अगर आप भारत में रहते हैं तो आपने एक चीज जरूर नोटिस की होगी। धूल हर जगह है। सुबह घर साफ करो शाम तक टेबल पर हल्की परत दिखने लगती है। बाइक से निकलो तो चेहरे पर गर्द महसूस होती है। खिड़की कुछ देर खुली छोड़ दो तो कमरे में महीन धूल पहुंच जाती है। लेकिन सवाल है भारत में इतनी धूल क्यों है? जबकि यूके या ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में यह समस्या इतनी दिखाई क्यों नहीं देती? इसका जवाब सिर्फ सफाई नहीं है। असली वजह इससे कहीं ज्यादा गहरी हैं। मौसम, मिट्टी, हवा, शहरी ढांचा और हमारी गतिविधियां।
सबसे पहली वजह है भारत की जलवायु। भारत का बड़ा हिस्सा साल के लंबे समय तक गर्म और कई इलाकों में शुष्क रहता है। गर्म मौसम में जमीन जल्दी सूखती है। मिट्टी के महीन कण ढीले हो जाते हैं और हल्की हवा भी उन्हें उड़ा सकती है। दूसरी वजह है सूखी हवाएं और हवा के साथ उड़ने वाले धूल कण। भारत के उत्तर और पश्चिमी हिस्सों में गर्मियों के दौरान तेज, गर्म और शुष्क हवाएं चलती हैं। यह हवाएं खेतों की सूखी मिट्टी, खुले प्लॉट, सड़क किनारे जमा धूल और शुष्क इलाकों की मिट्टी के महीन कणों को हवा में उठा लेती हैं। सहारा या अरब जैसे रेगिस्तानों का कुछ योगदान हो सकता है, लेकिन भारत की ज्यादातर उड़ती धूल सिर्फ रेगिस्तान से नहीं आती। लोकल मिट्टी और ह्यूमन एक्टिविटी भी बड़ा कारण है। तीसरी वजह है खुली मिट्टी का ज्यादा होना। भारत में शहरों और कस्बों के आसपास बहुत सी जमीन खुली रहती है। खाली प्लॉट, सड़क किनारे मिट्टी, कच्चे रास्ते, खुले मैदान और बिना कवर के निर्माण स्थल।
जैसे ही तेज हवा जलती है या कोई वाहन गुजरता है, यह महीन कण हवा में फैल जाते हैं। दूसरी तरफ कई विकसित देशों में खाली जमीन को घास, पेवमेंट, बजरी या दूसरी सतहों से कवर कर दिया जाता है। जिससे मिट्टी खुली नहीं रहती। चौथी वजह है तेजी से होता निर्माण कार्य। भारत इस समय तेजी से इंफ्रास्ट्रक्चर बना रहा है। नई सड़कें, पुल, फ्लाई ओवर, मेट्रो और इमारतें। निर्माण के दौरान सीमेंट, रेत, मिट्टी और मलबे के बेहद छोटे कण हवा में फैलते हैं। अगर साइट को ठीक से कवर ना किया जाए तो आसपास का पूरा इलाका धूल भरा महसूस हो सकता है। कई देशों में कंस्ट्रक्शन डस्ट कंट्रोल पर ज्यादा सख्ती से नियम लागू किए जाते हैं। पांचवी वजह है सड़कों पर भारी ट्रैफिक। लाखों वाहन रोज सड़कों पर चलते हैं। गाड़ियां सिर्फ धूल उड़ाती नहीं बल्कि टायर घिसने से निकलने वाले सूक्ष्म कण, ब्रेक से निकलने वाली महीन धूल और सड़क की सतह के घिसाव के कण भी हवा में मिलते हैं।
यह इतने छोटे होते हैं कि हमें दिखते नहीं लेकिन हवा को धूल भरा महसूस कराते हैं। अब एक जरूरी बात दूसरे देशों में धूल बिल्कुल नहीं होती ऐसा नहीं है। वहां भी धूल बनती है। फर्क यह है कि वहां खुली मिट्टी कम होती है। सड़क सफाई ज्यादा व्यवस्थित होती है। निर्माण स्थलों पर कंट्रोल बेहतर होता है और शहरी योजना ऐसी होती है कि धूल हवा में कम फैले। यानी भारत में ज्यादा धूल दिखने की वजह सिर्फ गंदगी नहीं बल्कि प्राकृतिक और मानवीय कारणों का कॉम्बिनेशन है। और अच्छी बात यह है कि इसका समाधान भी है। ज्यादा हरियाली, खुली मिट्टी को ढकना, बेहतर सड़क सफाई, निर्माण स्थलों पर सख्त नियम और प्रदूषण नियंत्रण। तो अगली बार जब आपको धूल दिखे तो सिर्फ यह मत सोचिए कि सफाई नहीं है बल्कि समझिए कि इसके पीछे पूरा साइंस काम कर रहा है। अब कमेंट करके बताइए आपके शहर में धूल सबसे ज्यादा किस वजह से उड़ती है?