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मजदूर की बेटी बनी करोड़ों की मालकिन, ना कंपनी, ना बिजनेस… फिर कैसे मिली प्रॉपर्टी?जानकर चौंक जाएंगे

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एक मजदूर की बेटी जो कॉलेज में बीए की पढ़ाई कर रही है जिसके पिता रोज कमाकर रोज खाने वाले इंसान है यानी दिहाड़ी मजदूर अचानक उसके नाम पर खुल जाती है कंपनी और उस कंपनी का टर्नओवर ₹1 लाख नहीं 10 लाख भी नहीं पूरे 20 करोड़ 98 लाख सही सुना आपने। है।

एक दिन घर पहुंचता है आयकर विभाग का समन। खुलासा होता है और उसके बाद यह कहानी एक फिल्मी कहानी सी लगने लगती है। क्या किसी ने उसकी पहचान चुरा ली? क्या आधार और पैन कार्ड बन गए करोड़ों के फर्जी कारोबार का हथियार? और अगर एक मजदूर की बेटी के साथ ऐसा हो सकता है तो क्या आपका आधार और पैन भी सुरक्षित है क्या? यह सवाल उठ खड़ा हुआ है। नमस्कार, आप देख रहे हैं एनएमएफ न्यूज़। आपके साथ मैं हूं भुवन शर्मा। यह खबर चौंकाने वाली है जो उत्तर प्रदेश से आ रही है।

एक साधारण से मोहल्ले गिरजा बाग में रहने वाली रश्मि सविता की जिंदगी बिल्कुल आम सी थी। कॉलेज जाना, पढ़ाई करना और अपने परिवार के सपनों को पूरा करने की कोशिश करना। तस्वीरों में आप उस लड़की को देख रहे हैं। लेकिन एक सरकारी लिफाफे ने उसकी जिंदगी में ऐसा तूफान ला दिया जिसकी उसने कभी कल्पना भी नहीं की थी। आयकर विभाग चंडीगढ़ की तरफ से एक समन जारी हुआ। समन में लिखा गया था कि रश्मि सविता के नाम पर करोड़ों रुपए की वित्तीय लेनदेन और कारोबार की जांच की जा रही है। और यही पढ़ते ही पूरे परिवार के पैरों तले जमीन खिसक गई।

जिस लड़की के पिता मजदूरी करके घर चलाते हो। जिस परिवार ने शायद करोड़ों रुपए सिर्फ टीवी और अखबारों में ही देखे हो। उसी परिवार की बेटी के नाम पर अचानक 20 करोड़ 98 लाख के कारोबार का रिकॉर्ड सामने आ जाता है। सोचिए उस परिवार पर उस वक्त क्या बीती होगी। लेकिन असली कहानी इसके बाद शुरू होती है। रश्मि ने जब इस पूरे मामले की जानकारी जुटानी शुरू की तो बेहद चौंकाने वाला खुलासा सामने आया। पता चला कि दिल्ली के बुराड़ी इलाके में उनके आधार कार्ड और पैन कार्ड का इस्तेमाल करके आर एस एंटप्राइजेस नाम की एक फर्म रजिस्टर कराई गई।

सबसे हैरान करने वाली बात यह थी कि रश्मि को इस कंपनी के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। ना उसने कभी कोई फर्म बनाई, ना कभी कोई व्यापार शुरू किया और ना ही किसी कारोबारी गतिविधि में वह शामिल रहे। लेकिन उसके दस्तावेजों के सहारे कोई और करोड़ों का खेल खेल रहा था। आधार कार्ड, पैन कार्ड, फर्जी कंपनी 20 करोड़ 98 लाख का कारोबार और आईटी का समन। अब सवाल यह है कि आखिर यह खेल हुआ कैसे शुरू? क्या किसी साइबर गिरोह ने उसके दस्तावेज चुरा लिए थे? क्या किसी ने फर्जी तरीके से केवाईसी भी पूरी कर ली और कंपनी खोल ली? या फिर यह पहचान चोरी यानी आइडेंटिटी थफ्ट का कोई बड़ा नेटवर्क है।

क्योंकि जिस तरह से कुछ महीनों में करोड़ों रुपए का कारोबार दिखाया गया उससे शक और भी गहरा हो जाता है। कंपनी के बारे में क्या कुछ जानकारी मिली है यह आगे आपको बताएंगे। इस खबर की और तह तक आपको ले जाएंगे। लेकिन रश्मि का इस पूरे मामले पर क्या कहना है? जिसके नाम पर यह फर्जीवाड़ा हुआ है। उससे पहले सुन लेते हैं। क्या नाम है गुड़िया आपका? रश्मि सता। रश्मि जी क्या मामला है? नोटिस कैसे प्राप्त हुई? क्या जानकारी हुई? नोटिस हमें 9 मई को प्राप्त हुई थी 3:00 बजे के आसपास और ये पैन कार्ड की थी तो हमें पहले इसके बारे में कुछ पता नहीं था।

हमने जब घर पे दिखाया सबको बताया तो फिर बाद में हमें पता चला कि आयकर विभाग से आई है और इसमें मेरे नाम पे कोई 20 करोड़ का बिनेस चल रहा है। हमें जब ये पता चला तो हमने फिर मेरे घर में सब करने लगे कि ऐसा कैसे सोचा? हम कभी चंडीगढ़ गए नहीं थे और इतना कुछ हो रहा था। फिर हमने जब जहां पे दिखाया था तो उन्होंने बोला कि इसकी क्राइम मतलब रिपोर्ट लिखाने का तो हम लोग गए थे एसपी ऑफिस वहां पे दिखाया। फिर वहां से हम लोग ऑफिस गए थे। तो उन्होंने हमसे बोला कि यह जो मामला है यह आयकार विभाग का है तो वहीं जाना पड़ेगा। वहीं से ही सारा हो गया। लगता है लगभग कितना अमाउंट उसमें दिखाया गया है .

जो आपके पास नोटिस आई थी। मेरे पास जो नोटिस आई थी उसमें 10,000 की पेनल्टी लग के आई थी। लेकिन जब हमने चेक कराया तो हमें पता चला कि मेरे नाम पे कोई 20 करोड़ का बिजनेस कर रहा है। क्या करते हैं आप? क्या करते हैं? मैं नॉर्मल छात्रा हूं। मैंने अभी ग्रेजुएशन पिछले साल ही कंप्लीट किया और मैं घर पे रहती हूं। सिलाई करती हूं। पिताजी क्या करते हैं? मेरे पिताजी मजदूर हैं। वो फैक्ट्री में काम करते हैं। और फैमिली में कौन-कौन है आपके?

मैं हूं, मम्मी हैं और हम तीन बहन, एक भाई है और मेरी एक बहन की शादी हो गई। हम दो बहन और भाई साथ में रहते हैं। तो सुना आपने जो जानकारी मिली है उसके मुताबिक आरएसएस एंटरप्राइजेज की ये फर्म 15 जनवरी 2025 को शुरू हुई थी। और सिर्फ कुछ महीनों बाद 9 मई 2025 को इसे बंद भी कर दिया गया था। यानी करीब 5 महीने का यह पूरा खेल चला। लेकिन इस 5 महीने में कथित तौर पर लगभग ₹21 करोड़ का कारोबार दिखाया गया। सबसे बड़ा सवाल यही है आखिर इतने बड़े लेनदेन के दौरान असली संचालक कौन था? पैसा कहां से आया और कहां को गया? ध्यान देने वाली बात यह है कि आज के डिजिटल दौर में आधार और पैन कार्ड केवल पहचान पत्र नहीं रह गए हैं।

इनसे बैंक खाते खुल सकते हैं। जीएसटी रजिस्ट्रेशन हो सकता है। कंपनी बनाई जा सकती है और करोड़ों रुपए के लेनदेन तक किए जा सकते हैं। यानी अगर आपकी पहचान किसी गलत हाथ में पहुंच जाए तो मुश्किलें आपके दरवाजे तक पहुंच सकती है। और रश्मि का मामला शायद इसी खतरे की सबसे बड़ी मिसाल बनकर सामने आया है। समन मिलने के बाद रश्मि और उनके परिवार ने तुरंत कारवाई शुरू की। रश्मि ने इनकम टैक्स को डिपार्टमेंट को जवाब भेजा। उन्होंने साफ कहा कि कथित फॉर्म से उसका कोई लेना देना नहीं है। उन्होंने जन सुनवाई पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई। साथ ही आधार और पैन कार्ड के दुरुपयोग की आशंका जताई। इतना ही नहीं पुलिस अधीक्षक को भी प्रार्थना पत्र देकर पूरे मामले की जांच और दोषियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग भी रश्मि ने की है। लेकिन इस कहानी का सबसे डरावना पहलू क्या है? जानते हैं.

आप? डरावना पहलू यह है कि अगर एक बीए की छात्रा के दस्तावेजों का इस्तेमाल करोड़ों का कारोबार दिखाया जा सकता है तो कहीं ना कहीं सिस्टम में ऐसी खामियां मौजूद है जिनका फायदा अपराधी उठा रहे हैं और यही वजह है कि यह मामला सिर्फ रश्मि का नहीं रह जाता है। यह मामला देश के करोड़ों आधार और पैन धारकों से जुड़ा सवाल बन जाता है। पुलिस अधिकारियों का साफ कहना है कि उन्हें शिकायत प्राप्त हुई। मामले को उच्च अधिकारियों के संज्ञान में लाया जा रहा है और आवश्यक कार्यवाही की जाएगी। अब जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती क्या है? उस व्यक्ति पर या नेटवर्क तक पहुंचना जिसने कथित तौर पर रश्मि की पहचान का इस्तेमाल किया। एक मजदूर की बेटी जिसके सपने शायद नौकरी और बेहतर भविष्य तक सीमित थे। अचानक ₹21 करोड़ के कथित कारोबार की जांच के घेरे में आ गए।

सवाल सिर्फ इतना नहीं कि रश्मि निर्दोष है या नहीं। सवाल यह है कि अगर उसकी पहचान चोरी हुई है तो आखिर चोर कौन है? क्योंकि कहीं ना कहीं इस कहानी का असली खिलाड़ी अभी भी पर्दे के पीछे कहीं छिपा हुआ है और जब तक वो सामने नहीं आता ₹21 करोड़ का यह रहस्य लोगों को हैरान करता रहेगा। आप तस्वीरें देख रहे हैं ना उसी रश्मि की ये तस्वीरें हैं। उसके घर की ये तस्वीरें हैं। पिता दिहाड़ी मजदूर हैं। रोज कमाते हैं तब जाकर के रोज अपने परिवार का पेट पाल पाते हैं। ऐसे दिहाड़ी मजदूर के घर में रहने वाली उनकी बेटी कैसे करोड़ों रुपए की मालकिन हो सकती है।

ये सुनकर आसपास के लोग जो हैं वो भी हैरान रह गए। लोगों की भीड़ जुटनी शुरू हो गई। लोग यह जानने समझने आने लगे कि भैया यह कैसे हो गया चमत्कार। अब पुलिस के सामने बड़ी मुश्किल है क्योंकि चंडीगढ़ पुलिस ने समन भेजा है। कोर्ट से समन आया है। इधर जो मामला उत्तर प्रदेश का है जहां पर ये समन भेजा गया और उन्नाव का और दूसरी तरफ पूरा कड़ी जो है वो दिल्ली में जुड़ती है जहां पर ये फर्म रजिस्टर्ड की गई। आप इस घटना को कैसे देखते हैं?

अपनी राय हमें जरूर बताइएगा। क्या आपके साथ आपके जान पहचान वालों के साथ भी कुछ ऐसी कभी धोखाधड़ी या फर्जीवाड़ा उनके दस्तावेजों का नाम इस्तेमाल करके पहचान चोरी आइडेंटिटी थफ्ट जिसको कहा जा रहा है क्या ऐसा करके कोई ऐसा कोई मामला

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