है। जिसकी हम मॉनिटरिंग कर भी नहीं पा रहे हैं। वह भी यहां पे इस्तेमाल किया जा रहा है तो जल संक्रमण और डाटा सेंटर्स के बारे में हमने यहां पर पढ़ लिया कि दोहरी मार पड़ रही है। पानी भी इस्तेमाल हो रहा है, बिजली भी इस्तेमाल हो रही है और उसका परिणाम जो है लोगों को बेरोजगार भी कर रहे हैं और बहुत सारे नकारात्मक प्रभाव जो कि हम देखते जा रहे हैं।

अब बात कर लेते हैं हम वाटर क्राइसिस के बारे में। WHO ने बहुत बार हमें बताया कि भाई पानी की समस्या लगातार बढ़ती जा रही है। यूनाइटेड नेशंस ने ये बताया है कि 1.8 मिल बिलियन पीपल्स ऐसे हैं जो कि दुनिया में पानी ड्रिंकिंग वाटर की कमी से जूझ रहे हैं। इसके अलावा देखो लिखा है यहां पर हर साल जो है बहुत सारा पानी कम होता जा रहा है। 2025 की रिपोर्ट है। 2023 की रिपोर्ट है।

अलग-अलग वर्षों में लगातार रिपोर्ट प्रकाशित की गई है। इसमें आप देखेंगे भारत में बहुत सारे जिले हैं। यूपी हो गया आपका यूपी ही नहीं। आप देखिएगा मध्य प्रदेश के बहुत सारे जिले ऐसे हैं जहां पर महिलाएं एक-एक मटका पानी लेने के लिए 3-3 4-4 कि.मी. ट्रैवल करती हैं। राजस्थान में भी बहुत सारे इलाके हैं। तो ये जो है वर्ल्ड वाइड प्रॉब्लम बनी हुई है जहां पर हम बात करते हैं बार-बार कि कैसे जल की समस्या बहुत बड़ी हो गई है। समाधान के प्रयास क्या अब आपके मन में आएगा कि मैम डाटा सेंटर्स बंद नहीं कर सकते हैं। ये हमारे भविष्य के लिए बहुत जरूरी है। एआई तकनीकी जो है बहुत जरूरी है। तो समाधान क्या होगा? तो क्लोज्ड लूप कूलिंग सिस्टम इनको बनाना चाहिए ताकि ठंडा भी रखें और पानी की कमरबादी हो।

तो इसमें बा पानी को बार-बार रिसाइकल कर उपयोग। अब यहां पर हम यह कर सकते हैं जैसे इवापोरेट ना हो पाए पानी। तो इसलिए बोल रहे हैं कि क्लोज्ड यूनिट बनाइए कि भाई पानी रिसाइकल वही घूमता रहे और ठंडा भी रहे और इनके सिस्टम को ठंडा रखे। तो इवापोरेट नहीं होगा तो लॉस कम हो जाएगा। डाटा सेंटर से निकलने वाली गर्मी का यह पुनः उपयोग कर सकते हैं। तो यूरोप के कई देश जो है इस प्रकार की तकनीकी का इस्तेमाल कर रहे हैं।

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