बॉलीवुड की वो अभागी मां जिसने अपनी ही औलाद की मौत की मांगी दुआ। दामाद के खिलाफ छेड़ी कानूनी जंग। मुर्दा घर में पड़ा रहा बेटी का शव। [संगीत] आखिरी बार नहीं देख पाई लाडली का चेहरा। जिंदगी भर रहा बेटी की भूल का पछतावा। औलाद की बेवख़्त मौत माता-पिता के दिल का ऐसा नासूर बन जाती है जो जिंदगी भर नहीं भरता। बॉलीवुड में कई ऐसे सितारे रहे हैं जिन्हें जीते जी औलाद को खोने का गम सहना पड़ा। इन्हीं में से एक हैं मौसमी चैटर्जी। जिनकी जिंदगी का सबसे बड़ा दर्द है
उनकी बेटी पायल का इस दुनिया से बेवख़ चले जाना और उसकी मौत से जुड़ा विवाद। जो मौसमी और उनके पति जयंत मुखर्जी के दिल का नासूर बन गया। बता दें कि मौसमी चैटर्जी ने एक्टर और फिल्म मेकर जयंत मुखर्जी से शादी की थी। शादी के बाद उनके घर में दो बेटियों पायल और मेघा का जन्म हुआ। लेकिन पायल की जिंदगी बचपन से ही मुश्किलों से घिरी रही। बता दें कि पायल टाइप वन डायबिटीज यानी कि जुवेनाइल डायबिटीज से पीड़ित थी। मौसमी की जिंदगी में भूचाल आया पायल की शादी के बाद। जब मौसमी और उनके पति जयंत मुखर्जी को अपनी बीमार बेटी से मिलने के लिए अपने ही दामाद के खिलाफ कोर्ट कचहरी तक जाना पड़ा था। दामाद से कानूनी जंग, जवान बेटी की मौत और फिर उससे मिले ट्रॉमा के बारे में मौसमी कई अलग-अलग इंटरव्यूज में अपना दर्द जाहिर कर चुकी हैं। बता दें कि पायल की शादी बिजनेसमैन डिक्की सिन्हा से हुई थी।
मौसमी चटर्जी और डिक्की का परिवार बिजनेस पार्टनर थे। लेकिन पायल और डिक्की सिन्हा की शादी के कुछ समय बाद ही बिजनेस में हुए मनमुटाव से दोनों परिवारों में दूरियां आ गई। उसी दौरान पायल की तबीयत बिगड़ने लगी। धीरे-धीरे पायल की बीमारी इतनी बढ़ गई कि उनके शरीर के कई अंग प्रभावित होने लगे। साल 2018 में पायल कोमा में चली गई और करीब 2 साल तक जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ती रहीं। मौसमी चैटर्जी का आरोप था कि बेटी की गंभीर हालत के बावजूद उन्हें
उससे मिलने तक नहीं दिया जाता था। मामला इतना बढ़ गया कि मौसमी और उनके पति जयंत मुखर्जी को अपनी ही शादीशुदा बेटी की कानूनी गार्डियनशिप लेने के लिए बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा। उन्होंने दामाद और ससुराल पक्ष पर लापरवाही के आरोप लगाए। यह विवाद लंबे समय तक सुर्खियों में बना रहा। बेटी की बिगड़ी हालत के बारे में बात करते हुए मौसमी ने एक इंटरव्यू में कहा था कि वो साल 2017 में कोमा में चली गई थी। वह समय-समय पर कोमा से बाहर आती रहती थी। लेकिन हमें बिना कंडीशन के उसे देखने की भी इजाजत नहीं दी गई थी। हमें पुलिस और कोर्ट के जरिए जाना पड़ता था। पायल भी जाना चाहती थी। मुझे भी भगवान से दुआ करनी पड़ी कि इसे दूर ले जाओ।
मैं उसे दर्द में नहीं देख सकती थी। हमें एक दिन अपने शरीर को छोड़कर जाना है तो दर्द सहने का क्या मतलब है? इसी बीच दिसंबर 2019 में पायल ने हमेशा के लिए दुनिया को अलविदा कह दिया। लेकिन बेटी की मौत के बाद भी मौसमी का दर्द कम नहीं हुआ। पायल की मौत के बाद डिक्की सिन्हा ने अपनी सास पर आरोप लगाया था कि वह आखिरी बार अपनी बेटी के अंतिम संस्कार में भी नहीं आई। उन्होंने बेटी का चेहरा भी नहीं देखा। जबकि पायल के पिता और बहन आए लेकिन मौसमी नहीं आई थी। वहीं दामाद के आरोपों पर बाद में मौसमी ने भी चुप्पी तोड़ी थी और [संगीत] दावा किया था कि उन्हें अपनी बेटी का चेहरा आखिरी बार देखने तक का मौका नहीं मिला। इतना ही नहीं उन्होंने यह भी कहा कि पायल का शव कई घंटों तक मुर्दा घर में पड़ा रहा। जबकि परिवार अंतिम दर्शन की कोशिश करता रहा। मौसमी ने तब इंटरव्यू में कहा था कि आज तक उनके पति और छोटी बेटी मेघा पायल की मौत के गम से उभर नहीं पाए हैं। ब्यूरो रिपोर्ट ई2