इंदिरा गांधी की वो एक बड़ी गलती, जिसकी कीमत अपनी जान देकर चुकानी पड़ी
30 अक्टूबर 1984 दिल्ली के आसमान तले एक अजीब सी खामोशी थी। इंदिरा गांधी उड़ीसा से अपनी [संगीत] चुनावी रैली खत्म करके वापस आ चुकी थी। रात के 12:00 बज रहे थे। किसको पता था कि यह रात देश [संगीत] के सबसे ताकतवर नेता की आखिरी रात बनने वाली है। 31 अक्टूबर की सुबह हवा […]
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