Cli

एक्शन में प्रह्लाद जोशी! पहले ही दिन कर दिया ये काम ! मची सनसनी।

Uncategorized

केंद्रीय मंत्री प्रहलाद जोशी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के रूप में कार्यभार संभाल लिया है। रविवार को उन्होंने मंत्रालय का कार्यभार संभाला और शिक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक भी की। जोशी को यह जिम्मेदारी ऐसे समय में सौंपी गई है जब देश में शिक्षा व्यवस्था, प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता और राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन जैसे विषयों पर व्यापक चर्चा चल रही है।

रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर प्रहलाद जोशी ने पोस्ट में कहा, आज मैंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री का पदभार संभाला। मुझ पर भरोसा जताने और मुझे यह जिम्मेदारी सौंपने के लिए मैं माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभारी हूं। मैं इसे विनम्रता और कर्तव्य बोध के साथ स्वीकार करता हूं। गौरतलब है कि राष्ट्रपति द्वारा पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा स्वीकार किए जाने के बाद प्रधानमंत्री की सलाह पर प्रहलाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।

कार्यभार संभालने के बाद प्रहलाद जोशी ने तुरंत ही शिक्षा मंत्रालय के कामकाज से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों से बातचीत की। दरअसल शिक्षा मंत्रालय देश के भविष्य से जुड़ा अत्यंत महत्वपूर्ण मंत्रालय है। नए शिक्षा मंत्री के लिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के साथ-साथ उच्च शिक्षा, विद्यालय शिक्षा, कौशल विकास और अनुसंधान को भी नई गति देना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रहलाद जोशी केंद्र सरकार के वरिष्ठ मंत्रियों में गिने जाते हैं। वह वर्तमान में उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की जिम्मेदारी पहले से ही संभाल रहे हैं।

इससे पहले वे संसदीय कार्य मंत्री, कोयला मंत्री और खान मंत्री जैसे महत्वपूर्ण विभागों का कार्यभार संभाल चुके हैं। उनकी पहचान एक अनुभवी, संसदीय रणनीतिकार और संगठनात्मक क्षमता रखने वाले नेता के रूप में रही है। कर्नाटक की धारवाड़ लोकसभा सीट से लगातार पांच बार सांसद चुने जा चुके प्रहलाद जोशी भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में शामिल हैं। लंबे संसदीय अनुभव और प्रशासनिक कार्यशैली के कारण उन्हें सरकार में कई अहम जिम्मेदारियां मिलती रही हैं।

फिलहाल जोशी के सामने सबसे बड़ी चुनौती देश की परीक्षा प्रणाली में लोगों का विश्वास मजबूत करना है। साथ ही प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता सुनिश्चित करना और राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत चल रही सुधारों को गति देना भी उनकी प्राथमिकता है। इसके अलावा विद्यालय शिक्षा की गुणवत्ता, उच्च शिक्षा संस्थानों में अनुसंधान को बढ़ावा, डिजिटल शिक्षा का विस्तार और कौशल आधारित शिक्षा को मजबूत करना भी उनकी प्राथमिकताओं में शामिल रहने की संभावना है।

शिक्षा मंत्रालय की कमाल संभालने के साथ ही मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उनकी प्रारंभिक बैठकें शुरू हो गई हैं। रविवार के दिन भी उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक बुलाई।

माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में मंत्रालय परीक्षा सुधार तकनीक आधारित मूल्यांकन प्रणाली विश्वविद्यालयों के अनुसंधान और छात्रों से जुड़े लंबित विषयों पर तेजी से निर्णय लेने की दिशा में काम करेगा। शिक्षा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों और विद्यार्थियों की नजर अब इस बात पर रहेगी कि नए शिक्षा मंत्री इन चुनौतियों से किस प्रकार निपटते हैं और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की प्रक्रिया को किस गति से आगे बढ़ाते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *