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कैसे सिर्फ 24 घंटे में अजित डोवल पाकिस्तान से बचकर निकले

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18 मार्च 1980 अजीत डोवाल एक ऐसा नाम जिसकी तलाश में पूरी पाकिस्तानी इंटर सर्विसेस इंटेलिजेंस आईएसआई अपनी हर चाल चल रही थी। 7 साल दुश्मन देश की जमीन पर एक नकली पहचान के साथ जीना जहां हर सांस आखिरी हो सकती थी। लेकिन आखिर ऐसा क्या हुआ कि जिसने मौत को रोज करीब [संगीत] से देखा उसे सिर्फ 24 घंटों के अंदर सब कुछ छोड़कर भागना पड़ा। उन आखिरी 24 घंटों में क्या कोई राज खुल गया था या फिर किसी ने पहचान लिया था असली चेहरा। यह कहानी शुरू होती है उस दौर से जब भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव सिर्फ खबर नहीं एक सच्चाई था। इंडोपाकि [संगीत] वॉर ऑफ 1971 का घाव अभी भी पाकिस्तान के दिल में ताजा था। [संगीत] बांग्लादेश अब एक अलग देश बन चुका था और पाकिस्तान सिर्फ टूटा नहीं था। [संगीत] अंदर से जल रहा था। यही वजह थी कि आईएसआई अब सिर्फ एक एजेंसी नहीं रही। वह बन चुकी थी। एक बदले की आग उसके निशाने पर था। भारत और भारत के वो साए जो दिखाई नहीं [संगीत] देते थे। तभी इंटेलिजेंस ब्यूरो ने तैयार किया एक ऐसा मिशन जो पहले कभी नहीं हुआ था। एक भारतीय [संगीत] अधिकारी सालों तक पाकिस्तान के अंदर उनकी ही दुनिया में उनके बीच उनकी नजरों के सामने और यह जिम्मेदारी दी गई अजय दोवाल को। लेकिन यह कोई मिशन नहीं था। यह एक जिंदा कब्र थी। [संगीत] सोचिए आपको अपना नाम छोड़ना है। अपनी पहचान मिटानी है। अपने ही देश को भूलने का नाटक करना है। हर रात सोने से पहले एक ही सवाल। क्या सुबह देख पाऊंगा? और फिर भी बिना एक पल रुके बिना एक सवाल पूछे डोवाल ने यह मिशन स्वीकार किया। डोवाल कोई साधारण आईपीएस अधिकारी नहीं थे। वो जानते थे पाकिस्तान में जिंदा रहना है तो पाकिस्तानी बनना पड़ेगा। उन्होंने बदला अपना नाम, अपनी पहचान यहां तक कि अपना धर्म भी और फिर एक मुसलमान बनकर वो पाकिस्तान में दाखिल हुए। [संगीत] उनकी उर्दू इतनी साफ कि शक की गुंजाइश ही नहीं बचती थी। उनका लहजा, उनकी नमाज, उनका रहन-सहन [संगीत] सब कुछ इतना असली था कि इंटर सर्विसेस इंटेलिजेंस, आईएसआई के एजेंट भी उन्हें अपना ही समझते थे। यह सिर्फ एक्टिंग नहीं थी। [संगीत] यह जिंदा रहने की कीमत थी।

7 साल पूरा एक दौर डोबाल पाकिस्तान में रहे। 7 साल तक हर खुफिया हरकत उन्होंने अपनी आंखों से देखी। 7 साल तक उन्होंने भारत को वह जानकारी दी जो किसी सेटेलाइट से भी नहीं मिल सकती थी। वो देख रहे थे आईएसआई कैसे काम करती है। वो समझ रहे थे। पाकिस्तानी सेना [संगीत] के अंदर कौन से प्लान बन रहे हैं। वो पकड़ रहे थे। भारत के खिलाफ रची जा रही हर साजिश और सबसे खतरनाक वो पहचान रहे थे। कौन से भारतीय पाकिस्तान के इशारों पर चल रहे थे। यह सारी [संगीत] जानकारी वो चुपचाप सीक्रेट तरीके से भारत तक पहुंचाते रहे। यह कोई फिल्म नहीं थी। यह असली खेल था। जहां हर दिन एक नया खतरा, हर रात, एक नया डर, एक गलत कदम, एक गलत शब्द, एक गलत नजर और कहानी वहीं खत्म। लेकिन डोबाल की कहानी यहीं नहीं रुकती। क्योंकि वह सिर्फ जानकारी नहीं जुटा रहे थे। वो धीरे-धीरे आईएसआई के अंदर तक पहुंच चुके थे। इंटर सर्विसेस इंटेलिजेंस आईएसआई के कुछ अफसरों के इतने करीब कि उन्हीं के साथ बैठकर भारत के खिलाफ बन रहे प्लान सुनते थे। मीटिंग्स में जहां हर शब्द सिर्फ बात नहीं एक साजिश होता था और वही साजिश चुपचाप सीधे भारत तक पहुंच जाती थी। यही था असली खेल। दुश्मन की आंखों में देखकर उसी को धोखा देना। लेकिन हर खेल की एक कीमत होती है। और जैसे-जैसे समय बीता खतरा और गहरा होता गया। आईएसआई को अब शक होने लगा था। कोई था जो उनकी हर चाल पड़ रहा था। कोई था जो उनके बीच रहकर उन्हें ही तोड़ रहा था और फिर शुरू हुआ शिकार जाल बिछाया गया। धीरे खामोशी से हर उस इंसान पर नजर जो थोड़ा भी अलग दिखता था। हर उस पर जो जरूरत से ज्यादा सवाल करता था। हर उस पर जो जरूरत से ज्यादा जानता था। हवा में अब शक था। नजरों में अब तलाशी थी। एक स्पेशल सेल बनाई गई। जिसका सिर्फ एक मकसद था उस साए को ढूंढना जो उनके बीच छुपा बैठा था। और धीरे-धीरे वो जाल सिकुड़ने लगा और उसका घेरा डोबाल के करीब आने लगा। फिर वहां वो रात आई। अंधेरी लेकिन सिर्फ अंधेरी नहीं खामोश और असामान्य जैसे कुछ होने वाला हो। डोबाल अपने कमरे में थे लेकिन बाहर सब कुछ वैसा नहीं था। गली में हलचल थी पर वो आम हलचल नहीं थी। अजनबी चेहरे जो ठहर-ठहर कर देख रहे थे। अजनबी निगाहें जो कुछ ढूंढ रही थी। डोबाल ने खिड़की से झांका और जो देखा वो काफी था समझने के लिए। दो आदमी गली के कोने पर खड़े थे। शांत लेकिन नजरें तेज और सबसे खतरनाक बात वह पहले नहीं थे। डोवाल का दिल एक पल के लिए सच में थम गया। एक ट्रेंड इंटेलिजेंस ऑफिसर के लिए इतना इशारा ही काफी होता है और उसी पल बिना किसी शक के वो समझ गए। जाल बिछ [संगीत] चुका था। अब खेल खुल चुका था। अगर अगले 24 घंटों में उन्होंने पाकिस्तान नहीं छोड़ा तो शायद वह कभी अपने देश, अपने परिवार, अपने असली नाम तक वापस नहीं जा पाएंगे और सिर्फ उनकी जान नहीं [संगीत] उनके सात साल, हर रिस्क, हर सच्चाई सब एक झटके में खत्म हो जाता। इंटर सर्विसेस इंटेलिजेंस की परतों के नीचे छुपे राज हमेशा के लिए दफन हो जाते। कोई सबूत नहीं, कोई कहानी नहीं।

बस एक गायब नाम यहीं से शुरू हुआ। उनकी जिंदगी का सबसे खतरनाक खेल, आखिरी 24 घंटों का काउंटडाउन हर सेकंड अब कीमत रखता था। एक तरफ वापस लौटने की उम्मीद, एक अधूरा सुकून, दूसरी तरफ हर कदम पर मौत, हर सांस में शक, हर [नाक से की जाने वाली आवाज़] नजर जैसे सच पढ़ लेना चाहती हो। क्या वो सच में इतनी आसानी से निकल पाएंगे? क्या यह आखिरी खेल उनका आखिरी मिशन बन जाएगा? डोवाल ने एक पल भी बर्बाद नहीं किया। कमरे के अंदर हर वो चीज जो उनकी असली पहचान से जुड़ी थी। ना सिर्फ हटाई गई बल्कि मिटा दी गई, कुछ जला दी गई, कुछ गायब कर दी गई। जैसे वह कभी अस्तित्व में थी ही नहीं। अब उनके पास कुछ नहीं था। [संगीत] ना कोई सबूत, ना कोई सहारा सिवाय एक झूठी पहचान और एक बेहद तेज दिमाग के सुबह होते ही दुनिया वहीं थी, लेकिन नजर बदल चुकी थी, गली वहीं [संगीत] थी। लोग वहीं थे, लेकिन अब हर चेहरा जैसे कुछ खोज रहा था, हर नजर जैसे सवाल पूछ रही थी। हर मोड़ पर खामोश निगरानी थी। हर साया जैसे उनका पीछा कर रहा था। हवा में अब सिर्फ शक था। और इसी शक के बीच डोबाल बाहर निकले। चाल बिल्कुल सामान्य। चेहरा बिल्कुल [संगीत] शांत, ना कोई जल्दबाजी, ना कोई डर जैसे वो सिर्फ एक आम इंसान हो। लेकिन सच इससे भी ज्यादा खतरनाक था। थोड़ी ही दूरी पर इंटर सर्विसेस इंटेलिजेंस आईएसआई के दो अधिकारी लगातार उन पर नजर गड़ाए हुए थे और डोबाल इस बात को महसूस कर चुके थे। उन्हें पता था हर कदम पर कोई उनका पीछा कर रहा है। फिर भी ना चाल बदली ना एक बार पीछे मुड़े क्योंकि वह जानते थे डर का एक इशारा सब कुछ खत्म कर सकता है। हर कदम अब एक एक्टिंग नहीं एक जंग था। आगे बढ़ते-बढ़ते वो एक भीड़भाड़ वाले इलाके में पहुंचे। जहां लोगों की आवाजाही, शोर, हलचल, सब कुछ एक साथ धड़क रहा था। माहौल अचानक उनके खिलाफ नहीं उनके पक्ष में हो गया और यही उनका मौका [संगीत] था एक सही टाइमिंग और डोबाल बिना रुके सीधे उस भीड़ में घुस गए धीरे-धीरे बिल्कुल बिना ध्यान खींचे वो उसी भीड़ का हिस्सा बनते चले गए कदम मिलाते हुए सांसे कंट्रोल करते हुए उन्होंने खुद को इस तरह छुपा लिया कि कुछ ही पलों में उनकी मौजूदगी भीड़ में घुलकर खत्म हो जैसे वह कभी थे ही नहीं। उधर आईएसआई के दोनों अधिकारी भीड़ में पागलों की तरह तलाश कर रहे थे। हर चेहरे को गौर से देखते, हर शक पर रुकते, हर दिशा में दौड़ते लेकिन अब बहुत देर हो चुकी थी। क्योंकि डोबाल उस भीड़ की आड़ [संगीत] लेकर काफी आगे निकल चुके थे। और अब कराची की तंग गलियों में खामोशी से दाखिल हो चुके थे। जहां हर मोड़ एक नया रास्ता देता है। जहां मुड़े हुए रास्ते और अंधेरे कोने हर मोड़ पर उन्हें छिपने का एक नया मौका [संगीत] दे रहे थे। कुछ देर बाद वो एक तय जगह पर पहुंचे। एक खामोश सुनसान कोना जहां ने उनकी मुलाकात हुई। एक दूसरे भारतीय जासूस से दोनों की नजरें मिली। कोई शब्द नहीं कोई इशारा नहीं। फिर भी सब कुछ समझ आ गया। वक नहीं था और हालात बहुत कुछ कह रहे थे। उस एजेंट ने तुरंत एक मुड़ा हुआ [संगीत] कागज डोबाल के हाथ में थमा दिया। उस कागज में एक रास्ता था सीधा नहीं खतरनाक और पूरी तरह छुपा हुआ एक गुप्त सुरंग का संकेत जो उन्हें पाकिस्तान की सीमा के पार ले जा सकता था। समय तेजी से खत्म हो रहा था। दोनों ने एक दूसरे की तरफ देखा और बिना कुछ कहे एक खामोश अलविदा। फिर दोनों अलग हो गए। अब डोवाल अकेले थे

और यह अकेलापन पहले से ज्यादा भारी था। जैसे ही सूरज ढलने लगा, [संगीत] अंधेरा गहराने लगा। डोबाल उस सुनसान इलाके की ओर बढ़े। जहां एक झरझर इमारत खामोशी में खड़ी थी। [संगीत] बाहर से बेकार अंदर से एक रास्ता उसी इमारत के भीतर छिपा था उस सुरंग का मुंह अंदर कदम रखते ही घना अंधेरा नम दीवारें और घुटन भरी हवा जैसे हर [संगीत] चीज उन्हें रोकना चाहती हो लेकिन वो रुके नहीं नीचे उतरते गए और फिर उस सककरी सुरंग में [संगीत] आगे बढ़ना शुरू किया जहां सीधा चलना भी मुमकिन नहीं था कहीं झुक कर कहीं घुटनों के बल हर कदम एक जोखिम [संगीत] था। ऊपर इंटर सर्विसेस इंटेलिजेंस आईएसआई के लोग उन्हें ढूंढ रहे थे [संगीत] और नीचे वो जिंदगी और मौत के बीच एक पतली सी रेखा पर चल रहे थे। समय का अंदाजा खत्म हो चुका था। बस अंधेरा था, सन्नाटा था और दिल की धड़कन। फिर काफी देर की उस कठिन यात्रा के बाद [संगीत] उन्हें दूर एक हल्की सी रोशनी दिखाई दी और आखिरकार वो उस सुरंग के दूसरे [संगीत] छोर तक पहुंच गए। एक आखिरी कदम और सब कुछ बदल गया। जैसे ही डोबाल बाहर निकले उन्हें तुरंत एहसास हुआ। हवा बदल चुकी थी। मिट्टी की खुशबू अलग थी। माहौल अब वैसा नहीं था। वो समझ गए। वो सीमा पार कर चुके थे। वो अब पाकिस्तान में [संगीत] नहीं थे। सुरक्षित थे लेकिन अभी भी सांसे तेज थी। उधर इंटर सर्विसेस इंटेलिजेंस [संगीत] के अधिकारी अब भी उनकी तलाश में भटक रहे थे। हर जगह छान रहे थे। हर शक के पीछे भाग रहे थे। लेकिन उन्हें समझ ही नहीं आ रहा था कि वो शख्स कब, कैसे और कहां उनकी आंखों के सामने से गायब हो गया। और इधर अजीत [संगीत] दोल 7 साल बाद जिंदा, [गला साफ़ करने की आवाज़] सुरक्षित और खाली हाथ नहीं अपने साथ लेकर आए थे। पाकिस्तान के सबसे गहरे राज, ऐसी जानकारी जो सिर्फ सुनी नहीं जाती जिसे हासिल करने के लिए जिंदगी दांव पर लगानी पड़ती है। डोवाल जो लेकर लौटे थे उसने भारत [संगीत] की इंटेलिजेंस हिस्ट्री की दिशा बदल दी। आईएसआई के अंडरकोर एजेंट्स की लिस्ट पाकिस्तान के सीक्रेट मिलिट्री प्लांस वो नेटवर्क्स जो भारत के अंदर रहकर उसी के खिलाफ काम कर रहे थे और वो नाम जिन्हें कोई जानता तक नहीं था।

हर फाइल एक खुलासा थी। हर जानकारी एक हथियार इतनी कीमती कि आने वाले कई सालों तक इंडियन इंटेलिजेंस एजेंसीज इसी जानकारी के दम पर अपने कदम तय करती रही। लेकिन यह कहानी यहां खत्म नहीं होती। समय बदला, हालात बदले और 2005 में डोबाल बने इंटेलिजेंस ब्यूरो के डायरेक्टर भारत की डोमेस्टिक इंटेलिजेंस का सबसे बड़ा पद। लेकिन यह सिर्फ शुरुआत थी 2014 नई सरकार नया दौर तब नरेंद्र मोदी ने उन्हें बुलाया और सौंप [संगीत] दी। देश की सबसे संवेदनशील जिम्मेदारी नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर वो इंसान जो कभी पाकिस्तान की गलियों में अपनी पहचान छुपाकर चलता था। आज पूरे देश की सुरक्षा का चेहरा बन चुका था। एक पहाड़ी गांव से निकलकर देश की सबसे ऊंची कुर्सियों तक पहुंचना यह सफर आसान नहीं था। लेकिन डोवाल ने कभी आसान रास्ता चुना भी नहीं। सवाल आज भी बाकी हैं। उन [नाक से की जाने वाली आवाज़] सात सालों में उन्होंने क्या-क्या [संगीत] देखा? किन खतरों से गुजरे? वो कौन सा पल था जब उन्हें समझ आया अब निकलना ही होगा। और वह आखिरी 24 [संगीत] घंटे जब हर सेकंड जिंदगी और मौत के बीच अटका हुआ था। उनके दिल में क्या चल रहा था? यह सब शायद कभी पूरी तरह सामने नहीं आएगा क्योंकि कुछ कहानियां फाइलों में बंद रह जाती हैं और कुछ इतिहास बन जाती हैं। लेकिन एक सच हमेशा जिंदा रहेगा [संगीत] कि जिस देश के पास अजीत डोबाल जैसे लोग हो उसे तोड़ना नामुमकिन है। अगर दोस्तों यह कहानी आपका दिल छू गई हो तो वीडियो को लाइक करें। चैनल को सब्सक्राइब करें और वीडियो शेयर जरूर करें। भारत माता की जय।

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